{"t01-apar-0":"समझावन-पोथी खातिर देल्मास सहायक नकसा ❦ पहिल शृंखला","t01-apar-1":"नकसा नं. १ इसकूल, माध्यमिक इसकूल, कक्षा।","t01-tit-1":"आम बयान।","t01-01-1":"१. — ई नकसा एगो **माध्यमिक इसकूल** के **कक्षा** देखावेला। एह कक्षा में आठ गो **मेज** (18) आ आठ गो **बेंच** (32) बा। हर बेंच पर तीन गो लइका बइठेलें। **मास्टर साहेब** (7) आपन **कुरसी** (8) पर, आपन **मंच** (6) पर बइठल बाड़ें।","t01-02-1":"२. — मंच के बाईं ओर काँच वाला **आलमारी** (15) ठाढ़ बा। दाहिने ओर **करिया पटिया** (1) बा, आपन **झाड़न** (2) आ **खड़िया** (3) के साथे।","t01-02-2":"मंच के ऊपर **भीत के नकसा** ( 9 , 11 , 12 ) आ एगो **नकसा** (10) लटकल बा।","t01-03-1":"३. — सब लइका आपन **जगहा** (17) पर नइखन बइठल। योहानेस (4) करिया पटिया लगे ठाढ़ बा ; ऊ **झाड़न** हाथ में लेके **रेखागणित के आकृति** मेटावत बा।","t01-03-2":"पेत्रुस मंच लगे बा ; ऊ **लिखल काम** (5) बटोरत बा आ मास्टर साहेब लगे ले जात बा।","t01-04-1":"४. — **ई** मास्टर साहेब **जिंदा भाषा** के मास्टर बाड़ें। ऊ लइकन के परदेसी भाषा **(जर्मन, अंगरेजी, स्पेनिस, इटालियन, रूसी भा फ्रेंच)** बोले, पढ़े आ लिखे सिखावेलें।","t01-05-1":"५. — कक्षा बहुते चाकर आ बहुते अँजोर बा। छोर पर दू गो **रोशनदान** (78) वाला चाकर **खिड़की** आ हवा आ अँजोर खातिर **काँच के केवाड़** बा।","t01-05-2":"ई कक्षा जाड़ नइखे। एकरा के गरम करे खातिर बीच में बहुते नीक **अँगीठी** (46) बा, आपन **नली** (45) के साथे।","t01-05-3":"भीत में **लुगा के खूँटी** (58) गाड़ल बा ; ओह पर लइकन के टोपी आ कोट लटकल बा।","t01-tit-2":"खेले के अँगना","t01-06-1":"६. — **घड़ी** (63) नौ बजके पाँच मिनट देखावत बा।","t01-06-2":"**छुट्टी के बेरा** (76) अबहीं खतम भइल आ पढ़ाई फेरु शुरू होत बा। खेले के जगहा **अँगना** (75) में बा। हम कुछ लइकन के खेलत देखत बानी। एगो **निगरान मास्टर** (74) ओह लोग पर नजर राखत बाड़ें।","t01-07-1":"७. — अँगना में हमनी के आउर कई गो लोग के देखत बानी जा, माने **इंस्पेक्टर** (73) , **हेडमास्टर** (71) आ **उप-हेडमास्टर** (72) ।","t01-07-2":"इंस्पेक्टर इसकूलन के जाँच करेलें, हेडमास्टर माध्यमिक इसकूल चलावेलें, आ उप-हेडमास्टर पढ़ाई पर नजर राखेलें।","t01-07-3":"चउथा मनई **दरबान** (77) बाड़ें। ऊ गैरहाजिर लोग के नाँव लिखे खातिर बगल में हाजिरी-रजिस्टर दबवले बाड़ें।","t01-08-1":"८. — अँगना के छोर पर **कसरत के सामान** (70) आ **हाथ के काम** (69) खातिर कारखाना बा।","t01-08-2":"एह नकसा के दाहिने ओर हमनी के **संगीत** आ **चित्रकारी** के **कक्षा** देखे लागत बानी जा।","t01-tit-3":"बिस्तार से बयान।","t01-tit-4":"नीक लइका।","t01-09-1":"९. — मंच के दाहिने ओर के पहिला बेंच के लइका **हेनरिकुस** (*) , **स्तेफानुस** आ **कारोलुस** बाड़ें।","t01-09-2":"हेनरिकुस बहुते धेयान देवे वाला आ मेहनती बा ; ऊ मास्टर साहेब के सुनत बा। ओकर मेज पर **कापी** (28) , **किताब** (29) , **शब्दकोश** (30) आ **कलमदान** (31) बा। ओकर किताब में बहुते **पन्ना** बा ; हर अध्याय में कई गो **पैरा** आ हर **लाइन** में बहुते **सबद** बा।","t01-09-4":"ओकर पड़ोसी स्तेफानुस (24) लगनशील बा। ऊ आपन कापी में अगिला बेर के पाठ लिखत बा। ओकर **अच्छर** सुंदर बा। ओकर किताब बंद बा ; हमनी के खाली ओकर **जिल्द** (27) देखत बानी जा। ओकरा लगे ओकर **परकार** (26) धइल बा।","t01-09-5":"कारोलुस (23) आपन किताब हाथ में पकड़ले बा ; ऊ आपन पाठ फेरु पढ़े खातिर ओकरा के खोलत बा। हर लइका नियर ओकरो आगे **दवात** (25) बा। ऊ कहल मानेला।","t01-10-1":"१०. — बगल के मेज पर **लुदोविकुस, अंतोनियुस** आ **पाउलुस** बाड़ें। लुदोविकुस आपन **पाठ** (22) सुनावत बा आ मास्टर साहेब के **सवालन** के जवाब देत बा। अंतोनियुस (21) बहुते बेधेयान बा, कबो-कबो त मास्टर साहेब ओकरा के सजा देलें। पाउलुस (20) नीक संगी बा, मिलनसार आ मददगार। ऊ बहुते धेयान देवेला।","t01-tit-5":"खराब लइका।","t01-11-1":"११. — हेनरिकुस के पाछे **गेओर्गियुस** (38) बा। ऊ खराब लइका नइखे, बाकिर ऊ **बतकुच्चन**, बेधेयान आ चंचल बा। ओकर **हलुकपन** आ **बेअदबी** पढ़ाई में **गड़बड़ी** पैदा करेला आ अकसर ओकरा के कड़ा **चेतावनी** मिलेला। ओकर **कच्चा कापी** (35) मैल बा, ऊ आपन **कलम** (34) से ओह पर **सियाही के दाग** लगावेला, एहीसे ऊ हरमेसा आपन **रबर** (36) राखेला ; ओकर **बस्ता** (33) फाटल बा, काहेकि ऊ बहुते लापरवाह बा। ऊ आपन **पेंसिल के खोल** (37) जिंदा भाषा के कक्षा में काहे ले आवेला ?","t01-11-2":"ओकर पड़ोसी एदमुंदुस (39) ओकरा के पसंद ना करे। ऊ सचहूँ कुछ सुस्त बा, बाकिर चुप आ सांत बा। ऊ बतियावे ना ; बाकिर सुने के बदले ऊ आपन **पढ़े के किताब** के **कहानी** पढ़ल पसंद करेला।","t01-11-3":"एह बेंच के तिसरका लइका **लुदोविकुस** (40) बा। ऊ मेहनती बा। ऊ उजर **कागज** पर लिखत बा। आपन आगे ऊ आपन **सोखता** (41) धइले बा।","t01-12-1":"१२. — मास्टर साहेब के बाईं ओर के दुसरका बेंच के लइका बहुते छोट बाड़ें। पहिलका, छोटका **एमिलियुस**, अबहीं ठीक से लिखे ना जानेला, ऊ आपन **पाटी** (42) , आपन **पाटी के पेंसिल** आ आपन **स्पंज** (43) ले आवेला।","t01-12-2":"ओकरा बगल में **आउगुस्तुस** आ **बेर्नार्दुस** (44) बाड़ें। ई दुसरका नीक काम करेला, बाकिर ओकर **पहिनावा** बहुते बेढंग बा।","t01-13-1":"१३. — ओह लोग के पाछे तीन गो **अलसी** बाड़ें। **आल्बेर्तुस** आपन पाठ ना याद करे। **याकोबुस** (47) सुने के बदले सूतेला। ओकर **अलसीपन** से ओकरा **डाँट** आ **सजा** तक मिलेला। आ **क्रिस्तियानुस** (48) बहुते गैरजिम्मेदार बा। ऊ खराब **बेवहार** करेला आ सुधरे के कवनो कोसिस नइखे करत।","t01-14-1":"१४. — ओकर पड़ोसी लोग एकरा उलटा नीक चालचलन वाला बाड़ें। **एर्नेस्तुस** (51) के ढंग आ नेम पसंद बा, ऊ हरमेसा आपन **पटरी** (50) आ आपन **पेंसिल** (49) इस्तेमाल करेला। ऊ **बाहरी लइका** बा।","t01-14-2":"**फ्रांसिस्कुस** (52) **होस्टल के लइका** बा, ऊ वरदी पहिनेला, इसकूल में खाला आ इसकूल में सूतेला। ऊ नीक **संगी** बा।","t01-14-3":"माउरिकियुस आपन **पेंसिल** आपन **चाकू** (56) से छिलत बा, ऊ बहुते सलीकेदार बा।","t01-14-4":"ऊ आपन सब किताब ले आवेला, आपन **बियाकरन** (55) , आपन **नोटबुक** (54) , आ **लिखे के गद्दी** (53) तक। ओकर **इसकूल के झोरा** (57) ओकरा पाछे भुइयाँ पर बा।","t01-14-5":"कक्षा के छोर पर के दुनो मेज **नीक लइकन** (19) से भरल बा।","t01-tit-6":"चित्रकारी आ संगीत।","t01-15-1":"१५. — **चित्रकारी के कक्षा** में भीत पर सुंदर **नमूना** टँगल बा आ छत से **छाता** वाला **बत्ती** (62) लटकल बा। **मास्टर साहेब** (60) बहुते धीरजवाला बाड़ें, ऊ लइकन के **चित्र** (61) सुधारेलें आ ओह लोग के देख के **मूरत** (59) बनावल सिखावेलें।","t01-16-1":"१६. — **संगीत के कक्षा** बहुते मजेदार लागत बा। ओहिजा संगीत पढ़ल सिखावल जाला, **सुर-रेखा** पर लिखल **सुर** (67) (सा, रे, ग, म, प, ध, नी = C. D. E. F. G. A. B.) गावल, **कुंजी** पहिचानल आ मीठ **धुन** गावल। संगीत के कागज **रिहल** (65) पर धइल जाला। एगो लइका **पियानो बजावत** (64) बा आ **संगीत के मास्टर** (66) **ताल देत** (68) बाड़ें।","t01-17-1":"१७. — हमनी के **हाथ के काम** (69) वाला **कारखाना** के एगो कोना देखत बानी जा, जहाँ लइकन के लकड़ी छीलल आ लोहा रेतल सिखावल जाला। ई सब इसकूलन में नइखे।","t01-tit-7":"बिज्ञान के कक्षा।","t01-18-1":"१८. — गनित के मास्टर साहेब लइकन के **रेखागणित, अंकगणित, हिसाब** आ **मीटरी नाप** सिखावेलें। पटिया पर हमनी के रेखागणित के खास आकृति देखत बानी जा : **गोल** (a) , **चौकोर** (b) , **तिकोन** (c) , **रेखा** (d) ।","t01-18-2":"हमनी के एगो **सवाल** भी देखत बानी जा ; ई ना त **जोड़** बा, ना **घटाव**, ना **गुना** — ई **भाग** (e) बा।","t01-19-1":"१९. — मीटरी नाप के पटिया पर हमनी के देखत बानी जा : **मीटर** (a) , **तराजू** (b) आ ओकर **बटखरा**, **लीटर** (e) , **डेकालीटर** (f) , **डेसीलीटर** आ **घन मीटर** (d) ।","t01-19-2":"लइकन **प्रकृति-बिज्ञान** (11) , जीव-बिज्ञान (a) , बनस्पति-बिज्ञान (b) , भू-बिज्ञान (c) आ **इतिहास** (12) भी पढ़ेलें।","t01-19-3":"आलमारी में **भौतिकी** (15) आ **रसायन** (16) के औजार बा।","t01-19-4":"आलमारी के ऊपर बा : **गोला** (14) , **शंकु** आ **भूगोला** (13) ।","t01-19-5":"पटियन के ऊपर दुनिया के पाँच हिस्सा देखावे वाला **नकसा** लटकल बा : **यूरोप** (e) , **एशिया** (g) , **अफ्रीका** (f) , **अमेरिका** ( a b ) आ **ओसीनिया** (h) , आ दू गो बड़का महासागर, **प्रशांत महासागर** (c) आ **अटलांटिक महासागर** (d) ।","t02-apar-1":"नकसा नं. २ मनई के देंह। — छुट्टी के बेरा। खेल।","t02-tit-0":"मनई के देंह। *(प्रकृति-बिज्ञान के एगो सादा पाठ।)*","t02-01-1":"१. — मनई के देंह के खास हिस्सा ई बा : **कपार**, **धड़** आ **अंग**।","t02-tit-1":"कपार।","t02-02-1":"२. — कपार में दू गो हिस्सा बा : **खोपड़ी**, जवना में **भेजा** रहेला आ जेकरा के **बाल** ढँकले रहेला, आ **चेहरा**।","t02-03-1":"३. — हमनी के आपन चित्र में ना त खोपड़ी देखत बानी जा ना भेजा ; बाकिर चेहरा के खास हिस्सा बहुते साफ देखाई देत बा।","t02-04-1":"४. — पहिले त **माथा**, जवन तेज बुद्धि आ हरमेसा चलत सोच के देखावेला। **कनपटी** बहुते खुलल बा। **आँख** जिंदादिल आ चाकर खुलल बा। घन **भौं** आ लमहर **बरउनी** ओकरा के बचावेला।","t02-05-1":"५. — फेरु **नाक** आ **नथुना**। नाक हमनी के सूँघे आ साँस लेवे के काम आवेला। नाक के दुनो ओर **गाल** बा, आ ओकरा से आगे **कान**। चेहरा के नीचला हिस्सा **मुँह** आ **ठुड्डी** से बनल बा।","t02-06-1":"६. — हमनी के ओकनी के ठीक से नइखी जा देखत, काहेकि **मोंछ** आ **गलमुच्छा** ओकनी के छिपवले बा। बाकिर हमनी के जानत बानी जा कि मुँह में दू गो **ओठ**, **ऊपरका जबड़ा** आ **नीचला जबड़ा** आपन **दाँत** के साथे, आ **जीभ** बा। मुँह से हमनी के बोलत आ खात बानी जा। जीभ से हमनी के खाना के सवाद लेत बानी जा।","t02-07-1":"७. — आँख, कान, नाक आ मुँह, अँगुरी नियर, पाँच इंद्री के अंग बा : **देखे के इंद्री**, **सुने के इंद्री**, **सूँघे के इंद्री**, **चिखे के इंद्री**, **छूए के इंद्री**।","t02-08-1":"८. — त कपार मनई के देंह के सबसे मजेदार हिस्सा में से एगो बा।","t02-tit-2":"धड़।","t02-09-1":"९. — **गरदन** कपार के धड़ से जोड़ेला। ओहमें **गला** आ **गुद्दी** बा।","t02-10-1":"१०. — धड़ में बहुते जरूरी अंग भी बा। **छाती** में **फेफड़ा** बा, जवना से हमनी के साँस लेत बानी जा, आ **करेजा** बा जवन जिनगी के केंद्र ह। जब करेजा धड़कल बंद कर देला, त जिंदा परानी मर जाला।","t02-11-1":"११. — **पसुली** छाती के थामले रहेला।","t02-12-1":"१२. — धड़ के बाकी हिस्सा ई बा : **बगल**, **पीठ**, **कान्ह** आ **पेट**। सूते खातिर हमनी के बगल पर भा पीठ पर लेटत बानी जा, आ बोझ आपन कान्ह पर ढोवत बानी जा।","t02-13-1":"१३. — पेट में **आमाशय** आ **आँत** बा। ई खाना पचावे के काम आवेला।","t02-tit-3":"अंग।","t02-14-1":"१४. — हमनी के चार गो **अंग** बा : दू गो **बाँह** आ दू गो **गोड़**। बाँह से हमनी के चीज पकड़त, थामत, उठावत आ बटोरत बानी जा ; गोड़ से हमनी के ठाढ़ होत, चलत आ दउड़त बानी जा।","t02-15-1":"१५. — **कान्ह** बाँह के देंह से जोड़ेला। बहुते मजबूत **मांसपेसी**, माने बाइसेप, बाँह के हिलावेला, आ **कोहनी** ओकरा के **अगिला बाँह** से जोड़ेला। **कलाई** **हाथ** के जोड़ बनावेले, आ हाथ **अँगुरी** आ **नाखून** पर खतम होला। हाथ पर हमनी के **नस** (आ धमनी) पहिचानत बानी जा, जवना में **खून** बहेला।","t02-16-1":"१६. — गोड़ के हिस्सा ई बा : **जाँघ**, **ठेहुना** आ **ठेहुना के पाछे**, **पिंड़री**, जेकर **मांस** **चाम** से ढँकल बा, **टखना** आ **पैर**। गोड़ के **हाड़** बहुते मोट आ बहुते मजबूत बा। पैर के छोर पर **पैर के अँगुरी** बा। बाकी हिस्सा **तरुआ** आ **एँड़ी** बा।","t02-17-1":"१७. — मनई के देंह के लगभग पूरा बयान इहे ह।","t02-17-2":"*नोट।* — *« हमरा ... (कपार वगैरह) में दरद बा » — एह कहन के मदद से मास्टर साहेब ई पूरा सबदकोस फेरु से इस्तेमाल कर सकेलें, नीक भा खराब* **देंह के हाल** *के नजरिया से।*","t02-tit-4":"कसरत। *(एगो लइका के कहल कहानी।)*","t02-18-1":"१८. — लचकदार, फुरतीला आ तंदुरुस्त रहे खातिर हमनी के आपन गोड़ आ आपन बाँह के कसरत करावे के चाहीं। एहीसे हमनी के खेलत बानी जा आ **कसरत** करत बानी जा।","t02-19-1":"१९. — हफ्ता भर ई दुनो कसरत इसकूल के अँगना में होला (नकसा नं. १ देखीं)। बाकिर बियफे आ इतवार के हमनी के बड़का घास के मैदान पर जाइले जा, जहाँ दउड़े आ मन बहलावे खातिर जगहा रहेला।","t02-20-1":"२०. — हमनी के मास्टर लोग आ घर के लोग कबो-कबो हमनी के साथे ओहिजा जालें ; बाकिर कसरत के देखरेख **कसरत के मास्टर** (12) ही करेलें।","t02-21-1":"२१. — मैदान में, गेट के बाईं ओर, **कसरत के सामान** (1) बा ; हमनी के **सीढ़ी** (2) से चढ़त बानी जा, **छल्ला** (3) आ **ट्रैपीज** (4) पर उलटा लटकत बानी जा, आ **रस्सी के सीढ़ी** (5) भा **गाँठ वाला रस्सी** (6) के चोटी तक हाथ से चढ़ जाइले जा।","t02-22-1":"२२. — ओही बेरा हमनी के संगी **लकड़ी के घोड़ा** (7) भा **समानांतर डंडा** (11) के ऊपर से कूदेलें। दोसर लोग **मुक्केबाजी** (8) करेला भा मुखौटा पहिन के **पातर तलवार** से **तलवारबाजी** (9) करेला। आ कुछ लोग **डंबल उठावेला** (10) ।","t02-tit-5":"खेल।","t02-23-1":"२३. — कसरत करे वाला लोग के चारो ओर छोटका लइका आ लइकी तरह-तरह के **खेल** खेलेलें। लइकी लोग आपन **घेरा** (14) से मन बहलावेली ; ऊ लोग **रस्सी** (13) कूदेली भा आपन भाई आ भतीजा लोग के **क्रोके** (15) के खेल में बोलावेली। ओह लोग के मजा एहमें आवेला कि जब सामने वाला सोचत रहेला कि ऊ आसानी से मेहराब पार कर लीही, ओही बेरा ओकर **गेंद** के आपन **लकड़ी के हथौड़ी** से ठेल के दूर कर दीहें !","t02-24-1":"२४. — छोटका लइकन के ताकत वाला खेल जादे नीक लागेला। ऊ लोग खुसी से **गुल्ली** (16) खेलेला, जेकरा के ऊ लोग **गेंद** (17) से चतुराई से गिरा देला। ऊ लोग **लट्टू** (18) आ **बिलबोके** (19) भा **मेढ़क-खेल** (20) खेले से भी परहेज ना करे। बाकिर ओह लोग के सबसे पसंदीदा खेल **गोली** (21) आ **भीत-गेंद** (22) ह, काहेकि **काँच-घर** (26) के भीत हलुक गेंद के वापस उछाले खातिर बहुते ठीक बा।","t02-25-1":"२५. — छोटका योहानेस, आपन **बल्ली-गोड़** (24) पर चलत, बहुते चतुर बा आ बहुते नीक से संतुलन साधेला। ओकरा लगे कुछ संगी ओह काँच-घर में आ **बाड़** के पाछे **लुका-छिपी** (25) खेलत बाड़ें। दोसर लोग **थपकी-बूझ** (28) भा **उड़त गेंद** (29) पसंद करेला, जवन एगो **रैकेट** से दोसरा पर उड़त रहेला।","t02-26-1":"२६. — मैदान के बीच में दू गो गाछ बा। ओहमें से एगो के जड़ लगे सात भा आठ गो लइका **कान्ह-कूद** (30) (*) के खेल जमवले बाड़ें। ई खेल सब देस में ना जानल जाव ; बाकिर **पीठ-कूद** का ह ई सब जानेला, जवन ऊ लोग एह बेर नइखे खेलत।","t02-tit-6":"खुला हवा के खेल।","t02-27-1":"२७. **आँखमिचौली** (31) भी बहुते मजेदार बा ; लइकी आ लइका बारी-बारी से आपन आँख पर **पट्टी** बाँधेलें आ जे अनाड़ी लोग पकड़ा जाला ओकरा के धर लेलें।","t02-28-1":"२८. — मैदान के बीच में एगो बहुते फ्रेंच बाकिर थोड़ा जोरदार खेल बा : ऊ ह **भालू-खेल** (32) , जवन **पतंग** (33) के ओतना सांत खेल से भा अंगरेजी खेल **टेनिस** (34) से भी बहुते जादे सोर करेला।","t02-29-1":"२९. — ई आखिरी खेल बड़का लइकन के खुसी ह। हमनी के मास्टर लोग खुदे एकरा के खुसी से खेलेला। एहमें बहुते चतुराई आ फुरती चाहीं आ हमरा ई बहुते नीक लागेला। **झूला** (35) के खेल हम लइकी लोग खातिर छोड़ देत बानी।","t02-30-1":"३०. — हमरा एगो दोसर अंगरेजी खेल नीक ना लागे, जवन सायद खतरनाक हो जाव।","t02-30-1b":"हम **फुटबॉल** (36) के बारे में कहे चाहत बानी, जवन हमार बड़का भाई के खुसी देला। हमरा त आपन पुरनका **बार के खेल** (38) जादे नीक लागेला, जवन ओतने सेहतमंद बा आ सचहूँ कम जंगली बा।","t02-tit-7":"साइकिल आ गेंद।","t02-31-1":"३१. — हम **साइकिल** (37) से मैदान के चक्कर लगावल भी खुसी से करत बानी।","t02-32-1":"३२. — अगिला साल हम **घुड़सवारी** (39) सीखब। कतना सुंदर लागेला ऊ घोड़ा जवन ठसक से चलेला भा दुलकी भरेला, आ जवन सरपट दउड़त बाधा के ऊपर से कूद जाला !","t02-33-1":"३३. — गरमी में हमनी के **तैराकी** (40) सीखत बानी जा। हमनी के मजा लेके नदी के साफ आ ठंढा पानी में डुबकी लगावत आ नहात बानी जा। कबो-कबो हमनी के कागज के **गुब्बारा** (41) भी उड़ाइले जा, जवन गरम हवा से भरते शान से आसमान में चढ़ जाला।","t02-34-1":"३४. — आउर भी बहुते खेल बा, बाकिर ओकनी के गिनल हमरा से खतम ना होई, आ एह सार से पता चल जाला कि बियफे के हमनी के सुंदर मैदान पर मन ना ऊबे।","t02-34-2":"टीप। — *मास्टर साहेब एह अध्याय के आसानी से पूरा कर लीहें ; हर खास खेल के आउर बिस्तार से बयान करके।*","t03-apar-1":"नकसा नं. ३ बचपन आ जवानी।","t03-apar-2":"(तीसरका आ चउथका नकसा एह तरह से जोड़ल गइल बा कि ऊ चार गो **घर-परिवार के दृस्य** में **मौसम**, **उमिर**, **परिवार**, **कपड़ा** आ **हैसियत** के जरूरी बात देखावेला।)","t03-tit-1":"*पहिलका दृस्य।