{"t01-apar-0":"व्याख्या-पुस्तिका संलग्न देल्मास सहायक तालिकाओं से ❦ पहली शृंखला","t01-apar-1":"तालिका सं. 1 विद्यालय। — माध्यमिक विद्यालय। — कक्षा।","t01-tit-1":"सामान्य विवरण।","t01-01-1":"1. — इस तालिका में एक **माध्यमिक विद्यालय** की **कक्षा** दिखाई गई है। इस कक्षा में आठ **मेज़ें** (18) और आठ **बेंच** (32) हैं। हर बेंच पर तीन विद्यार्थी बैठते हैं। **अध्यापक** (7) **कुर्सी** (8) पर अपने **मंच** (6) के पीछे बैठे हैं।","t01-02-1":"2. — मंच के बाईं ओर काँच की एक **अलमारी** (15) खड़ी है। दाईं ओर **श्यामपट** (1) है, और उस पर **झाड़न** (2) तथा **खड़िया** (3) ।","t01-02-2":"मंच के ऊपर **भित्ति-चित्र** ( 9 , 11 , 12 ) और एक **मानचित्र** (10) टँगे हैं।","t01-03-1":"3. — सब विद्यार्थी अपनी **जगह** (17) पर नहीं हैं। जॉन (4) श्यामपट के पास खड़ा है; वह झाड़न पकड़े हुए है और **ज्यामितीय आकृतियाँ** मिटा रहा है।","t01-03-2":"पीटर मंच के पास है; वह **लिखित अभ्यास** (5) इकट्ठे करके अध्यापक के पास ले जा रहा है।","t01-04-1":"4. — यह अध्यापक **आधुनिक भाषाओं** के अध्यापक हैं। वे विद्यार्थियों को विदेशी भाषाएँ **(जर्मन, अंग्रेज़ी, स्पेनी, इतालवी, रूसी** या **फ़्रेंच)** बोलना, पढ़ना और लिखना सिखाते हैं।","t01-05-1":"5. — कक्षा बहुत बड़ी और बहुत उजली है। सिरे पर हवा और उजाला आने के लिए दो **रोशनदानों** (78) वाली एक चौड़ी **खिड़की** और एक **काँच का दरवाज़ा** है।","t01-05-2":"यह कक्षा ठंडी नहीं है। बीच में उसे गरम रखने के लिए एक बहुत अच्छी **अँगीठी** (46) रखी है, अपनी **नली** (45) समेत।","t01-05-3":"दीवार पर **खूँटियाँ** (58) जड़ी हैं; उन पर विद्यार्थियों की टोपियाँ और कोट टँगे रहते हैं।","t01-tit-2":"खेल का प्रांगण।","t01-06-1":"6. — **घड़ी** (63) नौ बजकर पाँच मिनट बता रही है।","t01-06-2":"**अवकाश** (76) अभी समाप्त हुआ है और पाठ फिर आरंभ हो रहा है। अवकाश **प्रांगण** (75) में होता है। हमें कुछ विद्यार्थी खेलते दिखाई देते हैं। एक **सहायक अध्यापक** (74) उन पर नज़र रखे हुए है।","t01-07-1":"7. — प्रांगण में हमें और भी कई लोग दिखाई देते हैं: **निरीक्षक** (73) , **प्रधानाचार्य** (71) और **अनुशासक** (72) ।","t01-07-2":"निरीक्षक विद्यालयों का निरीक्षण करते हैं, प्रधानाचार्य विद्यालय चलाते हैं, अनुशासक विद्यार्थियों की पढ़ाई पर नज़र रखते हैं।","t01-07-3":"चौथे व्यक्ति **चपरासी** (77) हैं। वे अनुपस्थित विद्यार्थियों के नाम लिखने के लिए बगल में एक रजिस्टर दबाए हुए हैं।","t01-08-1":"8. — प्रांगण के सिरे पर **व्यायाम के उपकरण** (70) और **हस्तकला** (69) की कार्यशाला है।","t01-08-2":"तालिका के दाईं ओर **संगीत** और **चित्रकला** के **कक्ष** मुश्किल से दिखाई देते हैं।","t01-tit-3":"विस्तृत विवरण।","t01-tit-4":"अच्छे विद्यार्थी।","t01-09-1":"9. — मंच के दाईं ओर पहली बेंच पर बैठे विद्यार्थी **हेनरी** (*) , **स्टीफ़न** और **चार्ल्स** हैं।","t01-09-2":"हेनरी बहुत ध्यान देने वाला और मेहनती है; वह अध्यापक की बात सुन रहा है। उसकी मेज़ पर एक **कापी** (28) , एक **पुस्तक** (29) , एक **शब्दकोश** (30) और एक **कलमदान** (31) है। उसकी पुस्तक में बहुत से **पृष्ठ** हैं; हर अध्याय में कई **अनुच्छेद** हैं और हर **पंक्ति** में बहुत से **शब्द**।","t01-09-4":"उसका पड़ोसी स्टीफ़न (24) उत्साही है। वह अगली बार का दिया हुआ पाठ अपनी कापी में लिख रहा है। उसकी **लिखावट** सुंदर है। उसकी पुस्तक बंद है। केवल **जिल्द** (27) दिखाई देती है। उसके पास उसका **परकार** (26) पड़ा है।","t01-09-5":"चार्ल्स (23) हाथ में पुस्तक लिए है; वह उसे खोलकर अपना पाठ फिर दोहरा रहा है। हर विद्यार्थी की तरह उसके सामने भी एक **दवात** (25) है। वह आज्ञाकारी है।","t01-10-1":"10. — अगली मेज़ पर **लुई, एंटनी** और **पॉल** हैं। लुई अपना **पाठ** (22) सुना रहा है और अध्यापक के **प्रश्नों** का उत्तर दे रहा है। एंटनी (21) बहुत असावधान है; अध्यापक कभी-कभी उसे दंड भी देते हैं। पॉल (20) अच्छा मित्र है, मिलनसार और उपकारी। वह बहुत ध्यान देता है।","t01-tit-5":"बुरे विद्यार्थी।","t01-11-1":"11. — हेनरी के पीछे **जॉर्ज** (38) बैठा है। वह बुरा लड़का नहीं है, पर **बातूनी**, असावधान और चंचल है। उसकी **चपलता** और **अवज्ञा** पाठ के समय **विघ्न** डालती हैं, और उसे प्रायः कड़ी **चेतावनी** मिलनी चाहिए। उसकी **कच्ची कापी** (35) गंदी है, वह उस पर अपनी **कलम** (34) से **स्याही के धब्बे** डालता रहता है, इसीलिए उसे हमेशा अपना **रबड़** (36) चाहिए; उसका **बस्ता** (33) फटा हुआ है, क्योंकि वह बहुत लापरवाह है। आधुनिक भाषाओं की कक्षा में वह अपना **पेंसिल-धारक** (37) क्यों लाता है?","t01-11-2":"उसका पड़ोसी एडमंड (39) उसे पसंद नहीं करता। वह मानें तो थोड़ा आलसी है, पर शांत और स्थिर है। वह बकबक नहीं करता; बस, सुनने के बदले वह अपनी **पाठ्य-पुस्तक** की **कहानियाँ** पढ़ना अधिक पसंद करता है।","t01-11-3":"इस बेंच का तीसरा विद्यार्थी **लुडोविक** (40) है। वह परिश्रमी है। वह **कागज़ के** एक सफ़ेद **पन्ने** पर लिख रहा है। अपने सामने उसने अपना **सोख़्ता** (41) रखा है।","t01-12-1":"12. — अध्यापक के बाईं ओर दूसरी बेंच के विद्यार्थी बहुत छोटे हैं। पहला, नन्हा **एमिल**, अभी अच्छी तरह लिख नहीं पाता; वह अपनी **स्लेट** (42) , अपनी **स्लेट-पेंसिल** और अपना **स्पंज** (43) लाता है।","t01-12-2":"उसके पास **ऑगस्ट** और **बर्नार्ड** (44) हैं। पिछला अच्छा काम करता है, पर उसका **वेश** बहुत मैला-कुचैला रहता है।","t01-13-1":"13. — उनके पीछे तीन **आलसी** बैठे हैं। **अल्बर्ट** अपने पाठ याद नहीं करता। **जेम्स** (47) सुनने के बदले सो रहा है। उसका **आलस्य** उसे **डाँट** और **दंड** तक दिलाता है। अंत में **क्रिश्चियन** (48) कहीं अधिक चंचल है। उसका **आचरण** बुरा है और वह सुधरने का कोई यत्न नहीं करता।","t01-14-1":"14. — उनके पड़ोसी, इसके विपरीत, सुशील हैं। **अर्नेस्ट** (51) को क्रम और नियम प्रिय हैं; वह सदा अपना **रूलर** (50) और अपनी **पेंसिल** (49) काम में लाता है। वह **बाह्य छात्र** है।","t01-14-2":"**फ़्रांसिस** (52) **छात्रावासी** है; वह वरदी पहनता है, और विद्यालय में ही खाता और सोता है। वह अच्छा **मित्र** है।","t01-14-3":"मॉरिस अपने **चाकू** (56) से अपनी **पेंसिल** छील रहा है; वह बहुत सावधान है।","t01-14-4":"वह अपनी सब पुस्तकें लाता है, अपना **व्याकरण** (55) , अपनी **नोटबुक** (54) , और एक **लिखने का गद्दा** (53) भी। उसका **थैला** (57) उसके पीछे ज़मीन पर है।","t01-14-5":"कक्षा के पीछे की दो मेज़ों पर **अच्छे विद्यार्थी** (19) बैठे हैं।","t01-tit-6":"चित्रकला और संगीत।","t01-15-1":"15. — **चित्रकला-कक्ष** में दीवार पर सुंदर **नमूने** टँगे हैं और छत से एक **छाया-आवरण** समेत **लैंप** (62) लटका है। **अध्यापक** (60) बहुत धैर्यवान हैं; वे विद्यार्थियों के **चित्र** (61) सुधारते हैं और उन्हें सामने रखी **प्रतिमा** (59) देखकर चित्र बनाना सिखाते हैं।","t01-16-1":"16. — **संगीत-कक्ष** बहुत रोचक लगता है। वहाँ **संगीत** पढ़ना, **स्वरलिपि** पर लिखे **स्वर** (67) गाना (डो, रे, मी, फ़ा, सोल, ला, सी = C. D. E. F. G. A. B.), **कुंजियाँ** पहचानना और मनोहर **धुनें** गाना सिखाया जाता है। स्वरलिपियाँ **रिहल** (65) पर रखी जाती हैं। एक विद्यार्थी **पियानो बजा रहा** (64) है और **संगीत-अध्यापक** (66) **ताल दे रहे** (68) हैं।","t01-17-1":"17. — हमें **हस्तकला** (69) की **कार्यशाला** का एक कोना मुश्किल से दिखाई देता है, जहाँ बच्चे लकड़ी छीलना और लोहा रेतना सीख सकते हैं। यह हर विद्यालय में नहीं होती।","t01-tit-7":"विज्ञान-कक्ष।","t01-18-1":"18. — गणित के अध्यापक विद्यार्थियों को **ज्यामिति, अंकगणित, गणना** और **मीटरी प्रणाली** पढ़ाते हैं। तालिका पर हमें ज्यामिति की मुख्य आकृतियाँ दिखाई देती हैं: एक **वृत्त** (a) , एक **वर्ग** (b) , एक **त्रिभुज** (c) , एक **रेखा** (d) ।","t01-18-2":"हमें एक **हिसाब** भी दिखाई देता है; वह न **जोड़** है, न **घटाव**, न **गुणा**: वह **भाग** (e) है।","t01-19-1":"19. — मीटरी प्रणाली की तालिका पर हमें दिखाई देते हैं: एक **मीटर** (a) , एक **तराज़ू** (b) और उसके **बाट**, एक **लीटर** (e) , एक **डेकालीटर** (f) , एक **डेसीलीटर** और एक **घन मीटर** (d) ।","t01-19-2":"विद्यार्थी **प्राकृतिक विज्ञान** (11) — प्राणिविज्ञान (a) , वनस्पतिविज्ञान (b) , भूविज्ञान (c) — और **इतिहास** (12) भी पढ़ते हैं।","t01-19-3":"अलमारी में **भौतिकी** (15) और **रसायन** (16) के उपकरण रखे हैं।","t01-19-4":"अलमारी के ऊपर हैं: एक **गोला** (14) , एक **शंकु** और एक **भूगोलक** (13) ।","t01-19-5":"तालिकाओं के ऊपर एक **मानचित्र** टँगा है जिस पर संसार के पाँचों भाग दिखाए गए हैं: **यूरोप** (e) , **एशिया** (g) , **अफ़्रीका** (f) , **अमेरिका** ( a b ) और **ओशिआनिया** (h) , तथा दो बड़े महासागर, **प्रशांत** (c) और **अटलांटिक** (d) ।","t02-apar-1":"तालिका सं. 2 मानव शरीर। — अवकाश। खेल।","t02-tit-0":"मानव शरीर। *(प्राकृतिक विज्ञान का एक सरल पाठ।)*","t02-01-1":"1. — मानव शरीर के मुख्य भाग ये हैं: **सिर**, **धड़** और **अंग**।","t02-tit-1":"सिर।","t02-02-1":"2. — सिर के दो भाग हैं: **कपाल**, जिसमें **मस्तिष्क** रहता है और जिसे **बाल** ढके रहते हैं, तथा **मुख**।","t02-03-1":"3. — हमारे चित्र में न कपाल दिखाई देता है न मस्तिष्क; पर मुख के मुख्य भाग हमें बहुत स्पष्ट दिखाई देते हैं।","t02-04-1":"4. — सबसे पहले यह **ललाट** है, जो प्रबल बुद्धि और सदा काम करते मन का पता देता है। **कनपटियाँ** बहुत खुली हैं। **आँख** चंचल और चौड़ी खुली है। एक घनी **भौंह** और लंबी **पलकें** उसकी रक्षा करती हैं।","t02-05-1":"5. — यहाँ **नाक** और **नथुने** भी हैं। नाक से हम सूँघते और साँस लेते हैं। नाक के दोनों ओर **गाल** हैं, और उनसे परे **कान**। मुख का निचला भाग **मुँह** और **ठोड़ी** से बनता है।","t02-06-1":"6. — वे हमें अच्छी तरह दिखाई नहीं देते, क्योंकि **मूँछ** और **दाढ़ी** उन्हें छिपाए रखती हैं। पर हम जानते हैं कि मुँह में दो **होंठ**, **ऊपरी जबड़ा** और **निचला जबड़ा** अपने **दाँतों** समेत, तथा **जीभ** होती है। मुँह से हम बोलते और खाते हैं। जीभ से हम अपने भोजन का स्वाद लेते हैं।","t02-07-1":"7. — आँख, कान, नाक और मुँह, उँगलियों के साथ, पाँच इंद्रियों के अंग हैं: **दृष्टि**, **श्रवण**, **घ्राण**, **स्वाद** और **स्पर्श**।","t02-08-1":"8. — इस प्रकार सिर मानव शरीर के सबसे रोचक भागों में से एक है।","t02-tit-2":"धड़।","t02-09-1":"9. — **गरदन** सिर को धड़ से जोड़ती है। उसमें **गला** और **गुद्दी** आते हैं।","t02-10-1":"10. — धड़ में भी बहुत से आवश्यक अंग रहते हैं। **छाती** में **फेफड़े** हैं, जिनसे हम साँस लेते हैं, और **हृदय**, जो जीवन का केंद्र है। जब हृदय धड़कना बंद कर देता है, प्राणी मर जाता है।","t02-11-1":"11. — **पसलियाँ** छाती को सँभालती हैं।","t02-12-1":"12. — धड़ के दूसरे भाग हैं **पार्श्व**, **पीठ**, **कंधे** और **उदर** (पेट)। हम सोने के लिए करवट या पीठ के बल लेटते हैं, और बोझ कंधे पर ढोते हैं।","t02-13-1":"13. — उदर में **आमाशय** और **आँतें** हैं। वे हमें भोजन पचाने में काम आती हैं।","t02-tit-3":"अंग।","t02-14-1":"14. — हमारे चार **अंग** हैं: दो **बाँहें** और दो **टाँगें**। बाँहों से हम वस्तुएँ लेते, पकड़ते, उठाते और बटोरते हैं; टाँगों से हम खड़े होते, चलते और दौड़ते हैं।","t02-15-1":"15. — **कंधा** बाँह को शरीर से जोड़ता है। एक बहुत मज़बूत **पेशी**, द्विशिर, बाँह को हिलाती है, जिसे **कोहनी** **प्रकोष्ठ** से जोड़ती है। **कलाई** **हाथ** का जोड़ बनाती है, जो **उँगलियों** और **नाखूनों** पर समाप्त होता है। हाथ पर हमें एक **शिरा** (और एक धमनी) दिखाई देती है, जिसमें **रक्त** बहता है।","t02-16-1":"16. — टाँग के भाग ये हैं: **जाँघ**, **घुटना** और **घुटने का पिछला भाग**, **पिंडली**, जिसका **मांस** **त्वचा** से ढका है, **टखना** और **पैर**। टाँग की **हड्डियाँ** बहुत मोटी और बहुत दृढ़ हैं। पैर के सिरे पर **पैर की उँगलियाँ** हैं। दूसरे भाग **तलवा** और **एड़ी** हैं।","t02-17-1":"17. — मानव शरीर का लगभग पूरा विवरण यही है।","t02-17-2":"*टिप्पणी।* — *« मेरा ... दुखता है (मेरा सिर, इत्यादि) » वाक्य की सहायता से अध्यापक यह सारी शब्दावली अच्छे या बुरे* **शारीरिक स्वास्थ्य** *की दृष्टि से फिर दोहरा सकेंगे।*","t02-tit-4":"व्यायाम। *(एक विद्यार्थी की ज़बानी।)*","t02-18-1":"18. — लचीले, फुरतीले और स्वस्थ रहने के लिए हमें अपनी टाँगों और बाँहों से काम लेना चाहिए। इसीलिए हम खेल खेलते हैं और **व्यायाम** करते हैं।","t02-19-1":"19. — सप्ताह भर ये दोनों अभ्यास विद्यालय के प्रांगण में होते हैं (देखिए तालिका सं. 