*","t03-tit-2":"गाँव में बपतिसमा।","t03-tit-3":"बसंत।","t03-c1-01-1":"१. — हमनी के **बसंत** में बानी जा, **मार्च**, **अप्रैल** भा **मई** महीना में, **हफ्ता** के दिन में, **सोमार**, **मंगर** भा **बुध** के। भोर के **दस बजल** बा।","t03-c1-02-1":"२. — **मौसम** सुंदर बा, **हवा** साफ बा। सूरज चमकत बा। कुछ **बदरा** (2) नीला **आसमान** (1) में उठत बा।","t03-c1-03-1":"३. — **गाछ** पर मुसकिल से **पत्ता** बा। पातर **सफेदा** (3) आ ऊँच **चिनार** (17) पर अबहीं ले खाली कोंपल बा।","t03-c1-04-1":"४. — **अबाबील** (4) लवट आइल बाड़ी सँ आ खुसी से चहचहात ओह **सिखर** (7) के चारो ओर उड़त बाड़ी सँ जवन **घंटाघर** (5) के ह, आ ऊ घंटाघर गाँव के **गिरजाघर** (6) के माथे पर ठाढ़ बा।","t03-tit-4":"गिरजाघर।","t03-c1-05-1":"५. — ई गिरजाघर बहुते सादा बा, आपन **बड़का फाटक** (13) आ मोट **घड़ी** (8) के साथे। **छोटकी सूई** (9) X के अंक पर बा, ऊ **घंटा** देखावेले। **बड़की** (10) XII पर बा (दुपहरिया) ; ऊ **मिनट** देखावेले।","t03-c1-06-1":"६. — घंटाघर में **घंट** (11) खुसी से बाजत बा। छत के चोटी पर पाथर के छोट **क्रूस** (12) ठाढ़ बा।","t03-c1-07-1":"७. — गिरजाघर में खाली **बड़का फाटक** (13) ना बा, ओहमें बगल में एगो छोट केवाड़ भी बा। एही छोट केवाड़ से **पादरी** (15) साहेब, आपन **चोगा** पहिनले, **पूजा-कोठरी** (14) से निकल के **पादरी के घर** (19) ओर जात बाड़ें।","t03-c1-08-1":"८. — ओकरा लगे, इहाँ **दूधवाली** (24) आपन **गदहा** (23) के साथे बाड़ी। ऊ सहर से लवटत बाड़ी, जहाँ ऊ बच्चा लोग खातिर नीक दूध ले गइल रहली।","t03-tit-5":"फर-बगइचा।","t03-c1-09-1":"९. — अलिबोरों बाबू (गदहा) एह भोर के दउड़ से पूरा खुस बाड़ें। ऊ मजा लेके ओह हवा में साँस लेत बाड़ें जवना के ओह **फूल** (20) के महक बसवले बा जवन बगल के **फर-बगइचा** के **फर के गाछ** (18) के ढँकले बा। ऊ **आड़ू के गाछ** (18) आ **खुबानी के गाछ** (19) पूरा गुलाबी आ उजर बाड़ें, आ ओह लोग से नीक फसल के आस बा।","t03-c1-10-1":"१०. — ओही बेरा छोट **मधुमक्खी** (22) , जे **छत्ता** (21) के ह, भनभनात ओहिजा आपन मीठ **मधु** बटोरे जात बाड़ी सँ।","t03-c1-11-1":"११. — बाकिर ई का होत बा ? इहाँ गाँव के लइका दउड़ के आवत बाड़ें आ डेराइल **हंस** (25) के भगावत बाड़ें। ई त नोटरी के बेटा के **बपतिसमा** के बाद गिरजाघर से जुलूस के निकलल ह।","t03-c1-12-1":"१२. — छोटका याकोबुस आपन **पलना** (26) में घंट के खुसी भरल आवाज से जाग जात बा, आ ओकर बहिन मगदलेना, जे खुदे भी बपतिसमा के जुलूस देखल चाहत बाड़ी, आपन माई से बिनती करत बाड़ी कि घर के ओसारा पर ओकर बाल झार दीहें आ कपड़ा पहिना दीहें।","t03-c1-13-1":"१३. — माई मान जाली। ऊ आपन **ओढ़नी** (28) , आपन **चोली** (29) आ आपन **एप्रन** (30) पहिनेली, आ केवाड़ के सामने एगो छोट पीढ़ा पर बइठ जाली। मगदलेना लगे खाली आपन **घघरी** (31) आ आपन **कँचुकी** (32) बा।","t03-c1-14-1":"१४. — ऊ कतना खुस बाड़ी ! ऊ आपन मनपसंद फूल भुला जात बाड़ी — आपन **कार्नेशन** (34) , जवना पर **तितली** (35) बइठत बाड़ी सँ, आपन **ट्यूलिप** (36) , आपन **मई के फूल** (37) , जवन **गमला** (38) में, **भीत** (33) पर बा, आ आपन **गुलाब** (39) जवन एतना सुंदर बाड़ बनवले बा। ऊ जुलूस के मेहरारू लोग के महँग कपड़ा निहारत बाड़ी।","t03-c1-15-1":"१५. — गाँव के लइकन के कपड़ा से जादे मतलब नइखे। ऊ लोग **मिठाई** (55) भा **सिक्का** (52) पावे खातिर दउड़त आ एक-दोसरा के ठेलत बाड़ें। ओहमें से एगो रोवत बा (40) ।","t03-c1-16-1":"१६. — दोसरका **कुकुर** (42) के गोड़ पर पाँव धर देलस, आ ऊ चिचिआत भागल आ **मुरगी** (43) आ ओकर **चूजा** (44) के भगा देलस।","t03-tit-6":"बपतिसमा के जुलूस।","t03-c1-17-1":"१७. — जुलूस के आगे **धाय** (45) चलत बाड़ी। ओकरा लगे लमहर फीता वाला सुंदर **टोपी** (46) बा। ऊ **नवजात** (47) के गोद में लेले बाड़ी, जे पूरा **झालर** (48) में लपेटल बा।","t03-c1-18-1":"१८. — धाय के पाछे **धरम-पिता** (49) आ **धरम-माई** (53) आवत बाड़ें। ऊ लोग मिठाई आ सिक्का बाँटत बाड़ें। धरम-पिता लगे **दस्ताना** (51) आ **ऊँच टोपी** (50) बा। धरम-माई हाथ में सुंदर **फूल के गुच्छा** (54) पकड़ले बाड़ी।","t03-c1-19-1":"१९. — ओह लोग के पाछे हमनी के बच्चा के **चाचा** (56) आ **चाची** (58) के देखत बानी जा। चाची लगे सुंदर **हैट** (59) बा, चाचा लगे करिया **लमहर कोट** (57) आ उजर वास्कट बा। ओकरा बाद **चचेरा भाई** (60) आ **चचेरी बहिन** (61) बाड़ें। ई चचेरी बहिन हाथ में नवजात के **बहिन** (62) , छोटकी बेर्ता के पकड़ले बाड़ी।","t03-c1-20-1":"२०. — बेर्ता के दोसरका **भाई** (63) पाछे चलत बा। ऊ एगो **रिस्तेदारिन** (64) के हाथ पकड़ले बा। ओकरा बाद परिवार के **संगी** (65) लोग आवत बाड़ें।","t03-tit-7":"देखे वाला लोग।","t03-c1-21-1":"२१. — जुलूस लगे, इहाँ एगो **भिखारी** (66) आपन **बैसाखी** (67) पर टेकल बा। ऊ भीख माँगत बा।","t03-c1-22-1":"२२. — दोसरा ओर एगो बहुते **सभ्य** (68) छोटका लइका बा। ऊ जेकरा के चिन्हेला ओकरा के परनाम करेला आ « **नीक भोर** » कहेला।","t03-c1-23-1":"२३. — गाँव के लोग बपतिसमा के जुलूस देखे खातिर आपन घर से निकलल बा। हमनी के एगो **किसान** (69) के आपन **सूती टोपी** के साथे आ ओकरा बगल में **किसानिन** (70) के देखत बानी जा। ओकरा बाद **बुढ़िया** (71) आपन **लाठी** (72) पर टेकल बाड़ी। आ आखिर में **पनचक्की वाला** (73) आपन बड़का **फेल्ट के टोपी** (74) के साथे, आ एगो जवान किसानिन जे **लकड़ी के जूता** (75) पहिनले आपन छोट बच्चा के चलल सिखावत बाड़ी।","t03-c1-24-1":"२४. — ई दृस्य बहुते मजेदार बा।","t03-tit-8":"*दुसरका दृस्य।*","t03-tit-9":"सरबजनिक परब।","t03-tit-10":"नाव के खेल आ दउड़।","t03-c2-01-1":"१. — **गरमी** आ गइल। **जून** महीना के (**जुलाई** भा **अगस्त**) चिलचिलात घाम जवान लोग के नहाए आ नाव खेवे खातिर उकसावत बा।","t03-c2-02-1":"२. — नदी के दाहिने किनारे, नाव खेवे वाला लोग नाव के खेल आ दउड़ में हिस्सा लेवे खातिर कपड़ा उतारत बाड़ें।","t03-c2-03-1":"३. — ओहमें से एगो आपन **जूता** (1) उतारत बा ; ऊ ओकर बंद खोलत बा। ओकर दू गो संगी पहिलही से तइयार बाड़ें। अबहीं ओह लोग लगे खाली आपन **बुनल गंजी** (2) आ **नहाए के जाँघिया** (3) बा। ऊ लोग आपन दोस्तन के अगोरत बतियावत बाड़ें। ऊ लोग छुट्टी के आ ओह परब के बात करत बाड़ें जवन दोसरा किनारे होत बा।","t03-c2-04-1":"४. — ओह लोग लगे भुइयाँ पर ओह लोग के संगी लोग के **कपड़ा** धइल बा : एक जोड़ी **बूट** (4) , **जूता** (5) , **मोजा** (6) , **फेल्ट** (7) आ **पुआल** (8) के टोपी आ **टाई** (9) ।","t03-c2-05-1":"५. — ओह जवान लोग में से एगो आपन **कपड़ा** (10) सलीका से तह कइले बा। ऊ ओकरा के एगो अँगोछा पर धरत बा, जवना में ओकर पड़ोसी थोड़े देर में दुनो कपड़ा बान्ह ली।","t03-c2-06-1":"६. — छठवाँ लइका देर करत बा। ओकरा कपार पर अबहीं ले आपन **कैप** (11) बा। ऊ ना आपन **कमीज** (12) उतरले बा, ना आपन **कॉलर** (13) , ना आपन **कफ** (14) । ऊ हाथ में आपन **वास्कट** (17) पकड़ले बा आ ओकरा लगे अबहीं ले आपन **पतलून** (16) आ **गैलिस** (15) बा। ऊ अगिला दउड़ खातिर पक्का तइयार ना हो पाई।","t03-c2-07-1":"७. — ओह जवान लोग लगे एगो पगडंडी, जेकरा किनारे बहुते **कँटीला घास** (18) बा, नदी के तीर तक जाले, जहाँ याकोबुस बाबू **नरकट** (19) के बीच ओह **आतिसबाजी** (20) के तइयारी करत बाड़ें जवन साँझ के छोड़ल जाई।","t03-tit-11":"दउड़।","t03-c2-08-1":"८. — नदी पर कुछ मेहरारू लोग, आपन छाता से आपना के बचावत, **नाव** (21) पर घूमत बाड़ी सँ। ऊ लोग ओह दउड़ के देखत बाड़ी सँ जवन बहुते मजेदार बा। हर **डोंगी** (22) में चार गो **खेवइया** (24) आपन पूरा ताकत से खेवत बाड़ें, आ ओही बेरा **मल्लाह** (26) **पतवार** (25) थामले नाजुक डोंगी के चलावत बा। **डाँड़** (23) ताल से पानी पीटत बा आ हलुक नाव चक्कर आवे वाला तेजी से चलत बाड़ी सँ।","t03-c2-09-1":"९. — कुछ जवान लोग, पुल के खंभा लगे, **फिसलन वाला मस्तूल** (28) के इनाम खातिर होड़ लगावत बाड़ें। ओहमें से एगो लचकत आ फिसलत मस्तूल पर सँभल के चलत बा कि छोर पर बान्हल छोट **झंडी** (29) तक पहुँच जाव। ओकर बदकिस्मत **मुकाबिला करे वाला** (30) पानी में गिर गइल बा। ऊ किनारे आवे खातिर तइरत बा।","t03-c2-10-1":"१०. — ओकरा से बड़का जवान लोग **नाव के भिड़ंत** (32) करत बाड़ें, आ ई सब **घाट** (33) लगे होत बा। एह सब खेल के देखे खातिर बड़हन **जनता** (31) **पुल** (27) के **जँगला** पर टेकल आ किनारा पर जुटल बा। कुछ देखे वाला लोग तबो मुड़ के **इनाम वाला खंभा** (45) के खेल देखत बा भा ओह नगरपालिका के जुलूस के निहारत बा जवन इनाम बाँटे आवत बा।","t03-c2-11-1":"११. — पहिले, इहाँ कुछ **छोकड़ा** (35) **बजनियाँ** (36) के आगे-आगे चलत बाड़ें ; ओकरा बाद **नगर-मुखिया** (37) , ओकर सहायक आ कस्बा के **नगर-पंचायत** आवत बाड़ें। आखिर में **दमकल वाला** (38) लोग चलत बाड़ें।","t03-tit-12":"मेला।","t03-c2-12-1":"१२. — **मेला के मैदान** (39) पर बहुते भीड़ बा। लोग तरह-तरह के **तंबू** देखे आवेला : **लकड़ी के घोड़ा** (40) , **सर्कस** (41) जहाँ खेल शुरू हो चुकल बा, आ **सरबजनिक नाच** (42) जहाँ सहर के जवान लइका आ लइकी लोग **नाचे** के मजा लेत बाड़ें।","t03-c2-13-1":"१३. — छोर पर हमनी के **अखाड़ा** (44) देखत बानी जा जहाँ बहादुर स्पेनी **मातादोर** गुस्साइल **साँड़** (45) से भिड़त बा, ओकरा बाद **रेल-झूला** (49) , आ **निसानाबाजी के जगहा** (46) जहाँ लोग **बंदूक** चलावे आ **निसाना** लगावे के अभ्यास करेला।","t03-c2-14-1":"१४. — ओकरा लगे, इहाँ **मेला के नाटकघर** (47) बा जहाँ **हास-नाटक** आ **दुखांत नाटक** खेलल जाला। ओकरे लगे **दैत्य** (48) आ **बउना** के तंबू बा। पहिलका के **कद** दू मीटर पंद्रह सेंटीमीटर बा ; दुसरका मुसकिल से एगो बच्चा जेतना बा।","t03-c2-15-1":"१५. — आखिर में, इहाँ बड़का **जनावरखाना** (50) बा आपन **जंगली जनावर** के साथे — आपन **बाघ** (51) तेज **नाखून** के साथे, आपन **सिंह** (52) घन **गरदन के बाल** के साथे, आपन दू गो **जिराफ** (53) आ आपन **हाथी** (54) जे आपन **सूँड़** एतना चतुराई से चलावेला।","t03-c2-16-1":"१६. — ओह जनावरन के सधावे वाला **जनावर सधावे वाला** (55) तंबू के केवाड़ लगे बा।","t04-apar-1":"नकसा नं. ४ भरल उमिर आ बुढ़ापा।","t04-tit-1":"*पहिलका दृस्य।* बियाह के भोज।","t04-tit-2":"पतझड़।","t04-c1-01-1":"१. — जवान लोग बड़ हो गइल। ओहमें से एगो, योहानेस, बियाह करत बा। हमनी के ओह **बियाह के भोज** में बानी जा जवन एके मेज के चारो ओर दुनो पच्छ के परिवार के जुटवले बा।","t04-c1-02-1":"२. — हमनी के **पतझड़** में बानी जा, **सितंबर महीना** में। **अक्टूबर** आ **नवंबर** के ठंढा हवा अबहीं देहात से ओकर हरियर पत्ता ना छीनले बा। साँझ के हवा गुनगुन आ महकत बा ; एहीसे खाना बगइचा लगे **बरामदा** (8) के नीचे होत बा।","t04-c1-03-1":"३. — दूर, **पहाड़ी** (3) पर, योहानेस के माई-बाबूजी के घर बा, एगो सुंदर **किला** (1) जवन हरियरी में छिपल बा ; सुंदर अंगूर के बगइचा, जवना से बढ़िया सराब बनेला, ओह छोट पहाड़ी के ढलान के ढँकले बा। अंगूर के किसान ओकर जतन करेला।","t04-c1-04-1":"४. — अंगूर के बगइचा के ऊपर से **तीतर** (2) के झुंड उड़त बा, जे **सिकार-रखवार** (5) के लगे आवे से डेराइल बा। ऊ, बगल में **बंदूक** आ कान्ह पर सिकार-थैला लटकवले, **झाड़ी** (4) में, आपन **कुकुर** (6) के साथे, खोजत बाड़ें। ऊ जमीन के रखवारी करेलें आ चोर सिकारी के सिकार उजाड़े ना देलें।","t04-c1-05-1":"५. — **बरामदा** के बाहर **अंगूर के बेल** चढ़ल बा, जवना पर से घन **अंगूर के गुच्छा** (7) लटकत बा।","t04-c1-06-1":"६. — **मेज** (16) के सजावे वाला सुंदर पतझड़ के फूल **गुलदाउदी** (9) ह ; दुलहिन के **बाबूजी** (10) ओहमें से एगो आपन कोट के काज में लगवले बाड़ें।","t04-c1-07-1":"७. — खाना खतम होत बा। **नौकर** (11) मिठाई के थारी ले आवे लागल बा आ थोड़े देर में ऊ खाना के ऊ सामान उठा ली जेकर आउर जरूरत नइखे — **चम्मच** (14) , **काँटा** (12) , **छूरी** (13) , **बड़का थारी** (15) ।","t04-tit-3":"नात-रिस्तेदार।","t04-c1-08-1":"८. — सब लोग खुस लागत बा, आ दुलहा के **माई** (17) जवन मुसकी से आपन बेटा-बेटी के निहारत बाड़ी ऊ ओकर खुसी के परमान ह।","t04-c1-09-1":"९. — ई बियाह इलाका के दू गो धनी परिवार के जोड़त बा। योहानेस, **दुलहा** (18) , एगो बड़का जमींदार के **बेटा** ह, आ ऊ एगो होसियार कारखानेदार के **दामाद** बनत बा।","t04-c1-10-1":"१०. — **दुलहा-दुलहिन** जवान बाड़ें आ तबो ओह लोग के **सगाई** बहुते पहिले हो गइल रहे। **जवान दुलहिन** (19) , मार्था, आपन **उजर पोसाक** में, जवन संतरा के फूल से सजल बा, मनमोहक लागत बाड़ी।","t04-c1-11-1":"११. — ओकर **ससुर** (20) एतना भल **पतोह** पाके बहुते खुस बाड़ें, आ योहानेस के **सास** (21) आपन **बेटी** के एतना सुंदर देख के मुसकात बाड़ी।","t04-c1-12-1":"१२. — मेज के छोर पर बाकी **नेवतहरी** (22) लोग बइठल बा — **नात, संगी, चचेरा भाई, चचेरी बहिन**। **भोज-परोसनिहार** (23) , बगल में नैपकिन दबवले, ओह लोग के फुरती से परोसत बा।","t04-tit-4":"दोस्त लोग।","t04-c1-13-1":"१३. — मेज के दाहिने ओर, इहाँ एगो **कुँआरी लइकी** (24) बाड़ी, जवान दुलहिन के **सहेली**, आ ओकरा बाद ओकर भाई, जे ओकर **सम्मान-संगी** (25) ह। ऊ आपन **सम्मान-सहेली** (26) से बतियावत बा, जे दुलहा के बहिन ह आ जे एह बियाह से मार्था के **ननद** बनत बाड़ी। ऊ मनमोहक जवान बाड़ी। ओकरा लगे सुंदर **गहना**, **मोती के माला** आ सोना के **कंगन** बा।","t04-c1-14-1":"१४. — ओह लोग लगे जे साहेब ठाढ़ होके आपन गिलास उठावत बाड़ें ऊ परिवार के **दोस्त** (27) हउवें। ऊ **दुलहा के गवाह** में से एगो हउवें। ऊ **जाम उठावत** बाड़ें, जवान जोड़ी के **सेहत** खातिर पियत बाड़ें आ ओह लोग के लमहर खुसी के कामना करत बाड़ें। ऊ रस्मी पोसाक पहिनले बाड़ें, कोट आ **पॉलिस कइल जूता** (28) के साथे। ऊ **आजी** (29) के साथे आइल बाड़ें, जे **बिधवा** बाड़ी।","t04-c1-15-1":"१५. — **कोट** (31) पहिनले ऊ जवान, पातर करिया मोंछ वाला, योहानेस के **साढू** (30) हउवें। ऊ एगो नामी इंजीनियर हउवें। ऊ बहुते सजल-धजल **जवान मेहरारू** (33) के बगल में बाड़ें, जे मार्था के **बड़की बहिन** बाड़ी आ ओह नन्हीं लइकी के माई बाड़ी जे आपन चचेरा भाई के हाथ पकड़ के फूल देवे आ ओकरा के **नीक साँझ** **कहे** आवत बाड़ी। ओह मेहरारू लगे बहुते सुंदर **कान के बाली** आ सुंदर **केस-सिंगार** बा।","t04-c1-16-1":"१६. — छोटका चचेरा भाई, आपन **बुसकट** (36) आ आपन फुलल **जाँघिया** (37) के चलते एतना अजीब लागत बा, बहुते बेचारा बा। ऊ **अनाथ** (35) ह। बहुते छोट में ऊ आपन बाबूजी आ आपन माई के खो देलस। ओकर चाचा ओकर **अभिभावक** (38) हउवें, आ ऊ एह बेचारा बच्चा के पाले खातिर कुँआर रह गइलें। ऊ भल मनई हउवें। ऊ थोड़ा गंजा बाड़ें आ बहुते कम नजर वाला ; ऊ **चस्मा** लगावेलें।","t04-tit-5":"मिठाई-दौर।","t04-c1-17-1":"१७. — भोज करे वाला लोग के पाछे, **मेजपोस** से ढँकल एगो मेज पर, **मिठाई-दौर** (39) तइयार बा। बड़का कटोरा में फर बा : **आड़ू** (40) , **नासपाती** (41) , **सेब** (42) , **खुबानी** (43) आ **अंगूर** (44) । ओकरा लगे **अनन्नास** (45) , सुंदर **केक** (46) , **सराब के बोतल** (48) आ **सैंपेन** (49) , आ साफ **थारी** (47) के थाक भी बा।","t04-c1-18-1":"१८. — **सराब-परोसनिहार** (50) पुरनका सराब के **बोतल** (52) **पेंच** (51) से खोलत बा। **कॉर्क के डाट** (53) बहुते मुसकिल से निकलत लागत बा। ओह परोसनिहार के बगल में **नैपकिन** (54) दबल बा।","t04-c1-19-1":"१९. — खाना के बाद साहेब लोग सिगरेट पिए के कमरा में जइहें, आ मेहरारू लोग नाच खातिर तइयार होखे जइहें।","t04-tit-6":"*दुसरका दृस्य।* बाबा के जनम-दिन।","t04-tit-7":"भेंट।","t04-c2-01-1":"१. — दस बरिस बीत गइल, योहानेस के माई-बाबूजी बूढ़ हो गइलें आ आपन तीन गो नाती-नतिनी से बहुते मया करेलें — दू गो **नाती** (2) आ एगो **नतिनी** (3) । काहेकि आज **बाबा के जनम-दिन** बा, बेटा-बेटी लोग ओह लोग के बधाई देवे आइल बा।","t04-c2-02-1":"२. — छोटका पेत्रुस अबहीं बहुते छोट बा, ऊ खाली तीन बरिस के बा। ऊ **बिलार** (1) के लगे आवत देखत बा। ऊ ओकर सुंदर रेसमी **रोआँ** आ ओकर लमहर **पूँछ** सहलावल चाहत बा ; ऊ ई ना सोचत कि ओह सुंदर **पंजा** के नीचे तेज नाखून छिपल बा जवन सायद ओकरा के नोच ली।","t04-c2-03-1":"३. — ओकर बहिन गाब्रिएला, जे ओकर हाथ पकड़ले बाड़ी, बहुते जादे गंभीर बाड़ी, आ मार्केल्लुस आपन बड़का **लबादा** (4) आ चमड़ा के **पेटी** (5) में थोड़ा बड़ लागत बा, हालाँकि ओकर छोट जाँघिया से ओकर **मोजा** (6) लउकत बा।","t04-c2-04-1":"४. — ओह लोग के बाबूजी आपन मोट जाड़ के **ओवरकोट** (7) पहिनले बाड़ें **फर के कॉलर** (8) के साथे, आ आपन **जेब** (9) में ओकरा लगे रूमाल बा। ओकर घरवाली लगे **पंख** (10) से सजल फेल्ट के टोपी, आपन **जैकेट** (11) , आपन **बोआ-फर** (12) आ आपन **मफ** (13) बा।","t04-c2-05-1":"५. — बहुते ठंढा बा, काहेकि जाड़ के राज बा। **बरफ** (19) पूरा दिन गिरत रहल आ घरन के छत पूरा उजर बा। **रात** के साथे ठंढ आउर तेज हो जात बा। आसमान में **चान** (17) आ **तारा** (18) चमकत बाड़ें आ **अन्हार** के चीरत बाड़ें।","t04-tit-8":"बेमारी।","t04-c2-06-1":"६. — बेचारा **अन्हरा** (20) , जे **दवाखाना** (16) के सामने के चउक आपन **पूडल कुकुर** (21) के सहारे पार करत बा, बहुते दुखी बा। इउस्तीनिया, **नौकरानी** (14) , रसोई से बहुते गरम **काढ़ा** के **कटोरा** (15) ले आवत बाड़ी, जवना में खूब चीनी मिलल बा।","t04-c2-07-1":"७. — **आजी** (23) , जे मेज पर आपन **ऐनक** (26) खोजल चाहत बाड़ी, ताकि ऊ **नुसखा** (27) पढ़ सकीं जवन **डाक्टर** (25) अभिए लिखले बाड़ें, आपन **लाठी** (24) पर टेक के आपन आरामकुरसी से उठत बाड़ी।","t04-c2-08-1":"८. — अकसर ओकरा **जी मिचलाइल, चक्कर, सरदी, दाँत के दरद** होला, ओकर गोड़ कमजोर बा आ ओकर आँख आउर जादे नीक नइखे। तबो ऊ आपन पुरनका **डाक्टर** के हँसी उड़ावेली, जे हरमेसा ओकरा के **दवाई** (28) लिखल चाहेलें। आज ऊ बहुते खुस बाड़ी काहेकि आपन जवान परिवार ओकरा चारो ओर बा।","t04-c2-09-1":"९. — नीक से बंद कमरा में आराम बा। संगमरमर के **अँगीठी** (29) में **सुंदर आग** (30) जरत बा, आ ओह **लालटेन** (31) के मीठ **अँजोर** में, जवन अभिए जरावल गइल बा, मन खुस हो जात बा।","t04-tit-9":"बाबा।","t04-c2-10-1":"१०. — खुद **बाबा** (33) भुला गइल बाड़ें कि ऊ बेमार रहलें, कि ओकर **गठिया** ओकरा के आपन **आरामकुरसी** (34) से बान्हले बा, आ कि कल्हुए ओकरा **बोखार आ बेहोसी** रहे। ओकरा ई भी ना इयाद बा कि पिछला जाड़ में ऊ **निमोनिया** से पीड़ित रहलें आ खरखर आ थकावे वाला **खाँसी** ओकरा के बहुते सतवले रहे।","t04-c2-10-2":"आ तबो ऊ बहुते मुसकिल से नीक भइलें। अबहीं ऊ थोड़ा बेहतर बाड़ें। बाकिर ओकर जवन गोड़ ऊ **कुसन** (38) पर टेकले बाड़ें, जवन छोट **चौकी** (39) पर धइल बा, ऊ भी ओकरा के दुखावेला।","t04-c2-11-1":"११. — जब ऊ आपन गरम **ड्रेसिंग गाउन** (35) में सलीका से लपेटल रहेलें, जवना में सीप के मोटका **बटन** (36) लागल बा, आ जब ओकरा लगे अखबार पढ़े खातिर छोटकी **अनाथ लइकी** (40) रहेली, जे उजर **टोपी**, नीला **फ्राक** (42) आ **पेलरिन** (41) पहिनले बाड़ी, त ऊ कवनो सिकायत ना करेलें।","t04-c2-12-1":"१२. — हर साल, जब **कैलेंडर** (43) फेरु पहिला **दिसंबर** के **तारीख** देखावेला, त ऊ बेसबरी से आपन **नाती-पोता** के अगोरेलें, काहेकि ऊ जानेलें कि ऊ लोग ओह जरूरी **तारीख** के ना भुलाई।","t04-c2-13-1":"१३. — ऊ भावुक होके ओह बहुते पुरनका बेरा के इयाद करेलें जब ऊ खुद सम्राट के नामी **मार्शल** के बधाई देवे गइल रहलें, जेकर **तसवीर** (44) भीत पर टँगल बा आ जे ओकर बेटा-बेटी के **परबाबा** हउवें।","t05-apar-1":"नकसा नं. ५ घर आ ओकर बनावट।","t05-tit-1":"नीक भेंट।","t05-01-1":"योहानेस। — चाचा, हमरा बहुते जाने के मन बा कि **घर** कइसे बनेला।","t05-01-2":"चाचा (80) । — ई त बहुते आसान बा, हमार दोस्त, हमरा साथे आवऽ, हम तोहरा ऊ देखाइब जवन बेर्नार्दुस बाबू (79) बनववत बाड़ें आ जवना में हम रहब।","t05-01-3":"योहानेस। — त एह घर के **खाका** (76) के बनवले बा ?","t05-01-4":"चाचा। — **वास्तुकार** (75) ; ऊ बहुते साफ नक्सा देलें जवन मंजूर हो गइल, आ **ठेकेदार** (77) काम सुरू कर देलें।","t05-01-5":"योहानेस। — त ठेकेदार के हउवें ?","t05-01-6":"चाचा। — ऊ ब्लांको बाबू हउवें, तोहार दोस्त याकोबुस के बाबूजी। ऊ रूफो बाबू, वास्तुकार, के साथे मिल के मजूरन के काम करावेलें।","t05-01-7":"लऽ ! ठीक बेरा पर ब्लांको बाबू आपन **पटरी** (78) लेके आ रूफो बाबू आपन खाका लेके आ गइलें।","t05-01-8":"राम-राम, बाबू लोग। रउआ सभ कइसन बानी ?","t05-01-9":"रूफो बाबू। — बहुते नीक, धन्यवाद। राम-राम, योहानेस, ई बच्चा त केतना बड़ हो गइल !","t05-01-10":"चाचा। — हाँ, सचहूँ, ऊ छोट मरद हो गइल बा। ऊ बहुते गंभीर बा, जवन कुछ ऊ देखेला ओकरा बारे में ओकरा के बतावे के परेला। आज ऊ जानल चाहत बा कि घर कइसे बनेला।","t05-tit-2":"मजूर लोग।","t05-01-11":"ब्लांको बाबू। — लऽ, हमरा साथे आवऽ, छोट दोस्त, हम तोहरा के अभिए समझाइब, काहेकि हमरा ऊ लइका बहुते नीक लागेलें जे सीखल चाहेलें।","t05-01-12":"तू ओह मजूर के देखत बाड़ऽ जे हाथ में **बेलचा** (82) पकड़ले बा : ऊ **माटी खोदे वाला** (81) ह। ऊ पानी के पाइप धरे खातिर **नाली** (46) खोदत बा। ऊ ओह जगहा के जमीन भी खोदले बा जहाँ घर बा, ताकि मिस्त्री चारो **देवाल** उठा सके। ओह देवाल के जवन हिस्सा जमीन के भीतर बा ओकरा के **नेव** (2) कहल जाला। नेव के बीच के जगहा **तहखाना** (3) बनावेला। ओह तहखाना में एगो छोट खिड़की होले जेकरा **तहखाना के झरोखा** (5) कहल जाला, एगो **केवाड़** (4) आ एगो सीढ़ी।","t05-01-13":"**राजमिस्त्री** (108) देवाल बनावत रहलें आ **केवाड़** (8) आ **खिड़की** (17) खातिर जगहा छोड़त रहलें।","t05-01-14":"योहानेस। — बाकिर ऊ राजमिस्त्री त हमरा नइखे लउकत !","t05-01-15":"ब्लांको बाबू। — ऊ अबहीं घर के भीतर के काम खतम कर लेलें। ऊ **घोड़सार** (54) लगे बाड़ें, आपन **मचान** (110) पर, आ **धोबीघर** (56) के देवाल बनावत बाड़ें।","t05-01-16":"ओकरा लगे करनी, तसला आ **साहुल** (109) बा। बाकिर ई नाँव तोहरा इयाद ना रहीहें।","t05-01-17":"योहानेस। — जरूर रहीहें, काहेकि हम अभिए आपन चाचा से एगो छोट करनी आ तसला माँगब, आ साहुल हम खुदे एगो डोरी से बना लेब।","t05-tit-3":"सामान।","t05-01-18":"चाचा। — हा ! बहुते नीक। बाकिर हमरा बतावऽ, योहानेस, घर बनावे खातिर का-का चाहीं ?","t05-01-19":"योहानेस। — **गढ़ल पाथर** (59) आ **गारा** (65) चाहीं।","t05-01-20":"चाचा। — ठीक कहलऽ। ओह मनई के देखऽ, बड़का टोपी वाला, जे आपन **गाड़ी** (136) पर बा। ऊ **गाड़ीवान** (135) ह। ऊ रोज इहाँ **पाथर के ढोंका** (60) ले आवेला। ऊ आपन गाड़ी अँगना में खाली करेला, आ **पाथर काटे वाला** (83) ओह ढोंका के गढ़ेलें आ आपन **पाथर के आरी** (85) से चीरेलें। **मजूर** (146) ओकनी के राजमिस्त्री लगे ले जाला, जे ओकनी के जगहा पर धरेलें।","t05-01-21":"ओही बेरा **गारा सानेवाला** (87) गारा तइयार करत बा। ओकरा **बालू** (62) , **चूना** (63) आ **पानी** (64) चाहीं। चूना ओकरा लगे **बोरा** (71) में बा, **मिस्त्री के मददगार** (111) ओकरा लगे **ठेला** (112) पर बालू ले आवत बा आ **सिखउआ** (113) नल (58) लगे बा। ऊ **बाल्टी** (114) भरत बा। गारा थोड़े देर में तइयार हो जाई। **गारा ढोवे वाला** (107) ओकरा के लेके सीढ़ी से मचान पर ऊपर ले जाला, जहाँ राजमिस्त्री घर के ओह ओर के काम पूरा करत बाड़ें।","t05-01-22":"आ अबहीं बतावऽ, जे मजूर **छत** (31) के काम करेला ओकरा के का कहल जाला ?","t05-01-23":"योहानेस। — ऊ **छवइया** (118) ह।","t05-tit-4":"घर के छत।","t05-01-24":"ब्लांको बाबू। — हाँ, बाकिर पहिले **बढ़ई** (115) आवेला।","t05-01-25":"बढ़ई **छत के ढाँचा** (35) बनावेला। ऊ **कड़ी** (37) के **खूँटी** (117) से जोड़ेला। ऊ मजूर, ओहिजा ऊपर, आपन चाकर मखमली जाँघिया में, बढ़ई हउवें। एगो छोट कड़ी पकड़ले बा आ दोसरका आपन **टाँगी** (116) से खूँटी काटत बा। जे **चिमनी** (41) लगे बा ऊ छवइया ह। ऊ (*) बल्ली पर पटरी ठोकेला, आ पटरी पर **स्लेट** (66) । कबो-कबो ऊ खपड़ा धरेला।","t05-01-26":"घोड़सार के छत **खपड़ा वाला** (55) बा, घर के छत **स्लेट वाला** (32) बा आ बरामदा के छत **जस्ता वाला** (24) बा।","t05-01-27":"योहानेस। — का छवइया जस्ता के छत के भी काम करेला ?","t05-01-28":"ब्लांको बाबू। — ना, ऊ काम **जस्ता के मिस्त्री** (121) भा **प्लंबर** करेला, ऊहे जे घर के छत पर **छत के खिड़की** (38) बइठावेला। ऊ **परनाला** (43) आ **छत के नाली** (42) भी लगावेला। ऊ जस्ता आ टीन के जोड़ेला। ऊ **बिजली-रोधक** (40) आ **हवा के तीर** (39) **छत के माथ** (36) पर लगवले बा।","t05-01-29":"योहानेस। — त घर बन गइल ?","t05-tit-5":"औजार।","t05-01-30":"ब्लांको बाबू। — पूरा ना। **पलस्तर वाला** (99) **ईंटा** (61) से ऊ भीत बनावेला जवन घर के अलग-अलग कमरा में बाँटेला। ऊ **पलस्तर** (70) से **भितरी छत** (26) आ देवाल के लीपेला। अबहीं ऊ **बरामदा** (33) के भितरी छत के काम करत बा। ओकरा लगे, राजमिस्त्री नियर, **करनी** (100) आ **तसला** (101) बा।","t05-01-31":"ओकरा बाद काठ-मिस्त्री केवाड़, खिड़की, **काठ के फर्स** (16) आ **झिलमिली** (19) बनावेला।","t05-01-32":"अबहीं ऊ अँगना में आपन **काम के मेज** (90) पर काम करत बा। ओकरा लगे **आरी** (94) बा काठ (69) चीरे खातिर, **रंदा** (91) , **सिकंजा** (92) , **छेनी** (94 bis) , **परकार** (95) आ काठ के **हथौड़ी** (95 bis) बा।","t05-01-33":"योहानेस। — हा ! बाकिर मिस्त्री के काम से बढ़ई के काम जादे मजेदार बा। चाचा, रउआ हमरा खातिर काम के मेज, आरी आ रंदा खरीद दीं, काहेकि हम जल्दिए मेदोर खातिर एगो झोपड़ी बनाइब।","t05-01-34":"चाचा। — हाँ, बबुआ।","t05-01-35":"योहानेस। — हम केतना खुस बानी ! आ ऊ के हउवें जे मुख्य केवाड़ लगे ठाढ़ बाड़ें ?","t05-tit-6":"रंग-रोगन।","t05-01-36":"ब्लांको बाबू। — ऊ **रंगसाज** (102) हउवें। ऊ आपन सीढ़ी पर **रंग** (103) के डिब्बा आ आपन **कूँची** (104) लेके ठाढ़ बाड़ें। ऊ मुख्य केवाड़ के काठ पर रंग लगावत बाड़ें ताकि ऊ जादे दिन चले।","t05-01-37":"ऊ कमरन में कागज भी चिपकावेलें।","t05-01-38":"**परदा लगावे वाला** (107) , जे **सीढ़ी** (106) पर, **बालकनी** (28) पर बा, **परदा** (29) लगावत बा।","t05-01-39":"जे मजूर बड़का खिड़की लगे ठाढ़ बा ऊ **सीसा लगावे वाला** (96) ह। ऊ **सीसा** (18) **पुट्टी** (73) से बइठावेला। ऊ दोसरका मजूर, जे तहखाना के केवाड़ लगे घुटना टेकले बा, **तालासाज** (97) ह। ऊ **ताला** (6) लगावत बा। ओकर **रेती** (98) ओकरा लगे बा।","t05-01-40":"योहानेस। — का ऊ मजूर भी तालासाज ह जे लोहा पर आपन **हथौड़ी** (84) मारत बा ?","t05-01-41":"ब्लांको बाबू। — ठीक-ठीक कहीं त ऊ लोहार (125) ह। ऊ **लोहा के सामान** (67) गढ़त बा **बिजली मिस्त्री** (124) खातिर, जे **गाड़ीघर** (51) के छत पर बा। ओकरा लगे **भट्ठी** (126) , **निहाई** (127) आ **संड़सी** (128) बा।","t05-01-42":"बिजली मिस्त्री टेलीफोन के **ताँबा** (44) के **तार** बान्हत बा।","t05-tit-7":"बगइचा के काम।","t05-01-43":"चाचा। — **अँगना** (45) के छोर पर, **लोहा के जाली** (47) आ **फाटक** (48) लगे, तू **माली** (129) के देखत बाड़ऽ। ऊ **छोट बगइचा** (49) तइयार करत बा। ऊ आपन **कुदाल** (131) से माटी गोड़ले बा, बीया बोवत बा आ **पंजा** (130) से समतल करत बा। ओकरा बाद आपन **झारा** (132) से ऊ **क्यारी** (50) सींची आ पौधा बढ़ी।","t05-01-44":"**साईस** (133) , जे अभिए घोड़ा के मालिस कइले आ ओकरा के दाना देले बा, **गाड़ी** (52) के स्पंज, **हाथ-पंप** (134) आ बाल्टी भर पानी से साफ करत बा। ओकरा बाद ऊ ओकरा के गाड़ीघर में लगा दी आ मोटका **अरगल** (53) से केवाड़ बंद कर दी।","t05-01-45":"लऽ, अबहीं तू खुस बाड़ऽ, हमरा लागत बा ; तोहरा भरपूर समझ में आ गइल।","t05-01-46":"योहानेस। — हाँ, चाचा, बाकिर हम खुसी से घर के भीतर भी देखतीं।","t05-01-47":"चाचा। — ऊ काल्ह होई। रूफो बाबू तोहरा के खाका समझइहें आ हर कमरा के नाँव बतइहें।","t05-tit-8":"घर के भीतरी बनावट।","t05-apar-2":"*(खाका देखीं।)*","t05-01-48":"वास्तुकार। — आवऽ, योहानेस, हम तोहरा के घर के अलग-अलग हिस्सा अभिए घुमा देत बानी।","t05-01-49":"आवऽ, **भुइयाँ-तल** (7) में चलल जाव। ई रहल **घंटी** (11) के बटन। हमनी के तीन गो **डेग** (14) चढ़त बानी जा जवन **चबूतरा** (9) के ह, **देहरी** (10) पार करत बानी जा जवन **मुख्य केवाड़** (8) के ह, आ लऽ, हमनी के **सीढ़ी** (13) के जड़ लगे बानी जा।","t05-01-50":"योहानेस। — ई गलियारा ह।","t05-01-51":"वास्तुकार। — ना, ई **ड्योढ़ी** (12) ह। **गलियारा** (a) छोर पर बा। दाहिने ओर, ई रहल **बइठका** (b) आ **खाए के कमरा** (c) ; खाए के कमरा के सामने **रसोई** (d) आ **भंडार** (e) बा, आ ओकरा आगे **लिखे के कमरा** (f) । **बरामदा** (23) आपन **काँच के केवाड़** (25) के साथे बइठका लगे बा।","t05-01-52":"अबहीं हमनी के सीढ़ी चढ़ब जा। **जँगला** (15) पकड़ के चलऽ आ डेग गिनऽ। चउदह गो बाड़ें। ई रहल **सीढ़ी के चबूतरा** (m) , हमनी के पहिला **मंजिल** (27) पर बानी जा।","t05-tit-9":"पहिला मंजिल।","t05-01-53":"सीढ़ी के सामने **पाखाना** (20) आ **सिंगार-कोठरी** (j) बा। दाहिने ओर सुंदर **सुते के कमरा** (g) बा, जवना के दू गो खिड़की घर के **अगवारी** (1) पर बा। बाईं ओर **नहाए के कमरा** (1) आ **पाहुन के कमरा** (i) बा, जवना में बड़का **कोठरी** (h) बा। सुते के कमरा लगे **बच्चा के कमरा** (k) बा। ऊ चाकर **छज्जा** (21) से लागल बा। एह छज्जा के नीचे एगो आउर पाखाना (20) बा, आ देवाल पर ई रहल **घंट** (22) जवन खाना खातिर बाजेला।","t05-01-54":"योहानेस। — चलीं **दुसरका मंजिल** पर चलल जाव।","t05-01-55":"वास्तुकार। — दुसरका मंजिल बा ही ना। छत के नीचे खाली **अटारी** (33) आ कोठार (34) बा। हमनी के घुमाई पूरा भइल, अबहीं नीचे उतरल जा सकेला।","t05-01-56":"योहानेस। — धन्यवाद, बाबू, ई बहुते मजेदार रहल। हम जवन कुछ देखनी ऊ सब अभिए आपन बाबूजी के सुनाइब।","t06-apar-1":"नकसा नं. ६ घर के भीतर, सामान, खाना, अँजोर।","t06-apar-2":"घर बन गइल। योहानेस के चाचा आपन नया घर में रहे लागल बाड़ें, जेकर बनावट हमनी के जानत बानी जा। अबहीं देखल जाव कि ऊ आपन घर के कइसे सजवले बाड़ें। पहिले हमनी के ई देखब जा :","t06-tit-1":"सुते के कमरा।","t06-c1-01-1":"१. — हमनी के गलत बेरा पहुँचल बानी जा, काहेकि कमरा के नौकरानी **कमरा** साफ करे में लागल बाड़ी।","t06-c1-02-1":"२. — **सिंगार-मेज** (1) पर इहाँ-ओहिजा तरह-तरह के चीज बा जवना से लोग हाथ-मुँह धोवेला, बाल झारेला — सार में सिंगार करेला। ऊ ई बाड़ी सँ : **चिलमची** (2) आ **लोटा** (3) , **बाल के बुरुस** (4) , **कंघी** (5) , **साबुन** (6) आ **स्पंज** (7) , आ आखिर में दाँत के तरल दवाई खातिर **सीसी** (8) ।","t06-c1-03-1":"३. — भुइयाँ पर, सिंगार-मेज के आगे, ई रहल गंदा पानी जमा करे खातिर **बाल्टी** (9) ।","t06-c1-04-1":"४. — **अगला कमरा** (10) में हमनी के कुछ **खूँटी** (13) आ दू गो **छाता** (11) देखत बानी जा, **छाता-दान** (12) में।","t06-c1-05-1":"५. — केवाड़ के दोसरा ओर **सीसा वाला आलमारी** (14) बा जवना में **कपड़ा-लत्ता** (15) रहेला।","t06-c1-06-1":"६. — **कमरा के नौकरानी** (16) जब तक **पलंग** (17) ठीक करत बाड़ी, तब तक ओकर अलग-अलग हिस्सा देख लिहल जाव। **पलंग के ढाँचा** (20) में नीक **स्प्रिंग के गद्दा** (21) बा, जवना पर इउस्तीना अभिए **ऊन के गद्दा** (22) धरिहें। ओकरा बाद ऊ कुरसी पर से दू गो **चादर** (23) आ **कंबल** (24) लीहें। फेरु ऊ पलंग के सिरहाना पर **लमहर तकिया** (25) आ **तकिया** (26) धरिहें, जवन **रजाई** (27) के साथे **पलंग के दरी** (32) पर बा। ऊ **परदा** (19) आ **पलंग के छत्तर** (18) के धूर झाड़े खातिर पंख के झाड़न चलावेली, आ लऽ, काम के एगो हिस्सा पूरा भइल।","t06-c1-07-1":"७. — ओकरा बाद ओकरा **पलंग के छोट मेज** (28) थोड़ा ठीक करे के परी, **अलार्म घड़ी** (29) में चाभी भरे के परी, **रात के दिया** (30) तइयार करे के परी, आ मोमबत्तीदान साफ करे खातिर **मोमबत्ती** (31) निकाले के परी।","t06-tit-2":"सिलाई के टोकरी आ अँगीठी के सामान।","t06-c1-08-1":"८. — **सिलाई के टोकरी** (34) , जे **मोढ़ा** (33) लगे बा, ओकरो के ठीक करे के बहुते जरूरत बा। ओकरा **कढ़ाई** (35) तह करे के परी, **सिलाई के मेज** (38) में **अँगुश्ताना**, **धागा** (36) , **सूई** (37) आ **कैंची** (39) बंद करे के परी, आ मेज के ढक्कन **चाभी** (40) से बंद करे के परी।","t06-c1-09-1":"९. — बीच के **एक-गोड़ मेज** (41) पर इउस्तीना **सुराही** (42) के पानी बदल दीहें। ऊ **चीनीदान** (43) में **चीनी** धरिहें, **चीनी के चिमटी** (44) साफ करिहें आ **कपड़ा के बुरुस** (46) हटा दीहें।","t06-c1-10-1":"१०. — कमरा के दाहिना ओर ओकरा से कम काम माँगी, काहेकि **आराम-कुरसी** (47) आ ओकर **कुसन** (48) आपन ठीक जगहा पर बा, आ काहेकि ठंढ नइखे, **अँगीठी** (49) के सामान में से कुछ ना खिसकल बा। **बेलचा** (50) , **चिमटा** (51) , **अँगीठी के टेक** (55) , **राख-रोक** (56) साफ बा ; **आग के परदा** (54) अपना जगहा पर बा आ **काठ के संदूक** (52) में **लकड़ी के गुल्ला** (53) भरल बा।","t06-c1-11-1":"११. — तबो ओकरा **पेंडुलम घड़ी** (57) , **दीवट** (58) आ **जेब-दान** (59) के धूर झाड़े के परी, आ आखिर में **सीसा** (60) पोंछे के परी।","t06-c1-12-1":"१२. — रहल छोट बच्चा (बबुआ (*) ) के **पलना** (61) , ऊ त पहिलही से तइयार बा।","t06-tit-3":"बइठका।","t06-c2-01-1":"१. — अबहीं ई रहल बइठका। ई बहुते सुंदर **कमरा** बा। जे अँगीठी दाहिना कोना में बा ऊ नाजुक **छोट मूरत** (1) आ दू गो सुंदर **फूलदान** (3) से सजल बा आ मखमली **झालर** (2) (*) से ढँकल बा।","t06-c2-02-1":"२. — चूल्हा के चिनगारी से कालीन ना जर जाव, एहीसे चूल्हा के आगे ताँबा के **चिनगारी-रोक** (4) धइल गइल बा।","t06-c2-03-1":"३. — ओकरा लगे एगो सुंदर **लिखे के मेज** (5) खुलल बा। ओकरा पर **घर के मालकिन** (23) आपन चिट्ठी लिखत बाड़ी।","t06-c2-04-1":"४. — खिड़की पर **खिड़की के परदा** (6) लागल बा, जवना के **फीता** (8) **खूँटी** (7) में अँटकल बा, आ कपड़ा के बड़का परदा **ऊपर से लटकल** (9) बा।","t06-c2-05-1":"५. — खिड़की के ताख में **गमला-खोल** (11) में हरियर **पौधा** (10) बा, एगो सुंदर खजूर जेकर पत्ता लगभग **मिट्टी तेल के लालटेन** (12) तक फइलल बा।","t06-c2-06-1":"६. — लालटेन के **छत्ता** (13) मारिया सजवले बाड़ी, ऊ मनमोहक जवान लइकी (14) जे पियानो (15) लगे बाड़ी। **मोढ़ा** (16) पर सोझ बइठ के ऊ संगीत सीखत बाड़ी। ऊ बहुते होसियार आ सलीकेदार बाड़ी, जइसन ओकर **संगीत के आलमारी** (17) से पता चलेला, जवन पूरा सजल-सँवरल बा।","t06-tit-4":"सैतान लइका।","t06-c2-07-1":"७. — ओकर भाई, पाउलुस, **किताब** (19) खोजत बा **किताब के आलमारी** (18) में। ऊ **किसोर** (20) बा, चंचल आ ना सहे लायक। जवन किताब बहुते ऊपर बा ओकरा तक पहुँचे खातिर आलमारी में लटक के ऊ ओह **मूरत** (21) के गिरावे के खतरा बनवत बा जवन ऊपर धइल बा।","t06-c2-08-1":"८. — ऊ एह सैतानी खातिर एह बात के फायदा उठावत बा कि ओकर माई आपन सहेली, एगो **मेहरारू** (22) जे कुछ दिन ओकरा घरे बितावे आइल बाड़ी, से बतियावे में लागल बाड़ी। माई **सोफा** (24) पर **आरामकुरसी** (25) लगे बइठल बाड़ी, आ ओकर सहेली ओह **कुरसी** (27) पर बाड़ी जेकर खाली **पीठ के टेक** (26) लउकत बा।","t06-c2-09-1":"९. — भीत पर टँगल बड़का **फ्रेम** (30) में एगो रिस्तेदारिन के **तसवीर** (29) बा। मेज पर धइल **एलबम** (32) में बाकी घर के लोग के **फोटो** (33) जुटल बा। लइकन अभिए ओकरा के उलटले बाड़ें, काहेकि **कुरसी** (31) अबहीं ले मेज के चारो ओर जमा बा।","t06-c2-10-1":"१०. — चीनी मिट्टी के **चीनी फूलदान** (34) , जे **कागज-छूरी** (35) लगे बा, मारिया के ओकर परब पर भेंट में मिलल रहे, आ जे **आड़-परदा** (36) कमरा के कोना सजावत बा ऊ ओकर चाचा चीन से ले आइल रहलें।","t06-c2-11-1":"११. — सुंदर **चित्र** (37) से सजल, जवन **भीत** (42) पर टँगल बा, **झाड़-फानूस** (38) से अँजोर, जेकर **बिजली के बत्ती** (39) साँझ के खुसी से चमकेली, ई बइठका बहुते नीक लागत बा। काठ के फर्स पर बिछल मोलायम **कालीन** (40) , आ ओतना आसान **बिजली के घंटी** (41) , ओकर आराम पूरा कर देला।","t06-tit-5":"खाए के कमरा।","t06-c3-01-1":"१. — खाना के घंट बाजल। मारिया के छोड़ के पूरा परिवार मेज के चारो ओर जुटल बा। खाए के कमरा चीनी मिट्टी के बढ़िया **अँगीठी** (1) से, जेकर **नली** (2) पातर बा, नीक से गरम बा।","t06-c3-02-1":"२. — एह कमरा में जादे सामान नइखे। भीत के किनारे, **भीत-मेज** (4) के ऊपर, सजावटी **छोट फुहारा** (3) टँगल बा। एकदम लगे **परोसे के मेज** (5) बा जवना पर ठंढा खाना, मिठाई के थारी आ ऊ सब सामान धइल जाला जवन तुरते ना चाहीं।","t06-c3-03-1":"३. — एह तरह हमनी के ऊपर के तखता पर **भुँजल मुरगी** (7) , **मछरी** (8) आ **कटोरा** (10) देखत बानी जा जवना में **फर** (9) बा। नीचे ई रहल **पनीर** (11) , **डबलरोटी** (12) , आ **तेल-सिरका के दान** (13) जवना में सलाद के छौंके के सब सामान बा : तेल, सिरका, **नून** (14) आ **गोलमिरचा** (15) । आखिर में, नीचला तखता पर **केक** (17) बा, **सरसों-दान** (16) लगे।","t06-c3-04-1":"४. — खाए के कमरा के घड़ी, जेकरा **भीत के घड़ी** (20) कहल जाला, बहुते अलगे रूप के बा। ऊ काठ के फ्रेम में जड़ल बा जवना में **बैरोमीटर** (19) आ **थर्मामीटर** (18) भी बा।","t06-tit-6":"खाना के परोसाई।","t06-c3-05-1":"५. — कमरा के सब भीत पर मोम लागल सागवान के **काठ के पल्ला** (21) जड़ल बा। कपड़ा के **केवाड़ के परदा** (22) ओह केवाड़ के ठीक से बंद करेला जवन बरामदा में खुलेला। ओहिजा परिवार खाना के बाद कॉफी पिए जाई। **प्याली** (24) आ **तस्तरी** (25) पहिलही से **थारी-मेज** (23) पर तइयार बा।","t06-c3-06-1":"६. — मेज के ऊपर छत से **लटकन दिया** (26) बान्हल बा जेकर बहुते चमकत बत्ती साँझ के पूरा खाए के कमरा के अँजोर करेला।","t06-c3-07-1":"७. — अबहीं **खाए के मेज** (27) के देख लिहल जाव। जब परिवार आइल, खाना के सामान तइयार रहे। **मेजपोस** (28) पर हर खाए वाला के जगहा पर **थारी** (33) , **नैपकिन** (29) , **चम्मच** (34) , **काँटा** (35) , **छूरी** (36) आ **गिलास** (32) धइल रहे। सराब खातिर **बोतल** (30) आ पानी खातिर **सुराही** (31) भी रहे।","t06-c3-08-1":"८. — **नौकर** (39) पहिले **सूप के कटोरा** (37) ले अइलें, जवना में अबहीं ले थोड़ा सूप भाप छोड़त बा। अबहीं ऊ पहिलका **पकवान** (38) , गोस के पकवान, परोसत बाड़ें। ओकरा बाद ऊ ऊ सब देंहें जवन हमनी के गिना चुकल बानी जा, आ आखिर में, मिठाई के बाद, ऊ एह बात के फायदा उठइहें कि ओकर मालिक लोग बरामदा में चल गइल बा, आ मेज के सामान उठा के खाए के कमरा फेरु ठीक कर दीहें।","t06-c3-08-2":"*नोट।* — *खाना-पीना से जुड़ल आम सबद इहाँ बहुते संछेप में देहल गइल बा। ई सूची « होटल » (नं. १३) आ « बजार » (नं. १५) वाला दू गो नकसा पर पूरा कइल जाई।*","t06-tit-7":"रसोई।","t06-c4-01-1":"१. — रसोई में, जेकरा के हमनी के आधा खुलल केवाड़ से देखे लागत बानी जा, एगो देखे लायक अस्त-बेस्त बा। **चूल्हा** (1) के आगे, जवना में **आग** (3) चटकत बा, **सीख घुमावे वाला** (5) लागल बा। सुंदर **भुँजल गोस** (7) **सीख में लागल** (6) बा आ पकत बा।","t06-c4-02-1":"२. — **धौंकनी** (8) आ **कोयला के बेलचा** (9) , जवना के अभिए इस्तेमाल भइल, **लकड़ी** (10) नियर भुइयाँ पर पड़ल रह गइल।","t06-c4-03-1":"३. — अँगीठी के ऊपर सब ठीक बा : **लालटेन** (11) , **दियासलाई के डिब्बा** (13) , जवना में **दियासलाई** (12) बा, **दीवट** (14) आ **मोमबत्तीदान** (15) आपन **मोमबत्ती** (16) के साथे आपन जगहा पर बा। बाकिर बड़का **कोयला के बाल्टी** (18) , जवना में **पथरकोयला** (17) भरल बा आ जेकरा के **रसोइनिन** (23) अभिए तहखाना से भर के लइले बाड़ी, रसोई के बीचे रह गइल बा।","t06-c4-04-1":"४. — सचहूँ, ओह बेचारी के जल्दी करे के बा ताकि खाना ठीक बेरा पर तइयार हो जाव। अबहीं ऊ **रसोई-चूल्हा** (19) लगे बाड़ी आ **रसा** (24) चलावत बाड़ी, जवन जादे जरे के ना चाहीं।","t06-c4-05-1":"५. — **भट्ठी** (20) में केक सिंकत बा, जवन ऊ लइकन के जलपान खातिर बनवले बाड़ी। रसोई-चूल्हा के ऊपर **करछुल** (21) आ **झँझरी करछुल** (22) टँगल बा।","t06-tit-8":"बरतन।","t06-c4-06-1":"६. — कमरा के छोर पर टँगल **रसोई के बरतन** (25) बहुते साफ बा। ताँबा के सुंदर **कड़ाही** (26) , **दूध के लोटा** (27) , **छननी** (28) आ **कद्दूकस** (29) जतन से माँजल गइल बा।","t06-c4-07-1":"७. — **नून के डिब्बा** (30) बरतन के आलमारी पर **चाय के केतली** (31) आ **तेल के बोतल** (32) लगे धइल बा। **दराज** (33) में सायद खाए के सामान आ रसोई के छूरी रहेला।","t06-c4-08-1":"८. — **झाड़ू** (34) आ **पंख के झाड़न** (35) एगो कोना में बा। रसोइनिन अभिए **काठ के गुटका** (36) इस्तेमाल कइले बाड़ी, ऊ ओकरा के खिड़की लगे छोड़ देले बाड़ी।","t06-c4-09-1":"९. — **हाथ पोंछे के गमछा** (37) भीत पर, **कीप** (38) लगे टँगल बा। रसोई के ओह हिस्सा में **सिकाई के जाली** (39) , **काटे के छूरी** (40) आ **काटे के पटरी** (41) धइल बा। ओकरा बाद, काटे के छूरी के ऊपर, एगो **तखता** (42) पर **बरतन** (43) , **देगची** (44) आपन **ढक्कन** (45) के साथे आ **देग** (46) बा। **तवा** (47) लगहीं टँगल बा।","t06-c4-10-1":"१०. — एह कोना में खाली ताँबा के **टोंटी** (48) चमकत बा। **चौका** (49) , जवना पर मोटका **मटका** (50) धइल बा, आपन छोट आलमारी के साथे सायद बहुते सुविधा वाला बा ; ओह आलमारी में **सिरका के पीपा** (51) आपन **टोंटी** (52) के साथे, **कूड़ा के डिब्बा** (53) आ **मैल थारी** (54) रखल जाला।","t06-tit-9":"रसोई में धइल दोसर चीज।","t06-c4-11-1":"११. — **टब** (55) , जवना में **तरकारी** (58) धोवल जाला, आ **लोहा के कड़ाह** (56) , जवन **फर्स के टाइल** (57) पर धइल बा, सायद ओहिजे ओह आलमारी में रहेला।","t06-c4-12-1":"१२. — रसोइनिन के चूल्हा के कमी त पक्का नइखे, काहेकि ई रहल मेज के कोना पर **गैस के चूल्हा** (59) जवना पर छोट कड़ाही में पानी गरम होत बा। जवन **भाप** (60) ओहसे निकलत बा ऊ बतावत बा कि सायद ऊ उबलत बा। सायद ई पानी कॉफी खातिर काम आई, काहेकि ई रहल मेज के दोसरा छोर पर **कॉफी के केतली** (64) आ **कॉफी के चक्की** (63) ।","t06-c4-13-1":"१३. — चूल्हा **गैस के मुँह** (62) से लमहर **रबर के नली** (61) के जरिए जुड़ल बा।","t06-c4-14-1":"१४. — **दिहाड़ी के नौकरानी** (66) , जे रसोइनिन के मदद करे आवेली, खाना खातिर तरकारी तइयार करत बाड़ी। जब ऊ छिला आ धोवा जाई, त ऊ ओकरा के **परात** (65) में धर दीहें आ पकावे के बेरा के अगोरिहें।","t06-tit-10":"नहाए के कमरा। *(गुसलखाना।)*","t06-c5-01-1":"१. — घर के खास कमरा जाने खातिर हमनी के खाली एगो ढिठाई करे के बाकी बा : नहाए के कमरा के बनावट देखल। एहमें जादे बेरा ना लागी, काहेकि ऊ बड़ नइखे, आ हमनी के जल्दिए जान लेब जा कि **नहाए के टब** (1) में नीक **पानी गरम करे के भट्ठी** (2) बा, कि **साबुनदानी** (3) नहाए वाला के हाथ तक पहुँचेला, आ कि **गमछा-टाँग** (5) से **गमछा** (4) पक्का आसानी से सूख जाई।","t06-c5-02-1":"२. — एह कमरा के भीत **चीनी मिट्टी के टाइल** (6) से ढँकल बा, जवना के चलते **फुहारा** (7) लगावल संभव भइल बिना एह डर के कि ओकरा इस्तेमाल में जवन पानी छिटकेला ऊ भीत के बिगाड़ दी। जस्ता के **छोट परात** (8) , जवन गोड़ धोवे के काम आवेला, एह सामान के पूरा कर देला।","t07-apar-1":"दुसरका शृंखला नकसा नं. ७","t07-tit-1":"*पहिलका दृस्य।*","t07-tit-2":"जाड़ में गाँव।","t07-c1-01-1":"१. — नया साल के छुट्टी में हम आपन बाबूजी के साथे नोवुरबो गइनी, एगो छोट गाँव, जहाँ ओकरा कुछ बेपार के काम निपटावे के रहे।","t07-c1-02-1":"२. — हमनी के ऊ **डाक-गाड़ी** (11) से गइनी जा जवन सहर आ ओह कस्बा के बीच चलेला ; बाकिर बहुते ठंढा रहे, एहीसे ओह कम आराम वाला गाड़ी के जातरा बहुते नीक ना रहल।","t07-c1-03-1":"३. — एहीसे हमनी के सचहूँ खुसी भइल जब हमनी के **गाड़ीवान** के आपन गाड़ी चउक पर, *उजर भालू* के **सराय** (2) के आगे रोकत देखनी जा। **सरायवाला** (4) आपन घर के देहरी पर, चुपचाप आपन **पाइप** पियत, हमनी के अगोरत रहलें।","t07-c1-03-2":"ऊ हमनी के भीतर बोलवलें आ हम बिना दोसरा बेर कहवले ओह लकड़ी के आग के सामने जा बइठनी जवन चूल्हा में चटकत रहे। तब हम ओह तेज **उत्तर के हवा** के खूब हँसनी जवन पुरनका **तखती** (3) के चरमरावत रहे आ **धुँआ** (1) के, जवन अँगीठी से निकलत रहे, करिया बवंडर बना के उड़ावत रहे।","t07-c1-04-1":"४. — खाना के बेरा रहे। बिना जादे अगोरले, हमनी के ऊ सादा बाकिर सवाद वाला खाना नीक से खइनी जा जवन हमनी के परोसल गइल (*) ।","t07-tit-3":"कुछ भेंट।","t07-c1-05-1":"५. — खाना के बाद हम आपन बाबूजी के साथे गइनी, जे बीमा के काम करेलें, ओकर ग्राहक लोग लगे। पहिले हमनी के **लोहार** (5) लगे गइनी जा, जे सराय के लगे रहेलें। ऊ घोड़ा के नाल ठोके में लागल रहलें। हम ओकर संगी के मजबूती देख के दंग रह गइनी, जे घोड़ा के **खुर** आपन चमड़ा के फेंटा पर मजबूती से थामले रहलें, जबकि लोहार जोर-जोर के हथौड़ी मार के **नाल** (6) बइठावत रहलें।","t07-c1-06-1":"६. — ओकरा बाद हमनी के गाँव के **मोचिया** (7) , बुढ़उ याकोबुस, लगे गइनी जा। ओकर तखती पर सुंदर **बूट** बनल रहे, तबो ऊ फाटल जूता के जोड़ी में नया तला लगावे भर से संतोस कर लेलें।","t07-c1-06-2":"बुढ़उ हँसत हमनी के कहलें : « सहर में हम \" जूता बनावे वाला \" रहनी आ हमरा लगे ग्राहक ना रहे। इहाँ हम \" जूता सीये वाला \" बानी आ काम के कवनो कमी नइखे। »","t07-c1-07-1":"७. — ऊ हमनी के आपन पड़ोसी **हजाम** (8) के बारे में बतवलें, जेकरा ग्राहक लोग खुस नइखे। ओकर **उस्तरा** हरमेसा खँड़ल रहेला आ ओकर **कैंची** कबो नीक से ना काटे। बाकिर काहेकि ऊ गाँव के एकलौता हजाम हउवें, लोग के मजबूरी बा कि ओकरे से हजामत करावे आ बाल कटावे। ऊपर से ऊ कंजूस आ रूखा मनई हउवें।","t07-c1-08-1":"८. — गनीमत बा कि बाकी **पड़ोसी** लोग ओकरा नियर नइखे। जइसे **गाड़ी बनावे वाला** (9) भल मनई हउवें, मेहनती आ मददगार। ओकरा से गाड़ी बनवावल सुख के बात बा। ओकर काम हरमेसा पूरा रहेला।","t07-c1-09-1":"९. — बुढ़उ याकोबुस **जीन बनावे वाला** (10) के बारे में भी सिकायत ना कइलें, जेकरा ऊ कबो-कबो **साज** सीये में मदद करेलें जब काम के जल्दी रहेला।","t07-c1-09-2":"हमार बाबूजी ओकरा से ओकर घर-परिवार के हाल पूछलें : « सब नीक बा। हमार नतिनी **इसकूल** (12) में बाड़ी। ओकर **मास्टरनी** (13) ओकरा से बहुते खुस बाड़ी, ऊ नीक **बिद्यार्थी** (14) बाड़ी। ऊ हमार निकम्मा बेटा नियर नइखी ; ओकरा खाली खेले के सूझेला। **मास्टर साहेब** (15) ओकरा के कुछ भी ना सिखा पावेलें। »","t07-tit-4":"गाँव के गपसप।","t07-c1-10-1":"१०. — ओकरा बाद बुढ़उ हमनी के गाँव के खबर सुनवलें। नया इसकूल बने वाला बा, काहेकि जवन **पंचायत घर** में बा ऊ बहुते छोट पड़ गइल। ई काम आसान बा, काहेकि **पनचक्की वाला** के बगइचा के एगो हिस्सा खरीदल बहुते बा। ओह बेचारा खातिर ई बहुते फायदा के बात होई। ठंढ के चलते **पनचक्की** (16) के **पाट** आउर गोहूँ ना पीस पावत बा, काहेकि **चाक** (17) के **बरफ** (25) जमा के रोक देले बा, जवन **नाला** (23) के ह।","t07-c1-11-1":"११. — « बनावट के बात बा त, रउआ हमनी के नया **गिरजाघर** (18) देखनी ? ऊ आपन बरफ के चादर के नीचे बहुते सुंदर लागत बा। **कउआ** (19) , जे आपन पुरनका घंटाघर के आउर ना पहिचानत बाड़ें, उदास होके **कबरिस्तान** (20) के बड़का गाछ पर बइठल बाड़ें। »","t07-c1-12-1":"१२. — कबरिस्तान के ई बात से मोचिया के ऊ लोग इयाद आ गइल जेकरा के हमार बाबूजी जानत रहलें आ जे पिछला साल गुजर गइल। « केतना **कबर** (21) , हमार भल साहेब, **सरो** (22) के नीचे बाकी सब में जुड़ गइल ! मउअत हमनी के पुरनका नोटरी के काट लेलस। पूरा गाँव ओकर **अंतिम जातरा** में सामिल भइल। »","t07-c1-13-1":"१३. — « ई रहलें ओकर उत्तराधिकारी, जे नाला पर फिसलत बाड़ें। ऊ अभिए हमरा लगे आपन **बरफ के जूता** (26) के फीता बनवावे आइल रहलें, जवन टूट गइल रहे। »","t07-c1-14-1":"१४. — « ई रहलें नाला के किनारे नया **खेत के चौकीदार** (27) । ऊ पुरनका सिपाही हउवें जे गाँव के सैतान लइकन के डरा देलें। ऊ लोग ओकर **गेटर** (29) आ ओकर **कैप** (28) देखते भाग जाला। »","t07-c1-15-1":"१५. — « हा ! ई रहलें बुढ़उ योसेफ जे नानबाई खातिर **लकड़ी के गट्ठर के गाड़ी** (30) ले जात बाड़ें। — सही बा, हमार बाबूजी कहलें, हम ओकर **खच्चर** (31) के जोड़ी के पहिचानत बानी। हमरा ओकरा से बतियावे के बा, हम एह मउका के फायदा उठाइब। फेरु भेंट होई, याकोबुस बाबा। »","t07-c1-16-1":"१६. — हमनी के बाहर निकलते, गाँव के लइकन इसकूल से निकल के दउड़त **फिसलनी** (33) ओर लपकल, ई खतरा उठा के कि **गिरल** (34) में हाथ-गोड़ टूट जाई। ओहमें से एगो गाड़ी बनावे वाला के इहाँ से आपन **बरफ-गाड़ी** (32) लेलस, ओहमें आपन एगो संगी के बइठवलस आ दउड़त चल गइल।","t07-c1-17-1":"१७. — दोसर लोग **बरफ के ढेर** (37) ओर लपकल, जवन **पुल** (40) लगे रहे, आ ओह **बरफ के मूरत** (39) पर गोला बरसावे लागल जवन ऊ लोग कल्ह बनवले रहे आ जेकरा माथ पर ऊ लोग टोपी, पाइप आ कान्ह में लटकल इसकूल के झोरा धर देले रहे।","t07-c1-18-1":"१८. — ओह लोग के जमा देवे वाला हवा आ ठंढ के परवाह कम बा। जादेतर लोग लगे त **गुलूबंद** (35) भी नइखे, आ **बरफ के गोला** (38) के लड़ाई के बाद फेरु गरम होखे खातिर ओह लोग के मुट्ठी भर बहुते गरम **साहबलूत** (42) बहुते बा, जवन बुढ़िया **बेचनिहारिन** याकोबिना से खरीदल जाला, जे आपन बहुते पातर **साल** (43) के नीचे ठंढ से काँपत बाड़ी।","t07-tit-5":"*दुसरका दृस्य।*","t07-tit-6":"बसंत में देहाती घर।","t07-c2-01-1":"१. — जाड़ के सब सुख के बादो, हमनी के गहिर खुसी से **बसंत** के लवटला के सुआगत करत बानी जा।","t07-c2-01-2":"मई महीना के साँझ के खेत-खरिहान के अँगना केतना मन खुस करे वाला नजारा लागेला !","t07-c2-02-1":"२. — छितिज पर **सूरज** (1) धीरे-धीरे डूबत बा, आ **देहात** (3) के आपन लाल **किरन** (2) से भर देत बा। मेहनती **हरवाह** (6) आपन **खेत** (4) जोते के जल्दी करत बा।","t07-c2-02-2":"आपन **हर** (5) से, जवन ताकतवर **घोड़ा** (7) में जोतल बा, ऊ **नार** (8) खींचत बा, जवना में **बोवइया** (9) मुट्ठी भर-भर के **बीया** डाली जवना से सोना नियर **बाली** उपजी।","t07-c2-03-1":"३. — **घास काटे वाला** (11) , आपन बड़का हँसुआ लेके, चरागाह के घास काट लेले बाड़ें, आ सुखावे वाला लोग **सूखल घास** (10) के **कँटिया** (12) आ पंजा से उलट-पलट के सुखा देले बा, आ ई रहल ऊ लोग लवटत बा।","t07-c2-03-2":"कुछ लोग बैल से खींचल भारी गाड़ी के आगे-आगे चलत बा ; ऊ लोग आपन औजार कान्ह पर धइले बा। दोसर लोग, जादे अलसी, महकत सूखल घास पर आराम से पसर गइल बा।","t07-c2-04-1":"४. — चलत-चलत ऊ लोग **माली** (16) के दोस्ताना सलाम करत बा, जे **फर-बगइचा** (13) में लागल बाड़ें, **फर के गाछ** छाँटत आ **नासपाती के गाछ** (14) में कलम बान्हत। **आलूबोखारा के गाछ** (15) में फूल आवे लागल बा, आ नीक से खाद देहल **तरकारी के बगइचा** (17) में तरकारी, बंदागोभी आ सलाद पहिलही से बढ़िया बा।","t07-c2-04-2":"छोट भीत पर, सुंदर **मोर** (18) आपन पूँछ फइलावत बा, ताकि लोग ओकर बहुते सुंदर पंख देख के दंग रह जाव।","t07-tit-7":"खेत के अँगना।","t07-c2-05-1":"५. — **घोड़सार** (19) के केवाड़ खुलल बा आ **पयार** (23) आ चारा के जँगला लउकत बा, जवन ओह **घोड़ी** (21) के ह जेकरा के **साईस** (20) अभिए खोलले बाड़ें। **बछेड़ा** (22) , आपन लमहर गोड़ के साथे एतना मजेदार, कूदत आपन माई के पाछे-पाछे चलत बा।","t07-c2-06-1":"६. — **इनार** (29) लगे **गाय** (25) काठ के **नाँद** (26) में पानी पिए जात बाड़ी सँ, जवन ओह लोग के पियासा बुझावे के काम आवेला। **बछड़ा** (24) एह मउका के फायदा उठा के दूध पियत बा, आ **साँड़** (27) , चारा के महक सूँघ के, खुसी से डकरत बा आ आपन ताकतवर **सींग** (28) वाला कपार सान से उठावत बा।","t07-c2-07-1":"७. — सब लोग काम में लागल बा। **नौकरानी** (32) हाथ में इनार के **रस्सी** (31) पकड़ले बाड़ी। ऊ **बाल्टी** (30) से पानी खींचत बाड़ी ताकि जनावरन के पानी पिआवल जाव। **खरिहान** (33) लगे एगो मरद पयार बटोरत बा, आ **घर** (34) के केवाड़ के आगे बुढ़िया **कतवइनी** (35) आपन चरखा आ आपन **तकुला** से **सन** भा **पटुआ** कातत बाड़ी, जइसे पुरनका जमाना में।","t07-tit-8":"किसान।","t07-c2-08-1":"८. — **किसान** (36) ई सब काम के देखरेख करेलें आ आपन नौकरन के हुकुम देलें। ऊ कहेलें कि **हेंगा** (40) आ **कुदाल** (39) के छत के नीचे धर दिहल जाव, जवना के लोग **कुकुर के घर** (38) लगे भुला गइल बा, जवन **कुकुर** (37) के ह।","t07-c2-09-1":"९. — ओकर हल्ला से **कबूतर** (41) डेरा जात बा आ पूरा पाँख फइला के **कबूतरखाना** (42) में उड़ जात बा, आ **मुरगी** (43) भी, जे जल्दी से **मुरगीखाना** (44) में लवट जात बाड़ी सँ।","t07-c2-10-1":"१०. — **भेड़सार** (48) के आगे, ई रहलें बुढ़उ **गड़ेरिया** (45) जे आपन **रेवड़** (49) लवटा के ले आवत बाड़ें। आपन **लाठी** (46) थामले, जवन कबो ओकरा से अलग ना होखे, आ आपन रंग उड़ल **कुरता** (47) पहिनले, ऊ बथान की ओर **मेढ़ा** (50) , **भेड़** (53) , **मेमना** (54) , **बकरी** (51) आ **पठरू** (52) हाँकत बाड़ें। ओकर बफादार **कुकुर** (55) आरगुस सबसे पाछे आवत बा आ आपन भूँक से पिछड़त लोग के जल्दी करावत बा।","t07-c2-11-1":"११. — ई सब सोर आ हलचल ओह भल **दुधारू गाय** (56) के सांति ना बिगाड़े, जे आपन **घंटी** (57) बजावत बाड़ी जब ओकरा के **गोहाल** (58) के केवाड़ के आगे दुहल जात बा।","t07-c2-12-1":"१२. ओकरा जइसे समझ बा कि ओकरा आपन दूध देवे के बा, ताकि **किसानिन** (60) **मथनी** (61) में मक्खन निकाल सकीं, भा ऊ बढ़िया **पनीर** (64) बना सकीं जवन **कठौत** (63) पर धइल तखता से चूअत बा।","t07-c2-13-1":"१३. — पूरा **दूध-घर** (59) के **खेत के नौकर** (65) बहुते साफ रखेलें, जे अभिए ओह बड़का बाल्टी में **दूध के मटकी** (62) धो के आइल बाड़ें जवन ऊ हाथ में लटकवले बाड़ें।","t07-tit-9":"मुरगीखाना।","t07-c2-14-1":"१४. — आपन मोटका काठ के जूता पहिनले ऊ थोड़ा भारी चाल से चलेलें, आ एहसे **पीरू** (68) , **मादा बतख** (66) , **नर बतख** (67) आ **हंस** (69) भाग जालें, जे आपन **चोंच** (70) चाकर खोल के बेचैन होके चिचिआवेलें।","t07-c2-14-2":"**मुरगा** (71) , जे जादे लड़ाकू बा, आपन लाल **कलगी** (72) तान देला, आपन **पूँछ** (73) के पंख झाड़ेला आ जोर से « कुकड़ूँ-कूँ » बोलेला।","t07-c2-15-1":"१५. — **मुरगी माई** (74) **गोबर के ढेर** (81) पर आपन **चूजा** (75) के साथे चरत बाड़ी। **सूअर के बच्चा** (78) आपन माई ओर भागत बा, ऊ भारी-भरकम **सूअरी** (77) जेकरा के हमनी के सूअरखाना लगे देखत बानी जा।","t07-c2-16-1":"१६. — आपन खाना में **खरगोस** (79) ऊ नरम **घास** (80) चाव से खात बाड़ें जवन किसान के बेटी ओह लोग खातिर ले आवेली। योआनिना के आपन खरगोस बहुते नीक लागेलें आ रोज, मुरगीखाना से ताजा **अंडा** (76) बटोर के, ऊ आपन छोट दोस्तन से भेंट करे आवेली।","t08-apar-1":"नकसा नं. ८ *पहिलका दृस्य।* लवनी (*) । देहात के नजारा।","t08-c1-01-1":"१. — **गरमी** के साथे देहात के रूप फेरु बदल गइल। नार में डालल बीया जम गइल ; हरियर पौधा माटी से निकलल आ ओहमें बाली आइल। दाना बनल, फेरु पाकल, आ अबहीं खाली लवनी करे के बाकी बा।","t08-c1-02-1":"२. — **देहात के फूल** खिल गइल। **नील फूल** (1) , **जंगली पोस्ता** (2) आ **तिलपुष्पी** (3) गोहूँ के खेत के एके रंग में आपन ताजा **पंखुड़ी** के खुसनुमा भेद मिला देवेला।","t08-c1-03-1":"३. — फर के गाछ पत्ता से भर गइल ; फर पाके लागल। छोट **चेरी के गाछ** (4) सुंदर **चेरी** (5) से लदल बा, जेकरा के लइकन बड़का चाव से तोड़ेला आ खाला।","t08-c1-04-1":"४. — अबहीं जनावर पूरा दिन खुला हवा में बिता सकेला।","t08-c1-04-2":"**मेमना** (6) बड़ हो गइल आ सुंदर **भेड़** (7) आ सुंदर **मेढ़ा** (8) बन गइल, घन ऊन के साथे। ऊ लोग सांति से **चरागाह** (9) के **घास** चरत बा, जवन **गुलबहार** से रंगल बा।","t08-c1-04-3":"जल्दिए **एह** जनावरन के काटल जाई ताकि ओकर **ऊन** मिले, जवना से हमनी के कपड़ा के ऊनी थान बनेला।","t08-tit-2":"गड़ेरिया।","t08-c1-05-1":"५. — **गड़ेरिया** (10) ओह लोग पर जादे धेयान नइखे देत लागत। ओकरा खाली ओह आँधी के फिकिर बा जवन छितिज पर से गुजरत बा, आ **भेड़ के रखवार** (13) , जे आपन **तुमड़ी** (14) ओठ लगे ले जात बा, त आउरो बेफिकिर लागत बा।","t08-c1-06-1":"६. — गरमी बहुते सतावत बा ; काहेकि **कुकुर** (15) भी आपन पियास बुझावे आवत बा ; ऊ **नाला** (16) के ठंढा पानी चाटत बा आ एगो बेचारा **मेढ़क** (17) के डरा देत बा जे किनारे के घास में छिपल रहे। ई मेढ़क साफ पानी में कूद जात बा जहाँ **कमल** (18) खिलल बा।","t08-c1-07-1":"७. — **खंजन** (19) ओह **सोता** (20) लगे नहात बा जवन दू गो चट्टान के बीच से फूटत बा, आ **कँटीला झाड़** (21) आ **सफेद काँट** (22) के नीचे छिप जात बा।","t08-tit-3":"लवनी।","t08-c1-08-1":"८. — देहात के लइकन खातिर गोहूँ के लवनी बहुते मजेदार बेरा ह। ऊ लोग खुसी से **लोटत** (24) बा **पयार के ढेर** (23) पर, ऊ लोग **लवनी करे वाला** (26) के मदद करत बा, आ जब ऊ लोग **गोहूँ के खेत** (27) आपन **हँसुआ** (25) से काटत बा, जवन **सान के पाथर** (30) पर नीक से तेज कइल बा, त लइकन गोहूँ बटोरत बा आ ओकरा के **पूला** (31) भा **मुट्ठा** (32) में बान्हत बा।","t08-c1-09-1":"९. — कबो-कबो ओहमें से सबसे बड़का के इजाजत मिलेला कि ऊ **दराँती** (12) से ओह **सोना नियर डंठल** (28) के काटे जे दाना से भरल भारी **बाली** (29) थामले बा ; आ छोटका लोग, **रेवड़** (33) पर नजर राखत जे **चरागाह** (34) में बड़का **लिंडेन के गाछ** (35) के छाँह में चरत बा, आपन **जाल** (36) से सुंदर **तितली** पकड़त बा।","t08-c1-09-2":"कुछ लोग त **गाड़ी** (37) पर चढ़ के ओह पूला के जमावत बा जवन ओह लोग के **कँटिया** (38) से थमावल जात बा।","t08-c1-10-1":"१०. — पूरा **मैदान** (39) पर, जहाँ **चंडूल** (41) उड़े लागत बा, हलचल के राज बा। सब लोग लवनी में लागल बा। बाकिर जब तक गरीब लोग पुरनका औजार चलावत बा — **हँसुआ, दराँती** आ **दँवरी के डंडा** (40) — धनी जमींदार आपन गोहूँ भा आपन **राई** (43) **लवनी के मसीन** (42) से कटवावेलें। ओकरा बाद, पूला के खरिहान तक ढोवे के जरूरत ना पड़ेला, आ बड़का **पूला के ढेर** (44) लगा देहल जाला।","t08-c1-11-1":"११. — तब **दँवरी के मसीन** (47) ले आवल जाला, जेकरा के **चलत इंजन** (45) **पट्टा** (46) से चलावेला, आ एह तरह दाना **पयार** से अलग हो जाला, बिना ओह खेत के छोड़ले जहाँ ऊ बोवल गइल रहे।","t08-tit-4":"आँधी।","t08-c1-12-1":"१२. — लवनी के बेरा अकसर **आँधी-पानी** (53) आवेला। पहिले दूर से **गरज** के आवाज सुनाला ; **पछुआ हवा** (54) चले लागेला आ हाँफत **जंगल** (49) के सबसे मोट गाछ के झुका देला। करिया **बादर** (56) आसमान पर चढ़ आवेला ; ओकरा के **बिजली** (55) के चौंधिआवत टेढ़ लकीर चीर देला। **बरखा** आ कबो-कबो **ओला** गिरे लागेला, आ कटे खातिर तइयार फसल के दबा देला।","t08-c1-13-1":"१३. — अकसर बिजली कवनो इमारत में आग लगा देला। जइसे पिछला साल **पवनचक्की** (50) के छत **राख** (51) हो गइल आ ओकर दू गो **पाँख** टूट गइल।","t08-c1-14-1":"१४. — कुछ घंटा के बाद फेरु सांति लवट आवेला। छितिज पर चमकत **इंद्रधनुष** (52) लउकेला आ प्रकृति आपन ऊ जिनगी फेरु सुरू करेले जवन कुछ पल खातिर रुक गइल रहे। जे देहाती लोग **मड़ई** (48) में सरन लेले रहे, ऊ फेरु काम पर लाग जाला आ हिम्मत से ओह नुकसान के भरपाई करे के कोसिस करेला जवन अभिए भइल बा।","t08-tit-5":"*दुसरका दृस्य।