1)। पर बृहस्पतिवार और रविवार को हम एक बड़े मैदान में जाते हैं, जहाँ दौड़ने और मौज करने की जगह मिलती है।","t02-20-1":"20. — हमारे अध्यापक और हमारे माता-पिता कभी-कभी साथ आते हैं; पर अभ्यास **व्यायाम-अध्यापक** (12) ही कराते हैं।","t02-21-1":"21. — मैदान में, प्रवेश के बाईं ओर, **व्यायाम के उपकरण** (1) खड़े हैं: हम **सीढ़ी** (2) पर चढ़ते हैं, **छल्लों** (3) और **झूला-डंडे** (4) पर उलटे झूलते हैं, **रस्सी की सीढ़ी** (5) या **गाँठदार रस्सी** (6) के सिरे तक हाथों-हाथ चढ़ जाते हैं।","t02-22-1":"22. — इस बीच हमारे साथी **काठ के घोड़े** (7) या **समांतर डंडों** (11) के ऊपर से कूदते हैं। कुछ **मुक्केबाज़ी** (8) करते हैं या मुखौटा और **फ़ॉयल** लेकर **तलवारबाज़ी** (9) करते हैं। कुछ अंत में **डंबल** (10) उठाते हैं।","t02-tit-5":"खेल।","t02-23-1":"23. — व्यायाम करने वालों के चारों ओर लड़के और लड़कियाँ तरह-तरह के **खेल** खेल रहे हैं। लड़कियाँ अपने **घेरे** (14) से मन बहलाती हैं; वे **रस्सी कूदती** (13) हैं, या अपने भाइयों और चचेरे भाइयों को **क्रोके** (15) के खेल में बुलाती हैं। जब विरोधी सोचता है कि वह सहज ही घेरे में से निकल जाएगा, तभी वे अपने **काठ के मुँगरे** से उसकी **गेंद** दूर मार देती हैं, और इससे उन्हें बड़ा आनंद आता है!","t02-24-1":"24. — लड़के अधिक ज़ोर के खेल पसंद करते हैं। वे प्रसन्नता से **नौगोलियाँ** (16) खेलते हैं, जिन्हें वे **गेंद** (17) से साफ़ गिरा देते हैं। वे **लट्टू** (18) और **बिलबोके** (19) को, यहाँ तक कि **मेंढक के खेल** (20) को भी, तुच्छ नहीं समझते। पर उनके प्रिय खेल **कंचे** (21) और **दीवार-गेंद** (22) हैं, क्योंकि **काँच-घर** (26) की दीवार हलकी गेंद उछालने के लिए ठीक बैठती है।","t02-25-1":"25. — नन्हा जॉन अपने **बाँसों** (24) पर चढ़ा बहुत कुशल है और अपना संतुलन खूब सँभालता है। उसके पास कुछ साथी उसी काँच-घर में और **बाड़** के पीछे **लुका-छिपी** (25) खेल रहे हैं। कुछ को **हथेली का खेल** (28) अधिक भाता है, या **चिड़िया** (29) , जो एक **बल्ले** से दूसरे तक उड़ती रहती है।","t02-26-1":"26. — मैदान के बीच दो पेड़ हैं। उनमें से एक के नीचे सात-आठ लड़कों ने **कंधा-कूद** (30) (*) का खेल जमाया है। यह खेल हर देश में नहीं जाना जाता; पर **बकरी-कूद** क्या है, यह सब जानते हैं, जिसे बच्चे इस समय नहीं खेल रहे।","t02-tit-6":"खुली हवा के खेल।","t02-27-1":"27. — **आँख-मिचौली** (31) में भी बड़ा मज़ा आता है; लड़कियाँ और लड़के बारी-बारी से आँखों पर **पट्टी** बाँधते हैं और उन फूहड़ों को पकड़ते हैं जो पकड़े जाने देते हैं।","t02-28-1":"28. — मैदान के बीच, यह रहा एक बहुत फ़्रेंच खेल, यद्यपि कुछ खुरदरा: यह **रीछ** (32) है, जो **पतंग** (33) के शांत खेल से, यहाँ तक कि अंग्रेज़ी खेल **टेनिस** (34) से भी, कहीं अधिक शोरगुल वाला है।","t02-29-1":"29. — वह अंतिम खेल बड़े विद्यार्थियों का आनंद है। हमारे अध्यापक स्वयं भी उसे प्रसन्नता से अपनाते हैं। उसमें बड़ी कुशलता और फुरती चाहिए, और वह मुझे बहुत भाता है। **झूला** (35) मैं लड़कियों के लिए छोड़ देता हूँ।","t02-30-1":"30. — एक और अंग्रेज़ी खेल भी मुझे नहीं भाता, जो सहज ही ख़तरनाक हो सकता है।","t02-30-1b":"मेरा अभिप्राय **फ़ुटबॉल** (36) से है, जो मेरे बड़े भाई का आनंद है। मुझे हमारा पुराना खेल **बंदी-अड्डा** (38) अधिक भाता है, उतना ही स्वास्थ्यकर और कहीं कम कठोर।","t02-tit-7":"साइकिल और गेंद के खेल।","t02-31-1":"31. — मुझे मैदान के चारों ओर **साइकिल** (37) चलाना भी अच्छा लगता है।","t02-32-1":"32. — अगले वर्ष मैं **घुड़सवारी** (39) सीखूँगा। घोड़ा कैसा सुंदर लगता है जब वह ठुमकता या सुडौल दुलकी चलता है, और सरपट बाधाएँ पार कर जाता है!","t02-33-1":"33. — गरमियों में हम **तैरना** (40) सीखते हैं। हम नदी के स्वच्छ ठंडे पानी में आनंद से डुबकी लगाते और नहाते हैं। कभी-कभी अंत में हम एक कागज़ का **गुब्बारा** (41) उड़ाते हैं, जो गरम हवा से भरते ही गंभीरता से ऊपर उठ जाता है।","t02-34-1":"34. — और भी बहुत से खेल हैं, पर उन्हें गिनाते-गिनाते मैं कभी न चुकूँगा, और इस छोटे से वृत्तांत से ही दिखाई देता है कि हमारे सुंदर मैदान पर बृहस्पतिवार नीरस होने से बहुत दूर हैं।","t02-34-2":"न. ब. — *अध्यापक इस अध्याय को सहज ही पूरा कर सकेंगे, प्रत्येक महत्त्वपूर्ण खेल का अधिक विस्तार से वर्णन करके।*","t03-apar-1":"तालिका सं. 3 बचपन और यौवन।","t03-apar-2":"(तालिकाएँ 3 और 4 इस प्रकार रची गई हैं कि चार **पारिवारिक दृश्यों** में **मौसम**, **आयु**, **परिवार**, **वस्त्र** और **स्वास्थ्य** की मूल शब्दावली सामने आ जाए।)","t03-tit-1":"*पहला दृश्य।*","t03-tit-2":"गाँव में एक बपतिस्मा।","t03-tit-3":"वसंत।","t03-c1-01-1":"1. — हम **वसंत** में हैं, **मार्च**, **अप्रैल** या **मई** के महीने में, **सप्ताह** के किसी दिन — **सोमवार**, **मंगलवार** या **बुधवार**। सुबह के **दस बजे** हैं।","t03-c1-02-1":"2. — **मौसम** सुहावना है, **हवा** निर्मल। सूरज चमक रहा है। कुछ छोटे-छोटे **बादल** (2) नीले **आकाश** (1) में उठ रहे हैं।","t03-c1-03-1":"3. — **पेड़ों** पर अभी **पत्ते** लगभग नहीं हैं। दुबले **चिनार** (3) और ऊँचे **प्लेन वृक्ष** (17) पर अब तक कलियाँ ही हैं।","t03-c1-04-1":"4. — **अबाबीलें** (4) लौट आई हैं, और आनंद से चीखती हुई उस **शिखर-चूल** (7) के चारों ओर चक्कर काट रही हैं जो **घंटाघर** (5) की है, और वह घंटाघर गाँव के **गिरजे** (6) पर खड़ा है।","t03-tit-4":"गिरजा।","t03-c1-05-1":"5. — यह गिरजा बहुत सादा है, अपने बड़े **द्वार** (13) और अपनी बड़ी **घड़ी** (8) के साथ। **छोटी सुई** (9) X के अंक पर है: वह **घंटे** बताती है। **बड़ी वाली** (10) XII (दोपहर) पर है; वह **मिनट** बताती है।","t03-c1-06-1":"6. — मीनार में **घंटे** (11) प्रसन्नता से बज रहे हैं। छत के सिरे पर पत्थर का एक छोटा **क्रूस** (12) खड़ा है।","t03-c1-07-1":"7. — गिरजे में केवल बड़ा **द्वार** (13) ही नहीं, बगल में एक छोटा दरवाज़ा भी है। उसी दरवाज़े से **पादरी** (15) , अपने **चोगे** में, **वस्त्रागार** (14) से निकलकर **पादरी-निवास** (19) की ओर जाते हैं।","t03-c1-08-1":"8. — उनके पास यह रही **दूधवाली** (24) अपने **गधे** (23) के साथ। वह शहर से लौट रही है, जहाँ बच्चों के लिए अपना अच्छा दूध पहुँचा आई है।","t03-tit-5":"फलों का बग़ीचा।","t03-c1-09-1":"9. — उस्ताद अलीबोरों (गधा) इस सुबह की दौड़ से बहुत प्रसन्न है। वह पड़ोस के **बग़ीचे** के उन **फूलों** (20) से महकी हवा आनंद से भीतर खींचता है जो **फलदार पेड़ों** (18) को ढके हैं। वे **आड़ू के पेड़** (18) और **खुबानी के पेड़** (19) बिलकुल गुलाबी और सफ़ेद हैं, और अच्छी फसल की आशा बँधाते हैं।","t03-c1-10-1":"10. — इस बीच नन्ही **मधुमक्खियाँ** (22) , जो **छत्ते** (21) से आती हैं, वहाँ जाकर गुनगुनाती हुई अपना मीठा **शहद** बटोरती हैं।","t03-c1-11-1":"11. — पर यह क्या हो रहा है? गाँव के बच्चे दौड़ते हुए आ रहे हैं और डरी हुई **बत्तखों** (25) को तितर-बितर कर रहे हैं। यह वह जुलूस है जो मुंशी के बेटे के **बपतिस्मे** के बाद गिरजे से निकल रहा है।","t03-c1-12-1":"12. — नन्हा जेम्स, अपने **पालने** (26) में, घंटों की प्रसन्न ध्वनि से जाग उठता है, और उसकी बहन मेडलिन, जो जुलूस देखना चाहती है, अपनी माँ से कहती है कि आकर देहरी पर ही उसके बाल सँवार दें और उसे कपड़े पहना दें।","t03-c1-13-1":"13. — उसकी माँ मान जाती है। वह अपना **सिर का कपड़ा** (28) , अपनी **चोली** (29) और अपना **एप्रन** (30) पहनकर दरवाज़े के सामने एक छोटी कुर्सी पर आ बैठती है। मेडलिन पर केवल उसका **पेटीकोट** (31) और उसकी **कुरती** (32) है।","t03-c1-14-1":"14. — वह कितनी प्रसन्न है! वह अपने प्रिय फूल भूल जाती है — अपने **कार्नेशन** (34) , जिन पर **तितलियाँ** (35) बैठती हैं, अपने **ट्यूलिप** (36) , अपनी **घाटी की लिली** (37) जो **गमलों** (38) में हैं, और वे गमले **दीवार** (33) पर रखे हैं, और अपने **गुलाब** (39) जो इतनी सुंदर बाड़ बनाते हैं। वह जुलूस की महिलाओं के बहुमूल्य वस्त्र निहार रही है।","t03-c1-15-1":"15. — गाँव के लड़के वस्त्रों पर कम ध्यान देते हैं। वे **मिठाइयाँ** (55) या **सिक्के** (52) पाने के लिए आगे लपकते और धक्कमधक्का करते हैं। उनमें से एक रो (40) रहा है।","t03-c1-16-1":"16. — दूसरे ने **कुत्ते** (42) का पंजा कुचल दिया है, जो कूँ-कूँ करता भाग जाता है और **मुर्गी** (43) तथा उसके **चूज़ों** (44) को उड़ा देता है।","t03-tit-6":"बपतिस्मे का जुलूस।","t03-c1-17-1":"17. — जुलूस के आगे-आगे **धाय** (45) चल रही है। उसके सिर पर लंबे फीतों वाली सुंदर **टोपी** (46) है। वह **नवजात शिशु** (47) को लिए है, जो पूरा **लेस** (48) में लिपटा है।","t03-c1-18-1":"18. — धाय के पीछे **धर्मपिता** (49) और **धर्ममाता** (53) आते हैं। वे मिठाइयाँ और सिक्के बाँट रहे हैं। धर्मपिता के हाथ में **दस्ताने** (51) और सिर पर **ऊँचा हैट** (50) है। धर्ममाता हाथ में एक सुंदर **गुलदस्ता** (54) लिए है।","t03-c1-19-1":"19. — उनके पीछे हमें बच्चे के **चाचा** (56) और **चाची** (58) दिखाई देते हैं। चाची के सिर पर सजीला **हैट** (59) है, चाचा पर काला **लंबा कोट** (57) और सफ़ेद वास्कट। फिर **चचेरा भाई** (60) और उसकी **चचेरी बहन** (61) आते हैं। वह नवजात शिशु की **बहन** (62) , नन्ही बर्था, का हाथ थामे है।","t03-c1-20-1":"20. — बर्था का दूसरा **भाई** (63) पीछे चल रहा है। वह एक **रिश्तेदार** (64) को हाथ दिए हुए है। परिवार के **मित्र** (65) उनके बाद आते हैं।","t03-tit-7":"तमाशबीन।","t03-c1-21-1":"21. — जुलूस के पास यह रहा एक **भिखारी** (66) , अपनी **बैसाखी** (67) के सहारे। वह भीख माँग रहा है।","t03-c1-22-1":"22. — दूसरी ओर एक बहुत **शिष्ट** (68) लड़का है। वह अपनी टोपी उठाकर जान-पहचान वालों को **« नमस्ते »** कहता है।","t03-c1-23-1":"23. — गाँव वाले बपतिस्मे का जुलूस निकलते देखने अपने घरों से बाहर आ गए हैं। हमें अपनी **सूती टोपी** पहने एक **गँवई आदमी** (69) दिखाई देता है और उसके पास एक **गँवई औरत** (70) । फिर एक **बुढ़िया** (71) , जो अपनी **छड़ी** (72) के सहारे है। अंत में **चक्कीवाला** (73) अपने चौड़े **नमदे के हैट** (74) में, और **खड़ाऊँ** (75) पहने एक जवान गँवई औरत, जो अपने बच्चे को चलना सिखा रही है।","t03-c1-24-1":"24. — दृश्य बहुत जीवंत है।","t03-tit-8":"*दूसरा दृश्य।*","t03-tit-9":"सार्वजनिक उत्सव।","t03-tit-10":"जल-क्रीड़ा और नौका-दौड़।","t03-c2-01-1":"1. — **गरमी** आ गई है। **जून** (**जुलाई** या **अगस्त**) के महीने का तपता सूरज नौजवानों को नहाने और नौका चलाने के लिए ललचाता है।","t03-c2-02-1":"2. — नदी के दाहिने किनारे पर नाविक जल-क्रीड़ा और नौका-दौड़ में उतरने के लिए कपड़े उतार रहे हैं।","t03-c2-03-1":"3. — उनमें से एक अपने **जूते** (1) उतार रहा है; वह उनके तसमे (बटन) खोल रहा है। उसके दो साथी पहले ही तैयार हैं। अब उन पर केवल अपनी **बनियान** (2) और **तैरने का जाँघिया** (3) है। वे अपने साथियों की प्रतीक्षा करते बातें कर रहे हैं। वे दूसरे किनारे पर लगे मेले और उत्सव की बात कर रहे हैं।","t03-c2-04-1":"4. — उनके पास ज़मीन पर उनके साथियों के **कपड़े** पड़े हैं: एक **जोड़ी** **बूट** (4) , **जूते** (5) , **मोज़े** (6) , **नमदे** (7) और **तिनके** (8) के हैट तथा एक **टाई** (9) ।","t03-c2-05-1":"5. — एक नौजवान ने अपना **कोट** (10) सावधानी से तह किया है। वह उसे एक तौलिये पर रख रहा है, जिसमें उसका पड़ोसी थोड़ी देर में उन दोनों के **सूट** बाँध देगा।","t03-c2-06-1":"6. — छठा लड़का पिछड़ गया है। उसके सिर पर अब भी उसकी **टोपी** (11) है। उसने न अपनी **कमीज़** (12) उतारी है, न अपना **कॉलर** (13) , न अपने **कफ़** (14) । वह हाथ में अपनी **वास्कट** (17) लिए है और अब भी अपना **पतलून** (16) तथा अपनी **गैलिसें** (15) पहने है। वह अगली दौड़ के लिए निश्चय ही तैयार न हो सकेगा।","t03-c2-07-1":"7. — नौजवानों के पास **ऊँटकटारों** (18) से घिरी एक पगडंडी नदी के किनारे उतरती है, जहाँ बूढ़ा जेम्स **सरकंडों** (19) के बीच शाम को छोड़ी जाने वाली **आतिशबाज़ी** (20) तैयार कर रहा है।","t03-tit-11":"दौड़।","t03-c2-08-1":"8. — नदी पर अपनी छतरियों की छाँह में कुछ महिलाएँ एक **डोंगी** (21) में निकली हैं। वे दौड़ देख रही हैं, जो बहुत रोमांचक है। हर **नाव** (22) में चार **खेवैये** (24) पूरी शक्ति से खींच रहे हैं, जब कि **कर्णधार** (26) **पतवार** (25) थामे नाज़ुक नाव को दिशा देता है। **डाँड़** (23) ताल से पानी पर पड़ते हैं, और हलकी नावें चकरा देने वाली गति से दौड़ती हैं।","t03-c2-09-1":"9. — कुछ नौजवान पुल के खंभे के पास **चिकने बाँस** (28) का पुरस्कार जीतने में लगे हैं। उनमें से एक लचकते फिसलन भरे बाँस पर सावधानी से सरकता हुआ सिरे पर बँधी नन्ही **झंडी** (29) तक पहुँचना चाहता है। उसका अभागा **प्रतिद्वंद्वी** (30) पानी में गिर पड़ा है। वह तैरकर किनारे लौट रहा है।","t03-c2-10-1":"10. — बड़े लड़के **जल-युद्ध** (32) खेल रहे हैं, **घाट** (33) के पास। एक बड़ी **भीड़** (31) **पुल** (27) की **मुँडेर** पर झुकी और **किनारे** पर ठसाठस भरी ये सब खेल देख रही है। पर कुछ तमाशबीन मुड़कर **चढ़ने के बाँस** (45) का खेल देखते हैं, या **पुरस्कार-वितरण** की ओर जाते **नगराध्यक्ष के जुलूस** को निहारते हैं।","t03-c2-11-1":"11. — सबसे पहले यह रहे कुछ **छोकरे** (35) , जो **बाजेवालों** (36) के आगे-आगे दौड़ रहे हैं; फिर आते हैं **नगराध्यक्ष** (37) , उनके उप-अध्यक्ष और छोटे नगर की **नगर-परिषद्**। सबसे पीछे **दमकल वाले** (38) चलते हैं।","t03-tit-12":"मेला।","t03-c2-12-1":"12. — **मेले के मैदान** (39) पर बड़ी भीड़ है। लोग तरह-तरह के **तंबू** देखने आते हैं: **लकड़ी के घोड़े** (40) , **सरकस** (41) , जहाँ खेल आरंभ भी हो चुका है; **सार्वजनिक नाच** (42) , जहाँ नगर के नौजवान लड़के और लड़कियाँ **नाचने** का सुख ले रहे हैं।","t03-c2-13-1":"13. — सिरे पर हमें **अखाड़ा** (44) दिखाई देता है, जहाँ वीर स्पेनी **साँड़-योद्धा** क्रुद्ध **साँड़** (45) से लड़ता है; फिर **झूला-रेल** (49) और **निशानेबाज़ी का तंबू** (46) , जहाँ लोग **बंदूक** चलाने और **निशाने** पर मारने का अभ्यास करते हैं।","t03-c2-14-1":"14. — पास ही यह रहा **मेले का रंगमंच** (47) , जहाँ **प्रहसन** और **नाटक** खेले जाते हैं। उसके बिलकुल पास **दानव** (48) और **बौने** का तंबू है। पहले की **ऊँचाई** दो मीटर पंद्रह है; दूसरा मुश्किल से एक बच्चे जितना ऊँचा है।","t03-c2-15-1":"15. — अंत में यह रही बड़ी **चिड़ियाघर-गाड़ी** (50) , अपने **जंगली जानवरों** के साथ — अपने **बाघ** (51) के, जिसके **पंजे** बड़े बलवान हैं, अपने **सिंह** (52) के, जिसकी **अयाल** घनी है, अपनी दो **जिराफ़ों** (53) और अपने **हाथी** (54) के, जो अपनी **सूँड़** इतनी चतुराई से काम में लाता है।","t03-c2-16-1":"16. — **जानवर सधाने वाला** (55) , जो इन जानवरों को सिखाता है, तंबू के दरवाज़े पर खड़ा है।","t04-apar-1":"तालिका सं. 4 प्रौढ़ावस्था और वृद्धावस्था।","t04-tit-1":"*पहला दृश्य।