*","t08-tit-6":"सिकार। — अंगूर के लवनी। मछरी मारल।","t08-c2-01-1":"१. — **अगस्त** के आखिर भा **सितंबर** के बीच में, इलाका के हिसाब से, सिकार के मौसम खुलेला। सूरज के पहिलका किरन से **छिपकली** (2) आपन बिल से निकलबे ना कइले रहेली कि **सिकारी** (5) आपन **कुकुर** (4) के साथे निकल पड़ेला।","t08-c2-02-1":"२. — ऊ आपन मोट कपड़ा के मजबूत **सिकार के पोसाक** (9) पहिनले बा, गोड़ में चमड़ा के **गेटर** बान्हले बा, जवना से ऊ ओह गीली घास में चल पाई जहाँ **बेंग** (1) छिपल रहेला ; ऊ आपन **बंदूक** (6) आ आपन **सिकार-थैला** (10) उठवले बा, आ लऽ, ऊ चल पड़ल।","t08-c2-03-1":"३. — पीछा के जोस ओकरा के एगो अंगूर के खेत के बीच ले आवत बा जहाँ अंगूर के लवनी जोर पर बा। अंगूर के किसान के लइकन, जे रोज सड़क पर बकरी चरावेला, आज ओकनी के मनमाना चरे देत बा, आ बुढ़उ **बोकरा** (3) के खूँटा से बान्ह के — जे छूटल रहित त आपन आजादी के फायदा उठा के जरूर भाग जाइत — ऊ लोग खुद भी एह मजा में हिस्सा बँटावत बा। एगो **अंगूर के टोकरी** (12) से अंगूर के गुच्छा उठा लेत बा आ **रस** (14) **कटोरी** (13) में टपका के मजा लेत बा, ताकि बिना सड़ल अंगूर के रस बने। दोसरका आपन माथ पर ऊ **पत्ता के मउर** (15) पहिन लेत बा जवन ऊ अभिए गूँथले बा। ओह लोग के लगे, बेसरम **गौरइया** (16) कोल्हू तक आ जात बाड़ी सँ अंगूर के दाना चुगे।","t08-c2-04-1":"४. — जब लइकन खेलत बा, तब मरद लोग काम करत बा। **अंगूर तोड़े वाला** (18) **पीठ के टोकरी** (17) में अंगूर तहखाना में ले जात बा ; **पीपा बनावे वाला** (19) **पीपा** (20) ठीक करत बा, देखत बा कि **पीपा के फट्टी** (22) आ **पेंदी** (21) दुरुस्त बा कि ना, आ टूटल **लोहा के घेरा** (23) बदलत बा। ऊ ओह **नाद** (25) पर भी काम कइले बा जवना में **अंगूर** (26) डाल के सड़ावल जाला।","t08-c2-05-1":"५. — जब सड़ल पूरा हो जाला, त सराब छान लेहल जाला आ बचल भाग **कोल्हू** (28) पर धइल जाला, आ धीरे-धीरे **पेंच** (29) से दबा के रस निचोड़ल जाला, जवन **कठौत** (32) में बहेला आ ओहसे फेरु **सराब** (31) मिलेला।","t08-tit-8":"बीयर आ साइडर।","t08-c2-06-1":"६. — **तहखाना** (27) के भीत पर **हॉप के लता** (30) के डाढ़ चढ़ल बा। इहाँ ऊ खाली सजावट के पौधा ह, बाकिर कुछ देस में, जहाँ अंगूर बहुते कम होला, हॉप के खेती **बीयर** बनावे खातिर होला।","t08-c2-07-1":"७. — छोट **सेब के गाछ** (33) सेब से लदल बा, जवना से पाकला पर बढ़िया **साइडर** बनी। आपन **पिंजरा** (34) में **कनारी** (35) आ **तिलियर** (36) जलन भरल आँख से ओह गौरइयन के देखत बाड़ें जे खुल के उछल-कूद करत बाड़ी सँ।","t08-c2-08-1":"८. — जहाँ तक नजर जाला, पहाड़ी के ढलान पर **अंगूर के खूँटा** (40) के कतार लागल बा जवन ऊ सुंदर **अंगूर के ठूँठ** (39) के थामले बा, जवन भारी **गुच्छा** से लदल बा।","t08-c2-08-2":"पूरा साल **अंगूर के किसान** (42) आपन **अंगूर के बगइचा** (38) के जतन में लागल रहलें आ अबहीं ओकर मेहनत के इनाम सुंदर फसल से मिलत बा। **अंगूर तोड़े वाली** (41) ओह नाद के भरत बाड़ी जवन **खच्चर** (43) से खींचल गाड़ी पर धइल बा, आ सब लोग खुस बा।","t08-tit-9":"मछरी मारल।","t08-c2-09-1":"९. — ओहिजे हाल **बंसी वाला** (44) लोग के बा, जे भोरही से आपन **बंसी** (45) लेके पानी के किनारे आ जमल बाड़ें।","t08-c2-09-2":"**मछरी** (47) **काँटा** पर झपटेली जइसहीं ऊ लोग आपन **डोर** (46) पानी में डालेला, आ ओह लोग के **चारा** बदले के फुरसत मुसकिल से मिलेला कि नया सिकार डोर के छोर पर फड़फड़ाए लागेला।","t08-c2-09-3":"तबो **जाल वाला** (48) , जे आपन **डोंगी** (49) से **नदी** (50) के बीच में **जाल** फेंकेला, जादे मछरी पकड़ेला।","t08-c2-10-1":"१०. — पतझड़ नीक घूमे के मौसम ह : पैदल, **घोड़ा पर** (52) , **साइकिल से** (53) , **मोटर से** (54) । **सड़क** (51) साफ बा आ लोग आखिरी नीक दिन के फायदा उठावेला, काहेकि लऽ, **अबाबील** (56) पहिलही से छत पर जुटे लागल बाड़ी सँ ताकि पूरा पाँख फइला के जादे गरम देस उड़ जासु। पुरनका **अखरोट के गाछ** (57) के पत्ता पियर पड़त बा, **अखरोट** गिरत बा, आ ऊँच **गाछ** जे **गुच्छा** (58) नियर **टीला** (59) पर जुटल बा जल्दिए पतझड़ में नंगा हो जाई।","t08-c2-11-1":"११. — **सूरज** (60) देर से उगे लागल बा, दिन छोट होत बा, **भोर** के हल्का चुभत ठंढ महसूस होखे लागल बा, आ लऽ, **चाहा** (61) के झुंड पहिलही से हमनी के एह मेहमान-बिरोधी मौसम के छोड़त बाड़ें।","t09-apar-1":"नकसा नं. ९","t09-tit-1":"*पहिलका दृस्य।*","t09-tit-2":"पहाड़। — पानी के सहर।","t09-c1-01-1":"१. — आठ दिन से हम प्रात्स में बानी। हम ऊ पूरा अचरज ना बता सकीं जवन हमरा भइल जब हम पिरेनी के ओह अद्भुत **पहाड़ के कतार** (1) के सामने रहनी, जेकर **कगार** (2) नीला आसमान पर बड़हन झालर नियर लउकत बा।","t09-c1-02-1":"२. — हमरा सोचो में ना रहे कि पिरेनी के **चोटी** (3) एतना **ऊँचाई** तक पहुँचेला, आ हम ओह सुंदर **हिमनद** (5) आ बरफ से ढँकल **सिखर** (4) के सामने दंग रह गइनी, जवना पर एतना डरावन **हिमस्खलन** लुढ़केला।","t09-tit-3":"पहाड़ के नजारा।","t09-c1-03-1":"३. — पहुँचला के अगिले दिन हम ओह बुझल **ज्वालामुखी** (6) लगे गइनी जवन प्रात्स के लगे बा। **मुहाना** के सूखल आ नंगा किनारा पर ओह **लावा** के बहला के निसान अबहीं ले साफ लउकत बा, जवन कई सदी पहिले **पहाड़ के ढलान** (7) पर बहल रहे। हम एगो ढलान पर ओह लावा के कुछ टुकड़ा खोज लेनी।","t09-c1-04-1":"४. — प्रात्स सरहद पर बसल बा, आ जवन **किला** (8) ओह **दर्रा** (27) के रच्छा करेला जवन फ्रांस के स्पेन से अलग करेला, ऊ राइन के किनारे के ओह पुरनका किलन के इयाद दिआवेला जे आपन चट्टान के चोटी से **सिकार** ताकत लागेला।","t09-c1-05-1":"५. — एगो बड़हन **उकाब** (9) , जेकर घोंसला **किला** (8) से दूर नइखे, अकसर हमार धेयान खींचेला। ई **सिकारी चिरई**, जेकर **चोंच** मजबूत बा, अकसर आपन बच्चा खातिर मेमना भा पठरू ले आवेला, जेकरा के ऊ आपन **पंजा** में थामले रहेला। ओकर **पाँख** एतना बड़ बा कि ऊ आपन भारी बोझ के साथे देर तक हवा में तिर सकेला।","t09-tit-4":"घुमक्कड़।","t09-c1-06-1":"६. — ओहिजा सबसे नीक घुमाई « काउ » के झरना (10) तक के जातरा ह। **पानी के झरना** भँवर बनावत गिरेला आ ओकरा बाद सहर के पच्छिम में बसल **सनोबर के जंगल** (11) में सुंदर **नाला** बन के गायब हो जाला। हमनी के एह जंगल से होके **मौसम के वेधशाला** (12) तक चढ़नी जा, आ **मचान** के ऊपर से इलाका के पूरा **नजारा** देखनी जा। **दृस्य** अद्भुत बा, आ **प्रकृति** जइसे एह देस के आपन सब खजाना लुटा देत बाड़ी।","t09-c1-07-1":"७. — उतरे खातिर हमनी के **रस्सा-रेल** (13) चलवनी जा आ एगो छोट **इस्टेसन** पर रुकनी जा, जवन एगो पुरनका **किला** के **खंडहर** (14) लगे बा, जहाँ कबो प्रात्स के सामंत रहत रहलें।","t09-c1-08-1":"८. — बेचारा किला ! ऊ का सोचत होई जब नीचे ओह सजल-धजल **पानी के सहर** (15) के देखत होई जवन अबहीं चलन के **गरम पानी के इस्टेसन** बन गइल बा ?","t09-c1-08-2":"**जलवायु** एतना सुहावन बा, **खनिज पानी** एतना असरदार बा, कि **सैनेटोरियम** (17) में होखे वाला **इलाज** सचहूँ सुख के बात बा।","t09-tit-5":"सुहावन गरम पानी के सहर।","t09-c1-09-1":"९. — ऊपर से, रहे के सुहावन बनावे खातिर सब कुछ कइल गइल बा। रेल खातिर एगो बड़का **पुलिया** (16) बनावल गइल ; **गरम पानी के भवन** के **बगइचा** (18) , जहाँ **संगीत के जलसा** होला, बहुते सुंदर ढंग से सजल बा। कई गो सुंदर « **कोठी** » (19) जुआघर (21) के चारो ओर बनल बा, आ नीक से राखल **पक्का सड़क** (22) आवे-जाए के बहुते आसान बना देले बा।","t09-c1-10-1":"१०. — एगो सादा **ढाल** (23) **सड़क** (20) के ओह **घाटी** (25) से अलग करेला जेकर तल में एगो सुंदर छोट **झील** (26) बा, जवन एगो साफ **नाला** (24) के पानी देला।","t09-c1-11-1":"११. — घाटी के दोसरा ओर **लोहा के खान** (28) खोदल जात बा। हम कई बेर **खनिहार** लोग के **कुइयाँ** में उतरत देखे गइनी, आ हम ओह **सुरंग** में भी गइनी जहाँ ऊ लोग आपन दिन बितावेला, ओह **कच्चा धातु** के निकालत जवना में **धातु** रहेला।","t09-c1-12-1":"१२. — खान लगे एगो बड़का **ढलाईखाना** बनावल गइल बा ताकि ओहसे निकलल संपत्ति के तुरते काम में लावल जाव। **बड़का भट्ठी** (29) , जवन इहाँ भरपूर मिले वाला **पथरकोयला** से गरम होला, जल्दी आ सस्ता में **ढालल लोहा** देवेला।","t09-c1-13-1":"१३. — खान से दूर नइखे कि एगो **पाथर के खान** (30) खोदल जात बा। बुढ़उ **पाथर तोड़े वाला** आपन **गैंता** से ना **ग्रेनाइट** काटेलें, ना **पोरफरी**, ना **बलुआ पाथर** — खाली घर बनावे खातिर सादा **गढ़ल पाथर**।","t09-c1-14-1":"१४. — एह देस के सबसे सुंदर सिंगार में से एगो **सनोबर** (31) ह। हर जगह — **खाई** (32) के तल में, **पहाड़ी धार** (33) के किनारे, **गहिर खाई** (34) भा खड़ी ढाल के लगे — ओकर पातर पत्ता हरियर छाँह बिखेरत बा।","t09-tit-6":"पैदल घुमाई।","t09-c1-15-1":"१५. — हम आपन छुट्टी के फायदा उठा के **लमहर** घुमाई करत बानी। जवन **रस्ता** (35) पहाड़ पर घुमावदार चलेला ओहसे दूरी के परवाह कइले बिना कई गो **किलोमीटर** आ अकसर कई गो **चार किलोमीटर** नाप लिहल जाला।","t09-c1-15-2":"**मील के पाथर** (36) आ **दिसा-खंभा** (37) रस्ता के निसान देवेला, जवना पर अकसर एगो जवान **पहाड़ी** (38) मिलेला, बगल में **झोरी** (40) लटकवले, **मारमोट** (39) लेके चलत, भा कवनो **रोमा** (41) , जेकर **फर के कोट** (42) ओकर फाटल पुरनका **टोपा** (43) से अजीब मेल खात बा। ऊ **जंजीर** से एगो सधावल **भालू** (44) ले चलत बा।","t09-tit-7":"पहाड़ पर चढ़ाई।","t09-c1-16-1":"१६. — लगभग रोज हम **रस्ता देखावे वाला** (48) के साथे **चढ़ाई** के अभ्यास करे जात बानी, आ हमरा बहुते गरब होला जब, पीठ पर **झोरा** (47) आ हाथ में « **पहाड़ी लाठी** », सच्चा **सैलानी** (46) नियर हम **चट्टान** (45) पर टूट पड़त बानी।","t09-c1-17-1":"१७. — पहाड़ के चोटी से मैदान के रहे वाला लोग चींटी से बड़ ना लागे ; **भेड़ के रेवड़** (50) जे **चरागाह** (49) में चरत बा ऊ बच्चा के खेलौना लागेला। **चीड़** (51) भा **काठ के घर** (52) त हरियरी पर मुसकिल से एगो दाग नियर लागेला।","t09-c1-18-1":"१८. — एह घुमाई में हमनी के अकसर **पगडंडी** (53) पर **चामोइस के सिकारी** (54) मिलेलें, जे आपन कान्ह पर ऊ जनावर ढोवत बाड़ें जेकरा के ऊ अभिए मार के आइल बाड़ें।","t09-c1-19-1":"१९. — हम आपन पत्ता-संग्रह में **फर्न** (55) के एगो बहुते देखे लायक डाढ़ आ **हीथ** (57) के एगो सुंदर गुलाबी टहनी धर लेनी, जवन हम आपन पिछला घुमाई में एगो छोट **गुफा** (56) के मुहाना पर तोड़ले रहनी।","t09-tit-8":"*दुसरका दृस्य।*","t09-tit-9":"जंगल। — सिकार।","t09-c2-01-1":"१. — कल्ह हम जंगल में एगो बहुते नीक दिन बितवनी। ओहमें रहे वाला जनावर आ **कीड़ा** (5) लोग के बीच के फुरती हमरा बहुते नीक लागल।","t09-c2-01-2":"**मकड़ी** (1) जे दू गो डाढ़ के बीच आपन **जाला** (2) बुनत बा ताकि गुजरत **माछी** (3) के पकड़ सके, **घोंघा** (4) जे मेहनत से आपन खोल ढोवत बा, सींग वाला भँवरा जे आपन सिकार खोजत बा, मेहनती चींटी जे **चींटी के बमी** (6) लगे बहुते जोस में बा — ई सब छोट परानी आवत, जात आ काम करत रहल, अजीब लगन से।","t09-c2-02-1":"२. — एगो **साँप** (7) , जेकरा के हम पहिले **अफई** समझनी, बाकिर जे सादा **धामिन** से जादे कुछ ना रहे, एगो गाछ के ठूँठ के नीचे दुबकल रहे, आ बीच-बीच में आपन पातर छोट कपार निकालत रहे जवन हरमेसा डँसे खातिर तइयार लागत रहे। हमरा सामने एगो मोटका **बिन-खोल घोंघा** (8) भारी चाल से रेंगत रहे, ओह सवाद वाला **जंगली स्ट्राबेरी** (11) में से एगो खइला के बाद जे ओहिजा भरपूर उगेला।","t09-c2-03-1":"३. — जमीन **जंगल के फूल** से बिछल रहे : **प्रिमरोज** (9) , **परविंकल** (10) , आ बहुते दोसर पौधा जेकरा के हम ना जानत रहनी, **घास के गुच्छा** (12) के बीच खिलल रहे।","t09-c2-04-1":"४. — ओह इलाका में **ट्रफल** लगभग ओतने आम बा जेतना **कुकुरमुत्ता** (14) , आ एगो बनरछक के **सूअर के बच्चा** (13) चटोरपन से खोजत रहे कि ओकरा कुछ मिल जाव कि ना।","t09-tit-10":"चोरी के सिकार।","t09-c2-05-1":"५. — हम एगो दृस्य के **आखिर** देखनी जवन हमरा बहुते नीक लागल। आपन **बासे कुकुर** (15) के सूँघे के मदद से **बनरछक** (16) अभिए एगो **चोर-सिकारी** (22) के धर लेले रहलें, ठीक ओह बेरा जब ऊ आपन मारल **सिकार** (17) ढोवे के तइयारी करत रहे। धरा जाए के बदले आपन सिकार छोड़ल नीक समझ के चोर-सिकारी भाग गइल रहे, आ **खरहा** (18) , **हिरनी** (19) , **छोट हिरन** (20) आ **जंगली सूअर** (21) घास पर पड़ल रह गइल आ बनरछक के खुस कर देलस।","t09-c2-06-1":"६. — जंगल में जेतना तरह के गाछ बा ऊ देख के अचरज होला। **बीच के गाछ** (23) आ **भोजपत्र** (26) , **चीड़** जे **गोंद** (27) देला, **बलूत** (29) आ बहुते दोसर गाछ आपन डाढ़ आपस में मिला देले बा।","t09-c2-06-2":"**आइवी** (24) , जे ऊँच गाछ के ठूँठ से चिपकल बा, **जंगल** (25) के चमकत हरियरी से रँग देत बा, जवन ओह **काई** (31) के हल्का पियरइल हरियर रंग से नीक मेल खात बा जवना में **कठफोड़वा** (30) कीड़ा खोजत बा।","t09-tit-11":"जंगल के नजारा।","t09-c2-07-1":"७. — पुरनका बलूत हमरा मन भा गइल। ओकर मोटका **जड़** (32) ऐंठल बा आ आधा जमीन से बाहर निकलल बा, जवना से ओकरा में ताकत आ जोर के सुंदर रूप आ जाला, आ हम आपने से पूछत बानी कि **मालिक** (35) एकरा के कटवा के **आरी** (34) के हवाले करे खातिर, जवन **लकड़हारा** (33) के ह, कइसे तइयार हो जालें। बेचारा **ठूँठ** (36) , जेकर **छाल** (37) छिलल बा भा जेकरा के **टाँगी** (38) चीर देले बा, जवन **दिहाड़ी मजूर** (39) के ह, हमरा दुख देला।","t09-c2-08-1":"८. — लगहीं एगो बुढ़उ **कोयला बनावे वाला** (41) आपन **बेलचा** (42) से कोयला के **ढेर** लगवले बाड़ें, आ एगो बुढ़िया कटल गाछ के टहनी के **सूखल लकड़ी** के **गट्ठर** (40) ले आइल बाड़ी।","t09-tit-12":"सिकार।","t09-c2-09-1":"९. — हम कुछ पल सुस्तावे खातिर **बनरछक के घर** (46) जाए चाहत रहनी, बाकिर जब हम **पोखरा** (43) लगे पहुँचनी, जवना पर सुंदर **राजहंस** (45) तइरत रहे, हम देखनी कि हाले के **बाढ़** (44) रस्ता के सचहूँ **दलदल** बना देले बा। हमरा घूम के जाए के पड़ल, आ **देवदार** (49) , **सफेदा** (48) आ **एल्म** (47) लगे से गुजरत, जे जंगल के किनारे बा, हम देखनी कि **झाड़ी** (54) से एगो सुंदर **बारहसिंगा** (50) निकलल, जेकर पाछे जिद्दी **सिकारी कुकुर के झुंड** (51) लागल रहे, आ जेकरा के **बिगुल** (53) भी उकसावत रहे जवन **घोड़सवार सिकारी** (52) के रहे। बेचारा जनावर पूरा थक गइल रहे। ऊ हमरा से कुछे डेग दूर मरत गिर गइल।","t09-c2-10-1":"१०. — बनरछक के बेटा, जेकरा के **सिकार के सोर** खींच लइले रहे, घर से बाहर निकलल आ हमनी के दुनो जंगल में लवट गइनी जा। ऊ एगो पुरनका बलूत के डाढ़ पर **मैगपाई** (56) देखले रहे। ओकरा लागल कि ओकर घोंसला **पत्ता** (58) में छिपल होई, आ ऊ घोंसला निकाले चाहत रहे।","t09-c2-10-2":"**गिलहरी** (61) नियर फुरतीला होके ऊ एगो **डाढ़** (55) से दोसरा पर चढ़ल, बाकिर ओकरा कुछ ना मिलल आ ऊ खाली एगो पुरनका **कउआ** (60) के उड़ा पवलस जे एगो **टहनी** (57) पर बइठल रहे।","t10-apar-1":"नकसा नं. १० समुंदर। — बंदरगाह।","t10-01-1":"१. — गरमी में, जब कुछ लोग पहाड़ पर सांति आ ठंढक खोजेला, दोसर लोग समुंदर के किनारे जाइल पसंद करेला। पिछला साल हमनी के इहे कइनी जा, काहेकि हमनी के **महासागर** (1) बहुते नीक लागेला।","t10-02-1":"२. — हमरा त बहुते मजा आवेला ओह पानी के अपार फइलाव के निहारे में जवन **छितिज** (2) तक फइलल बा, आ ओह बड़हन **भाप के जहाज** (3) के लमहर **समुंदरी जातरा** पर जात देखे में, जवना पर अमेरिका जाए वाला जातरी चढ़ेलें।","t10-03-1":"३. — एहीसे हमार बाबूजी, जे हमार मन जानेलें, छुट्टी बितावे खातिर हरमेसा कवनो बहुते सांत बालू के किनारा चुनेलें, जवन हमनी के कवनो बड़का **फौजी बंदरगाह** के लगे होखे।","t10-03-2":"हमनी के पिछला बेर के ठहराव में **जहाजी बेड़ा** ओह बड़हन **बाँध** (4) के पाछे लंगर डालल, जवन **फौजी बंदरगाह** (5) के घेरेला आ बचावेला, आ हम आपन मन भर के तरह-तरह के **लड़ाकू जहाज** देख पवनी — ऊ छोट **पनडुब्बी** (10) जे डूब के पानी के नीचे गायब हो जाले, आ ऊ बड़हन **कवच वाला जहाज** (9) जेकरा के अबहीं तक लगभग खाली **तारपीडो जहाज** (8) के हमला के डर रहल।","t10-tit-2":"छोट जहाज।","t10-04-1":"४. — ई छोट जहाज पहिलही से बहुते **चतुराई** से मोटका धातु के कवच के कमजोर जगहा खोज लेत रहे, ताकि ओहिजा खतरनाक **तारपीडो** चिपका सके, जेकर धमाका जहाज के डुबा देला ; तबो ऊ पनडुब्बी से कम डरावन रहे, काहेकि तारपीडो-नासक जहाज ओकर पीछा आसानी से कर लेला।","t10-05-1":"५. — हम कवच वाला तेज **क्रूजर** (6) भी देख पवनी, जे लगभग ओतने अभेद्य बा जेतना असली कवच वाला जहाज, आ कई गो **ढोवे वाला जहाज** (12) , तीन-चार **तोप-नाव** (7) आ आखिर में एगो **फ्रिगेट** (11) । **एह बेड़ा के नजारा, जब ऊ लंगर उठावे खातिर चाल चलेला, सबसे मजेदार होला।