* विवाह-भोज।","t04-tit-2":"शरद्।","t04-c1-01-1":"1. — वे नौजवान अब बड़े हो गए हैं। उनमें से एक, जॉन, विवाह कर रहा है। हम **विवाह-भोज** में हैं, जो वर और वधू के दोनों परिवारों को एक ही मेज़ के चारों ओर ले आता है।","t04-c1-02-1":"2. — हम **शरद्** में हैं, **सितंबर** के महीने में। **अक्तूबर** और **नवंबर** की ठंडी हवा ने अभी देहात से उसके हरे पत्ते नहीं छीने। शाम की हवा हलकी और सुगंधित है; इसलिए भोजन उस **बरामदे** (8) के नीचे परोसा जा रहा है जो बग़ीचे की ओर खुलता है।","t04-c1-03-1":"3. — दूर **पहाड़ी** (3) पर जॉन के माता-पिता का घर है, एक सजीला **देहाती मकान** (1) , हरियाली में छिपा; अच्छे अंगूर-बाग़, जिनसे बढ़िया शराब बनती है, ढलान को ढके हैं। अंगूर उगाने वाला उनकी देखभाल करता है।","t04-c1-04-1":"4. — बेलों के ऊपर से **तीतरों** (2) का एक झुंड उड़ता है, जो **शिकार-रक्षक** (5) के पास आने से चौंक गया है। वह, बगल में **बंदूक** दबाए और **कंधे पर शिकार-थैला** लटकाए, **झाड़ियाँ** (4) पीट रहा है, अपने **कुत्ते** (6) के साथ। वह जागीर पर नज़र रखता है और चोर-शिकारियों को शिकार नष्ट नहीं करने देता।","t04-c1-05-1":"5. — **बरामदे** के बाहर एक **सधी हुई बेल** चढ़ती है, जिससे भारी **अंगूर के गुच्छे** (7) लटकते हैं।","t04-c1-06-1":"6. — **मेज़** (16) को सजाने वाले शरद् के सुंदर फूल **गुलदाउदी** (9) हैं; वधू के **पिता** (10) ने अपने कोट के काज में एक लगा रखा है।","t04-c1-07-1":"7. — भोजन समाप्ति पर है। **नौकर** (11) मिठाई के बरतन लाने लगा है और थोड़ी देर में वह सब कुछ उठा ले जाएगा जिसकी अब ज़रूरत नहीं — **चम्मच** (14) , **काँटे** (12) , **छुरियाँ** (13) , **परोसने के बरतन** (15) ।","t04-tit-3":"परिवार।","t04-c1-08-1":"8. — सब प्रसन्न दिखाई देते हैं, और वर की **माँ** (17) जिस मुसकान से अपने बच्चों को देख रही है, वह बताती है कि वह कितनी सुखी है।","t04-c1-09-1":"9. — यह विवाह इलाके के दो संपन्न परिवारों को जोड़ता है। जॉन, **पति** (18) , एक बड़े ज़मींदार का **बेटा** है, और वह एक सफल कारखानेदार का **दामाद** बन रहा है।","t04-c1-10-1":"10. — **जोड़ा** जवान है, फिर भी उनकी **मँगनी** बहुत पहले हो चुकी थी। **नववधू** (19) , मार्था, नारंगी के फूलों से सजी अपनी **सफ़ेद पोशाक** में मोहक लगती है।","t04-c1-11-1":"11. — उसके **ससुर** (20) इतनी भली **बहू** पाकर प्रसन्न हैं, और जॉन की **सास** (21) अपनी **बेटी** को इतनी सुंदर देखकर मुसकरा रही हैं।","t04-c1-12-1":"12. — मेज़ के सिरे पर दूसरे **मेहमान** (22) बैठे हैं: **रिश्तेदार, मित्र, चचेरे भाई**। एक **प्रधान परिचारक** (23) , बाँह पर नैपकिन डाले, फुरती से उनकी सेवा कर रहा है।","t04-tit-4":"मित्र।","t04-c1-13-1":"13. — मेज़ के दाहिने भाग पर यह रही एक **युवती** (24) , वधू की **सहेली**, फिर वधू का **भाई**, जो उसका **सहबाला** (25) है। वह अपनी **सहबाली** (26) से बातें कर रहा है, जो वर की बहन है और इस विवाह से मार्था की **ननद** बन रही है। वह मोहक युवती है। उसके पास सुंदर **गहने** हैं, एक **मोतियों का हार** और सोने का एक **कंगन**।","t04-c1-14-1":"14. — उनके पास खड़े होकर गिलास उठाते सज्जन परिवार के एक **मित्र** (27) हैं। वे **वर के साक्षियों** में से एक हैं। वे **बधाई** दे रहे हैं, नवविवाहितों के **स्वास्थ्य** की कामना कर रहे हैं और उन्हें लंबे सुख की शुभेच्छा दे रहे हैं। वे पूरे ठाट में हैं: लंबा कोट और **चमड़े के चमकीले जूते** (28) । वे **दादी** (29) को साथ लाए हैं, जो **विधवा** हैं।","t04-c1-15-1":"15. — **लंबे कोट** (31) वाला वह नौजवान, जिसकी पतली काली मूँछ है, जॉन का **बहनोई** (30) है। वह प्रतिष्ठित अभियंता है। वह एक बहुत सजीली **युवती** (33) के पास बैठा है, जो मार्था की **बड़ी बहन** है और उस प्यारी नन्ही लड़की की माँ, जो अपने चचेरे भाई का हाथ थामे फूल देने और **« शुभ संध्या »** **कहने** आ रही है। इस महिला के **कर्णफूल** बहुत सुंदर हैं और उनके **केश-शृंगार** में सलीका है।","t04-c1-16-1":"16. — वह नन्हा चचेरा भाई, जो अपने **कुरते** (36) और अपनी ढीली **निकर** (37) में इतना अनोखा लगता है, बड़ा दयनीय है। वह **अनाथ** (35) है। बहुत छोटी उम्र में उसने अपने पिता और अपनी माता को खो दिया। उसके चाचा उसके **संरक्षक** (38) हैं, और उस बेचारे बच्चे को पालने के लिए ही कुँआरे रह गए। वे भले आदमी हैं। उनके सिर पर बाल कम हैं और उन्हें दूर का बहुत कम दिखता है; वे **नाक-चश्मा** लगाते हैं।","t04-tit-5":"मिठाई।","t04-c1-17-1":"17. — मेहमानों के पीछे, **मेज़पोश** बिछी एक मेज़ पर, **मिठाई** (39) सजी है। एक बड़े कटोरे में यह रहे फल: **आड़ू** (40) , **नाशपाती** (41) , **सेब** (42) , **खुबानी** (43) और **अंगूर** (44) । उनके पास **अनन्नास** (45) , एक सुंदर **केक** (46) , **मदिरा की बोतलें** (48) और **शैंपेन** (49) , तथा साफ़ **प्लेटों** (47) के ढेर भी।","t04-c1-18-1":"18. — **मदिरा-परिचारक** (50) पुरानी शराब की एक **बोतल** (52) खोल रहा है, **पेंच** (51) से। **डाट** (53) बड़ी कठिनाई से निकलती लगती है। इस परिचारक की बाँह पर एक **नैपकिन** (54) है।","t04-c1-19-1":"19. — भोजन के बाद सज्जन धूम्रपान-कक्ष में जाएँगे, और महिलाएँ नाच के लिए तैयार होने चली जाएँगी।","t04-tit-6":"*दूसरा दृश्य।* दादा का जन्मदिन।","t04-tit-7":"भेंट।","t04-c2-01-1":"1. — दस वर्ष बीत गए। जॉन के माता-पिता बूढ़े हो चले हैं, और वे अपने तीनों नातियों को बहुत प्यार करते हैं — दो **पोते** (2) और एक **पोती** (3) । आज **दादा का जन्मदिन** है, इसलिए बच्चे उन्हें बधाई देने आए हैं।","t04-c2-02-1":"2. — नन्हा पीटर अभी बहुत छोटा है; वह केवल तीन बरस का है। वह **बिल्ली** (1) को अपनी ओर आते देखता है। वह उसके सुंदर रेशमी **रोएँ** और लंबी **पूँछ** पर हाथ फेरना चाहता है; उसे यह नहीं सूझता कि उन सुडौल **पंजों** के नीचे तीखे नाखून हैं, जो उसे खरोंच भी सकते हैं।","t04-c2-03-1":"3. — उसकी बहन गैब्रिएल, जो उसका हाथ थामे है, कहीं अधिक गंभीर है, और मार्सेल, अपने बड़े **ओवरकोट** (4) और चमड़े की **पेटी** (5) में, पूरा छोटा आदमी लगता है, यद्यपि छोटी निकर उसके **मोज़े** (6) खुले छोड़ देती है।","t04-c2-04-1":"4. — उनके पिता ने अपना मोटा जाड़े का **ओवरकोट** (7) पहना है, **रोएँदार कॉलर** (8) समेत, और अपनी **जेब** (9) में एक गुलूबंद रखा है। उनकी पत्नी ने **पंखों** (10) से सजा नमदे का हैट, अपनी **जैकेट** (11) , अपना रोएँदार **गुलूबंद** (12) और अपना **मफ़** (13) पहना है।","t04-c2-05-1":"5. — बहुत ठंड है, क्योंकि जाड़ा आ गया है। **बर्फ़** (19) दिन भर गिरती रही है और घरों की छतें बिलकुल सफ़ेद हैं। **रात** के साथ ठंड और भी तीखी हो जाती है। आकाश में **चाँद** (17) और **तारे** (18) चमकते हैं और **अँधेरे** को चीरते हैं।","t04-tit-8":"बीमारी।","t04-c2-06-1":"6. — वह बेचारा **अंधा** (20) , जो **दवाख़ाने** (16) के सामने चौक पार कर रहा है और जिसे उसका **पूडल** (21) राह दिखा रहा है, बड़ा अभागा है। **नौकरानी** (14) जस्तीन रसोई से बहुत गरम **काढ़े** का एक **कटोरा** (15) ला रही है, ख़ूब मीठा किया हुआ।","t04-c2-07-1":"7. — **दादी** (23) , जो मेज़ पर से अपना **चश्मा** (26) लेना चाहती हैं ताकि वह **पर्ची** (27) पढ़ सकें जो **वैद्य** (25) ने अभी लिखी है, अपनी **छड़ी** (24) के सहारे अपनी कुरसी से उठ रही हैं।","t04-c2-08-1":"8. — उन्हें प्रायः छोटी-छोटी **तकलीफ़ें** रहती हैं, **चक्कर**, **ज़ुकाम** और **दाँत का दर्द**; उनकी टाँगें कमज़ोर हैं और उनकी आँखें अब अच्छी नहीं रहीं। फिर भी वे अपने बूढ़े **वैद्य** को छेड़कर प्रसन्न होती हैं, जो उन्हें सदा कोई **घूँट** (28) लिख देना चाहते हैं। आज वे अपने जवान परिवार को अपने चारों ओर पाकर बहुत सुखी हैं।","t04-c2-09-1":"9. — अच्छी तरह बंद कमरे में गरमाहट है। संगमरमर की **अँगीठी** (29) में **सुंदर आग** (30) धधक रही है, और अभी-अभी जलाए गए **लैंप** (31) की कोमल **रोशनी** में मन प्रसन्न हो जाता है।","t04-tit-9":"दादा।","t04-c2-10-1":"10. — **दादा** (33) तक भूल गए हैं कि वे बीमार रहे हैं, कि उनका **गठिया** उन्हें अपनी **आरामकुरसी** (34) में बाँधे रखता है, और कि कल ही उन्हें **बुखार और मूर्च्छा** आई थी। उन्हें अब याद नहीं कि पिछले जाड़े उन्हें **निमोनिया** हुआ था, और एक कठोर पीड़ादायक **खाँसी** ने उन्हें बहुत सताया था।","t04-c2-10-2":"और वे कठिनाई से ही स्वस्थ हुए। अब कुछ बेहतर हैं। पर उनकी टाँग, जिसे वे एक **गद्दी** (38) पर टिकाए रखते हैं, और वह गद्दी एक छोटी **चौकी** (39) पर रखी है, अब भी दुखती है।","t04-c2-11-1":"11. — जब वे अपने गरम **ड्रेसिंग गाउन** (35) में, अपने बड़े सीपी के **बटनों** (36) समेत, अच्छी तरह लिपटे होते हैं, और जब उनके पास अख़बार पढ़ने के लिए वह नन्ही **अनाथ लड़की** (40) होती है, अपनी सफ़ेद **टोपी**, अपनी नीली **पोशाक** (42) और **ओढ़नी** (41) में, तब वे कोई शिकायत नहीं करते।","t04-c2-12-1":"12. — हर वर्ष, जब **पंचांग** (43) पहली **दिसंबर** की **तिथि** फिर ले आता है, वे अपने **नातियों** की अधीरता से प्रतीक्षा करते हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि वे उस महत्त्वपूर्ण **तिथि** को नहीं भूलेंगे।","t04-c2-13-1":"13. — वे भावुक होकर उन दूर के दिनों को याद करते हैं जब वे स्वयं उस गौरवशाली राजकीय **मार्शल** को बधाई देने जाया करते थे, जिनका **चित्र** (44) दीवार पर टँगा है, और जो बच्चों के **परदादा** हैं।","t05-apar-1":"तालिका सं. 5 घर और उसका बनना।","t05-tit-1":"अच्छी भेंट।","t05-01-1":"जॉन। — चाचा, मैं बहुत जानना चाहता हूँ कि **घर** कैसे बनता है।","t05-01-2":"चाचा (80) । — यह सहज है, बेटा; मेरे साथ आओ और मैं तुम्हें वह घर दिखाऊँगा जो श्री बर्नार्ड (79) बनवा रहे हैं और जिसमें मैं रहने जा रहा हूँ।","t05-01-3":"जॉन। — और इस घर का **नक़्शा** (76) किसने बनाया?","t05-01-4":"चाचा। — **वास्तुकार** (75) ने; उन्होंने बहुत साफ़ चित्र बनाया, वह मान लिया गया, और **ठेकेदार** (77) ने काम आरंभ कर दिया।","t05-01-5":"जॉन। — और ठेकेदार कौन हैं?","t05-01-6":"चाचा। — श्री श्वेत, तुम्हारे साथी जेम्स के पिता। वे वास्तुकार श्री रू के साथ मिलकर मज़दूरों को निर्देश देते हैं।","t05-01-7":"लो! श्री श्वेत ठीक समय पर अपना **पैमाना** (78) लिए आ रहे हैं, और श्री रू अपना नक़्शा लिए।","t05-01-8":"नमस्ते, महोदय। आप कैसे हैं?","t05-01-9":"श्री रू। — बहुत अच्छा, धन्यवाद। नमस्ते जॉन; लड़का कितना बढ़ गया है!","t05-01-10":"चाचा। — सचमुच, यह पूरा छोटा आदमी है। यह बहुत गंभीर है; जो कुछ देखता है, उसे समझाना पड़ता है। आज यह जानना चाहता है कि घर कैसे बनता है।","t05-tit-2":"मज़दूर।","t05-01-11":"श्री श्वेत। — तो मेरे साथ चलो, मेरे नन्हे मित्र, और मैं तुम्हें अभी समझा देता हूँ, क्योंकि मुझे सीखने के इच्छुक बच्चे बहुत भाते हैं।","t05-01-12":"वह मज़दूर देखते हो, जिसके हाथ में **बेलचा** (82) है: वह **खुदाई करने वाला** (81) है। वह पानी की नली बिछाने के लिए एक **खाई** (46) खोद रहा है। उसी ने वह ज़मीन भी खोदी थी जहाँ घर खड़ा है, ताकि राज चारों **दीवारें** उठा सके। उन दीवारों का जो भाग ज़मीन में है उसे **नींव** (2) कहते हैं। नींव से घिरी जगह **तहख़ाना** (3) बनाती है। इस तहख़ाने में एक छोटी खिड़की है जिसे **हवादान** (5) कहते हैं, एक **दरवाज़ा** (4) और एक सीढ़ी।","t05-01-13":"**राज** (108) दीवारें उठाता गया, **दरवाज़ों** (8) और **खिड़कियों** (17) के लिए जगह छोड़ता हुआ।","t05-01-14":"जॉन। — पर मुझे तो यह राज दिखाई ही नहीं देता!","t05-01-15":"श्री श्वेत। — उसका घर का काम अब पूरा हो चुका है। वह उधर **अस्तबल** (54) के पास है, अपने **मचान** (110) पर चढ़ा, **धोबीघर** (56) की दीवार बना रहा है।","t05-01-16":"उसके पास एक करनी, एक नाँद और एक **साहुल** (109) है। पर ये नाम तुम्हें याद न रहेंगे।","t05-01-17":"जॉन। — क्यों नहीं रहेंगे, मैं चाचा से एक छोटी करनी और एक नाँद माँगूँगा, और साहुल तो मैं सुतली के टुकड़े से आप ही बना लूँगा।","t05-tit-3":"सामग्री।","t05-01-18":"चाचा। — वाह, बहुत अच्छे। पर बताओ तो जॉन, घर बनाने के लिए क्या चाहिए?","t05-01-19":"जॉन। — **तराशा हुआ पत्थर** (59) और **गारा** (65) चाहिए।","t05-01-20":"चाचा। — ठीक। उस बड़े हैट वाले आदमी को देखो, अपनी **गाड़ी** (136) पर। वह **गाड़ीवान** (135) है। वह हर दिन यहाँ **पत्थर के ढोके** (60) लाता है। वह अपनी गाड़ी आँगन में ख़ाली करता है, और **संगतराश** (83) ढोकों को तराशते और अपनी **पत्थर-आरी** (85) से चीरते हैं। एक **मज़दूर** (146) उन्हें राज तक पहुँचाता है, जो उन्हें अपनी जगह बिठाता है।","t05-01-21":"इस बीच **गारा बनाने वाला** (87) गारा तैयार करता है। उसे **बालू** (62) , **चूना** (63) और **पानी** (64) चाहिए। चूना उसके पास एक **बोरी** (71) में है; एक **राज-सहायक** (111) उसे **ठेले** (112) में बालू लाता है, और **शागिर्द** (113) पंप (58) पर है। वह एक **बाल्टी** (114) भर रहा है। गारा जल्दी ही तैयार हो जाएगा। **गारा ढोने वाला** (107) उसे लेकर सीढ़ी से मचान पर चढ़ा ले जाता है, जहाँ एक राज घर का वह पाखा पूरा कर रहा है।","t05-01-22":"और अब बताओ, जो मज़दूर **छत** (31) बनाता है उसे क्या कहते हैं?","t05-01-23":"जॉन। — वह **छत बनाने वाला** (118) है।","t05-tit-4":"घर की छत।","t05-01-24":"श्री श्वेत। — हाँ, पर पहले **बढ़ई** (115) आता है।","t05-01-25":"बढ़ई **छत का ढाँचा** (35) बनाता है। वह **कड़ियों** (37) को **खूँटों** (117) से जोड़ता है। ऊपर वे मज़दूर, अपनी चौड़ी मख़मली निकर में, बढ़ई हैं। एक छोटी कड़ी थामे है और दूसरा अपने **कुल्हाड़े** (116) से एक खूँटा गढ़ रहा है। **चिमनी** (41) के पास वाला छत बनाने वाला है। वह **शहतीरों** (*) पर पट्टियाँ ठोंकता है, और पट्टियों पर **स्लेटें** (66) । कभी-कभी वह खपरैल बिछाता है।","t05-01-26":"अस्तबल की छत **खपरैल की** (55) है, घर की **स्लेट की** (32) , और बरामदे की **जस्ते की** (24) ।","t05-01-27":"जॉन। — क्या जस्ते की छतें भी छत बनाने वाला ही बनाता है?","t05-01-28":"श्री श्वेत। — नहीं, वह **जस्तासाज़** (121) या **नलसाज़** का काम है — वही जो घर की छत में एक **रोशनदान-खिड़की** (38) बिठा रहा है। वही **छत के परनाले** (43) और **उतरती नलियाँ** (42) भी लगाता है। वह जस्ते और टीन को टाँका लगाता है। उसी ने **तड़ित-चालक** (40) और **वात-सूचक** (39) **मुँडेर** (36) पर जड़े थे।","t05-01-29":"जॉन। — तो क्या घर पूरा हो गया?","t05-tit-5":"औज़ार।","t05-01-30":"श्री श्वेत। — पूरा नहीं। **पलस्तर करने वाला** (99) **ईंटों** (61) से वे दीवारें बनाता है जो घर को अलग-अलग कमरों में बाँटती हैं। वह **पलस्तर** (70) **छतों** (26) और दीवारों पर चढ़ाता है। इस समय वह **बरामदे** (33) की छत पर काम कर रहा है। राज की तरह उसके पास भी एक **करनी** (100) और एक **नाँद** (101) है।","t05-01-31":"फिर बढ़ई दरवाज़े, खिड़कियाँ, **लकड़ी के फ़र्श** (16) और **झिलमिलियाँ** (19) बनाता है।","t05-01-32":"इस समय वह आँगन में अपनी **कारीगरी की मेज़** (90) पर काम कर रहा है। उसके पास एक **आरी** (94) है, **लकड़ी** (69) चीरने के लिए, एक **रंदा** (91) , एक **शिकंजा** (92) , एक **छेनी** (94 *bis*) , एक **परकार** (95) और लकड़ी का एक **मुँगरा** (95 *bis*) ।","t05-01-33":"जॉन। — अरे, तब तो बढ़ई होना राज होने से भी अधिक मज़े का है। चाचा, आप मुझे एक कारीगरी की मेज़, एक आरी और एक रंदा दिलाएँगे? मैं मेदोर के लिए एक घर बनाऊँगा।","t05-01-34":"चाचा। — हाँ बेटा।","t05-01-35":"जॉन। — कितनी ख़ुशी हुई! और वह आदमी कौन है जो सामने के दरवाज़े के पास खड़ा है?","t05-tit-6":"रँगाई।","t05-01-36":"श्री श्वेत। — वह **रँगसाज़** (102) है। वह अपनी सीढ़ी पर खड़ा है, **रंग** (103) की एक हाँडी और अपना **ब्रश** (104) लिए। वह सामने के दरवाज़े की लकड़ी पर रंग चढ़ा रहा है ताकि वह अधिक टिके।","t05-01-37":"कमरों में दीवार का काग़ज़ भी वही चिपकाता है।","t05-01-38":"**सजावट करने वाला** (107) , जो **सीढ़ी** (106) पर चढ़ा **बालाख़ाने** (28) पर है, एक **परदा** (29) लगा रहा है।","t05-01-39":"बड़ी खिड़की के पास खड़ा मज़दूर **शीशासाज़** (96) है। वह **शीशे** (18) **मसाले** (73) से जमाता है। वह दूसरा मज़दूर, जो तहख़ाने के दरवाज़े के पास घुटनों के बल है, **तालासाज़** (97) है। वह एक **ताला** (6) बिठा रहा है। उसकी **रेती** (98) उसके पास पड़ी है।","t05-01-40":"जॉन। — जो आदमी अपने **हथौड़े** (84) से लोहे के टुकड़े पर चोट कर रहा है, क्या वह भी तालासाज़ है?","t05-01-41":"श्री श्वेत। — ठीक कहें तो वह **लोहार** (125) है। वह **लोहे का सामान** (67) गढ़ रहा है **बिजलीवाले** (124) के लिए, जो **गाड़ीख़ाने** (51) की छत पर है। उसके पास एक **भट्ठी** (126) , एक **निहाई** (127) और एक **संडासी** (128) है।","t05-01-42":"बिजलीवाला टेलीफ़ोन का **ताँबे का तार** (44) जोड़ रहा है।","t05-tit-7":"बाग़वानी।","t05-01-43":"चाचा। — **आँगन** (45) के सिरे पर, **जँगले** (47) और **गाड़ी-फाटक** (48) के पास, तुम्हें **माली** (129) दिखाई देता है। वह छोटा **बग़ीचा** (49) तैयार कर रहा है। उसने अपने **फावड़े** (131) से मिट्टी खोद डाली है, वह बीज बो रहा है और **पंजे** (130) से समतल कर रहा है। फिर अपने **झारे** (132) से वह **क्यारियों** (50) को सींचेगा और पौधे उगेंगे।","t05-01-44":"**साईस** (133) , जो अभी घोड़े की देखभाल कर उसे खिला चुका है, **बग्घी** (52) साफ़ कर रहा है — स्पंज, एक **हाथ-पंप** (134) और पानी की बाल्टी से। फिर वह उसे गाड़ीख़ाने में रख देगा और भारी **अर्गला** (53) से दरवाज़ा बंद कर देगा।","t05-01-45":"लो, अब तो संतोष हुआ होगा; समझाना बहुत हो चुका।","t05-01-46":"जॉन। — हाँ चाचा, पर मैं घर के भीतर भी देखना चाहूँगा।","t05-01-47":"चाचा। — वह कल के लिए। श्री रू तुम्हें नक़्शा समझाएँगे और हर कमरे का नाम बताएँगे।","t05-tit-8":"घर की भीतरी बनावट।","t05-apar-2":"*(नक़्शा देखिए।)*","t05-01-48":"वास्तुकार। — आओ जॉन, मैं तुम्हें घर के अलग-अलग भाग दिखाता हूँ।","t05-01-49":"चलो **भूतल** (7) में चलें। यह रहा **घंटी** का बटन (11) । हम तीन **सीढ़ियाँ** (14) चढ़ते हैं, जो **ड्योढ़ी** (9) की हैं, फिर **देहरी** (10) पार करते हैं, जो **सामने के दरवाज़े** (8) की है, और यह रहे हम **ज़ीने** (13) के नीचे।","t05-01-50":"जॉन। — यह गलियारा है।","t05-01-51":"वास्तुकार। — नहीं, यह **ड्योढ़ी-कक्ष** (12) है। **गलियारा** (a) सिरे पर है। दाहिनी ओर यह रहे **बैठक** (b) और **भोजन-कक्ष** (c) ; भोजन-कक्ष के सामने **रसोई** (d) और **भंडार-कक्ष** (e) ; फिर आगे की ओर **अध्ययन-कक्ष** (f) । **बरामदा** (23) , अपने **काँच के दरवाज़े** (25) समेत, बैठक के पास है।","t05-01-52":"अब हम ज़ीना चढ़ेंगे। **जंगला** (15) थामे रहो और सीढ़ियाँ गिनो। चौदह हैं। यह रही **चौकी** (m) : हम पहली **मंज़िल** (27) पर हैं।","t05-tit-9":"पहली मंज़िल।","t05-01-53":"ज़ीने के सामने **शौचालय** (20) और **वेश-कक्ष** (j) हैं। दाहिनी ओर एक सुंदर **शयन-कक्ष** (g) , जिसकी दो खिड़कियाँ घर के **सामने** (1) की ओर खुलती हैं। बाईं ओर **स्नान-कक्ष** (1) और **अतिथि-कक्ष** (i) हैं, जिसमें एक बड़ा **आला** (h) है। शयन-कक्ष के पास **बच्चों का कमरा** (k) है। वह एक चौड़ी **छत-बारजा** (21) में खुलता है। इस बारजे के नीचे एक और शौचालय (20) है, और दीवार से सटी यह रही **घंटी** (22) , जो भोजन के लिए बजाई जाती है।","t05-01-54":"जॉन। — चलिए **दूसरी मंज़िल** पर चलें।","t05-01-55":"वास्तुकार। — दूसरी मंज़िल है ही नहीं। छत के नीचे केवल **अटारियाँ** (33) और भंडार (34) हैं। हमारा चक्कर पूरा हुआ, अब नीचे उतर सकते हैं।","t05-01-56":"जॉन। — धन्यवाद महोदय, बहुत रोचक रहा। मैं अपने पिता को सब कुछ बताऊँगा जो मैंने देखा।","t06-apar-1":"तालिका सं. 6 घर के भीतर, साज-सामान, भोजन, रोशनी।","t06-apar-2":"घर बनकर तैयार है। जॉन के चाचा अपने नए घर में आ बसे हैं, जिसकी बनावट हम जानते ही हैं। अब देखें कि उन्होंने उसे कैसे सजाया है। पहले हम देखेंगे:","t06-tit-1":"शयन-कक्ष।","t06-c1-01-1":"1. — हम कुछ बेमौके आ गए हैं, क्योंकि नौकरानी **कमरे** की सफ़ाई में लगी है।","t06-c1-02-1":"2. — **हाथ-मुँह धोने की चौकी** (1) पर इधर-उधर वे चीज़ें पड़ी हैं जिनसे नहाया, कंघी की और तैयार हुआ जाता है। वे हैं **चिलमची** (2) और **पानी का जग** (3) , **बाल का ब्रश** (4) , **कंघी** (5) , **साबुन** (6) और **स्पंज** (7) , और अंत में कुल्ला करने के पानी की एक छोटी **शीशी** (8) ।","t06-c1-03-1":"3. — ज़मीन पर, चौकी के सामने, यह रही गंदे पानी की **बालटी** (9) ।","t06-c1-04-1":"4. — **बाहरी कमरे** (10) में हमें कुछ **खूँटियाँ** (13) दिखाई देती हैं और दो **छाते** (11) , जो **छाता-दान** (12) में हैं।","t06-c1-05-1":"5. — दरवाज़े की दूसरी ओर **शीशेदार अलमारी** (14) खड़ी है, जिसमें **कपड़े** (15) रखे रहते हैं।","t06-c1-06-1":"6. — **नौकरानी** (16) **पलंग** (17) लगा रही है, इसी बहाने उसके अलग-अलग भाग देख लें। **चारपाई** (20) पर एक अच्छा **कमानीदार गद्दा** (21) है, जिस पर जस्तीन अभी ऊन का **गद्दा** (22) बिछाएगी। फिर वह कुरसियों से दो **चादरें** (23) और **कंबल** (24) उठाएगी। फिर वह पलंग के सिरहाने **लंबा तकिया** (25) और **तकिया** (26) रखेगी, जो अभी **रजाई** (27) के साथ **पलंग के आगे की दरी** (32) पर पड़े हैं। वह **परदों** (19) और **छत्र** (18) पर पंख का झाड़न फेरती है, और आधा काम हो जाता है।","t06-c1-07-1":"7. — फिर उसे **पलंग के पास की मेज़** (28) थोड़ी सँवारनी होगी, **अलार्म घड़ी** (29) में चाबी भरनी होगी, **रात की बत्ती** (30) तैयार करनी होगी, और **मोमबत्ती** (31) हटाकर शमादान साफ़ करना होगा।","t06-tit-2":"सिलाई की टोकरी और अँगीठी का सामान।","t06-c1-08-1":"8. — **सिलाई की टोकरी** (34) , जो **तिपाई** (33) के पास रखी है, उसे भी सँवारने की बड़ी ज़रूरत है। उसे **कढ़ाई** (35) तह करनी होगी, **सिलाई की मेज़** (38) में **अँगुश्ताना**, **धागा** (36) , **सुइयाँ** (37) और **कैंची** (39) रखनी होंगी, और मेज़ का ढक्कन **चाबी** (40) से बंद करना होगा।","t06-c1-09-1":"9. — बीच में रखी **तिपाई-मेज़** (41) पर जस्तीन **सुराही** (42) का पानी बदलेगी। वह **चीनीदान** (43) में **चीनी** डालेगी, **चीनी की चिमटी** (44) साफ़ करेगी और **कपड़े का ब्रश** (46) हटा देगी।","t06-c1-10-1":"10. — कमरे का दाहिना भाग उसे कम काम देगा, क्योंकि **दिन का पलंग** (47) और उसका **गद्दी** (48) अपनी जगह पर हैं, और चूँकि मौसम ठंडा नहीं है, **अँगीठी** (49) के सामान में कुछ हिलाया नहीं गया। **बेलचा** (50) , **चिमटा** (51) , **लकड़ी के टेक** (55) और **राख का परदा** (56) साफ़ हैं; **आग का परदा** (54) हिलाया नहीं गया और **लकड़ी का संदूक** (52) **जलावन** (53) से भरा है।","t06-c1-11-1":"11. — उसे अभी **अँगीठी की घड़ी** (57) , **शमादान** (58) और **सजावट की तश्तरियाँ** (59) झाड़नी होंगी, फिर **आईना** (60) पोंछना होगा।","t06-c1-12-1":"12. — रही बच्चे का **पालना** (61) (वह babo (*) ), वह तो पहले से तैयार है।","t06-tit-3":"बैठक।","t06-c2-01-1":"1. — अब यह रही बैठक। यह बहुत सुंदर **कमरा** है। दाहिने कोने की अँगीठी एक नाज़ुक **मूर्ति** (1) और दो सुंदर **फूलदानों** (3) से सजी है, और मख़मल की **झालर** (2) (*) से ढकी है।","t06-c2-02-1":"2. — अँगीठी की चिनगारियाँ कालीन में आग न लगा दें, इसलिए उसके सामने ताँबे का एक **आग-जँगला** (4) रखा गया है।","t06-c2-03-1":"3. — उसके पास एक सजीली **लेखन-मेज़** (5) खुली खड़ी है। यहीं **घर की मालकिन** (23) अपने पत्र लिखती हैं।","t06-c2-04-1":"4. — खिड़की पर **जालीदार परदे** (6) लगे हैं, जिन्हें **डोरियाँ** (8) बाँधे रखती हैं, और वे डोरियाँ **खूँटियों** (7) में अटकी हैं, और उन पर भारी कपड़े के परदे, जिनके ऊपर एक **झालर-पट्टी** (9) है।","t06-c2-05-1":"5. — खिड़की के ताक में एक **गमला-चौकी** (11) में हरा **पौधा** (10) है, एक शानदार ताड़, जिसके पत्ते लगभग **तेल के लैंप** (12) तक पहुँचते हैं।","t06-c2-06-1":"6. — **लैंप-छाया** (13) मारिया ने बनाई है, वही मोहक **युवती** (14) जो **पियानो** (15) पर बैठी है। **चौकी** (16) पर सीधी बैठी वह एक धुन का अभ्यास कर रही है। वह बहुत कुशल और बहुत सलीकेदार है, जैसा उसकी **स्वरलिपि की अलमारी** (17) से पता चलता है: उसमें पूरा क्रम है।","t06-tit-4":"शरारती।","t06-c2-07-1":"7. — उसका भाई पॉल एक **किताब** (19) ढूँढ़ रहा है, **किताबों की अलमारी** (18) में। वह ऐसा **लड़का** (20) है जो चंचल और बिलकुल बेकाबू है। बहुत ऊँची रखी किताब तक पहुँचने के लिए अलमारी से लटकते हुए वह उसके ऊपर रखी **प्रतिमा** (21) गिरा देने का ख़तरा उठा रहा है।","t06-c2-08-1":"8. — यह शरारत करने के लिए वह इस बात का लाभ उठा रहा है कि उसकी माँ एक सहेली से बातों में लगी हैं, एक **महिला** (22) जो कुछ दिन उनके साथ बिताने आई हैं। माँ **सोफ़े** (24) पर बैठी हैं, **आरामकुरसी** (25) के पास, और उनकी सहेली उस **कुरसी** (27) पर, जिसकी हमें केवल **पीठ** (26) दिखाई देती है।","t06-c2-09-1":"9. — दीवार पर टँगे बड़े **फ़्रेम** (30) में एक रिश्तेदार का **चित्र** (29) है। मेज़ पर पड़ी **एल्बम** (32) में बाकी परिवार की **तस्वीरें** (33) इकट्ठी हैं। बच्चे अभी थोड़ी देर पहले उसे उलट-पलट रहे थे, क्योंकि **कुरसियाँ** (31) अब भी मेज़ के चारों ओर जमा हैं।","t06-c2-10-1":"10. — चीनी मिट्टी का **चीनी फूलदान** (34) , जो **काग़ज़ काटने की छुरी** (35) के पास रखा है, मारिया को उसके नाम-दिवस पर मिला था, और कमरे का कोना भरता **तह होने वाला परदा** (36) उसके चाचा चीन से लाए थे।","t06-c2-11-1":"11. — सुंदर **चित्रों** (37) से जगमगाती, जो **दीवार** (42) पर टँगे हैं, छत के **झाड़-फ़ानूस** (38) से रोशन, जिसके **बिजली के लैंप** (39) शाम को इतने प्रसन्न चमकते हैं, यह बैठक बड़ी सुहावनी लगती है। फ़र्श पर बिछा कोमल **कालीन** (40) और इतनी काम की **बिजली की घंटी** (41) उसे पूरी तरह आरामदेह बना देते हैं।","t06-tit-5":"भोजन-कक्ष।","t06-c3-01-1":"1. — भोजन की घंटी बज चुकी है। मारिया को छोड़ सारा परिवार मेज़ के चारों ओर जमा है। भोजन-कक्ष एक बढ़िया मिट्टी के **चूल्हे** (1) से सुखद गरम है, जिसकी **नली** (2) पतली है।","t06-c3-02-1":"2. — इस कमरे में सामान अधिक नहीं। दीवार के साथ, **तिपाई** (4) के ऊपर, एक सजावटी छोटा **फ़व्वारा** (3) टँगा है। पास ही **सजावटी अलमारी** (5) है, जिस पर ठंडे व्यंजन, मिठाइयाँ और वे बरतन रखे जाते हैं जिनकी इस समय ज़रूरत नहीं।","t06-c3-03-1":"3. — सो ऊपर के ख़ाने में हमें एक **भुना मुर्ग़ा** (7) दिखाई देता है, एक **मछली** (8) और एक **कटोरा** (10) **फलों** (9) का। नीचे **पनीर** (11) , **रोटी** (12) और **तेल-सिरके का दान** (13) है, जिसमें सलाद सजाने का सब कुछ रहता है: तेल, सिरका, **नमक** (14) और **मिर्च** (15) । अंत में सबसे नीचे के ख़ाने में एक **केक** (17) है, **सरसों का दान** (16) के पास।","t06-c3-04-1":"4. — भोजन-कक्ष की घड़ी, जिसे **दीवार-घड़ी** (20) कहते हैं, बहुत अनोखे आकार की है। वह लकड़ी के एक चौखटे में जड़ी है, जिसमें एक **वायुदाब-मापी** (19) और एक **तापमापी** (18) भी हैं।","t06-tit-6":"भोजन परोसना।","t06-c3-05-1":"5. — कमरे के चारों ओर दीवारों पर मोम की पॉलिश की बलूत की **लकड़ी की चौखट** (21) लगी है। कपड़े का एक **दरवाज़े का परदा** (22) बरामदे की ओर जाते दरवाज़े को अच्छी तरह ढक देता है। भोजन के बाद परिवार वहीं कॉफ़ी पीने जाएगा। **प्याले** (24) और **तश्तरियाँ** (25) पहले से **चीनी बरतन की अलमारी** (23) पर सजे हैं।","t06-c3-06-1":"6. — मेज़ के ऊपर छत से एक **लटकता लैंप** (26) बँधा है; उसकी बहुत तेज़ रोशनी शाम को सारे भोजन-कक्ष में भर जाती है।","t06-c3-07-1":"7. — अब ख़ुद **भोजन की मेज़** (27) देखें। परिवार के आने पर मेज़ लगी हुई थी। **मेज़पोश** (28) पर हर खाने वाले की जगह रखी थी एक **प्लेट** (33) , एक **नैपकिन** (29) , एक **चम्मच** (34) , एक **काँटा** (35) , एक **छुरी** (36) और एक **गिलास** (32) । शराब की **बोतलें** (30) और पानी की एक **सुराही** (31) भी थी।","t06-c3-08-1":"8. — **नौकर** (39) पहले **सूप का पात्र** (37) लाया, जिसमें अब भी कुछ सूप से भाप उठ रही है। अब वह पहला **व्यंजन** (38) परोस रहा है, माँस का। फिर वह वे व्यंजन लाएगा जिनके नाम हम ले चुके; और अंत में, **मिठाई** के बाद, वह इस बात का लाभ उठाएगा कि मालिक बरामदे में चले गए हैं, और मेज़ ख़ाली करके भोजन-कक्ष फिर ठीक कर देगा।","t06-c3-08-2":"*टिप्पणी।* — *भोजन से जुड़े रोज़ के शब्द यहाँ केवल मोटे तौर पर दिए गए हैं। यह सूची « होटल » (सं. 13) और « बाज़ार » (सं. 15) की दो तालिकाओं में पूरी की जाएगी।*","t06-tit-7":"रसोई।","t06-c4-01-1":"1. — अधखुले दरवाज़े से जिस रसोई पर हम नज़र डालते हैं, वहाँ एक सुरम्य गड़बड़झाला मिलता है। **चूल्हे** (1) के सामने, जहाँ **आग** (3) चटक रही है, **भूनने का यंत्र** (5) लगा है। एक बढ़िया **भुना माँस** (7) **सींक** (6) पर है और पकने को है।","t06-c4-02-1":"2. — **धौंकनी** (8) और **कोयले का बेलचा** (9) , जो अभी काम में आए हैं, **लकड़ियों** (10) समेत ज़मीन पर ही छोड़ दिए गए हैं।","t06-c4-03-1":"3. — अँगीठी के ऊपर का हिस्सा सँवरा है: **लालटेन** (11) , **दियासलाई-दान** (13) जिसमें **दियासलाइयाँ** (12) हैं, **शमादान** (14) और **हाथ का शमादान** (15) अपनी **मोमबत्ती** (16) समेत — सब अपनी जगह हैं। पर बड़ी **कोयले की टोकरी** (18) , जो उस **कोयले** (17) से भरी है जिसे **रसोइया** (23) अभी तहख़ाने से लाई है, रसोई के बीच में ही पड़ी रह गई है।","t06-c4-04-1":"4. — सच तो यह है कि बेचारी को जल्दी करनी है, यदि दोपहर का भोजन समय पर तैयार करना है। इस समय वह **पकाने के चूल्हे** (19) पर एक **रसा** (24) चला रही है, जो जलने न पाए।","t06-c4-05-1":"5. — **तंदूर** (20) में एक केक पक रहा है, जो उसने बच्चों की शाम की चाय के लिए बनाया है। चूल्हे के ऊपर **करछुल** (21) और **झरना** (22) टँगे हैं।","t06-tit-8":"रसोई के बरतन।","t06-c4-06-1":"6. — कमरे के पीछे टँगा **बरतनों का सेट** (25) बहुत साफ़ है। ताँबे की सुंदर **पतीलियाँ** (26) , **दूध का जग** (27) , **छलनी** (28) और **कद्दूकस** (29) ध्यान से माँजे गए हैं।","t06-c4-07-1":"7. — **नमकदान** (30) छोटी अलमारी पर **चायदान** (31) और **तेल की बड़ी बोतल** (32) के पास रखा है। **दराज़** (33) में शायद चम्मच-काँटे और रसोई की छुरियाँ रहती हैं।","t06-c4-08-1":"8. — **झाड़ू** (34) और **पंख का झाड़न** (35) एक कोने में हैं। रसोइया अभी **काटने का कुंदा** (36) काम में ला चुकी है; उसने उसे खिड़की के पास छोड़ दिया है।","t06-c4-09-1":"9. — एक **हाथ का तौलिया** (37) दीवार पर टँगा है, **कीप** (38) के पास। रसोई के इस भाग में **सीख़-जाली** (39) , **कटार** (40) और **काटने का पटरा** (41) रखे जाते हैं। फिर कटार के ऊपर, एक **ताक** (42) पर, **हाँडियाँ** (43) , **सालन की देगची** (44) अपने **ढक्कन** (45) समेत, और **कड़ाहा** (46) हैं। **तलने की कड़ाही** (47) पास ही टँगी है।","t06-c4-10-1":"10. — इस कोने में केवल ताँबे की **टोंटी** (48) चमक डालती है। **नाली-चौकी** (49) , जिस पर बड़ा **घड़ा** (50) रखा है, अपनी छोटी अलमारी के साथ बहुत काम की होगी, जहाँ **सिरके का पीपा** (51) अपनी **टोंटी** (52) समेत, **कूड़े का संदूक** (53) और **गंदे बरतन** (54) रखे जाते हैं।","t06-tit-9":"रसोई में रखी और चीज़ें।","t06-c4-11-1":"11. — वह बड़ा **टब** (55) जिसमें **सब्ज़ियाँ** (58) धोई जाती हैं, और ढलवाँ लोहे का **कड़ाहा** (56) , जो **ईंट के फ़र्श** (57) पर रखा है, शायद उसी अलमारी के हैं।","t06-c4-12-1":"12. — रसोइया के पास चूल्हों की कमी नहीं, क्योंकि यह रहा मेज़ के कोने पर एक **गैस का चूल्हा** (59) , जिस पर एक छोटी पतीली में पानी गरम हो रहा है। उससे निकलती **भाप** (60) बताती है कि वह उबल रहा होगा। यह पानी शायद कॉफ़ी के लिए है, क्योंकि मेज़ के दूसरे सिरे पर यह रहे **कॉफ़ी का बरतन** (64) और **कॉफ़ी की चक्की** (63) ।","t06-c4-13-1":"13. — गैस का चूल्हा **गैस की टोंटी** (62) से जुड़ा है, एक लंबी **रबर की नली** (61) के ज़रिए।","t06-c4-14-1":"14. — **दिहाड़ी की मददगार** (66) , जो रसोइया की सहायता को आती है, रात के भोजन की सब्ज़ियाँ तैयार कर रही है। छीलकर और धोकर वह उन्हें **बरतन** (65) में रख देगी, जब तक पकाने का समय न आए।","t06-tit-10":"स्नानघर। *(नहाने का कमरा।)*","t06-c5-01-1":"1. — घर के मुख्य कमरे जान लेने के लिए अब एक ही ताक-झाँक बाकी है: स्नानघर का सामान देखना। इसमें देर न लगेगी, क्योंकि वह बड़ा नहीं, और हम झट देख लेंगे कि **नहाने के टब** (1) के साथ एक अच्छा **पानी गरम करने का यंत्र** (2) है, कि **साबुनदानी** (3) नहाने वाले के हाथ की पहुँच में है, और कि **तौलिया-डंडा** (5) से **तौलिये** (4) सुखाना सहज होता होगा।","t06-c5-02-1":"2. — इस कमरे की दीवारें **चमकीली टाइलों** (6) से ढकी हैं, जिससे एक **फ़ुहारा** (7) लगाना संभव हुआ, बिना इस डर के कि उसे बरतते समय छींटे उन्हें बिगाड़ दें। पैर धोने का जस्ते का एक छोटा **तसला** (8) सामान पूरा कर देता है।","t07-apar-1":"दूसरी शृंखला तालिका सं. 7","t07-tit-1":"*पहला दृश्य।*","t07-tit-2":"जाड़े में गाँव।","t07-c1-01-1":"1. — नए वर्ष की छुट्टियों में मैं अपने पिता के साथ नयागाँव गया, एक छोटा गाँव जहाँ उन्हें कुछ काम निपटाना था।","t07-c1-02-1":"2. — हमने वह **डाक-गाड़ी** (11) ली जो शहर और उस गाँव के बीच चलती है; पर ठंड बहुत थी, और इतनी असुविधाजनक गाड़ी में यात्रा तनिक भी सुखद न रही।","t07-c1-03-1":"3. — इसलिए हमें सचमुच ख़ुशी हुई जब हमने **गाड़ीवान** को चौक में *श्वेत भालू* की **सराय** (2) के सामने गाड़ी रोकते देखा। **सरायवाला** (4) अपनी देहरी पर हमारी बाट जोह रहा था, चुपचाप अपना **चिलम** पीता हुआ।","t07-c1-03-2":"उसने हमें भीतर बुलाया, और चूल्हे में चटकती बेल की आग के सामने बैठने के लिए मुझे दुबारा कहलाने की ज़रूरत न पड़ी। फिर मुझे उस कँपाती **उत्तरी हवा** की कोई चिंता न रही जो पुराने **बोर्ड** (3) को चरमराती थी और चिमनी से निकलते **धुएँ** (1) को काले बगूलों में उड़ा ले जाती थी।","t07-c1-04-1":"4. — दोपहर के भोजन का समय था। और देर किए बिना हमने उस सादे पर स्वादिष्ट भोजन के साथ पूरा न्याय किया जो हमें परोसा गया (*) ।","t07-tit-3":"कुछ भेंटें।","t07-c1-05-1":"5. — भोजन के बाद मैं अपने पिता के साथ गया, जो बीमे के एजेंट हैं, उनके ग्राहकों से मिलने। पहले हम **लोहार** (5) के पास गए, जो सराय के बगल में रहता है। वह एक घोड़े की नाल ठोंकने में लगा था। मैंने उसके सहायक के बल की सराहना की, जो घोड़े की **टाप** को अपने चमड़े के एप्रन पर कसकर थामे था, जब तक लोहार भारी हथौड़े की चोटों से **नाल** (6) जड़ता रहा।","t07-c1-06-1":"6. — फिर हम गाँव के **मोची** (7) बूढ़े जैकब के पास गए। यद्यपि उसके बोर्ड पर एक शानदार **बूट** बना था, वह पुराने घिसे जूतों में नया तला लगाकर काम चला रहा था।","t07-c1-06-2":"बूढ़े ने हँसते हुए कहा: « शहर में मैं “जूता बनाने वाला” था और मेरे ग्राहक ही न थे। यहाँ मैं “मोची” हूँ और काम की कोई कमी नहीं। »","t07-c1-07-1":"7. — उसने हमें अपने पड़ोसी **हजामतवाले** (8) की बात बताई, जिसके ग्राहक सब असंतुष्ट रहते हैं। उसके **उस्तरे** सदा खंडित रहते हैं और उसकी **कैंची** कभी ठीक नहीं काटती। पर चूँकि वही गाँव का अकेला हजामतवाला है, लोगों के पास उसी से हजामत बनवाने और बाल कटवाने के सिवा चारा नहीं। वह ऊपर से कंजूस और रूखा भी है।","t07-c1-08-1":"8. — सौभाग्य से दूसरे **पड़ोसी** उस जैसे नहीं। **गाड़ी बनाने वाला** (9) , उदाहरण के लिए, भला आदमी है, मेहनती और उपकारी। उसे गाड़ी मरम्मत को देना सुख की बात है। उसका काम सदा साफ़-सुथरा होता है।","t07-c1-09-1":"9. — बूढ़े जैकब को **जीनसाज़** (10) से भी कोई शिकायत न थी, जिसकी वह काम के दबाव में कभी-कभी **साज** सीने में मदद करता है।","t07-c1-09-2":"मेरे पिता ने उससे उसके परिवार के बारे में पूछा। « सब भले-चंगे हैं। मेरी पोती **पाठशाला** (12) में है। उसकी **अध्यापिका** (13) उससे बहुत प्रसन्न हैं; वह अच्छी **विद्यार्थिनी** (14) है। वह मेरे उस शरारती बेटे जैसी नहीं; उसे खेल के सिवा कुछ नहीं सूझता। **प्रधान अध्यापक** (15) उससे कुछ भी नहीं सिखा पाते। »","t07-tit-4":"गाँव की बातें।","t07-c1-10-1":"10. — फिर बूढ़े ने हमें गाँव की ख़बरें सुनाईं। एक नई पाठशाला बननी थी, क्योंकि **ग्राम-भवन** वाली बहुत छोटी पड़ गई थी। यह सहज होता, क्योंकि **चक्कीवाले** के बग़ीचे का एक हिस्सा ख़रीद लेना ही बहुत था। बेचारे के लिए यह बड़ा अच्छा रहता। जब से ठंड पड़ी, **चक्की** (16) के **पाट** गेहूँ नहीं पीस सके, क्योंकि **पहिया** (17) **बर्फ़** (25) में फँस गया था, जो **नाले** (23) की थी।","t07-c1-11-1":"11. — « निर्माण की बात चली तो — हमारा नया **गिरजा** (18) देखा आपने? बर्फ़ की चादर के नीचे वह बड़ा सुरम्य लगता है। **कौवे** (19) , जो अपना पुराना घंटाघर अब पहचानते ही नहीं, उदास होकर **कब्रिस्तान** (20) के बड़े पेड़ पर बैठे रहते हैं। »","t07-c1-12-1":"12. — कब्रिस्तान का नाम आते ही मोची को वे लोग याद आ गए जिन्हें मेरे पिता जानते थे और जो पिछले साल चल बसे। « कितनी **कब्रें** (21) , मेरे भले महाशय, **सरो** (22) के नीचे और जुड़ गईं! मौत हमारे बूढ़े मुंशी को ले गई। सारा गाँव उनकी **अंत्येष्टि** में था। »","t07-c1-13-1":"13. — « वह रहे उनके उत्तराधिकारी, नाले पर बर्फ़ फिसल रहे हैं। थोड़ी देर पहले ही आए थे कि मैं उनकी **बर्फ़-जूती** (26) का तसमा जोड़ दूँ, जो टूट गया था। »","t07-c1-14-1":"14. — « और वह रहा, नाले के किनारे, नया **गाँव का चौकीदार** (27) । वह पुराना सिपाही है और गाँव के शरारती लड़कों का काल। उसके **पट्टे** (29) और उसकी **झालरदार टोपी** (28) दिखते ही वे भाग खड़े होते हैं। »","t07-c1-15-1":"15. — « अरे! वह रहा बूढ़ा जोसेफ़, नानबाई के लिए **लकड़ी के गट्ठरों की गाड़ी** (30) लाता हुआ। — ठीक कहा, मेरे पिता बोले, मैं उसके **ख़च्चरों** (31) की जोड़ी पहचानता हूँ। मुझे उससे एक बात करनी है, यही मौका है। नमस्ते, बूढ़े जैकब। »","t07-c1-16-1":"16. — हम बाहर निकल ही रहे थे कि गाँव के बच्चे पाठशाला से छूटकर **बर्फ़ की फिसलपट्टी** (33) पर टूट पड़े, इस ख़तरे के साथ कि **गिरने** (34) पर हाथ-पाँव तोड़ बैठें। उनमें से एक ने गाड़ीवाले के यहाँ से अपनी **स्लेज** (32) लाई, उस पर अपने एक साथी को बिठाया, और दौड़ पड़ा।","t07-c1-17-1":"17. — दूसरे एक **बर्फ़ के ढेर** (37) की ओर लपके, जो **पुल** (40) के पास था, और उस **बर्फ़ के आदमी** (39) पर मारने लगे जो उन्होंने कल बनाया था, जिसे उन्होंने एक टोपी, एक चिलम और कंधे पर लटका एक बस्ता दे रखा था।","t07-c1-18-1":"18. — उन्हें बर्फ़ीली हवा और ठंड की परवाह न थी। उनमें से अधिकतर के पास **गुलूबंद** (35) तक न था, और **बर्फ़ के गोलों** (38) की लड़ाई के बाद गरम होने के लिए मुट्ठी भर तपते **चेस्टनट** (42) ही उन्हें बहुत थे, जो वे बूढ़ी जैकलीन **बेचनेवाली** से ख़रीदते थे, जो अपनी बहुत पतली **चादर** (43) में ठंड से काँपती रहती है।","t07-tit-5":"*दूसरा दृश्य।*","t07-tit-6":"वसंत में खेत का घर।","t07-c2-01-1":"1. — जाड़े के सब सुखों के बावजूद **वसंत** के लौटने का हम गहरे आनंद से स्वागत करते हैं।","t07-c2-01-2":"मई के महीने में शाम को खेत का आँगन कैसा उत्साह भरा चित्र बनाता है!","t07-c2-02-1":"2. — क्षितिज पर **सूरज** (1) धीरे-धीरे ढल रहा है, और **देहात** (3) को अपनी लाल **किरणों** (2) से भर रहा है। मेहनती **हलवाहा** (6) अपना **खेत** (4) जोतने की जल्दी में है।","t07-c2-02-2":"अपने **हल** (5) से, जिसे एक मज़बूत **घोड़ा** (7) खींचता है, वह **कूँड़** (8) खींचता है, जिसमें **बोने वाला** (9) मुट्ठी-मुट्ठी वह **बीज** छिड़केगा जिससे सुनहरी बालियाँ निकलेंगी।","t07-c2-03-1":"3. — अपनी हँसियों से **घास काटने वालों** (11) ने मैदान की घास काट ली है, सुखाने वालों ने **सूखी घास** (10) को **पंजों** (12) और खुरपों से उलट-पलटकर सुखा लिया है, और अब वे लौट रहे हैं।","t07-c2-03-2":"कुछ बैलों से खींची भारी गाड़ी के आगे-आगे चलते हैं, कंधे पर अपने औज़ार लिए। दूसरे, अधिक आलसी, सुगंधित सूखी घास पर आराम से पसर गए हैं।","t07-c2-04-1":"4. — चलते-चलते वे **माली** (16) का मित्रता से अभिवादन करते हैं, जो **बग़ीचे** (13) में लगा है, **फलदार पेड़ों** की छँटाई करता और **नाशपाती के पेड़ों** (14) में कलम लगाता। **आलूबुख़ारे के पेड़** (15) फूलों से लदे हैं, और अच्छी खाद पाए **सब्ज़ी के बग़ीचे** (17) में सब्ज़ियाँ, गोभी और सलाद पहले से अच्छी हो रही हैं।","t07-c2-04-2":"नीची दीवार पर एक सुंदर **मोर** (18) अपने शानदार पंख दिखाने को पूँछ फैलाता है।","t07-tit-7":"खेत का आँगन।","t07-c2-05-1":"5. — **अस्तबल** (19) के दरवाज़े खुले हैं, और चरनी तथा **बिछावन की पुआल** (23) दिखाई देती है उस **घोड़ी** (21) की, जिसे **साईस** (20) ने अभी खोला है। **बछेड़ा** (22) , अपनी लंबी टाँगों पर इतना मज़ेदार, कुलाँचें भरता अपनी माँ के पीछे चलता है।","t07-c2-06-1":"6. — **कुएँ** (29) के पास **गायें** (25) उस लकड़ी की **नाँद** (26) से पानी पीने जाती हैं जो उनका घाट है। **बछड़ा** (24) इसी मौके पर दूध पी लेता है, और **बैल** (27) , चारे की अच्छी गंध पाकर, प्रसन्नता से रँभाता है और अपने बलवान **सींगों** (28) वाला सिर गर्व से उठाता है।","t07-c2-07-1":"7. — सब काम में लगे हैं। **नौकरानी** (32) कुएँ की **रस्सी** (31) थामे है। वह जानवरों को पिलाने के लिए एक **बालटी** (30) में पानी खींच रही है। **खलिहान** (33) के पास एक आदमी बिखरी पुआल बटोर रहा है, और **खेत के घर** (34) के दरवाज़े के सामने एक बूढ़ी **कातने वाली** (35) , अपने चरखे और अपनी **तकली** के साथ, पुराने दिनों की तरह **सन** या **पटसन** कात रही है।","t07-tit-8":"खेत का मालिक।","t07-c2-08-1":"8. — **खेत का मालिक** (36) यह सारा काम चलाता है और अपने आदमियों को हुक्म देता है। वह उनसे कहता है कि **हेंगा** (40) और **कुदाल** (39) ढककर रख दें, जो उस **घर** (38) के पास छोड़ दिए गए हैं जो **कुत्ते** (37) का है।","t07-c2-09-1":"9. — उसकी हाँक से एक **कबूतर** (41) चौंक उठता है, जो पूरी गति से **कबूतरख़ाने** (42) की ओर उड़ जाता है, और **मुर्ग़ियाँ** (43) भी, जो जल्दी-जल्दी **दड़बे** (44) में लौट जाती हैं।","t07-c2-10-1":"10. — **भेड़शाला** (48) के सामने, यह रहा बूढ़ा **गड़रिया** (45) अपना **रेवड़** (49) लौटाता हुआ। अपनी **लाठी** (46) थामे, जो उसका साथ उतना ही नहीं छोड़ती जितना उसका फीका **कुरता** (47) , वह बाड़े की ओर **मेढ़े** (50) , **भेड़ें** (53) , **मेमने** (54) , **बकरियाँ** (51) और **बकरी के बच्चे** (52) हाँकता है। उसका वफ़ादार **कुत्ता** (55) आर्गुस सबसे पीछे आता है और भौंककर पिछड़ों को आगे करता है।","t07-c2-11-1":"11. — यह सारा शोर-शराबा उस भली **दुधारू गाय** (56) की शांति नहीं बिगाड़ता, जो अपनी **घंटी** (57) बजाती रहती है, जब उसे **गोशाला** (58) के दरवाज़े के सामने दुहा जाता है।","t07-c2-12-1":"12. — वह जैसे समझती है कि उसे अपना दूध देना ही है, ताकि **खेत की मालकिन** (60) **मथानी** (61) में **मक्खन** बना सके, या वे बढ़िया **पनीर** (64) जो **टब** (63) पर रखे तख़्ते पर निथर रहे हैं।","t07-c2-13-1":"13. — सारी **दुग्धशाला** (59) **खेत के मज़दूर** (65) की बदौलत बहुत साफ़ रहती है, जिसने अभी उस बड़ी बालटी में **दूध के डिब्बे** (62) धोए हैं जो वह उठाए है।","t07-tit-9":"मुर्ग़ीख़ाना।","t07-c2-14-1":"14. — अपनी भारी खड़ाऊँ में वह कुछ भद्दे ढंग से चलता है, और इससे **टर्की** (68) , **बत्तखें** (66) , **बत्तख़ों के नर** (67) और **हंस** (69) उड़ जाते हैं, जो अपनी **चोंचें** (70) चौड़ी खोलकर बेचैन कोलाहल मचाते हैं।","t07-c2-14-2":"**मुर्ग़ा** (71) , जो अधिक लड़ाकू है, अपनी लाल **कलगी** (72) उठाता है, अपनी **पूँछ** (73) के पंख झाड़ता है और एक गूँजती « कुकड़ूँ-कूँ » छोड़ता है।","t07-c2-15-1":"15. — एक **मुर्ग़ी-माँ** (74) **गोबर के ढेर** (81) पर चुग रही है, अपने **चूज़ों** (75) के साथ। **सूअर का बच्चा** (78) अपनी माँ की ओर दौड़ जाता है, उस विशाल **सूअरी** (77) की ओर जो हमें बाड़े के पास दिखाई देती है।","t07-c2-16-1":"16. — अपने दड़बों में **ख़रगोश** (79) वह कोमल **घास** (80) चाव से खा रहे हैं जो मालिक की बेटी उन्हें लाती है। जेनी को अपने ख़रगोश बहुत प्रिय हैं, और हर दिन, दड़बे से ताज़े **अंडे** (76) लाने के बाद, वह अपने नन्हे मित्रों से मिलने आती है।","t08-apar-1":"तालिका सं. 