**","t10-06-1":"६. — ओह बड़हन इस्पात के ढेर आ ओह सुंदर तीन मस्तूल वाला भा ओह लचकदार **पाल वाला जहाज** (13) के बनावट में केतना अंतर बा, जवन अबहीं ले बेपार के बेड़ा में चलत बा, आ जेकरा के हम पूरा पाल तानले बंदरगाह में आवत देखनी जब हम **घाट** (14) पर टहलत रहनी। सचहूँ ई जहाज आपन बहुते फायदा खो देले बाड़ें **जब** **हवा** उलटा होखे। ओह लोग के सब पाल उतार के फेरु बंदरगाह में आवे के पड़ल आ ओकनी के खींच के घाट तक ले आवे खातिर एगो **खींचे वाला जहाज** (16) जरूरी भइल, जइसे ऊ सादा **मालवाहक नाव** (17) होखसु।","t10-tit-3":"बेपार के बंदरगाह।","t10-07-1":"७. — जवन बंदरगाह के बारे में हम कहत बानी ओहमें ई बात मजेदार बा कि ओहमें खाली फौजी बंदरगाह नइखे, जवन बड़हन काम से बनावल गइल बा, बलुक एगो अद्भुत **बेपार के बंदरगाह** भी बा जवन एगो बड़का नदी के **मुहाना** में बा।","t10-08-1":"८. — जवन जमीन के पट्टी दुनो बंदरगाह के अलग करेला ऊ किलाबंद बा आ **तोपखाना** आ **बुर्ज** के कतार से बचावल बा, जवन समुंदर की ओर बढ़ल बा। **परकोटा** (15) पर टहले खातिर खास इजाजत चाहीं। हमरा ऊ आपन चाचा के जरिए आसानी से मिल गइल, जे **जहाज बनावे के कारखाना** (18) के इंजीनियर हउवें, आ हम ओह जहाजन के देखे गइनी जेकरा के बड़हन छप्पर के नीचे बनावल जात बा।","t10-09-1":"९. — हम त एगो कवच वाला जहाज के पानी में उतारल भी देखनी, आ हमरा ऊ भावुक पल इयाद बा जवन पूरा भीड़ महसूस कइलस जब ऊ बड़हन ढेर, आपन हाल पर छोड़ल, आपन ढाँचा पर सरकल आ नदी के पानी पर तइरे लागल।","t10-10-1":"१०. — कारखाना तक जाए खातिर **कवायद के मैदान** (19) पार करे के पड़ेला, जहाँ छावनी के सिपाही रोज अभ्यास करे आवेला, आ एगो लोहा के **पुलिया** (20) पर से गुजरे के पड़ेला, जवन परेड के मैदान के **सिलहखाना** (21) से जोड़ेला।","t10-tit-4":"सिलहखाना आ डॉक।","t10-11-1":"११. — आपन चाचा के साथे हम ओह बड़हन इमारत के देखनी जवन **तोप** (22) , **गोला** (23) आ **गोला-बारूद** से भरल बा। हम ऊ **ढलाईखाना** (24) भी देखनी जवना में भाप के जहाज के **बॉयलर** (25) बनेला।","t10-12-1":"१२. — एकदम लगे **डॉक** (26) बा — मरम्मत के डॉक — आ ऊ बहुते देखे लायक **तैरत डॉक** (27) , जवना में हम मरम्मत होखे वाला जहाज पर एकदम लगे से जहाज के **पंखा** (28) , **पेंदी** (29) आ **पतवार** (30) देख पवनी।","t10-13-1":"१३. — बेपार के बंदरगाह भी ओतने देखे लायक बा जेतना फौजी बंदरगाह, आ हम कई घंटा घाट पर ताकत बितवनी, जहाँ ऊ **चाक वाला जहाज** (31) बान्हल बा जे नदी के उलटा चढ़ेला, आ ऊ **मस्तूल के क्रेन** (32) के चलत देखनी, जे पंख नियर बड़हन लदान उठा लेला।","t10-tit-5":"रस्ता देखावे वाला।","t10-14-1":"१४. — हम ओह **अटलांटिक जहाज** (34) के देख के दंग रह गइनी जे आपन **झंडा** (35) खुला हवा में फहरावत बंदरगाह से निकलत रहे, आ जेकरा के एगो कुसल **रस्ता देखावे वाला मल्लाह** (36) चलावत रहे, जे **बोया** (40) आ निसान-खंभा से चिन्हल गहिर धार के साथे-साथे कमाल के ढंग से चले जानत रहे, आ ओह **चौड़ी नाव** (41) से बचत रहे जेकरा के आपन एकलौता चौकोर पाल से मुसकिल से चलावल जात रहे। हम **अगवारी** (37) पर — आगे के हिस्सा — दुसरका दर्जा के **केबिन** (39) पहिचननी, आ **पिछवारी** (38) पर — पाछे के हिस्सा — पहिला दर्जा के जातरी लोग के कमरा।","t10-15-1":"१५. — कबो-कबो हम **मालवाहक नाव** (42) पर लदान चढ़त भी देखनी, जवना में अभिए **गोदाम** (43) आ **समुंदरी इस्टेसन** (44) के माल जमा कइल गइल रहे, जवन **घाट के पटरी** (45) पर कई गो गाड़ी से आइल रहे।","t10-tit-6":"डाँड़ के मजा।","t10-16-1":"१६. — हम अकसर **तैरे के डॉक** (53) में नाव चलवनी, जहाँ **नाव** (46) सरन लेवे आवेली, आ हमरा **डाँड़** (47) चलावे में बहुते मजा आवत रहे। हम एगो **डेक** (48) पर चढ़नी, जवन **पाल वाला नाव** (49) के रहे, हम **रस्सा** (52) के सहारे **मस्तूल** (51) पर **आड़ा डंडा** (50) तक चढ़नी, आ ओकरा बाद हम आपन घुमाई **डोंगी से** (54) फेरु कइनी, भारी **मछरी मारे के नाव** (55) के बीच, जहाँ **जाल** (56) सुखत रहे।","t10-17-1":"१७. — **घाट** (58) पर हमरा सामने तरह-तरह के **माल** (59) गुजरल, जवन **पेटी** (60) में भा **गठरी** (61) में रहे। ऊ बड़का नाव के **लदान** (63) बनावत रहे, आ ताकतवर **क्रेन** (62) ओकरा के उठा के **ट्रक** (64) पर धरत रहे, जबकि ट्रक वाला लोग ओकर घोसना करत आ **चुंगीघर** (65) में चुंगी भरत रहे।","t10-18-1":"१८. — आखिर में, जब हम **घुमत पुल** (66) भा **जल-फाटक** (69) तक पहुँचनी, ओह **गाद निकाले के मसीन** (68) के सामने से गुजरत जे **नहर** (67) साफ करेले, हम **इसारा-खंभा** (70) लगे घाट पर उतरनी।","t10-19-1":"१९. — ओह घाट के दोसरा ओर ऊ **बड़का डोंगी** (71) लागेली जे बेड़ा के अफसर लोग के किनारे ले आवेली। मल्लाह लोग के ताल से आपन डाँड़ उठावत देखल देखे लायक नजारा बा, जबकि **लहर** (72) पर डोलत नाव आसानी से उतरे के सीढ़ी लगे लाग जाले। एह जगहा से **ज्वार-भाटा** आ **बालू के किनारा** (73) पर चढ़ाव आ उतार के चाल नीक से देखल जा सकेला।","t10-tit-7":"कलब घर।","t10-20-1":"२०. — घर लवटे खातिर हम **बिजली के ट्राम** (74) चलवनी, जेकर **ठहराव** (75) ओह **खंभा** लगे बा जवन अफसर लोग के कलब के सामने गाड़ल बा।","t10-20-2":"कलब के **बालकनी** (76) से, जवन **लंगर** (77) , तोप आ गोला से सजल बा, हम अकसर जहाजी अफसर लोग के सुंदर जमघट देखनी : **लेफ्टिनेंट** (78) , आपन **सीधा तलवार** (79) के साथे, **तोपखाना के कप्तान** आ **पैदल सेना** (80) के कप्तान, आपन **बाँकी तलवार** (81) के साथे। ओह लोग के पाछे एगो **मल्लाह** रहे जे ओह लोग के **दूरबीन** देत रहे, जब ऊ लोग दूर के कुछ देखल चाहत रहे।","t10-21-1":"२१. — हम जवान **उप-लेफ्टिनेंट** (82) लोग के भी देखनी जे आपन **कमांडर** (83) भा **एडमिरल** (84) से हुकुम लेत रहे, जबकि एगो **क्वार्टरमास्टर** (85) ओकरा के जहाज पर ले जाए खातिर अगोरत रहे।","t10-22-1":"२२. — ओह बालकनी से नजारा शानदार बा : पूरा **बालू के किनारा** आपन **तंबू** (86) आ **कपड़ा बदले के कोठरी** (87) के साथे नजर में आ जाला, आ नहाए के बेरा **नहाए वाला** (88) लोग के **जुआघर** (89) के सामने खुसी से उछलत देखल जा सकेला।","t10-23-1":"२३. — किनारा के छोर पर तट एगो छोट **चट्टानी प्रायद्वीप** (91) बनावेला, जहाँ **बड़का लहर** (92) आके टूटेला आ जवना पर एगो **दीपघर** (93) बनल बा जे रात में जहाजन के रस्ता देखावेला। ई प्रायद्वीप जमीन से खाली एगो बहुते पातर **जलडमरूमध्य** (90) से जुड़ल बा।","t10-tit-8":"तट के आम नजारा।","t10-24-1":"२४. — **खड़ी चट्टान** (94) दूर तक फइलल बा, जेकरा के समुंदर चीर देले बा आ ओहमें मनमाना ढंग से **खाड़ी** (95) आ **अंतरीप** के कतार बना देले बा, जवना से ऊ बहुते सुंदर लागेला।","t10-24-2":"**पठार** (96) पर, जवन **जलसंधि** (98) के ऊपर बा, एगो बहुते जरूरी **किला** (97) आ कुछ « कोठी » बा।","t10-25-1":"२५. — ई जलसंधि महादीप से एगो बहुते खतरनाक **टापू** (99) के अलग करेला, जेकरा चारो ओर **चट्टान के रोड़ा** (100) आ लहर तोड़त चट्टान बा, जहाँ नाव आ बड़का जहाज तक कबो-कबो फँस जाला। मदद के तइयारी आ **बचाव के नाव** के जल्दी पहुँचला के बादो ई **जहाज के डूबल** डरावन होला, आ बराबरी के दिन के **तूफान** में कई गो जहाज मनई आ माल के साथे डूब गइल बा।","t10-25-2":"एह लगे होखला के बादो **बंदरगाह** में मल्लाह लोग के बहुते आवाजाही रहेला।","t11-apar-1":"तिसरका शृंखला नकसा नं. ११ सहर आ ओकर इमारत। — आग।","t11-tit-1":"उपनगर।","t11-c1-01-1":"१. — हम एगो बड़का सहर में रहेनी जवन महासागर से सौ किलोमीटर दूर बा, आ तबो ऊ एगो ऊँच दर्जा के **बंदरगाह** (1) बा। जवन नदी ओकरा किनारे बहेले ऊ चार सौ मीटर चाकर बा आ बहुते सुंदर मोड़ बनावेले।","t11-c1-02-1":"२. — सहर के जवन हिस्सा **घाट** (2) पर बा ऊ पूरा जहाजी आ कारखाना वाला लागेला, आ एगो **उपनगर** (3) बनावेला जवना में खाली मल्लाह आ मजूर रहेला। ई लोग **कारखाना** (4) में आ **गैस के कारखाना** (5) में काम करेला, जेकर ऊँच **चिमनी** (6) आ **गैस के टंकी** बहुते दूर से लउकेला।","t11-c1-03-1":"३. — मध्यकाल में सहर किलाबंद रहे, आ ओकर परकोटा के कुछ अवसेस अबहीं ले मिलेला, खास तौर पर ऊ **फाटक** (8) , जवन पुरनका **किलाबंद गढ़** (7) के ह आ जेकरा दुनो ओर दू गो **बुर्ज** (9) बा जवना के अबहीं **जेलखाना** के तौर पर इस्तेमाल कइल जाला।","t11-c1-04-1":"४. — एह पूरा **मुहल्ला** में, जवन बहुते पुरान लागेला, खाली एगो इमारत कुछ नया बा : ऊ ह **चुंगीघर** (10) । ऊ घाट आ ओह **गली** (11) के बीच बा जवन पुरनका **नगरपालिका भवन** (12) तक ले जाले। ई आखिरी इमारत ओह बड़हन **घंटाघर** (13) से आसानी से पहिचानल जाला जवन पुरनका सहर पर छाइल बा।","t11-c1-05-1":"५. — सड़क के दोसरा ओर **ठाढ़** बा एगो इमारत जवन चुंगीघर के नमूना पर बनल बा : ऊ ह **सट्टा-बाजार** (14) । ओकर एगो अगवारी एगो छोट चउक की ओर देखत बा जहाँ **कमिस्नरी** (15) बा। सचहूँ, हमार सहर राजधानी ना होखला के बादो जिला के जरूरी मुख्यालय बा।","t11-tit-2":"सहर के सबसे ऊँच हिस्सा।","t11-c1-06-1":"६. — सेना के टुकड़ी, जवन ठीक-ठाक बड़ बा, बहुते सेहतमंद बड़हन **छावनी** (16) में रहेला ; ऊ **नगर के बगइचा** (17) के जाली तक फइलल बा। जवन **चौड़ा सड़क** (19) एह बगइचा तक ले जाले ऊ **बचत बैंक** (18) के पाछे से गुजरेले आ **बड़का गिरजाघर** (20) के चउक पर खतम होले।","t11-c1-07-1":"७. — ई सब इमारत एगो छोट पहाड़ी पर सीढ़ीदार फइलल बा, जहाँ हमनी के बड़हन **माध्यमिक इसकूल** (21) भी बा।","t11-c1-07-2":"अगर थोड़ा ढालू रस्ता से उतरल जाव, जवन बड़का सड़क से मिलेला, त **कचहरी** (22) लगे पहुँचल जाला, जेकरा सामने एगो सुहावन **सरबजनिक बगइचा** (26) फइलल बा। ई **बगइचा-चउक** बहुते बड़ नइखे, बाकिर ई सहर के बीच में हरियरी आ ठंढक के मरूद्यान बना देला। एहीसे इहाँ सहर के लोग के बहुते आवाजाही रहेला, जे **कॉफीघर** (25) के छाजन के नीचे बइठ के ओह फौजी बजनियाँ लोग के सुनल पसंद करेला जे बियफे आ इतवार के ओह **मंडप** (27) में बजावेला जवन घास के मैदान आ फुलवारी के बीच बनल बा।","t11-c1-08-1":"८. — ओहमें से एगो घास के मैदान पर काँसा के **मूरत** (28) ठाढ़ बा, जवन हमनी के एगो सहरी के इयाद में बनल बा, जे आपन जनम के सहर के बड़का सेवा कइले रहलें।","t11-tit-3":"सवारी।","t11-c1-09-1":"९. — अबहीं ले हमनी के सहर में बिजली के अँजोर नइखे, ओहिजा खाली **गैस के बत्ती** (29) बा। बाकिर **इहाँ के अखबार** एह बात खातिर मुहिम चलावत बा कि अँजोर के ई तरीका सुधारल जाव, **जइसे** **ट्राम के खींचे के तरीका** पहिलही से सुधारल जा चुकल बा। **घोड़ा** से **खींचल** **ऊ** पुरनका गाड़ी लगभग पूरा तरह **बिजली के ट्राम** (31) से बदल गइल बा, जवन जातरी लोग के **सहर के एक छोर से दोसरा तक** बहुते **सस्ता** में जल्दी पहुँचा देला।","t11-c1-10-1":"१०. — कचहरी लगे **बैंक** (32) बा जहाँ बेपार के कागज भुनावल जाला। **बैंक के दलाल** (33) लोग घरे-घरे जाके बकाया वसूलेला।","t11-tit-4":"कला आ पढ़ाई।","t11-c1-11-1":"११. — जवन सुंदर इमारत लगहीं ठाढ़ बा ऊ **अजायबघर** ह। ओहमें एके साथे सहर के **पुस्तकालय** (34) , **प्रकृति-बिज्ञान के सुंदर संग्रह** (35) आ एगो सुघर **चित्रसाला** (36) बा, जवन एगो शानदार पक्का **प्रदर्सनी** बनावेला।","t11-c1-11-2":"ऊ हफ्ता में दू बेर जनता खातिर खुलेला, बाकिर परदेसी लोग कवनो भी दिन **रखवार** (37) के थोड़ा बकसीस देके ओकरा के देख सकेला। **चित्रकार** (38) लोग ओहिजा काम करे आवेला। ओकनी के आपन तिपाई के **सामने**, हाथ में **रंग-पटरी** लेके, नामी चित्र के नकल करत देखल जाला।","t11-c1-12-1":"१२. — ऊँचाई पर, अजायबघर के पाछे, ऊ **गुंबद** (40) लउके लागेला जवन **अस्पताल** (39) के ह, आ ओह **मास्टर के इसकूल** (41) के इमारत भी, जहाँ हमनी के नगर के इसकूलन के मास्टर लोग के तालीम मिलत रहे। नाटकघर के चउक पर एगो **निजी घर** (43) में **डाकघर** (42) बा।","t11-tit-5":"आग।","t11-tit-6":"आग के हल्ला।","t11-c2-01-1":"१. — सहर में एगो डरावन खबर फइल गइल : नाटकघर में अभिए आग लाग गइल ! जवन बेरा हम **चउक** (96) पर पहुँचनी, भीड़ पहिलही से **पटरी** (46) पर आ **सड़क** (47) पर जुट चुकल रहे। **डाकिया** (44) आ **चिट्ठी बाँटे वाला** (45) डाकघर से बाहर निकलत बाड़ें। एगो **ट्राम चलावे वाला** (48) के आपन गाड़ी रोके के पड़ल ताकि सहर के **एंबुलेंस** (50) गुजर सके, जवन एगो **जर्राह** (52) आ एगो **नर्स** (51) के लेके आवत बा एगो **घायल** (53) के देखे खातिर, जेकरा के **नक्कालात** (54) पर **अखबार के गुमटी** (55) लगे ले आवल गइल बा।","t11-c2-02-1":"२. — पैदल सेना के एगो टुकड़ी, जे अभ्यास से लवटत रहे, रुक गइल ताकि **सहर के घोड़सवार पुलिस** (61) के साथे मिल के बेवस्था सँभाल सके। **घोड़सवार लोग**, जेकर घोड़ा अगुड़ी उठावत बा, **फौजी सिपाही** (57) भा **जेंडार्म** (63) से जादे नीक से **तमासबीन** (56) के पाछे हटावत बाड़ें। ऊपर से जेंडार्म लोग बहुते बेस्त बा। ओहमें से एगो **पुलिस वाला** (64) के बतावत बा कि दोसरका **दुर्घटना में घायल** (65) के कहाँ ले जाइल जाव — एगो हिम्मती दमकल वाला जे सीढ़ी से गिर गइल बा।","t11-c2-03-1":"३. — **अफसर** (66) बतावत बाड़ें कि आवत **भाप के दमकल** (67) के कहाँ लगावल जाव। ओह ताकतवर मसीन के अगोरत ऊ फुरती से एगो **हाथ के पंप** (68) लगववले बाड़ें, जेकर लमहर **नली** (69) आग पर धार नियर पानी फेंकत बा। छव गो दमकल वाला ओकरा के चलावत बा, जबकि ओह लोग के संगी, जे **नोजल** (70) थामले बा, **धार** (71) के आग के बीचोबीच ले जात बा।","t11-c2-04-1":"४. — नाटकघर के दोसरा ओर बड़का **सीढ़ी** (72) टेकावल गइल बा। ओहसे दमकल वाला लोग ओह लपट लगे पहुँच पावत बा जवन करिया **धुँआ** (75) के बवंडर के बीच से निकलत बा।","t11-tit-7":"बहादुरी के काम।","t11-c2-05-1":"५. — **आग** (74) **नाटकघर** (73) के बरामदा में लागल, जब ऊ **ओपेरा** के रिहर्सल होत रहे जेकर पहिलका **खेल** काल्ह होखे वाला रहे। गनीमत बा कि दरसक-कमरा में थोड़े **दरसक** (76) रहलें। बेचारा लोग **बालकनी** (77) पर सरन लेलस, जहाँ हिम्मती **दमकल वाला** (86) लोग सीढ़ी आ रस्सा से ओकनी के बचावे आवत बाड़ें।","t11-c2-06-1":"६. — **खंभा वाला बरामदा** (78) के नीचे, जहाँ **इस्तिहार** (79) खेल के खबर देत बा, ओहिजा **बजनियाँ** (81) लोग के **आरकेस्ट्रा** (80) से भागत देखल जात बा, आपन बाजा लेके : **बेला** (81) , **बाँसुरी** (82) , **चेलो** (83) , **ट्रंबोन** (84) , **ढोल** (85) , वगैरह। लोग **सामान** (87) के कुछ हिस्सा बचावे के कोसिस करत बा।","t11-c2-07-1":"७. — **नट** (89) आ **नटी** (88) , **गवइया** आ **गवइनी** के आपन नाटक के **पोसाक** (90) में भागे के पड़ल। तेनोर एगो **पत्रकार** (92) के बतावत बाड़ें कि ई सब कइसे भइल। **रिपोर्टर** पहिलही पल से अफसर लोग के साथे दउड़ के आ गइल रहलें : **कमिस्नर** (91) , **नगर-मुखिया** (93) , **पुलिस कप्तान** (94) आ **अदालत के अफसर** (95) , जे जाँच करिहें ताकि तय होखे कि केकर जिम्मेवारी बा।","t12-apar-1":"नकसा नं. १२ इस्टेसन। — रेल। — जहाज। नोट। — *हर देस में रेल के समय-सारनी अलग होले, एहीसे हमनी के मिसाल खातिर* **फ्रेंच सारनी** *के समय लेत बानी जा।*","t12-01-1":"१. — हम अभिए जर्मनी के जातरा कइनी। निकले से पहिले हम एगो **रेल के समय-पोथी** (15) खरीदनी ताकि गाड़ी छूटे के समय जान सकीं। ई देख के कि सबसे सुभीता के गाड़ी पेरिस से राति नौ बजे छूटेले आ स्ट्रासबुर्ग एक बजके तेरह मिनट पर पहुँचेले, हम आपन जातरा के तइयारी कइनी, आ अगिले दिने हम आपन के इस्टेसन ले जाए के कहनी।","t12-02-1":"२. — जब हम बड़का रवानगी-हाल में घुसनी, एगो बुढ़उ देहाती **पादरी** (2) के पाछे, जे हाथ में आपन **जातरा के झोरा** (3) लटकवले रहलें, बहुते **जातरी** (1) पहिलही से आ चुकल रहलें।","t12-02-2":"काहेकि हमरा एगो **तार** (5) भेजे के रहे, हम एगो **जाँचकर्ता** (6) से **तारघर** (4) पूछ लेनी।","t12-03-1":"३. — **अगोरे के कमरा** (7) में जाए से पहिले हम लवटे के **टिकट** (9) ले लेनी।","t12-04-1":"४. — हमरा **खिड़की** (8) पर देर तक ना अगोरे के पड़ल, काहेकि ओहिजा थोड़े लोग रहे। एगो **फौजी** (10) , जे छुट्टी पर जात रहे, भलमनसाहत से आपन नंबर हमरा के दे देलस, एहसे हमरा लगे एतना समय रह गइल कि हम **इस्टेसन मास्टर** (13) से कुछ बात पूछ सकीं, जे निगरानी के **दरोगा** (12) आ डिउटी पर के **पुलिस के सिपाही** (11) से बतियावत रहलें।","t12-tit-1":"असबाब के दर्ज।","t12-05-1":"५. — **किताब के गुमटी** (14) से अखबार खरीद के हम आपन **असबाब** (17) तउलवनी, जेकरा के एगो **कुली** (16) अभिए **असबाब के ठेला** (19) पर ले आइल रहे ; **बाबू** (22) जे **तराजू** (21) पर लागल रहलें, हमरा बतवलें कि हमार संदूक पैंतीस किलो के बा ; एहसे पाँच किलो **जादे वजन** भइल, जेकर खातिर हमरा **असबाब के खिड़की** (23) पर बेसी पइसा देवे के पड़ल।","t12-06-1":"६. — काहेकि हम बहुते जल्दी आ गइल रहनी, हमरा लगे इस्टेसन पर जातरी लोग के आवाजाही देखे के फुरसत रहे। कुछ लोग **असबाब-घर** (25) में आपन छोट सामान धरत भा उठावत रहे ; दोसर लोग **समय-सारनी** (26) देखत रहे। आवे वाला जातरी लोग **निकास** (32) की ओर जल्दी करत रहे, हाथ में आपन **सूटकेस** (24) लेके। कुछ लोग **असबाब बाँटे के जगहा** (27) पर अगोरत रहे आ आपन **रसीद** (29) देके आपन संदूक, **पेटी** (28) भा **टोकरी** (30) लेत रहे।","t12-07-1":"७. — **चुंगी के बाबू** (33) लोग जतन से गठरी के जाँचत रहे कि कुछ बतावे लायक बा कि ना।","t12-08-1":"८. — कुछ जातरी **जलपानघर** (34) की ओर गइलें, जहाँ एगो **बैरा** (35) ओह लोग के परोसे में लागल रहे। ओह लोग के जल्दी करे के रहे, काहेकि **गाड़ी** (36) , जवन तेज गाड़ी ह, इस्टेसन पर देर ले ना रुकी।","t12-09-1":"९. — ओकरा बाद हम रवानगी के प्लेटफार्म पर गइनी आ सोझ जाए वाला **डिब्बा** (37) खोजनी ताकि जातरा में डिब्बा बदले के ना पड़े। हम एगो गलियारा वाला डिब्बा में चढ़नी जवना में पिए वाला लोग खातिर एगो **खाना** (38) बा आ « अकेली मेहरारू » खातिर एगो अलग खाना।","t12-tit-2":"राति के रवानगी।","t12-10-1":"१०. — **पायदान** (40) पर चढ़ के, **केवाड़** (39) बंद करके, **परदा** (41) लपेट के आ आपन छोट असबाब **जाल** (43) पर धर के, हम **बेंच** (42) पर बइठ गइनी। **बत्ती वाला** (44) के बत्ती जरावत देख के हमरा लागल कि हमरा डिब्बा में राति बितावे के बा, आ हम **तकिया** (45) किराया पर देवे वाला बाबू के बोला के एगो तकिया माँगनी।","t12-11-1":"११. — गाड़ी के कंडक्टर टिकट जाँचे आइलें। हम ओकरा से पूछनी कि हमनी के अबहीं ले काहे नइखी चलत, काहेकि ठीक समय हो गइल बा। ऊ हमरा जवाब देलें कि **गार्ड** (46) **सामान के डिब्बा** (47) में साइकिल धरवावे में लागल बाड़ें। ऊपर से अबहीं सब गोड़ गरम करे के डिब्बा (48) बदलल नइखे।","t12-12-1":"१२. — बाकिर हमनी के जल्दिए चले वाला रहनी जा, काहेकि **आगवाला** (50) आपन **टेंडर** (49) पर से कोयला उठा रहल रहे **इंजन** (54) के आग तेज करे खातिर, आ **ड्राइवर** (51) खाली **उप-इस्टेसन मास्टर** (52) के इसारा के अगोरत रहे, जे **प्लेटफार्म** (53) पर रहलें।","t12-13-1":"१३. — इंजन के **बॉयलर** (56) धीमे-धीमे गुर्रात रहे ; **चिमनी** (55) **भाप** (60) से मिलल धुँआ के धार उगलत रहे। एगो तेज **सीटी** (59) गूँजल आ **पिस्टन** (58) चले लागल, ओह भारी मसीन के **पहिया** (57) के ठेलत।","t12-tit-3":"चल पड़लीं !","t12-14-1":"१४. — **पटरी** (64) पर दउड़त गाड़ी के रफ्तार तेज हो गइल ; **प्लेटफार्म** (65) गायब हो गइल ; हमनी के **पाखाना** (66) के पार कइनी जा, आ ओकरा बाद दोसरा **लाइन** (63) पर खड़ा गाड़ी के भी : **सुते के डिब्बा** (67) , **खाए के डिब्बा** (68) , **डाक के डिब्बा** (69) ।","t12-15-1":"१५. — ओकरा बाद **माल के इस्टेसन** (71) हमनी के आँख के सामने से गुजरल। छप्पर के नीचे बाबू लोग ऊ **माल** (72) लादत रहे जवन धीमा गाड़ी से भेजल जाला। **मजूर के टोली** (76) **पानी के टंकी** (73) लगे **जनावर के डिब्बा** (75) आ **चपटा डिब्बा** (79) के इधर-उधर करत रहे ताकि एगो **माल गाड़ी** (80) बने।","t12-16-1":"१६. — हमनी के आखिरी **दुफाड़** (78) पार कइनी जा, जेकरा लगे काँटा वाला ठाढ़ रहलें ; हमनी के **सिगनल** (86) के पार कइनी जा आ इस्टेसन दूर जाके गायब हो गइल।","t12-17-1":"१७. — जल्दिए हमनी के ऊ **लोहा के पुल** (74) पार कइनी जा जवन **नदी** (81) के ऊपर से जाला। ऊ पुल पार कइला के बाद हमनी के नदी के साथे-साथे चलनी जा, जवना पर ताकतवर **खींचे वाला जहाज** (82) भारी **मालवाहक नाव** (83) खींचत रहे। हमनी के एगो **जातरी जहाज** (84) भी देखनी जा, जब ऊ एगो **जेटी** (85) लगे लागत रहे।","t12-18-1":"१८. — कई गो इस्टेसन के तेजी से पार कइला के बाद हमनी के कुछ **सुरंग** (87) पार कइनी जा आ आपन पाछे **फाटक के रखवार** के अनगिनत **गुमटी** (88) छोड़त गइनी जा। गाड़ी के झोंका से झूलत हम गहिर नींद में सो गइनी।","t12-tit-4":"दोयच-आवरिकूर इस्टेसन।","t12-19-1":"१९. — हम अचानक एगो बाबू के आवाज से जाग गइनी, जे चिचिआत रहलें : « दोयच-आवरिकूर ! (*) । सब लोग उतरीं ! » चुंगी के जाँच आ सरहद के सब उबाऊ काम भइल। हमरा आपन जेब के घड़ी इस्टेसन के ओह **बड़का घड़ी** (89) से मिलावे के पड़ल, जवन पचपन मिनट आगे रहे ; नींद से मुसकिल से जागल हम **बड़की सूई** (90) के **छोटकी** (91) से मुसकिल से अलग कर पवनी ; भोर के कुहासा से **डायल** (92) खुदे पूरा धुँधला रहे।","t12-20-1":"२०. — जब चुंगी वाला लोग आपन जाँच करत रहे, हम जँभाई लेत ओह **इस्तिहार** (93) के पढ़त रहनी जवन इस्टेसन के भीत सजावत बा। समय काटे खातिर हम कुछ खा लेनी, जर्मन **रेल के जाल** (94) के नकसा देखनी कि स्ट्रासबुर्ग अबहीं केतना दूर बा, आ आपन डिब्बा में लवट गइनी, एह आस से ताकत पाके कि जल्दिए हम आपन जातरा के मंजिल पर पहुँच जाइब।","t13-apar-1":"नकसा नं. १३ होटल। — भोजनालय। कॉफीघर।","t13-01-1":"१. — कल्ह साँझ के रोयान पहुँच के हम « *होटल दे ल’ओसेआँ* » में ठहरनी, जेकर सलाह हमरा एगो दोस्त देले रहलें।","t13-01-2":"हमरा एगो सुंदर **कमरा** (2) मिलल, दुसरका **मंजिल** (1) पर, जहाँ हम बहुते नीक से सुतनी (*) ।","t13-02-1":"२. — आज भोर, आपन कमरा से निकलत, जहाँ **नौकरानी** (3) जलपान ले आइल रहली, हम **सिगरेट पिए के कमरा** (5) में गइनी, जवना के **पढ़े के कमरा** (4) के तौर पर भी इस्तेमाल कइल जाला, आ ओहिजा **अखबार** (6) पढ़नी, **सिगरेट** (8) पियत। पढ़ला के बाद हम **लिफ्ट** (9) से नीचे उतरनी आ सहर घूमे निकल गइनी।","t13-03-1":"३. — काहेकि हम होटल के **मुनीम** (12) से पूछल भुला गइल रहनी कि **साझा मेज** (11) पर खाना कवना बेरा मिलेला, हम जल्दी लवट अइनी आ एह मउका पर होटल के **नहाए के कमरा** (10) में नहाए चल गइनी। ओकरा बाद हम फेरु **गल्ला** (15) लगे गइनी ताकि आपन एगो दोस्त के फोन कर सकीं। बाकिर **टेलीफोन** (13) बेस्त रहे ; हमार परेसानी देख के **गल्ला वाली** (14) , जे एगो **बिल** (17) **जातरी के रजिस्टर** (16) पर लिखत रहली, **दरबान** (18) से कहली कि **छोटका नौकर** (19) के भेज दें जे हमार काम **साइकिल से** (20) कर आवे।","t13-04-1":"४. — हम ओकरा के धन्यवाद देनी आ बाहर निकलनी ताकि ओह **कुली** (24) के बकसीस दे सकीं जे आपन **हाथ के ठेला** (25) पर इस्टेसन से हमार **टोपी के डिब्बा** (26) , **हमार सूटकेस** (27) आ **हमार जातरा के झोरा** (28) ले आइल रहे। **डाकिया** (21) , जे अभिए पहुँचल रहलें, हमरा एगो **चिट्ठी** (22) देलें।","t13-05-1":"५. — हम कुछ देर ले केवाड़ के देहरी पर, **चिट्ठी के डिब्बा** (23) लगे, रुकल रहनी आ सड़क के आवाजाही देखत रहनी। **गाड़ीवान** (30) , जे **ओमनिबस** (29) के रहे, आपन गाड़ी पर एगो **संदूक** (31) लादत रहे जवन एगो **जातरी** (32) के रहे, जेकरा के **होटल के मालिक** (33) विदा करे आइल रहलें। एगो जवान **तार वाला** (35) आराम से होटल के एगो ग्राहक खातिर **तार** (34) ले आइल ; आ एगो **सैलानी** (36) , कान्ह पर आपन **कैमरा** (38) लटकवले, आपन **गाइड-पोथी** (37) देखत रहे।","t13-tit-1":"खाना के बेरा।","t13-06-1":"६. — जाली के सामने, एगो बेफिकिर **जूता पालिस करे वाला** (39) आपन **बोझ के हुक** (40) आ आपन **पालिस के डिब्बा** (41) के बीच झपकी लेत रहे, जबकि एगो जवान **धोबिन** (42) , जे बियाढ़न के एगो **टोकरी** (43) शायल रहली, ओह **हाल के मुखिया** (44) के गंभीर सूरत पर हँसत रहली जे केवाड़ लगे ठाढ़ रहलें।","t13-07-1":"७. — **बावर्ची** (45) के देख के, जे आपन **रसोई** (47) से निकलत रहलें, जवन **तहखाना** (48) में बा, ताकि **रसोई के छोकड़ा** (46) के कवनो काम से भेज सकसु, हमरा इयाद आइल कि खाना के बेरा नगीच बा, आ हम भोजनालय में घुसनी, ओह अँगना से होके जहाँ एगो **ड्राइवर** (50) आपन **मोटर** (49) लगववले रहे, जबकि एगो **मिस्त्री** (52) , **साइकिल वाला** (53) के बतावल के हिसाब से, ओह **तीन पहिया के मोटर** (51) के बनावत रहे जेकर अभिए दुर्घटना भइल रहे।","t13-08-1":"८. — हम एगो जवान **छोटका नौकर** (54) से पूछनी, जे **बीयर के गिलास** (55) लेके जात रहे, कि साझा मेज बरामदा के नीचे बा कि ना, आ ओकर हामी सुन के हम एगो मेज पर जगहा लेनी आ आपन खातिर बढ़िया खाना मँगवनी।","t13-tit-2":"बढ़िया खाना।","t13-09-1":"९. — बैरा हमरा खाना के **सूची** (*) आ **सराब के सूची** ले आइल। हम चुन के मँगवनी : सुरू में **झींगा** आ **मक्खन**, आ पहिला पकवान में **काँ के तरीका के ओझरी**। हम **मछरी** ना खइनी, बाकिर **मेमना के जाँघ** के एगो हिस्सा माँगनी, आ **तरकारी** में **मलाई वाला पालक**। ओकरा बाद, काहेकि **बीच के पकवान** में कवनो हमरा नीक ना लागल, हम तरह-तरह के मिठाई मँगवनी — **पनीर**, **फर** आ **बिस्कुट**। ऊपर से हम एगो बढ़िया सैंत-एमिलियोँ **सराब** भी लेनी, आ आपन खाना से बहुते खुस होके हम मेज छोड़नी, **बैरा** (57) के नीक **बकसीस** (59) देके।","t13-10-1":"१०. — हमरा जाए खातिर तइयार देख के **मैनेजर** (60) हमरा के सुझावलें कि बालकनी पर जाके **महासागर** (62) के शानदार नजारा देख लीं। दूर मछरी मारे के **नाव** (63) , **पाल वाला जहाज** (64) आ एगो बड़हन **भाप के जहाज** (65) लउकत रहे, जेकर करिया आकृति उजर **बादर** (67) पर उभरत रहे, जवन **छितिज** (66) के रहे। हलुक हवा ओह **झंडी** (70) के लहरावत रहे जवन **तखती** (69) के ऊपर लागल रहे, आ ऊ तखती **छाजन** (68) के रहे।","t13-tit-3":"मन बहलाव।","t13-11-1":"११. — नजारा एतना मजेदार रहे कि हम तय कइनी कि काल्ह कॉफीघर के छत पर **दूरबीन** (71) भा **लमहर दूरबीन** (72) लेके चढ़ब।","t13-12-1":"१२. — बालकनी छोड़ के हम होटल के कॉफीघर में गइनी ताकि एगो **पेय** (73) पिये आ **बिलियर्ड के खेल** (75) खेलीं। हम बिना रुकले ओह कॉफी-कमरा से गुजरनी जहाँ बहुते ग्राहक **शतरंज** (78) , **चेकर** (79) , **डोमिनो** (80) , **बैकगैमन** (81) भा **ताश** (82) खेलत रहे, आ सोझे **बिलियर्ड कमरा** (74) में चढ़ गइनी।","t13-13-1":"१३. — खेल खतम भइला पर हम भुइयाँ-तल पर उतरनी आ बैरा से चिट्ठी लिखे खातिर **लिफाफा** (84) , **कागज** (83) , **टिकट** (85) , **कलम** (87) आ **सियाही** (86) माँगनी।","t13-13-2":"ओकरा बाद हम एगो **कोचवान** (92) के बोलवनी जेकर **गाड़ी** (88) कॉफीघर के सामने खड़ा रहे। हम ओकरा से घंटा के भा एक फेरा के भाड़ा पूछनी, आ जब भाड़ा तय हो गइल, ऊ हमरा खातिर **गाड़ी के केवाड़** (89) खोललस आ हमरा के बइठवलस। ऊ फेरु **गद्दी** (91) पर चढ़ल, **चाबुक** (93) से घोड़न के तेज हँकलस आ हमनी के एगो मनमोहक घुमाई पर निकल गइनी जा।","t14-apar-1":"नकसा नं. १४","t14-tit-1":"सड़क। — दुकानदार।","t14-01-1":"१. — हमार दोस्त योहानेस, जे देहात में रहेला, हमरा घरे तीन दिन बितावे आइल। **ओकरा पहिले** ओकरा बड़का सहर देखे के मउका ना मिलल रहे ; एहीसे हमनी के आपन पूरा दिन घूमे में बितावत बानी जा, आ हम ओकरा के ऊ सब समझावत बानी जवन ऊ ना जानेला।","t14-02-1":"२. — पहिले हमनी के **वेधशाला** (1) देखे गइनी जा, जवन ओकरा के बहुते नीक लागल। लवटत बेरा ओह **सड़क** (3) से गुजरत, जहाँ **तुर्की हम्माम** (2) बा, हमनी के एगो **अरथी** (4) से भेंट भइल। **सवयातरा** के आगे **पादरी लोग** चलत रहे, आ ओकनी के पाछे **मुरदा-गाड़ी**, जवना में **कफन-पेटी** धइल रहे। बहुते दोस्त लोग **सोक में डूबल** परिवार के साथे रहे।","t14-02-2":"जुलूस के गुजरला के बाद हमनी के ओह बड़का **बीयरघर** (5) के सामने सड़क पार कइनी जा, जवना के छत पर बहुते **ग्राहक** **बीयर** पियत रहे, काँच के **छाजन** (6) के नीचे बइठल।","t14-03-1":"३. — योहानेस ओह **निसान** के देख के दंग रह गइल जवन **सराब बेचे वाला** (7) के दुकान आ **बाजा बेचे वाला** (10) के दुकान के बीच लागल रहे। ऊ हमरा से ओकर मतलब पूछलस ; हम जवाब देनी कि ऊ **अंगरेजी कोंसुलखाना** (8) के निसान ह, आ हम ओकरा के ऊ **कोंसुल** (9) देखवनी जे बालकनी पर रहलें।","t14-tit-2":"दुकान के सैर।","t14-04-1":"४. — जाहिर बा कि हमनी के **बाजा** के बसता के सामने रुकनी जा — **हारमोनियम**, **ऑरगन** आ **पियानो** ; हमनी के **सुरलिपि** आ पियानो के **धुन** के चित्र वाला जिल्द देखनी जा, आ ओह सोना चढ़ल काठ के **वीणा** के निहारनी जा जवन निसान के तौर पर लागल बा।","t14-05-1":"५. — **झाड़ू वाला** (11) लोग आ **झाड़ू के गाड़ी** (12) से उठल धूर के बादर हमनी के मजबूर कर देलस कि हमनी के **सामान बेचे वाला** (13) के सुंदर **सामान** के सामने आ **टीन के मिस्त्री** (14) के **चूल्हा** आ **लालटेन** के बसता के सामने से जल्दी गुजर जाईं।","t14-06-1":"६. — ऊपर से, इहाँ हमनी के पटरी छोड़े के पड़ल, काहेकि ऊ गठरी से भरल रहे, जेकरा के **ढोवे के गाड़ी** (16) से उतार के ओह **दुकान** (15) में धरल जात रहे जवन अभिए किराया पर लेहल गइल रहे।","t14-06-2":"एहसे हमनी के **गाड़ी बनावे वाला** (17) के सुंदर गाड़ी ना देख पवनी जा, बाकिर एहसे हमनी के रुक के ओह **पेटी बनावे वाला** (19) के देखे से ना रुकनी जा, जे आपन पड़ोसी, **साइकिल आ मोटर बेचे वाला** (18) , खातिर एगो पेटी बनावत रहे। ओकरा बाद, काहेकि थोड़ा देर हो गइल रहे, हमनी के घरे लवट अइनी जा।","t14-tit-3":"सहर के सैर।","t14-07-1":"७. — अगिले दिने हमार माई योहानेस के सुझावली कि ओकर फोटो खिंचावल जाव, आ ओकरा बाद ऊ हमरा के कहली कि ओकरा के **फोटो खींचे वाला** (20) लगे ले जाईं। खाना के बाद हमनी के ओह कलाकार के **इस्टूडियो** में गइनी जा, जहाँ हमनी के ठीक-ठाक देर तक अगोरे के पड़ल। मन बहलावे खातिर हमनी के भीत पर टँगल **तसवीर** (22) देखत रहनी जा।","t14-07-2":"जब हमनी के नंबर आइल, काम में देर ना लागल, आ हमार दोस्त के **कैमरा** (21) के सामने बइठला के तुरते बाद हमनी के नीचे उतर गइनी जा।","t14-08-1":"८. — पहिला मंजिल पर हमनी के **हजाम** (23) के खुलल केवाड़ से देखनी जा कि ओकर छोकड़ा एगो ग्राहक के बाल काटत बा।","t14-08-2":"सड़क पर पहुँच के हमनी के **तमाखू के दुकान** (24) के सामने से गुजरनी जा। योहानेस ओह **लाल लालटेन** (25) आ ओह **मोटका पाइप** से एतना बहल गइल जवन **निसान** (26) के तौर पर लागल बा, कि ऊ दू गो बुढ़उ साहेब से टकरा गइल जे **नसवार सूँघत** (27) बतियावत रहलें।","t14-tit-4":"हलवाई के दुकान।","t14-09-1":"९. — **सर्राफ** (29) के **सो-केस** में सजल दुनिया भर के **नोट** आ **सिक्का** कुछ देर हमनी के धेयान खींच लेलस, बाकिर काहेकि जलपान के बेरा हो गइल रहे, हमनी के बिना जादे रुकले **हलवाई** (31) के इहाँ चल गइनी जा।","t14-10-1":"१०. — दुकान में जवन-जवन **मिठाई** रहे — **केक, मधु के केक, बिस्कुट** आ हर तरह के **बोनबोन** — ऊ सब देख के हमनी के चुने में मुसकिल भइल। आखिर में योहानेस **मलाई के केक** चुनलस, आ हम खाली एगो छोट **चेरी के टार्ट** लेनी, काहेकि मीठ से **हमार दाँत दुखेला**, आ हमरा **दाँत के डाक्टर** (30) लगे बार-बार जाइल बिलकुल ना भावेला।","t14-tit-5":"मसीन से लिखल।","t14-11-1":"११. — आपन दोस्त के **टाइपराइटर** देखावे खातिर, जेकर बारे में ऊ सुनले रहे बाकिर देखले ना रहे, हमनी के ओह **दफ्तर** (32) में गइनी जा जवन हमार **चचेरा भाई** (34) के ह। हमनी के ओकरा के आपन **सचिव** (35) के चिट्ठी लिखवावत पवनी जा, जे **आसुलिपिक** बा। चिट्ठी खतम होते एगो **टाइपिस्ट** (33) ओकरा के आपन मसीन पर उतार लेलस। आपन रिस्तेदार के काम में बाधा ना डाले के मन से हमनी के ओकरा लगे खाली कुछे पल रुकनी जा।","t14-12-1":"१२. — हमार चचेरा भाई के दफ्तर के नीचे एगो बड़का **घड़ीसाज-सोनार** (37) रहेला, जे ऊपर से सोना के काम भी करेला। ओकर शानदार दुकान में बहुते **घड़ी, पेंडुलम घड़ी, जेब घड़ी**, **जंजीर** आ कीमती **जेवर** बा — जइसे **मोती के माला**, सोना के **कंगन**, **बाली** आ **अँगूठी** जवना में **नग** आ **हीरा** जड़ल बा। एगो सो-केस खास तौर पर **सोना के सामान** खातिर रखल बा आ ओहमें चाँदी के **बरतन** के बड़का संग्रह बा।","t14-13-1":"१३. — सड़क के मोड़ पर मुड़त हम देखनी कि घर के **नंबर** लगे लागल **तखती** (36) बदल गइल बा। हम जोर से आपन बात कहे वाला रहनी कि तबहीं **फौजी बाजा** के खुसी भरल आवाज सुनाइल। हमनी के पलटन की ओर दउड़ पड़नी जा, ई सोचले बिना कि **ऊ** **टोपी वाला** (39) आ **दस्ताना वाला** (40) के दुकान के सामने से गुजरे वाला बा, आ कि हमनी के ओकर परेड देखे खातिर **चस्मा वाला** (38) के सो-केस के सामने ठाढ़ रह के भी ओतने नीक जगहा पर रहतीं जा, जवन **नाक के चस्मा, कान के चस्मा** आ **छोट दूरबीन** से भरल बा।","t14-tit-6":"परेड।","t14-14-1":"१४. — **पलटन** (41) के आगे **ढोल-नायक** (42) चलत रहलें, ओकरा पाछे **ढोलकिया** (43) , **बिगुल वाला** (44) आ पूरा **बजनियाँ** लोग। **जनरल** (45) , जे चउक पर आपन **अरदली** के साथे रहलें, **फुहारा के टोंटी** (49) लगे रुक गइल रहलें, जवन **फुहारा** (48) के ह, ताकि **परेड** देख सकसु।","t14-14-2":"**सदर के अफसर** (46) लोग, **कर्नल** आ **लेफ्टिनेंट-कर्नल** ओकरा के **तलवार** से सलामी देलें। **मेजर** लोग आपन **दस्ता** (47) के आगे रहलें आ हर **कप्तान** आपन **कंपनी** के हुकुम देत रहलें, जबकि **लेफ्टिनेंट**, **उप-लेफ्टिनेंट** आ **सूबेदार** लोग आपन सिपाहियन के बगल में आपन नियमित जगहा पर रहलें।","t14-15-1":"१५. — बहुते राहगीर **चौराहा** (50) पर जुट गइल रहलें ; दुकानदार लोग — **छाता बनावे वाला** (51) , **रँगरेज** (53) , **हथियार बनावे वाला** (54) — **सिपाही** लोग के देखे बाहर निकल अइलें। सब सवारी — **किराया के गाड़ी** (52) , **असबाब के गाड़ी** (57) आ **पानी छिड़के के गाड़ी** (56) भी — पटरी के किनारे लाग गइल।","t14-tit-7":"सड़क के दृस्य।","t14-15-2":"एगो **बेपार के दलाल** (55) , हाथ में आपन **नमूना के पेटी** लेके, जल्दी से सड़क पार कइलस, आ **ऊपरी छत** (59) पर बइठल लोग, जवन **ओमनिबस** (58) के ह, नजारा के मजा लेवे खातिर मुड़ गइल। एगो बेचारा **घुमंतू गवइया** (60) के आपन **घुमावदार बाजा** (61) के साथे आपन **गीत** रोके के पड़ल, काहेकि ढोल के सोर ओकर आवाज दबा देलस।","t14-16-1":"१६. — जब पलटन **कपड़ा के दुकान** (64) के सामने पहुँचल, **सिलाई करे वाली** (63) आ **दर्जी** (62) लोग आपन **सिलाई मसीन** आ आपन काम छोड़ के खिड़की से देखे लागल। **दुकानदार** (65) , जे अभिए आपन बसता पर नया **सूट** (66) लगववले रहलें, ओह **ऊनी थान** (67) आ **सूती थान** के भीतर धरवावे के पड़ल जवन पटरी पर **नाली के ढक्कन** (68) लगे रखल रहे, ई डर से कि भीड़ ओकरा के ना गिरा दे ; इहाँ तक कि बुढ़उ **फेरी वाला** (69) के, जेकरा से एगो दरबानिन **मोजा** के भाव-ताव करत रहली, आपन बेचाई पूरा करे खातिर गलियारा में घुसे के पड़ल।","t14-16-2":"हमनी के पलटन के साथे छावनी तक गइनी जा, **आ**, आपन दिन से बहुते खुस होके, हमनी के खाना के बेरा घरे लवट अइनी जा।","t14-tit-8":"तरह-तरह के धंधा आ पेसा।","t14-17-1":"१७. — अगिले दिने हमार बाबूजी हमनी के सुझवलें कि ओहिजा के अखबार के छापाखाना देखल जाव। हमनी के जोस से मान लेनी जा।","t14-17-2":"**छापे वाला** ऊपर से **किताब बेचे वाला** (70) , **प्रकासक**, **कागज बेचे वाला** आ **जिल्दसाज** भी हउवें। ऊ पहिला मंजिल पर अखबार के **संपादक के कमरा** (71) बनववले बाड़ें, आ ओकरा साथे **खोदाई के कमरा** भी, जहाँ **लिथो वाला** (72) आ **ताँबा पर खोदे वाला** (73) लोग काम करेला, आ आखिर में **टाइप जोड़े के कमरा**, जहाँ **छपाई मजूर** (74) लोग बा। असली **छापाखाना** (75) , **छापे के मसीन** आ दोसर मसीन भुइयाँ-तल पर बा।","t14-tit-9":"योहानेस बहुते सवाल पूछेला।","t14-18-1":"१८. — छापाखाना से निकलत योहानेस बहुते अचरज में एगो छोट काँच के डिब्बा के सामने रुक गइल जवन एगो खंभा पर लागल रहे, **गोटा-किनारी के दुकान** (77) के सामने, आ पूछलस कि ऊ काहे लागल बा। हमार बाबूजी ओकरा के समझवलें कि ऊ **आग के चेतावनी के डिब्बा** (76) ह। ऊपर से सहर में सब कुछ हमार दोस्त खातिर अचरज के बात रहे — सादा **पाथर के फुहारा** (78) आ ऊ हलुक **ढोवे के तीन पहिया** (80) से