8 *पहला दृश्य।* फ़सल (*) । देहात का रूप।","t08-c1-01-1":"1. — **गरमी** के साथ देहात ने फिर एक बार अपना रूप बदल लिया है। कूँड़ को सौंपा गया बीज फूट पड़ा; ज़मीन से एक नन्हा हरा पौधा निकला और उसने अपनी बाली दी। दाना बना, फिर पका, और अब फ़सल काटने के सिवा कुछ बाकी नहीं।","t08-c1-02-1":"2. — **जंगली फूल** खिल आए हैं। **कॉर्नफ़्लावर** (1) , **पोस्ते के फूल** (2) और **डिजिटैलिस** (3) गेहूँ के खेतों के एकसार रंग पर अपने ताज़े **फूलों** का प्रसन्न विरोध रखते हैं।","t08-c1-03-1":"3. — फलदार पेड़ों ने पत्ते निकाल लिए हैं; फल पक गए हैं। नन्हा **चेरी का पेड़** (4) सुंदर **चेरियों** (5) से लदा है, जिन्हें बच्चे तोड़ते और चाव से खाते हैं।","t08-c1-04-1":"4. — रेवड़ अब सारा दिन बाहर बिता सकता है।","t08-c1-04-2":"**मेमने** (6) बढ़कर सुंदर **भेड़ें** (7) और सुंदर **मेढ़े** (8) बन गए हैं, घनी ऊन वाले। वे **चरागाह** (9) की **घास** शांति से चरते हैं, जिस पर **गुलबहार** बिखरे हैं।","t08-c1-04-3":"जल्दी ही इन जानवरों की **ऊन** उतारी जाएगी, जिससे हमारे कपड़ों का कपड़ा बनता है।","t08-tit-2":"चरवाहा।","t08-c1-05-1":"5. — **चरवाहा** (10) उन पर अधिक ध्यान देता नहीं लगता। उसकी एक ही चिंता है क्षितिज पर जाता तूफ़ान, और **गड़रिया** (13) , जो अपनी **सुराही** (14) होंठों तक उठाए है, उससे भी अधिक बेफ़िक्र लगता है।","t08-c1-06-1":"6. — गरमी दमघोंटू है; क्योंकि **कुत्ता** (15) भी ठंडा होने आता है; वह **नाले** (16) का ताज़ा पानी चाटता है और एक बेचारे नन्हे **मेंढक** (17) को चौंका देता है जो किनारे की घास में दुबका था। वह उस साफ़ पानी में कूद पड़ता है जहाँ **कुमुदिनियाँ** (18) खिली हैं।","t08-c1-07-1":"7. — एक **खंजन** (19) उस नन्हे **सोते** (20) के पास नहा रहा है जो दो चट्टानों के बीच से फूटता है और **काँटेदार झाड़ियों** (21) तथा **नागफनी की झाड़ियों** (22) के नीचे छिप जाता है।","t08-tit-3":"फ़सल की कटाई।","t08-c1-08-1":"8. — देहात के बच्चों के लिए गेहूँ की कटाई बड़े मनोरंजन का समय है। वे प्रसन्न **कलाबाज़ियाँ** (24) खाते हैं **पुआल के ढेरों** (23) पर, **काटने वालों** (26) की मदद करते हैं, और जब वे **गेहूँ का खेत** (27) काटते हैं अपनी **हँसियों** (25) से, जो **सान** (30) पर ख़ूब तेज़ की गई हैं, तब बच्चे गेहूँ बटोरकर **पूले** (31) या **छोटी गड्डियाँ** (32) बाँधते हैं।","t08-c1-09-1":"9. — कभी-कभी उनमें से बड़ों को **दराँती** (12) से वे **सुनहरे डंठल** (28) काटने दिए जाते हैं जो दानों से भरी भारी **बालियाँ** (29) उठाए हैं; और छोटे, **पशुओं** (33) की रखवाली करते हुए, जो **मैदान** (34) में बड़े **लिंडेन पेड़** (35) की छाँह में चरते हैं, अपनी **जाली** (36) में सुंदर **तितलियाँ** पकड़ते हैं।","t08-c1-09-2":"कुछ तो **गाड़ी** (37) पर चढ़कर वे पूले जमाते हैं जो उन्हें **पंजे** (38) पर उठाकर दिए जाते हैं।","t08-c1-10-1":"10. — सारे **मैदान** (39) में, जहाँ से **चंडूलें** (41) उड़ती हैं, बड़ी चहल-पहल है। सब फ़सल में लगे हैं। पर जहाँ ग़रीब पुराने औज़ार ही काम में लाते हैं — **हँसियाँ, दराँतियाँ** और **मुँगरी** (40) — , वहाँ धनी ज़मींदार अपना गेहूँ या अपनी **राई** (43) **काटने की मशीन** (42) से कटवाते हैं। फिर, पूलों को खलिहान तक ढोए बिना, वहीं बड़े **ढेर** (44) लगा दिए जाते हैं।","t08-c1-11-1":"11. — फिर एक **गहाई की मशीन** (47) लाई जाती है, जिसे एक **चलता इंजन** (45) एक **पट्टे** (46) के ज़रिए चलाता है, और इस तरह दाना **पुआल** से अलग हो जाता है, उसी खेत में जहाँ वह बोया गया था।","t08-tit-4":"तूफ़ान।","t08-c1-12-1":"12. — फ़सल के समय प्रायः प्रचंड **तूफ़ान** (53) टूट पड़ते हैं। पहले दूर से **बादलों की गड़गड़ाहट** सुनाई देती है; एक तेज़ **पछुआ हवा** (54) उठती है और **जंगल** (49) के सबसे बड़े पेड़ों को कराहते हुए झुका देती है। काले **बादल** (56) आकाश पर चढ़ आते हैं; उन्हें **बिजली** (55) की चौंधियाती टेढ़ी रेखाएँ चीरती हैं। **बारिश** और कभी **ओले** गिरने लगते हैं, और कटने को तैयार फ़सल को बिछा देते हैं।","t08-c1-13-1":"13. — प्रायः बिजली किसी इमारत में आग लगा देती है। पिछले साल, उदाहरण के लिए, **पवनचक्की** (50) की छत जलकर राख हो गई और उसके दो **पंख** (51) चूर-चूर हो गए।","t08-c1-14-1":"14. — कुछ घंटों बाद शांति लौट आती है। क्षितिज पर एक चमकीला **इंद्रधनुष** (52) दिखाई देता है, और प्रकृति वह जीवन फिर उठा लेती है जो थोड़ी देर के लिए रुक गया था। जो देहाती **झोपड़ियों** (48) में आ छिपे थे, वे काम पर लौटते हैं और अभी-अभी हुए नुक़सान की मरम्मत में हिम्मत से जुट जाते हैं।","t08-tit-5":"*दूसरा दृश्य।*","t08-tit-6":"शिकार। — अंगूर की फ़सल। मछली पकड़ना।","t08-c2-01-1":"1. — **अगस्त** के अंत या **सितंबर** के मध्य में, इलाक़े के अनुसार, शिकार का मौसम खुलता है। सूरज की पहली किरणें **छिपकलियों** (2) को उनके बिलों से बाहर लाती भी नहीं कि **शिकारी** (5) अपने **कुत्तों** (4) के साथ निकल पड़ता है।","t08-c2-02-1":"2. — उसने मोटे कपड़े का अपना मज़बूत **शिकारी सूट** (9) पहना है, और चमड़े के **पट्टे**, जो उसे उस गीली घास में चलने देंगे जहाँ **भेक** (1) छिपे रहते हैं; उसने अपनी **बंदूक** (6) और अपना **शिकार-थैला** (10) लिया है, और चल दिया है।","t08-c2-03-1":"3. — शिकार की उमंग उसे एक अंगूर-बाग़ के बीच ले आती है जहाँ अंगूर की फ़सल पूरे ज़ोर पर है। अंगूर उगाने वाले के बच्चे, जो आम तौर पर सड़क के किनारे बकरियाँ चराते हैं, आज उन्हें जहाँ जी चाहे चरने दे रहे हैं, और एक बूढ़े **बकरे** (3) को खूँटे से बाँधकर — जो अपनी आज़ादी का लाभ उठाकर निश्चय ही भाग जाता — वे भी अपने हिस्से का मज़ा ले रहे हैं। एक **अंगूर की टोकरी** (12) से एक गुच्छा लेता है और उसका **रस** (14) एक **प्याले** (13) में निचोड़कर मस्त (बिना ख़मीर की शराब) बनाने में मन बहलाता है। दूसरा अपने सिर पर **पत्तों का मुकुट** (15) रख रहा है जो उसने अभी गूँथा है। उनके पास ढीठ **गौरैयाँ** (16) अंगूर चुराने कोल्हू तक चली आती हैं।","t08-c2-04-1":"4. — जब तक बच्चे मन बहलाते हैं, आदमी काम करते हैं। **अंगूर तोड़ने वाले** (18) अंगूर **पीठ की टोकरियों** (17) में तहख़ाने तक ले जाते हैं; एक **पीपासाज़** (19) **पीपों** (20) की मरम्मत करता है, देखता है कि **फट्टे** (22) और **ढक्कन** (21) ठीक हैं, और टूटे **छल्ले** (23) बदलता है। वे बड़े **कुंड** (25) भी उसी ने बनाए थे, जिनमें ख़मीर उठाने को **अंगूर** (26) डाले जाते हैं।","t08-c2-05-1":"5. — ख़मीर उठ चुकने पर शराब निकाल ली जाती है और बचा हुआ **कोल्हू** (28) पर रखा जाता है; बड़े **पेंच** (29) को धीरे-धीरे कसकर रस निचोड़ा जाता है, जो एक **टब** (32) में बहता है और और भी **शराब** (31) देता है।","t08-tit-8":"बीयर और सिडर।","t08-c2-06-1":"6. — **तहख़ाने** (27) की दीवार पर **हॉप्स** (30) की एक शाख चढ़ती है। यहाँ वह केवल सजावटी पौधा है, पर कुछ देशों में, जहाँ बेल बहुत कम होती है, **बीयर** बनाने के लिए हॉप्स उगाए जाते हैं।","t08-c2-07-1":"7. — नन्हा **सेब का पेड़** (33) सेबों से लदा है, जिनसे पकने पर बढ़िया **सिडर** बनेगा। अपने **पिंजरे** (34) में **कनारी** (35) और **गोल्डफ़िंच** (36) उन गौरैयों को ईर्ष्या से देखते हैं जो आज़ाद उछल-कूद कर रही हैं।","t08-c2-08-1":"8. — जहाँ तक नज़र जाती है, पहाड़ियों की ढलान पर, **बेल के खूँटों** (40) की क़तारें खड़ी हैं, जो शानदार **बेल के ठूँठों** (39) को सँभाले हैं, **गुच्छों** से लदे हुए।","t08-c2-08-2":"सारा साल **अंगूर उगाने वाले** (42) ने अपने **अंगूर-बाग़** (38) की देखभाल में मेहनत की है, और अब उसे अच्छी फ़सल से उसका पुरस्कार मिलता है। **तोड़ने वालियाँ** (41) उन कुंडों को भरती हैं जो **ख़च्चरों** (43) से खींची गाड़ी पर रखे हैं, और सब प्रसन्न हैं।","t08-tit-9":"मछली पकड़ना।","t08-c2-09-1":"9. — यही बात **बंसीवालों** (44) की है, जो पौ फटते ही अपनी **बंसियों** (45) के साथ पानी के किनारे आ जमे हैं।","t08-c2-09-2":"**मछलियाँ** (47) काँटा पकड़ लेती हैं ज्यों ही वे अपनी **डोरी** (46) पानी में डालते हैं, और उन्हें **चारा** बदलने का समय भी नहीं मिलता कि डोरी के सिरे पर एक नया शिकार तड़प रहा होता है।","t08-c2-09-3":"फिर भी **जाल वाला मछुआ** (48) , जो अपनी **नाव** (49) से **नदी** (50) के बीच जाल फेंकता है, कहीं अधिक पकड़ता है।","t08-c2-10-1":"10. — शरद् अच्छी सैर का मौसम है: पैदल, **घोड़े** (52) पर, **साइकिल** (53) से, **मोटर** (54) से। **सड़कें** (51) साफ़ हैं और लोग आख़िरी अच्छे दिनों का भरपूर लाभ उठाते हैं, क्योंकि **अबाबीलें** (56) पहले ही छतों पर जुटने लगी हैं, गरम देशों को उड़ जाने के लिए। बूढ़े **अख़रोट के पेड़** (57) के पत्ते पीले पड़ रहे हैं, **अख़रोट** गिर रहे हैं, और एक **झुरमुट** (58) में खड़े ऊँचे **पेड़**, जो **ऊँची भूमि** (59) पर है, जल्दी ही नंगे हो जाएँगे।","t08-c2-11-1":"11. — **सूरज** (60) देर से उगता है, दिन छोटे होते जाते हैं, **सुबह** एक अच्छी-ख़ासी ठंडक महसूस होने लगती है, और **चाहों** (61) के झुंड अभी से हमारी निर्मम जलवायु छोड़कर जा रहे हैं।","t09-apar-1":"तालिका सं. 9","t09-tit-1":"*पहला दृश्य।*","t09-tit-2":"पहाड़। — जल-नगरी।","t09-c1-01-1":"1. — मैं एक सप्ताह से प्रात्ज़ में हूँ। पिरेनीज़ की अद्भुत **पर्वत-माला** (1) के सामने खड़े होकर मुझे जो विस्मय हुआ, उसे मैं कह नहीं सकता; उसकी **चोटी-रेखा** (2) नीले आकाश पर किसी विशाल झालर की तरह उभरती है।","t09-c1-02-1":"2. — मैंने कल्पना न की थी कि पिरेनीज़ के **शिखर** (3) इतनी **ऊँचाई** तक पहुँच सकते हैं, और मैं उन शानदार **हिमनदों** (5) तथा बर्फ़ से ढकी **चोटियों** (4) को देखकर चकित रह गया, जिनसे इतने भयानक **हिमस्खलन** उतरते हैं।","t09-tit-3":"पहाड़ी दृश्य।","t09-c1-03-1":"3. — आने के अगले ही दिन मैं प्रात्ज़ के पास उस पुराने बुझे **ज्वालामुखी** (6) तक गया। **मुख** के नंगे बंजर किनारे पर अब भी वे निशान साफ़ दिखाई देते हैं जो उस **लावा** ने छोड़े थे, जो कई सदियों पहले **पहाड़ की ढाल** (7) से बहा था। एक **ढलान** पर मुझे उस लावे के कुछ टुकड़े मिल ही गए।","t09-c1-04-1":"4. — प्रात्ज़ सीमा पर बसा है, और जो **किला** (8) फ़्रांस और स्पेन के बीच के **दर्रे** (27) की रखवाली करता है, वह राइन के किनारे के उन पुराने दुर्गों जैसा ही है जो अपनी चट्टान के ऊपर से किसी **शिकार** की ताक में लगते हैं।","t09-c1-05-1":"5. — एक विशाल **गरुड़** (9) , जिसका घोंसला **गढ़** (8) से दूर नहीं, प्रायः मेरा ध्यान खींचता है। यह **शिकारी पक्षी**, अपनी बलवान **चोंच** के साथ, प्रायः अपने बच्चों के लिए कोई मेमना या बकरी का बच्चा अपने **पंजों** में दबाए लाता है। उसके **पंख** इतने बड़े हैं कि वह अपने भारी बोझ के साथ देर तक तैर सकता है।","t09-tit-4":"पैदल चलने वाला।","t09-c1-06-1":"6. — यहाँ की सबसे सुखद सैर को के **झरने** (10) तक जाना है। **गिरता पानी** बगूला बनकर नीचे आता है और फिर नगर के पश्चिम के **देवदार वन** (11) में एक सुंदर **नाले** के रूप में लुप्त हो जाता है। हम इस वन में से **मौसम-केंद्र** (12) तक चढ़े, और **मीनार** के ऊपर से हमने इलाक़े का सारा **विहंगम दृश्य** समेट लिया। **प्राकृतिक दृश्य** अत्युत्तम है, और लगता है **प्रकृति** ने इस देश पर अपने सब कोष लुटा दिए हैं।","t09-c1-07-1":"7. — नीचे उतरने के लिए हमने **रज्जु-रेल** (13) ली और एक छोटे **स्टेशन** पर रुके, एक पुराने **सामंती दुर्ग** के **खंडहरों** (14) के पास, जिसमें कभी प्रात्ज़ के सामंत रहते थे।","t09-c1-08-1":"8. — बेचारा दुर्ग! वह क्या सोचता होगा जब अपने नीचे उस सुथरी **जल-नगरी** (15) को देखता है, जो आज एक फैशनेबल **तापीय आरोग्य-स्थल** है?","t09-c1-08-2":"**जलवायु** इतनी सुखद है और **खनिज जल** इतना गुणकारी कि **आरोग्यशाला** (17) में लिया गया **उपचार-क्रम** सचमुच सुख की बात है।","t09-tit-5":"एक सुहावनी जल-नगरी।","t09-c1-09-1":"9. — सचमुच, ठहरने को सुखद बनाने के लिए सब कुछ किया गया है। रेल ले जाने के लिए एक बड़ा **सेतु-पुल** (16) बनाया गया; **जल-भवन** का **उपवन** (18) , जहाँ **संगीत-सभाएँ** होती हैं, बड़े सलीके से सजाया गया है। कई सुडौल **कोठियाँ** (19) **जुआघर** (21) के चारों ओर बनी हैं, और एक बहुत अच्छी तरह रखी **राजमार्ग** (22) आना-जाना बहुत सहज कर देती है।","t09-c1-10-1":"10. — एक सादा **बाँध** (23) **सड़क** (20) को असली **घाटी** (25) से अलग करता है, जिसके तल में एक सुडौल छोटी **झील** (26) है, जो एक साफ़ **नाले** (24) को पानी देती है।","t09-c1-11-1":"11. — घाटी के दूसरी ओर लोहे की एक **खान** (28) खोदी जा रही है। कई बार मैं **खनिकों** को **कुएँ** में उतरते देखने गया, और मैं उस **सुरंग** में भी गया जहाँ वे दिन भर वह **कच्ची धातु** निकालते हैं जिसमें **धातु** रहती है।","t09-c1-12-1":"12. — खान के पास एक बड़ी **ढलाई-शाला** बनाई गई, ताकि निकाली गई संपदा वहीं काम आ जाए। **भट्ठी** (29) , जो यहाँ बहुतायत से मिलने वाले **कोयले** से गरम की जाती है, जल्दी और सस्ते में **कच्चा लोहा** पाने देती है।","t09-c1-13-1":"13. — खान से दूर नहीं एक **खदान** (30) काटी जा रही है। बूढ़ा **खदान-मज़दूर** अपनी **कुदाल** से जो तोड़ता है वह न **ग्रेनाइट** है, न **पोर्फ़री**, न **बलुआ पत्थर**, बल्कि घर बनाने का साधारण **इमारती पत्थर**।","t09-c1-14-1":"14. — इस देश के सबसे सुंदर गहनों में एक है **देवदार** (31) । हर जगह — किसी **खड्ड** (32) के तल में, किसी **प्रपात** (33) के किनारे, किसी **गह्वर** (34) या कगार के पास — उसकी पतली सुइयाँ अपना हरा स्वर जोड़ देती हैं।","t09-tit-6":"पैदल चलना।","t09-c1-15-1":"15. — मैं अपनी छुट्टियों का लाभ लंबी सैर के लिए उठा रहा हूँ। जो **पगडंडियाँ** (35) पहाड़ पर चक्कर काटती चढ़ती हैं, उन पर कई **किलोमीटर**, और प्रायः कई **कोस**, दूरी का पता चले बिना तय हो जाते हैं।","t09-c1-15-2":"**मील-पत्थर** (36) और **दिशा-सूचक** (37) रास्तों को चिह्नित करते हैं, जिन पर प्रायः कोई जवान **पहाड़ी लड़का** (38) मिलता है, बग़ल में **झोला** (40) लिए और एक **मरमोट** (39) उठाए, या कोई **बंजारा** (41) , जिसकी **रोएँदार टोपी** (42) उसके फटे पुराने **ओढ़ने** (43) से अजीब मेल खाती है। वह एक सधे **भालू** (44) को **ज़ंजीर** से लिए चलता है।","t09-tit-7":"चढ़ाई।","t09-c1-16-1":"16. — लगभग हर दिन मैं एक **गाइड** (48) के साथ **चढ़ाई** करने जाता हूँ, और मुझे बड़ा गर्व होता है जब पीठ पर अपना **पिट्ठू** (47) और हाथ में अपनी **लाठी** लिए, किसी सच्चे **सैलानी** (46) की तरह, मैं **चट्टानों** (45) पर चढ़ाई करता हूँ।","t09-c1-17-1":"17. — पहाड़ की चोटी से मैदान के लोग चींटियों से बड़े नहीं लगते; **भेड़ों का रेवड़** (50) , जो **चरागाह** (49) में चरता है, बच्चों का खिलौना लगता है। एक **चीड़** (51) , या **लकड़ी का पहाड़ी घर** (52) तक, हरे पर एक बिंदु से अधिक नहीं।","t09-c1-18-1":"18. — इन सैरों में हमें **पगडंडी** (53) पर प्रायः कोई **शामोआ का शिकारी** (54) मिलता है, जो अभी-अभी मारा हुआ जानवर कंधे पर लिए होता है।","t09-c1-19-1":"19. — मैंने अपने पादप-संग्रह में **फ़र्न** (55) का एक बहुत अनोखा पत्ता और **हीदर** (57) की एक सुंदर गुलाबी टहनी रखी है, जो मैंने पिछली सैर में एक छोटी **गुफा** (56) के मुँह पर बटोरी थी।","t09-tit-8":"*दूसरा दृश्य।