लेके, जेकरा के वरदी पहिनले एगो **छोटका नौकर** (79) चलावत रहे, **डाक के गाड़ी** (81) तक।","t14-19-1":"१९. — जब हमार बाबूजी कुछ पल खातिर हमनी के छोड़ के **कर वसूले वाला** (83) से बतियावे गइलें, जे एगो **वकील** (82) आ एगो **नोटरी** (84) से बतियावे रुकल रहलें, हमनी के सड़क के आवाजाही आँख से पीछा करत मन बहलवनी जा। हमनी के सामने तरह-तरह के लोग गुजरल : एगो **हलवाई के छोकड़ा** (85) , जे टोकरी में शानदार **मीट-पाई** लेले रहे, एगो **कपड़ा बेचे वाला** (86) के पाछे आइल ; एगो **लालटेन जरावे वाला** (87) एगो **गैस वाला** (88) से बतियावत रहे ; आ एगो **नन** (89) , जे हाथ में एगो अनाथ लइकी के पकड़ले रहली, आपन मठ की ओर लवटत रहली।","t14-tit-10":"घरे लवटत बेरा।","t14-20-1":"२०. — जवना बेरा हमार बाबूजी हमनी से आके मिललें, योहानेस जोर से हँस पड़ल, दू गो पूरा कालिख में सनल **चिमनी साफ करे वाला** (91) के मैल मुँह आ अजीब फटल कपड़ा देख के।","t14-21-1":"२१. — हम **फूल बेचे वाली** (92) से आपन माई खातिर एगो पौधा खरीदल चाहत रहनी, बाकिर हमार बाबूजी हमरा के बतवलें कि ऊ ढोवे में बहुते भारी होई आ **संतरा** लेहल जादे नीक होई। हमनी के **बेचनिहारिन** (94) लगे गइनी जा, आ जब **गवर्नेस** (93) , जे आपन पाले वाला बच्चा खातिर चुनत रहली, आपन खरीदारी खतम कइली, हमनी के आपन सामान लेनी जा।","t14-22-1":"२२. — घरे लवटत हमनी के कई गो जान-पहिचान वाला से भेंट भइल : हमार परिवार के एगो पुरनकी सहेली, जे आपन **साथी मेहरारू** (95) के बाँह पकड़ले रहली, पुल आ सड़क के **इंजीनियर** (96) , आ हमार एगो चचेरी बहिन आपन **आया** (98) के साथे।","t14-22-2":"ओकरा बाद हमनी के आपन माई के **टोपी बनावे वाली** (97) से भेंट भइल आ दू गो **मठवासी** (99) से, जे सहर में परदेसी रहलें आ हमार बाबूजी से इस्टेसन के रस्ता पूछे आइल रहलें।","t15-apar-1":"नकसा नं. १५","t15-tit-1":"बजार। — खाए के चीज।","t15-01-1":"१. — जे बेवसाई हमनी के खाए-पिए के जरूरी सामान देलें, ओहमें से जादेतर **ढँकल बजार** के **बड़का छाजन** (1) के नीचे भा आसपास के गली में जुटल रहेलें।","t15-02-1":"२. — **सूअर के कसाई** (2) , जे **हैम** (3) , **खून के सॉसेज** (4) , **सॉसेज** (5) , **ओझरी के सॉसेज** (6) आ **सूअर के चरबी** (7) बेचेलें, **मक्खन आ चीज बेचे वाली** (8) के बगल में ठाढ़ बाड़ें, जेकर बसता **हॉलैंड के चीज** (9) से भरल बा जेकर छिलका लाल बा, **कामाम्बेर चीज** (10) से, **ग्रुयेर के चक्का** (11) से आ ताजा **मक्खन के पिंड** (12) से।","t15-03-1":"३. — ओकरा सामने एगो **तरकारी बेचे वाली** (13) आपन ग्राहकिन लोग के सुंदर **टमाटर** (14) , **फूलगोभी** (15) , **सलाद** (16) , **बंदागोभी** (17) , **कोहड़ा** (19) , **खरबूजा** (18) आ इहाँ तक कि **कुकुरमुत्ता** (20) देखावत बाड़ी। बाकिर एगो **बीयर के छोकड़ा**, जे आपन **पहुँचावे के गाड़ी** (21) — जवना पर **बीयर के पीपा** (22) लदल बा — ठीक ओकर बसता के सामने रोक देले बा, ओकर ग्राहक लोग के लगे आवे से रोकत बा। एगो मालिन ओकरा खातिर **हाथीचक** (23) के एगो टोकरी ले आवत बाड़ी।","t15-tit-2":"बेचल आ खरीदल।","t15-04-1":"४. — बजार में बहुते चहल-पहल बा, काहेकि **बोली** (24) के बेरा आ गइल बा। **घरनी लोग** (26) , जे इहाँ सौदा करे आवेली, चलत-चलत **ओझरी बेचे वाली** (25) के दुकान के सामने रुक जाली, **ओझरी** भा **बछड़ा के कपार** खरीदे खातिर।","t15-05-1":"५. — एगो तखिन **बावर्ची** (27) **मछरी बेचे वाली** (28) से एगो बहुते सुंदर **टूना** के भाव-ताव करत बाड़ें, आ ऊ आपन मरजी से भाव बढ़ावत बाड़ी। ओकरा लगे **बाम, सोल मछरी, ट्राउट** आ **कार्प** के बड़का खेप आइल बा। ओकर **कॉड** आ **सीप** बहुते ताजा बा।","t15-tit-3":"सस्ता आ महँग माल।","t15-06-1":"६. — **मुरगी बेचे वाली** (29) , जे ओकरा बगल में बइठल बाड़ी, बहुते ईमानदार बाड़ी। जब ऊ **पीरू, हंस, बतख** भा सादा **मुरगी** बेचेली, त खाली सही दाम माँगेली।","t15-07-1":"७. — चउक के कोना पर, पहिला मंजिल पर, कुछ दिन से एगो **कपड़ा बेचे वाला** (30) बइठल बा, जेकरा लगे खरीदार मेहरारू लोग के हरमेसा भरोसा रहेला कि **मेजपोस, नैपकिन, एप्रन** आ **पोंछन** के बहुते सुंदर तरह-तरह मिल जाई। ओही मंजिल पर एगो **छूरी बनावे वाला** (31) आपन **कारखाना** खोलले बा। ऊ छाजन के बेचे वाली लोग के **छूरी** तेज करेला आ मालिन लोग खातिर सबसे कड़ा **फौलाद** के **हँसुआ** बनावेला।","t15-tit-4":"किराना के दुकान।","t15-08-1":"८. — ओकर कारखाना के नीचे, कुछ दिन से, एगो बड़का **खाना के दुकान** खुलल बा। ऊ आउर ऊ सादा आ मामूली **किराना के दुकान** (32) नइखे रह गइल जवन पहिले रहे, जे खाली रोज के काम के चीज बेचत रहे — **चाय** (33) , **चॉकलेट** (34) , **चीनी के चक्का** (37) आ **साबुन** (38) । इहाँ हर चीज बिकेला — **सूखल बिस्कुट**, **डिब्बाबंद** (35) , **मीठ सराब** (36) , **रम, कोंयाक, किर्श, सौंफ के सराब** आ **कुराकाओ**। इहाँ **सिकार** भी मिलेला : **खरहा** (39) , **थ्रश** (40) , **तीतर** (41) , **बटेर** (42) , **जंगली बतख** (43) भा **फीजेंट** (44) , आ ओतने आसानी से परदेसी फर भी, जइसे **केरा** (46) आ **अनन्नास**।","t15-09-1":"९. — किराना के **छोकड़ा** (45) , जे बहुते मददगार बा, जवन माँगीं ऊ देवे के तइयार बा : **करौंदा** भा **बिही** के **मुरब्बा** (47) , **चरबी** (48) , **खीरा के अचार** (49) भा नून लागल **सारडीन** (50) ।","t15-09-2":"ई **ग्राहकिन** (51) लोग खातिर बहुते सुभीता बा, जे सबसे मामूली चीज के बगल में सबसे दुर्लभ **नया फसल** आ सबसे सवाद वाला **फर** पा जाली : रसदार **नासपाती** (52) , **आलूबोखारा** (53) , **अंगूर** (54) , **आड़ू** (55) , **बादाम** (56) आ **अखरोट** (57) ।","t15-tit-5":"ग्राहक लोग।","t15-10-1":"१०. — **चाउर** (58) आ **मसूर** (59) **धुँआइल हेरिंग** (60) के पेटी के बगल में बा ; **आलू** (61) आ **सेम** (63) **सेब** (62) , **अंजीर** (64) , **सूखल आलूबोखारा** (65) आ **हेजलनट** (66) के लगे बा। एह दुकान में ताजा **अंडा** (67) आ **जैतून** (68) भी मिलेला ; एहीसे **टोकरी** (70) आ **सौदा के जाली** (73) पलक झपकते भर जाला।","t15-11-1":"११. — एह बढ़िया दुकान के **कॉफी के दाना** (72) के **नौकरानी** (69) आ रसोइनिन लोग के बीच सचहूँ नाँव हो गइल बा, काहेकि बुढ़उ **किराना वाला** (71) खुदे ओकरा के बहुते जतन से भूँजेलें।","t15-tit-6":"नजारा।","t15-12-1":"१२. — सब लोग बजार में सौदा करे ना आवे। जवन गली छाजन तक ले जाले ओकर रंगीन आवाजाही में सबसे अलग-अलग तरह के लोग लउकेला। एगो भल **बूचड़खाना के छोकड़ा** (75) के बगल में, जे आपन सामने **ठेला** (74) ठेलत बा, ई रहलें दू गो छुट्टी पर आइल सिपाही, जे आपन चमकत वरदी देखावे में बहुते फूलल बाड़ें : **हुसार** (76) , नीला **दोलमान** आ पंख वाला **साको** में, आ **जुआव के नायक**, फुलल जाँघिया में आ **तुर्की टोपी** पहिनले।","t15-13-1":"१३. — **नानबाई** (80) , जे **नानबाई के दुकान** (78) के देहरी पर ठाढ़ बाड़ें, अभिए आपन **डबलरोटी** (79) के आटा गूँथले बाड़ें आ भट्ठी से ऊ **क्रोसां** (81) , **पाव** (82) आ **बड़का रोटी** (83) निकालले बाड़ें जवन सो-केस में बा।","t15-14-1":"१४. — नानबाई के दुकान के ऊपर एगो कुसल **बियाढ़न के सिलाई करे वाली** (84) रहेली, जे कई गो **कढ़ाई करे वाली** (85) के काम पर रखले बाड़ी। ओकरा बगल में एगो **धोबिन आ इस्तिरी करे वाली** (86) रहेली, जे **बियाढ़न** (88) के धो के आ सुखा के ओकरा में कलफ लगावेली, आ **इस्तिरी** (87) से ओकरा के इस्तिरी करेली।","t15-tit-7":"मांस, मछरी आ तरकारी।","t15-15-1":"१५. — **कसाई के दुकान** (89) में, जवन भुइयाँ-तल पर बा, हर तरह के **मांस** बिकेला — **भेड़ के मांस** (90) , **गोमांस** (94) भा **बछड़ा के मांस** (92) — **जाँघ, बीफस्टेक, भूँजल मांस** आ **पसुली** के रूप में। **कसाई के छोकड़ा** (93) ई सब मांस काटेला आ **गूदा वाला हाड़** (96) अलग धरेला। कसाई के दुकान के केवाड़ पर एगो **सीप बेचे वाली** (97) बाड़ी जे **सीप** (98) बेचेली। केहू चाहे त ऊ ओकरा के खोल भी देली।","t15-16-1":"१६. — ई सब बेवसाई रखसा भा जगहा के भाड़ा देलें ; एहीसे **पुलिस वाला** (100) ओह बेचारा **ठेला पर तरकारी बेचे वाली** (99) लोग के बेदरदी से खदेड़ेला, जे आपन ठेला पर **गाजर, मूली, सलगम, गंधना** भा **सतावर के मुट्ठा, हरियर मटर, पालक, चूका, हलीम** आ **अजमोद** ढो के ओह लोग के मुकाबिला करेली।","t15-tit-8":"पुलिस से बचीं !","t15-17-1":"१७. — जे लइका **लहसुन** (101) आ **पियाज** बेचेला ऊ नीक से जानेला कि ओकरो के बजार लगे आपन माल बेचे के हक नइखे। ऊ दउड़ के भागेला, एह खतरा के साथे कि ऊ **बड़का झींगा** आ **लॉबस्टर** बेचे वाला **बेचे वाला** (102) के **केकड़ा, नदी के झींगा** आ **झींगा** के टोकरी गिरा दी।","t15-18-1":"१८. — सब लोग हिलत-डोलत बा आ भयानक सोर करत बा ; बाकिर एहसे ओह **सीसा वाला** (103) के आवाज साफ सुने में कवनो बाधा ना पड़े जे गली में फेरी लगावत बा, ना ओह **कोयला वाला** (104) के हाँक, जे अभिए कुछ पल खातिर आपन ठेला छोड़ के एगो **कोयला के बोरा** (105) पहुँचावे गइल बा।","t16-apar-1":"नकसा नं. १६ बड़का दुकान। — बजार। खेलौना।","t16-01-1":"१. — नया साल नगीच आ रहल बा। बड़का दुकान आपन बसता **खेलौना** (1) आ नया साल के **भेंट** से सजा लेले बा।","t16-01-2":"हम आपन बाबा से कहनी कि हमरा के ई सुंदर नुमाइस देखे बजार ले चलीं, आ ऊ मान गइलें।","t16-02-1":"२. — पहिले हमनी के सुंदर हथियार के तखता के सामने रुकनी जा, जवना में **बंदूक**, **फौजी टोपी**, **तलवार**, **तलवार के पेटी** आ एक जोड़ी **कान्ह के पट्टी** रहे, भा **खोद**, **कवच** (3) आ **पिस्तौल** (4) । ई सब हमरा के **जादुई लालटेन** (2) से बहुते जादे नीक लागल।","t16-tit-1":"सुंदर नजारा।","t16-03-1":"३. — ओही विभाग में एगो **पहरेदार** (5) आपन **पहरा के गुमटी** में रहे ; लागत रहे कि ऊ कागज के पूरा जनावरखाना के पहरा देत बा। ओहिजा केतना जनावर रहे ! एगो **तोता** (6) आपन अड्डा पर, एगो **गैंडा** (7) नाक पर सींग लेके, एगो **रेनडियर** (8) , एगो **सुतुरमुर्ग** (9) , एगो **बंदर** (10) जे अखरोट तोड़त बा, एगो **लोमड़ी** (11) जे मुरगी ले भागत बा, एगो **मगर** (12) जे आपन बड़हन **जबड़ा** फारले बा, एगो **ऊँट** (13) , एगो सुघर **सलूकी** (14) , एगो **तेंदुआ** (15) , आ ओकरा बाद दू गो जनावर जेकरा के हम ना जानत रहनी आ जे, लोग के कहला के मुताबिक, **वीजल** (16) आ **लकड़बग्घा** (17) हउवें। ओहिजा एगो **चीता** (18) आ एगो **भेड़िया** (21) भी रहे ; एकदम लगे रबर के सुघर छोट **चूहा** (19) आ बहुते छोट **मूस** (20) रहे। आखिर में एगो **दरियाई घोड़ा** (22) आ एगो कूबड़ वाला **एक-कूबड़ ऊँट** (23) एह मजमा के पूरा करत रहे। हम ओहिजा आउर कई घंटा रह जइतीं जो लगहीं **सीसा के सिपाही** (29) से भरल एगो शानदार पड़ाव हमार धेयान ना खींच लेत।","t16-tit-2":"सिपाही आ लड़ाई।","t16-04-1":"४. — हमार बाबा, जे **अपाहिज फौजी** (24) हउवें आ जेकरा एगो **घाव** के चलते फौज छोड़े के पड़ल, जवना से ओकरा **फौजी तमगा** मिलल, हमरा के ओह **लड़ाई** के हाल सुनावल बहुते पसंद करेलें जवना में ऊ लड़ल रहलें। ऊ खुसी से हमरा के ओह छोट मिनिएचर फौज के अलग-अलग चाल समझावत रहलें। बजार देखे आइल सच्चा सिपाही लोग के एगो टोली — एगो **इंजीनियर सिपाही** (25) , एगो **पहाड़ी सिकारी** (26) जे **बेरे टोपी** (27) पहिनले रहे, पैदल सेना के एगो **हवलदार-मेजर** (28) आ तोपखाना के एगो **हवलदार** आपन कमीज पर सोना के **फीता** लगववले — हमनी के लगे रुक के ई समझावल सुने लागल।","t16-05-1":"५. — हमार बाबा, एतना नीक सुनइया पाके बहुते फूल गइलें, आ फउरन एगो पूरा लड़ाई के नकसा बना देलें।","t16-05-2":"आपन **परकोटा** आ **खाई** के साथे किलाबंद सहर के **दुसमन के फौज** घेरले रहे, आ लमहर **गोलाबारी** के बाद ऊ **धावा** बोले के तइयार रहे। बाकिर **घिराइल** लोग, भूख से तंग आके, **घेरे वाला** के **पड़ाव** पर **उलटा धावा** बोले के कोसिस कइलस। **तंबू** के चारो ओर के जिद्दी **लड़ाई** में **हमला** पीछे धकेलला के बाद **जितइया** घेरे वाला आपन **घोड़सवार दस्ता** के **हारल** हमलावर लोग के **पीछा** पर लगा देलस। ई लोग **पीछे हटल**, आ **रनभूमि** के **मुरदा** आ **घायल** से भर देलस। **नक्कालात वाला** लोग घायलन के **एंबुलेंस** में ले गइल ताकि **जर्राह** ओकनी के इलाज करसु।","t16-05-3":"कुछ **दस्ता** के बहादुर बिरोध के बादो, जे **चौकोर** बना के ठाढ़ रहे, **हार** पूरा भइल, बाकी फौज **भाग** गइल आ बहुते **बंदी** छोड़ गइल। दुसमन सहर पर कब्जा करके आपन **जीत** पूरा करे वाला रहे। सायद इहे लड़ाई के अंत होई आ **हथियार बंदी** के बाद **सांति के संधि** पर दसखत हो सकी।","t16-tit-3":"नया साल के भेंट।","t16-06-1":"६. — जवान सिपाही लोग, जे ओह पुरनका लड़इया के रंगीन कहानी सुन के हँसत रहे, ओकरा से कुछ आउर बात पूछलस। हम त दुकान के चारो ओर घूम के एगो सुंदर **क्रॉसबो** (32) आ एगो **धनुष** (33) आपन **तीर** (31) के साथे देखत रहनी। ओहिजा हमरा जनावरन के एगो दोसर मजमा मिलल : दू गो **गवइया चिरई** (34) — एगो मसीनी **बुलबुल** आ एगो **फुदकी** जे गला फार के गावत रहे — आ अजीब जनावरन के एगो कतार : **चमगादड़** (35) , **अजगर** (36) , **कछुआ** (37) , **सील** (38) , **व्हेल** (39) आ फुलावल रबर के **शार्क** (40) ।","t16-07-1":"७. — हम ओकनी के देखे में देर ना कइनी, काहेकि हमरा ऊ लउक गइल जेकर हम सपना देखत रहनी : एगो शानदार **कठपुतली के नाटकघर** (41) आपन बढ़िया **साज-सज्जा** आ मन मोह लेवे वाला लाल **परदा** के साथे। **मंच** पर दू गो **नट** एगो बहुते मजेदार **नाटक** में आपन **भूमिका** निभावत लागत रहलें, काहेकि कागज के छोट **दरसक**, जे **मचान** में बइठल रहे भा **कुरसी** पर आ **बजनियाँ के मुखिया** के पाछे **अगला जगहा** में, जोर से ताली बजावत रहे।","t16-07-2":"अफसोस, ई नाटकघर बहुते महँग रहे।","t16-08-1":"८. — ऊपर से, खेलौना चुनल मुसकिल रहे, काहेकि सो-केस में हर तरह के खेलौना जमा रहे : **अर्लेकिन** (42) , **पोलिशिनेल** (43) , **पिएरो** (44) , **उल्लू** (45) जे पाँख फड़फड़ावत रहे, सीटी बजावे वाला **कस्तूरा** (46) , भूँके वाला **पूडल कुकुर**, एगो **फोनोग्राफ** (47) आ **धीरज के खेल**। ओहमें से एगो खेल हमरा बहुते नीक लागल : ओहमें एगो **समुंदरी लड़ाई** (48) देखावल गइल रहे जवना में एगो **जहाज** पर **समुंदरी लुटेरा** लोग हमला करत रहे, एगो अइसन जमीन लगे जहाँ **नरियर के गाछ** लागल रहे।","t16-09-1":"९. — हम ई सब अचरज बहुते आराम से देख पवनी, काहेकि दुकान में थोड़े लोग रहे — बस कुछ टहले वाला, एगो **घोड़सवार सिपाही** (49) आ एगो **वसूली करे वाला** (50) जे मुख्य **गल्ला** (51) पर एगो **हुंडी** देत रहे।","t16-10-1":"१०. — हम आपन बाबा से पूछनी कि गल्ला वाली के पाछे तखता पर धइल किताब कवना काम के हउवें ; ऊ जवाब देलें कि ऊ **बही-खाता** हउवें।","t16-tit-4":"दुकान के सामने ताकल।","t16-11-1":"११. — खेलौना के विभाग छोड़ के हमनी के जीन के विभाग में गइनी जा ताकि **जीन** (53) , **रकाब** (54) , **लगाम** (55) , **दहाना** (56) आ **चाबुक** देख सकीं जा। जब **विभाग के मुखिया** (57) हमार बाबा के कुछ बात बतावत रहलें, हम **चीनी मिट्टी आ काँच** (58) के बसता देखे चल गइनी जहाँ सुंदर **सलाद के कटोरा** आ नाजुक **चाय के केतली** (59) रहे।","t16-12-1":"१२. — पहिला मंजिल पर जाए खातिर हमनी के **कोरसेट** (60) के सो-केस के पाछे से गुजरनी जा, मोजा के दुकान लगे, जहाँ बहुते सुंदर **जाँघिया** (63) सजल रहे। लगहीं, एगो **दुकान के लइकी** (61) एगो **खरीदार मेहरारू** (62) के सुंदर रेसमी **कपड़ा** (64) चुनवावत रहली।","t16-12-2":"सीढ़ी से चढ़त हम देखनी कि दुकान जापानी **लालटेन** (65) , **छाता** (66) आ बहुते बड़का **खजूर के गाछ** (70) से सजल बा।","t16-13-1":"१३. — पहिला मंजिल पर देखे लायक कुछ जादे ना रहे ; बस फर्नीचर (*) , **लोहा के तिजोरी** (67) , **दराज वाला आलमारी** (68) आ **बच्चा के गाड़ी** (69) । बाकिर पूरा दुकान के नजारा बहुते **मजेदार** रहे।","t16-14-1":"१४. — हमनी के गोड़ के नीचे हम बाजा देखनी : **वीणा** (71) , **गिटार** (72) , **मैंडोलिन** (73) , **पिस्टन वाला भोंपू** (74) , **क्लैरिनेट** (75) , आपन **गज** (76) के साथे बेला आ इहाँ तक कि एगो **बड़का ढोल** (77) । थोड़ा आगे, कागज के विभाग लगे, एगो **बिद्यार्थी** (78) एगो **दुकान के छोकड़ा** (79) से कापी के थैली के भाव-ताव करत रहे। ओह लोग लगे हम एगो सुंदर **वर्णमाला के किताब** (80) देखनी।","t16-14-2":"दुकान के बीचोबीच एगो ऊँच **बड़ दिन के गाछ** (81) खड़ा रहे, जवन मोमबत्ती, छोट सजावट आ हर तरह के खेलौना से भरल रहे : **काठ के घोड़ा** (82) , **गुड़िया** (83) , वगैरह।","t16-14-3":"**इतर के दुकान** (84) आपन **दाँत के पानी** आ तरह-तरह के **इतर** के साथे बहुते नीक महक फइलावत रहे जवन हमनी तक पहुँचत रहे।","t16-tit-5":"हमनी के कुछ खरीदत बानी जा।","t16-15-1":"१५. — काहेकि हमार बाबा के लागे लागल कि बहुते देर हो गइल, हमनी के बड़का सीढ़ी से नीचे उतरनी जा। ऊ एगो **खगोल के तखता** (85) के सामने थोड़ा रुकलें, जवन — ऊ हमरा के कहलें — **धूमकेतु** (a) , **चंद्रगहन आ सूरजगहन** (b) , **चार दिसा** (c) **(उत्तर, दक्खिन, पूरब आ पच्छिम)** वाला हवा-चक्र, दू गो **गोलार्ध** (d) के नकसा, **ग्रह** (e) आ **सौरमंडल** (f) देखावत बा। एह सब में हमरा कुछ समझ ना आइल, आ हमरा त गुजरत **पहुँचावे वाला छोकड़ा** (86) के फीता वाला वरदी में बहुते जादे मन लागल, आ ओह सुंदर **पंखा** (87) में जे हमरा लगे रहे, **बटुआ** (88) आ **पर्स** (89) के बगल में।","t16-16-1":"१६. — हम बसता पर **पंख** (90) आ **पेटी के बकुआ** (91) भी निहारनी, आ ऊ सुंदर **बनावटी फूल** (94) जे टोकरी में सुघर ढंग से सजल रहे। **बनफसा**, **तुदरी**, **सुंबुल** (95) , **जिरेनियम** (96) , **लिली** (97) आ **नस्तूर्तियम** (98) बहुते नीक से नकल कइल गइल रहे।","t16-tit-6":"बाबा के भेंट।","t16-17-1":"१७. — हम आपन बाबा से बिनती कइनी कि हमरा खातिर ओह **दाँत के बुरुस** (92) में से एगो खरीद दीं जे **बाल के पिन** (93) लगे एगो डिब्बा में रहे। ऊ मान गइलें आ हम खुदे आपन सामान के दाम गल्ला पर देवे गइनी, जेकरा लगे एगो बड़हन **खेप** (100) एगो **ग्राहक** (99) खातिर तइयार कइल जात रहे।","t16-18-1":"१८. — अचानक ओह लोग के बीच थोड़ा हलचल भइल जे कलात्मक **काँसा के मूरत** (101) लगे रुकल रहे। एगो **चोर** (102) के अभिए एगो **निरीक्षक** (103) रंगे हाथ धर लेले रहलें, जब ऊ केहू के जेब काटे के कोसिस करत रहे। लोग ओकर **गिरफ्तारी** खातिर पुलिस बोलववलस, आ ठीक जब हमनी के बाहर निकलत रहनी जा, ओह गुनहगार के हवालात ले जात रहे।"}