*","t09-tit-9":"जंगल। — शिकार।","t09-c2-01-1":"1. — कल मैंने जंगल में एक आनंददायक दिन बिताया। वहाँ रहने वाले जानवरों और **कीड़ों** (5) के व्यस्त जीवन ने मुझे बहुत रुचिकर लगा।","t09-c2-01-2":"**मकड़ी** (1) , जो दो डालों के बीच अपना **जाला** (2) बुनकर गुज़रती **मक्खी** (3) पकड़ती है, **घोंघा** (4) , जो अपना ख़ोल लिए मुश्किल से आगे बढ़ता है, वह भृंग जो अपने शिकार की टोह में है, वह मेहनती चींटी जो **बाँबी** (6) के पास काम में जुटी है — ये सब नन्हे जीव असाधारण उत्साह से आते-जाते और काम करते रहे।","t09-c2-02-1":"2. — एक **साँप** (7) , जिसे पहले मैंने **नाग** समझा पर जो केवल एक निर्दोष **पनिहा** था, एक तने के नीचे कुंडली मारे था, और बीच-बीच में अपना पतला सिर निकालता था, जो सदा डँसने को तैयार लगता था। मेरे सामने एक बड़ा **स्लग** (8) भारी चाल से रेंग रहा था, उन स्वादिष्ट नन्ही **जंगली स्ट्रॉबेरियों** (11) में से एक चट कर लेने के बाद, जो यहाँ बहुतायत से उगती हैं।","t09-c2-03-1":"3. — ज़मीन **जंगली फूलों** से बिछी थी: **प्रिमरोज़** (9) , **पेरिविंकल** (10) और और भी बहुत से पौधे, जिन्हें मैं जानता न था, **घास के गुच्छों** (12) के बीच खिले थे।","t09-c2-04-1":"4. — इस इलाक़े में **ट्रफ़ल** लगभग उतना ही आम है जितना **कुकुरमुत्ता** (14) , और एक वनरक्षक का **सूअर का बच्चा** (13) लालच से खोज में लगा था कि कुछ मिल जाए।","t09-tit-10":"चोरी का शिकार।","t09-c2-05-1":"5. — मैंने एक दृश्य का **अंत** देखा जिसने मुझे बहुत हँसाया। अपने **बासे कुत्ते** (15) की नाक की बदौलत **वनरक्षक** (16) ने अभी-अभी एक **चोर-शिकारी** (22) को उस समय रँगे हाथ पकड़ा था जब वह अपना मारा **शिकार** (17) उठा ले जाने की तैयारी में था। पकड़े जाने से अच्छा उसे अपना शिकार छोड़ देना लगा, सो चोर-शिकारी भाग गया, और **ख़रगोश** (18) , **हिरनी** (19) , **बारहसिंगा** (20) और **जंगली सूअर** (21) घास पर पड़े रह गए, वनरक्षक की ख़ुशी के लिए।","t09-c2-06-1":"6. — जंगल में पेड़ों की जितनी क़िस्में हैं, वह चकित कर देती है। **बीच** (23) और **भोजपत्र** (26) , **चीड़**, जिनसे **राल** (27) मिलती है, **बलूत** (29) और और भी बहुत से अपनी डालें मिलाते हैं।","t09-c2-06-2":"ऊँचे पेड़ों के तनों से लिपटी **आइवी** (24) **ऊँचे वन** (25) को एक चमकीला हरा रंग देती है, जो उस **काई** (31) की फीकी कोमल छाया से सुखद ढंग से मिल जाता है जिसमें **हरा कठफोड़वा** (30) कीड़े खोजता है।","t09-tit-11":"जंगल का दृश्य।","t09-c2-07-1":"7. — पुराने बलूत मुझे मोह लेते हैं। उनकी बड़ी बल खाती **जड़ें** (32) , आधी ज़मीन से बाहर, उन्हें बल और ओज का शानदार रूप देती हैं, और मुझे अचरज होता है कि **मालिक** (35) उन्हें कटवाकर उस **आरी** (34) को सौंपने को कैसे राज़ी हो जाता है जो **लकड़हारे** (33) की है। बेचारे **तने** (36) , अपनी **छाल** (37) से छीले या **कुल्हाड़े** (38) से चीरे, जो **दिहाड़ी मज़दूर** (39) का है, मुझे दुख देते हैं।","t09-c2-08-1":"8. — पास ही एक बूढ़े **कोयला बनाने वाले** (41) ने अपने **बेलचे** से कोयले का एक **ढेर** (42) लगा रखा था, और एक बुढ़िया कटे पेड़ों की टहनियों से बना **सूखी लकड़ी** का एक **गट्ठर** (40) ले जा रही थी।","t09-tit-12":"शिकार।","t09-c2-09-1":"9. — मैं **वनरक्षक के घर** (46) में थोड़ा सुस्ताने जाने वाला था, पर उस छोटे **ताल** (43) तक पहुँचकर, जिस पर एक सुंदर **हंस** (45) तैर रहा था, मैंने देखा कि हाल की एक **बाढ़** (44) ने रास्ते को सचमुच का **दलदल** बना दिया है। मुझे चक्कर काटना पड़ा, और **देवदार** (49) , **चिनारों** (48) तथा **एल्म** (47) के पास से गुज़रते हुए, जो जंगल के किनारे खड़े हैं, मैंने देखा कि एक **झाड़ी** (54) से निकलकर एक शानदार **बारहसिंगा** (50) भागा, जिसके पीछे एक न थकने वाला **शिकारी कुत्तों का झुंड** (51) लगा था, जिसे **नरसिंगा** (53) उकसा रहा था, **घोड़े पर सवार शिकारियों** (52) का। बेचारा जानवर बिलकुल थक चुका था। वह मुझसे कुछ ही क़दम पर मरता हुआ गिर पड़ा।","t09-c2-10-1":"10. — वनरक्षक का बेटा, जिसे **शिकार** के शोर ने बाहर खींच लिया, घर से निकला, और हम दोनों फिर जंगल में लौटे। उसने एक पुराने बलूत की डाल पर एक **नीलकंठ** (56) देखा था। उसे लगा कि उसका घोंसला **पत्तों** (58) में छिपा होगा, और वह उसे लेना चाहता था।","t09-c2-10-2":"**गिलहरी** (61) की तरह फुरतीला, वह एक **डाल** (55) से दूसरी डाल चढ़ता गया, पर उसे कुछ न मिला और वह केवल एक बूढ़े **कौवे** (60) को चौंका सका, जो एक **शाखा** (57) पर बैठा था।","t10-apar-1":"तालिका सं. 10 समुद्र। — बंदरगाह।","t10-01-1":"1. — गरमियों में जब कुछ लोग पहाड़ों में शांति और ठंडी हवा खोजते हैं, दूसरे समुद्र-तट पर जाना अधिक पसंद करते हैं। पिछले साल हमने यही किया, क्योंकि हमें **महासागर** (1) बहुत भाता है।","t10-02-1":"2. — मुझे तो **क्षितिज** (2) तक फैली उस विशाल जल-चादर को निहारने में बड़ा सुख मिलता है, और यह देखने में कि विशाल **भाप-जहाज़** (3) अमेरिका जाते यात्रियों को लेकर लंबी **समुद्र-यात्रा** पर निकलते हैं।","t10-03-1":"3. — सो मेरे पिता, जो जानते हैं कि मुझे क्या भाता है, छुट्टियों के लिए सदा हमारे किसी बड़े **नौसैनिक बंदरगाह** के पास का कोई बहुत शांत तट चुनते हैं।","t10-03-2":"हमारे पिछले प्रवास में **बेड़ा** आकर उस विशाल **लहर-रोक** (4) के पीछे लंगर डाल गया जो **नौसैनिक बंदरगाह** (5) को बंद करता और उसकी रक्षा करता है, और मैं इत्मीनान से अलग-अलग **युद्धपोत** निहार सका — छोटी **पनडुब्बी** (10) से, जो डुबकी लगाकर पानी के नीचे लुप्त हो जाती है, विशाल **युद्धपोत** (9) तक, जिसे अब तक **टारपीडो नौका** (8) के हमलों के सिवा कुछ डराता न था।","t10-tit-2":"छोटी नौकाएँ।","t10-04-1":"4. — वह पहले ही **चतुराई** से मोटे धातु-कवच की कमज़ोर जगह ढूँढ़ लेती थी और वहाँ वह ख़तरनाक **टारपीडो** गाड़ देती थी जिसके विस्फोट से जहाज़ डूब जाता है; पर वह पनडुब्बी से फिर भी कम डरावनी थी, क्योंकि विनाशक उसका पीछा सहज ही कर सकते हैं।","t10-05-1":"5. — मैं तेज़ बख़्तरबंद **क्रूज़र** (6) भी देख सका, जो सच्चे युद्धपोत जितने ही अभेद्य हैं, कई **सैनिक-जहाज़** (12) , तीन-चार **तोप-नौकाएँ** (7) , और अंत में एक **फ़्रिगेट** (11) । **उस बेड़े को लंगर उठाते देखना सबसे रोचक है।**","t10-06-1":"6. — इस्पात के उन विशाल ढेरों और उन सजीले **तिमस्तूल** या सुडौल **पालदार जहाज़ों** (13) की बनावट में कितना अंतर है, जो अब भी व्यापारी बेड़े में काम आते हैं और जिन्हें मैं **घाट-बाँध** (14) पर टहलते हुए पूरे पाल खोले बंदरगाह में आते देखता था। यह सच है कि **हवा** विपरीत होने पर वे अपना बहुत लाभ खो देते थे। गोदी में घुसने के लिए उन्हें सब पाल समेटने पड़ते थे, और एक **खींचने वाली नाव** (16) चाहिए होती थी जो उन्हें लेने जाए और साधारण **मालवाही नावों** (17) की तरह घाट तक ले आए।","t10-tit-3":"व्यापारिक बंदरगाह।","t10-07-1":"7. — जिस बंदरगाह की मैं बात कर रहा हूँ वह इसलिए इतना रोचक है कि उसमें केवल विशाल कामों से कृत्रिम रूप से बना नौसैनिक बंदरगाह ही नहीं, बल्कि एक बड़ी नदी के **मुहाने** पर एक अद्भुत **व्यापारिक बंदरगाह** भी है।","t10-08-1":"8. — दोनों गोदियों को अलग करती भूमि की पट्टी किलेबंद है और समुद्र तक फैली **तोपों की क़तार** तथा **बुर्जों** से रक्षित है। **प्राचीरों** (15) पर टहलने के लिए विशेष अनुमति चाहिए। मुझे वह अपने चाचा के ज़रिए सहज ही मिल गई थी, जो **जहाज़-निर्माणशाला** (18) में अभियंता हैं, और मैं विशाल छप्परों के नीचे बनते जहाज़ देखने गया।","t10-09-1":"9. — मैंने एक युद्धपोत को पानी में उतरते भी देखा, और मुझे वह रोमांच याद है जो सारी भीड़ ने अनुभव किया जब वह विशाल ढेर, अपने भरोसे छोड़ा गया, अपनी पालनी पर सरकने लगा और नदी के पानी पर तैरने आ गया।","t10-10-1":"10. — निर्माणशाला तक पहुँचने के लिए **परेड-मैदान** (19) पार करना पड़ता है, जहाँ छावनी की सेना हर दिन कवायद को आती है, और लोहे का वह **पुलिया** (20) पार करना पड़ता है जो परेड-मैदान को **शस्त्रागार** (21) से जोड़ता है।","t10-tit-4":"शस्त्रागार और गोदियाँ।","t10-11-1":"11. — अपने चाचा के साथ मैंने वह बड़ा प्रतिष्ठान देखा, जो **तोपों** (22) , **गोलों** (23) और **ख़ोलों** से भरा है। मैंने वह **लोहशाला** (24) भी देखी जहाँ भाप-जहाज़ों के **बॉयलर** (25) बनते हैं।","t10-12-1":"12. — बहुत पास ही **गोदियाँ** (26) हैं — सूखी गोदियाँ — और वे बहुत उल्लेखनीय **तैरती गोदियाँ** (27) , जिनमें मैं मरम्मत होते एक जहाज़ पर पास से किसी पोत का **पंखा** (28) , **पेंदी** (29) और **पतवार** (30) देख सका।","t10-13-1":"13. — व्यापारिक बंदरगाह नौसैनिक बंदरगाह जितना ही देखने योग्य है, और मैंने कई घंटे उन घाटों पर बिताए जहाँ नदी चढ़ने वाले **चक्रदार भाप-जहाज़** (31) बँधे रहते हैं, और उस **तिपाई-क्रेन** (32) को काम करते देखते हुए, जो विशाल बोझ पंखों की तरह उठा लेती है।","t10-tit-5":"कर्णधार।","t10-14-1":"14. — मैंने उन **अंतर्महासागरीय जहाज़ों** (34) को निहारा जो अपनी **झंडियाँ** (35) फहराते बंदरगाह छोड़ते हैं, जिन्हें एक कुशल **कर्णधार** (36) चलाता है, जो **बोयों** (40) और **संकेत-स्तंभों** से चिह्नित **जलमार्ग** पर अद्भुत ढंग से चलना जानता है, और उन **मालनौकाओं** (41) से बचता है जो अपने अकेले चौकोर पाल से बड़ी कठिनाई से चलाई जाती हैं। मैं **अगले भाग** (37) पर दूसरे दर्जे की **कोठरियाँ** (39) पहचान सका, और **पिछले भाग** (38) पर पहले दर्जे के यात्रियों के कक्ष।","t10-15-1":"15. — कभी-कभी मैं किसी **मालवाही जहाज़** (42) की लदाई भी देखता, जिसमें **गोदाम** (43) और **बंदरगाह-स्टेशन** (44) का माल ठूँसा जाता, जो **घाट की रेल-लाइन** (45) की अनेक गाड़ियाँ लाती थीं।","t10-tit-6":"नौका-विहार।","t10-16-1":"16. — मैं प्रायः **तैरती गोदी** (53) में नाव चलाता था, जहाँ छोटी **नावें** (46) शरण लेती हैं, और **डाँड़** (47) चलाना मेरे लिए आनंद था। मैं **तख़्ते** (48) पर चढ़ जाता, किसी **पालदार नाव** (49) के, **रस्सियों** (52) के सहारे **मस्तूल** (51) पर **आड़ी डाँडों** (50) तक चढ़ता, फिर एक **डोंगी** (54) में अपनी सैर जारी रखता, भारी **मछली की नावों** (55) के बीच, जहाँ **जाल** (56) सूखने को टँगे रहते हैं।","t10-17-1":"17. — **घाट** (58) पर मेरे सामने से तरह-तरह का **माल** (59) गुज़रता, **संदूकों** (60) या **गट्ठरों** (61) में बँधा। वे मालनौकाओं का **लदान** (63) बनाते थे, और शक्तिशाली **क्रेनें** (62) उन्हें उठाकर **ट्रकों** (64) पर रखती थीं, जब तक **ढोने वाले** **चुंगी-घर** (65) में उनकी घोषणा करते और शुल्क चुकाते।","t10-18-1":"18. — अंत में, **घूमने वाले पुल** (66) या **जलद्वार** (69) तक पहुँचकर, उस **खोदने वाली नाव** (68) के पास से गुज़रते हुए जो **नहर** (67) साफ़ करती है, मैं **संकेत-मस्तूल** (70) के पास घाट पर उतर जाता।","t10-19-1":"19. — उसी घाट की दूसरी ओर वे **छोटी नावें** (71) लगती हैं जो बेड़े के अफ़सरों को किनारे लाती हैं। नाविकों को ताल से डाँड़ उठाते देखना सुंदर दृश्य है, जब **लहर** (72) पर उठी नाव सहज ही उतरने की सीढ़ियों तक आ लगती है। यहीं से **ज्वार** और **तट** (73) पर **भाटे** तथा **ज्वार** की चाल सबसे अच्छी देखी जा सकती है।","t10-tit-7":"अफ़सरों का क्लब।","t10-20-1":"20. — घर लौटने के लिए मैं **बिजली की ट्राम** (74) लेता, जिसका **ठहराव** (75) अफ़सरों के क्लब के सामने खड़े **खंभे** पर है।","t10-20-2":"क्लब के **बालाख़ाने** (76) से, जो **लंगरों** (77) , तोपों और गोलों से सजा है, मैंने प्रायः नौसैनिक अफ़सरों का शानदार जमघट देखा: अपनी तलवारों समेत **लेफ़्टिनेंट** (78) , **तोपख़ाने** (79) और **पैदल सेना** (80) के **कप्तान** अपनी **कृपाणों** समेत। उनके पीछे एक **नाविक** (81) खड़ा रहता, जो उन्हें एक **दूरबीन** लाकर देता जब वे दूर की बात पहचानना चाहते।","t10-21-1":"21. — मैंने जवान **उप-लेफ़्टिनेंट** (82) भी देखे, जो अपने **कमांडर** (83) या **एडमिरल** (84) से आदेश लेते थे, जब तक एक **क्वार्टरमास्टर** (85) उन्हें जहाज़ तक ले जाने की प्रतीक्षा करता।","t10-22-1":"22. — उस बालाख़ाने से दृश्य शानदार है: वहाँ से सारा तट दिखाई देता है, अपने **तंबुओं** (86) और **स्नान-कुटियों** (87) समेत, और नहाने के समय **नहाने वालों** (88) को **जुआघर** (89) के सामने प्रसन्न उछलते देखा जा सकता है।","t10-23-1":"23. — तट के सिरे पर किनारा एक छोटा चट्टानी **प्रायद्वीप** (91) बनाता है, जहाँ **लहरें** (92) टकराकर टूटती हैं और जिस पर एक **प्रकाश-स्तंभ** (93) बना है, जो रात में नाविकों को रास्ता दिखाता है। यह प्रायद्वीप ज़मीन से केवल एक बहुत सँकरे **डमरूमध्य** (90) से जुड़ा है।","t10-tit-8":"तट का सामान्य दृश्य।","t10-24-1":"24. — **कगार** (94) आगे चलता जाता है, समुद्र से कटा हुआ, जो उसमें से **खाड़ियों** (95) और **भृगुओं** (अंतरीपों) की एक अनोखी लड़ी तराशता है, और उसे बहुत सुरम्य बना देता है।","t10-24-2":"**पठार** (96) पर, जो **जलडमरूमध्य** (98) पर झुका है, एक बहुत महत्त्वपूर्ण **गढ़** (97) है और कुछ कोठियाँ।","t10-25-1":"25. — वह जलडमरूमध्य मुख्य भूमि से एक बहुत ख़तरनाक **द्वीप** (99) को अलग करता है, जो **चट्टानों** (100) और **भित्तियों** से घिरा है, जहाँ नावें और बड़े जहाज़ तक कभी-कभी टूट जाते हैं। बचाव की सारी फुरती और **बचाव-नौकाओं** के जल्दी पहुँचने के बावजूद ये **जहाज़-भंग** भयानक होते हैं, और विषुव की **आँधियों** में कई जहाज़ अपने सब आदमियों और माल समेत डूब चुके हैं।","t10-25-2":"इस पड़ोस के बावजूद **बंदरगाह** नाविकों का बहुत आना-जाना देखता है।","t11-apar-1":"तीसरी शृंखला तालिका सं. 11 नगर और उसकी इमारतें। — आग।","t11-tit-1":"बाहरी बस्ती।","t11-c1-01-1":"1. — मैं महासागर से सौ किलोमीटर दूर एक बड़े नगर में रहता हूँ, जो फिर भी पहले दर्जे का **बंदरगाह** (1) है। जो नदी उसके साथ बहती है वह चार सौ मीटर चौड़ी है और एक बहुत सुंदर लंगरगाह बनाती है।","t11-c1-02-1":"2. — **घाटों** (2) के साथ का सारा भाग बिलकुल सामुद्रिक और औद्योगिक रूप रखता है, और एक ऐसी **बाहरी बस्ती** (3) बनाता है जिसमें केवल नाविक और मज़दूर रहते हैं। ये **कारख़ानों** (4) में और **गैस-घर** (5) में काम करते हैं, जिसकी ऊँची **चिमनी** (6) और **गैस-टंकी** दूर से ही दिखाई देती है।","t11-c1-03-1":"3. — मध्यकाल में नगर किलेबंद था, और उसकी प्राचीरों के कुछ अवशेष अब भी मिलते हैं, विशेषकर वह **द्वार** (8) जो पुराने **गढ़-दुर्ग** (7) का है, और जिसके दोनों ओर उसकी दो **मीनारें** (9) हैं, जो अब **कारागार** के काम आती हैं।","t11-c1-04-1":"4. — इस सारे **मुहल्ले** में, जो बहुत पुराना लगता है, केवल एक इमारत अपेक्षाकृत नई है: **चुंगी-घर** (10) । वह घाट और उस छोटी **गली** (11) के बीच खड़ा है जो पुराने **नगर-भवन** (12) तक जाती है। उस अंतिम इमारत को उस विशाल **घंटा-मीनार** (13) से सहज ही पहचाना जा सकता है जो पुराने नगर पर छाई रहती है।","t11-c1-05-1":"5. — गली के दूसरी ओर चुंगी-घर की ही शैली की एक इमारत **खड़ी** है: वह **व्यापार-भवन** (14) है। उसका एक मुख एक छोटे चौक की ओर खुलता है जहाँ **प्रशासन-भवन** (15) है। हमारा नगर, वस्तुतः, राजधानी न होते हुए भी एक महत्त्वपूर्ण ज़िला-मुख्यालय है।","t11-tit-2":"नगर का ऊपरी भाग।","t11-c1-06-1":"6. — छावनी, जो काफ़ी बड़ी है, विशाल और बहुत स्वास्थ्यकर **बैरकों** (16) में रहती है; वे **नगर-उपवन** (17) के जँगले तक फैली हैं। जो **चौड़ी सड़क** (19) इस उपवन तक जाती है, वह **बचत-बैंक** (18) के पीछे से गुज़रकर **महागिरजे** (20) के चौक पर निकलती है।","t11-c1-07-1":"7. — ये सब इमारतें एक छोटी पहाड़ी पर सीढ़ीदार उठती हैं, जहाँ हमारा बड़ा **माध्यमिक विद्यालय** (21) भी है।","t11-c1-07-2":"यदि आप उस हलकी ढाल वाली सड़क से उतरें जो बड़ी सड़क से मिलती है, तो आप **न्यायालय** (22) तक पहुँचते हैं, जिसके सामने एक सुहावना **सार्वजनिक बग़ीचा** (26) है। यह **चौक** बहुत बड़ा नहीं, पर नगर के बीच वह हरियाली और ठंडक का मरूद्यान बनाता है। सो नगरवासी उसमें ख़ूब आते हैं, जिन्हें **कहवाघर** (25) के छज्जे के नीचे बैठकर उस सैनिक बैंड को सुनना भाता है जो बृहस्पतिवार और रविवार को लॉनों और क्यारियों के बीच बने **बाजा-मंच** (27) में बजता है।","t11-c1-08-1":"8. — उन्हीं लॉनों में से एक पर काँसे की एक **प्रतिमा** (28) खड़ी है, हमारे एक नगरवासी की स्मृति में उठाया गया स्मारक, जिसने अपनी जन्मभूमि की बड़ी सेवा की।","t11-tit-3":"आना-जाना।","t11-c1-09-1":"9. — हमारा नगर अभी बिजली से रोशन नहीं; उसमें केवल **गैस के लैंप** (29) हैं। पर **स्थानीय अख़बार** इस बात के लिए मुहिम चला रहे हैं कि रोशनी की वह व्यवस्था सुधारी जाए, जैसे ट्रामों की **खिंचाई की व्यवस्था** पहले ही सुधारी जा चुकी है। **घोड़ों** से **खींची** जाने वाली पुरानी गाड़ियों की जगह अब व्यावहारिक **बिजली की ट्रामें** (31) आ गई हैं, जो बहुत **कम** किराए में यात्रियों को **नगर के** एक सिरे से **दूसरे तक** जल्दी पहुँचा देती हैं।","t11-c1-10-1":"10. — न्यायालय के पास **बैंक** (32) है, जहाँ व्यापारिक हुंडियाँ भुनाई जाती हैं। **बैंक के हरकारे** (33) लोगों के घर-घर जाकर बकाया वसूलते हैं।","t11-tit-4":"कला और विद्या।","t11-c1-11-1":"11. — पास की वह सुंदर इमारत **संग्रहालय** है। उसमें एक साथ नगर का **पुस्तकालय** (34) , कुछ सुंदर **प्राकृतिक इतिहास के संग्रह** (35) (एक प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय) और एक सुडौल **चित्रशाला** (36) है, जो एक शानदार स्थायी **प्रदर्शनी** बनाती है।","t11-c1-11-2":"वह सप्ताह में दो बार जनता के लिए खुलती है, पर दर्शक किसी भी दिन उसे देख सकते हैं, **रक्षक** (37) को थोड़ी बख़्शीश देकर। **चित्रकार** (38) वहाँ काम करने आते हैं। उन्हें अपनी तिपाइयों के **सामने** देखा जा सकता है, हाथ में **रंग-पट्टी** लिए, प्रसिद्ध चित्रों की नक़ल उतारते।","t11-c1-12-1":"12. — संग्रहालय के पीछे की ऊँचाइयों पर वह **गुंबद** (40) जो **चिकित्सालय** (39) का है, और उस **अध्यापक-प्रशिक्षण विद्यालय** (41) की इमारतें मुश्किल से दिखाई देती हैं जहाँ हमारे नगर-विद्यालयों के अध्यापक प्रशिक्षित हुए थे। रंगमंच के चौक पर एक **डाकघर** (43) है, जो एक **निजी मकान** (42) में बैठा है।","t11-tit-5":"आग।","t11-tit-6":"आग की हाँक।","t11-c2-01-1":"1. — नगर में डरावनी ख़बर फैल रही है: रंगमंच में अभी-अभी आग लग गई! जब तक मैं **चौक** (96) पहुँचता हूँ, भीड़ **पटरी** (46) और **सड़क** (47) पर जुट चुकी है। **डाक के बाबू** (44) और **डाकिए** (45) डाकघर से बाहर आ रहे हैं। एक **ट्राम-चालक** (48) को अपनी ट्राम रोकनी पड़ी है ताकि नगर की एक **रोगी-गाड़ी** (50) निकल सके, जो एक **शल्य-चिकित्सक** (52) और एक **परिचारिका** (51) को लेकर आ रही है, एक **घायल** (53) की देखभाल के लिए, जिसे **स्ट्रेचर** (54) पर **अख़बार के खोखे** (55) के पास लाया गया है।","t11-c2-02-1":"2. — कवायद से लौटती पैदल सेना की एक टुकड़ी रुक गई है, ताकि घोड़ों पर सवार **नगर-रक्षकों** (61) के साथ व्यवस्था बनाए रखने में मदद करे। **घुड़सवारों** के घोड़े दो पैरों पर खड़े हो जाते हैं; वे **सैनिकों** (57) या **जेंडार्मों** (63) से बेहतर **तमाशबीनों** (56) को पीछे धकेल पाते हैं। जेंडार्म वैसे भी बहुत व्यस्त हैं। उनमें से एक **पुलिस के सिपाहियों** (64) को बता रहा है कि एक और **घायल** (65) को कहाँ ले जाना है, एक वीर दमकल वाला जो सीढ़ी से गिर पड़ा है।","t11-c2-03-1":"3. — **अफ़सर** (66) ठीक-ठीक बताता है कि जो **भाप-पंप** (67) अभी आ रहा है उसे कहाँ रखना है। उस शक्तिशाली यंत्र की प्रतीक्षा में उसने एक **हाथ-पंप** (68) लगवा दिया है, जिसकी लंबी **नली** (69) आग पर पानी की धाराएँ उड़ेल रही है। छह दमकल वाले उसे चला रहे हैं, जब तक उनका साथी **टोंटी** (70) थामे **धार** (71) को आग के बीच साधता है।","t11-c2-04-1":"4. — रंगमंच के दूसरी ओर बड़ी **सीढ़ी** (72) खड़ी की गई है। वह दमकल वालों को उन लपटों के पास पहुँचने देती है जो काले **धुएँ** (75) के बगूलों के बीच उठती हैं।","t11-tit-7":"वीरता के काम।","t11-c2-05-1":"5. — **आग** (74) **रंगमंच** (73) के प्रवेश-कक्ष में लगी, उस **ओपेरा** के पूर्वाभ्यास के समय जिसका पहला **प्रदर्शन** कल होने वाला था। सौभाग्य से सभा-कक्ष में केवल कुछ **दर्शक** (76) थे। बेचारों ने **बालाख़ाने** (77) में शरण ली, जहाँ वीर **दमकल वाले** (86) सीढ़ी और रस्सियों के साथ उनकी मदद को आ रहे हैं।","t11-c2-06-1":"6. — **द्वार-मंडप** (78) के नीचे, जहाँ **नाट्य-सूचना** (79) प्रदर्शन की घोषणा करती है, **बाजेवाले** (81) भागते दिखाई देते हैं, जो **वाद्य-वृंद** (80) के हैं, अपने वाद्य उठाए: **वायलिन** (81) , **बाँसुरी** (82) , **चेलो** (83) , **ट्रॉम्बोन** (84) , **ढोल** (85) , इत्यादि। **साज-सामान** (87) का एक हिस्सा बचाने का यत्न किया जा रहा है।","t11-c2-07-1":"7. — **अभिनेताओं** (89) और **अभिनेत्रियों** (88) को, गायकों और गायिकाओं को, अपने मंच के **वस्त्रों** (90) में ही भागना पड़ा है। मुख्य गायक एक **पत्रकार** (92) को समझा रहा है कि यह कैसे हुआ। **संवाददाता** पहले ही क्षण से अधिकारियों के साथ दौड़ा आया था: **प्रशासक** (91) , **नगराध्यक्ष** (93) , **पुलिस अधीक्षक** (94) और एक **न्यायाधीश** (95) , जो जाँच करेंगे कि ज़िम्मेदारी किसकी है।","t12-apar-1":"तालिका सं. 12 स्टेशन। — रेलगाड़ियाँ। — जहाज़। टिप्पणी। — *हर देश में समय की गणना अलग है, इसलिए हमने उदाहरण के लिए* **फ़्रेंच तालिका** *के समय लिए हैं।*","t12-01-1":"1. — मैंने अभी जर्मनी की एक यात्रा की है। निकलने से पहले मैंने गाड़ियों के छूटने का समय जानने के लिए एक **समय-सारणी** (15) ख़रीदी थी। यह देखकर कि सबसे सुविधाजनक गाड़ी पेरिस से रात नौ बजे छूटती है और स्ट्रासबूर्ग एक बजकर तेरह मिनट पर पहुँचती है, मैंने अपनी यात्रा की तैयारी की, और अगले दिन स्टेशन तक गाड़ी करा ली।","t12-02-1":"2. — जब मैं प्रस्थान के बड़े कक्ष में घुसा, एक बूढ़े देहाती **पादरी** (2) के पीछे, जो हाथ में अपना **यात्रा-थैला** (3) लिए था, तब तक बहुत से **यात्री** (1) आ चुके थे।","t12-02-2":"मुझे एक **तार** (5) भेजना था, इसलिए मैंने एक **निरीक्षक** (6) से **तार-घर** (4) पूछ लिया।","t12-03-1":"3. — **प्रतीक्षालय** (7) में जाने से पहले मैं आने-जाने का एक **टिकट** (9) लेने गया।","t12-04-1":"4. — **टिकट-खिड़की** (8) पर मुझे देर न लगी, क्योंकि वहाँ भीड़ कम थी। छुट्टी पर जाते एक **सिपाही** (10) ने कृपा करके मुझे अपनी बारी दे दी, सो मुझे इतना समय मिल गया कि **स्टेशन-अध्यक्ष** (13) से कुछ बातें पूछ लूँ, जो **पुलिस अधीक्षक** (12) और ड्यूटी पर तैनात **जेंडार्म** (11) से बातें कर रहे थे।","t12-tit-1":"सामान की बुकिंग।","t12-05-1":"5. — **किताबों के खोखे** (14) से एक अख़बार ख़रीदकर मैंने अपना **सामान** (17) तुलवाया — एक **कुली** (16) उसे अभी एक **सामान की ठेली** (19) पर लाया था। **बाबू** (22) , जो **तौल-यंत्र** (21) के प्रभारी हैं, उन्होंने मुझे बताया कि मेरा संदूक पैंतीस किलो का है, जिससे पाँच किलो का **अधिभार** बनता है, जिसके लिए मुझे **सामान की खिड़की** (23) पर अतिरिक्त शुल्क देना होगा।","t12-06-1":"6. — चूँकि मैं समय से पहले था, मुझे स्टेशन में यात्रियों की चहल-पहल देखने का समय मिल गया। कुछ **अमानती घर** (25) में छोटे थैले रख या ले रहे थे; दूसरे **समय-सारणियाँ** (26) देख रहे थे। आते यात्री **निकास** (32) की ओर जल्दी करते थे, हाथ में अपने **सूटकेस** (24) लिए। कुछ **सामान की सुपुर्दगी** (27) पर प्रतीक्षा करते और अपनी **रसीद** (29) दिखाते, अपने संदूक, **पेटियाँ** (28) या **टोकरियाँ** (30) लेने के लिए।","t12-07-1":"7. — **चुंगी के कर्मचारी** (33) ध्यान से गठरियाँ जाँचते थे कि कहीं कुछ घोषित करने योग्य तो नहीं।","t12-08-1":"8. — कुछ यात्री **जलपानगृह** (34) की ओर गए, जहाँ एक **बैरा** (35) उन्हें फुरती से परोस रहा था। उन्हें जल्दी करनी थी, क्योंकि **गाड़ी** (36) , जो एक्सप्रेस थी, स्टेशन पर अधिक देर नहीं रुकती।","t12-09-1":"9. — फिर मैं प्रस्थान के प्लेटफ़ॉर्म पर गया और एक सीधा **डिब्बा** (37) ढूँढ़ा, ताकि रास्ते में बदलना न पड़े। मैं गलियारे वाली एक गाड़ी में चढ़ा, जिसमें धूम्रपान करने वालों के लिए एक **कक्ष** (38) है और एक « अकेली महिलाओं » के लिए सुरक्षित।","t12-tit-2":"रात का प्रस्थान।","t12-10-1":"10. — **पायदान** (40) चढ़कर, **दरवाज़ा** (39) बंद करके, **परदा** (41) चढ़ाकर और अपने छोटे थैले **सामान की जाली** (43) में रखकर मैं **सीट** (42) पर बैठ गया। **लैंप वाले** (44) को बत्तियाँ जलाते देखकर मुझे याद आया कि मुझे एक रात डिब्बे में बितानी है, और मैंने **तकिए** (45) किराए पर देने वाले कर्मचारी को बुलाकर एक माँग लिया।","t12-11-1":"11. — गाड़ी का कंडक्टर टिकट जाँचने आया। मैंने उससे पूछा कि हम चले क्यों नहीं, जब कि समय हो चुका है। उसने उत्तर दिया कि **गाड़ी के प्रमुख** (46) **सामान के डिब्बे** (47) में साइकिलें रखवाने में लगे हैं। इसके सिवा, सब **पाँव गरम करने के डिब्बे** (48) अभी बदले भी नहीं गए।","t12-12-1":"12. — पर हम जल्दी ही चलने वाले थे, क्योंकि **आग वाला** (50) , अपने **कोयला-डिब्बे** (49) पर चढ़ा, **इंजन** (54) की आग तेज़ करने को कोयला ले रहा था, और **चालक** (51) केवल **सहायक स्टेशन-अध्यक्ष** (52) के संकेत की प्रतीक्षा में था, जो **प्लेटफ़ॉर्म** (53) पर खड़े थे।","t12-13-1":"13. — इंजन का **बॉयलर** (56) धीमे स्वर में गरजता था; **चिमनी** (55) **भाप** (60) मिले धुएँ की धाराएँ उगलती थी। एक तीखी **सीटी** (59) गूँजी और **पिस्टन** (58) चलने लगे, जो उस भारी यंत्र के **पहिए** (57) घुमाते हैं।","t12-tit-3":"चल पड़े!","t12-14-1":"14. — गाड़ी, जो **पटरियों** (64) पर दौड़ रही थी, तेज़ होती गई; **प्लेटफ़ॉर्म** (65) समाप्त हो गए; हम **शौचालयों** (66) के पास से गुज़रे, और एक दूसरी **पटरी** (63) पर खड़े डिब्बों की क़तार के पास से भी: **शयन-डिब्बे** (67) , एक **भोजन-डिब्बा** (68) , एक **डाक-डिब्बा** (69) ।","t12-15-1":"15. — फिर हमारी आँखों के सामने से **माल-स्टेशन** (71) गुज़रा। छप्परों के नीचे कर्मचारी धीमी गाड़ी से भेजा **माल** (72) लाद रहे थे। **डिब्बे जोड़ने वाले** (76) , **पानी की टंकी** (73) के पास, **पशु-डिब्बे** (75) और **खुले डिब्बे** (79) इधर-उधर कर रहे थे, एक **माल-गाड़ी** (80) बनाने को।","t12-16-1":"16. — हम आख़िरी **काँटे** (78) से गुज़रे, जिसके पास काँटेवाला खड़ा था; हमने **संकेत-चक्र** (86) पीछे छोड़ा और स्टेशन दूर में खो गया।","t12-17-1":"17. — जल्दी ही हम उस **लोहे के पुल** (74) पर आ गए जो **नदी** (81) पार करता है। पुल पार करके हम नदी के साथ-साथ चले, जिस पर शक्तिशाली **खींचने वाली नावें** (82) भारी **मालनौकाएँ** (83) खींच रही थीं। हमने एक **यात्री-जहाज़** (84) भी देखा, ठीक उस समय जब वह एक **तैरते घाट** (85) से लगने वाला था।","t12-18-1":"18. — कई स्टेशन बिना रुके पार करके हम कुछ **सुरंगों** (87) से गुज़रे और अपने पीछे **फाटक-रक्षकों** की अनगिनत **कोठरियाँ** (88) छोड़ते गए। गाड़ी के झूले में झूलते हुए मुझे गहरी नींद आ गई।","t12-tit-4":"डॉयच-आव्रीकूर स्टेशन।","t12-19-1":"19. — मुझे अचानक एक कर्मचारी की आवाज़ ने जगा दिया, जो चिल्ला रहा था: « डॉयच-आव्रीकूर! (*) सब उतरें! » यह चुंगी की जाँच थी और सीमा की सारी झंझट भरी औपचारिकताएँ। मुझे अपनी घड़ी स्टेशन की **घड़ी** (89) से मिलानी पड़ी, जो पचपन मिनट आगे थी; मुश्किल से जागा हुआ मैं **बड़ी सुई** (90) और **छोटी** (91) में भेद कठिनाई से कर पाता था; **डायल** (92) तो सुबह की धुंध से बिलकुल धुँधला था।","t12-20-1":"20. — जब तक चुंगी वाले अपनी जाँच करते रहे, मैं जँभाई लेते हुए उन **इश्तहारों** (93) को पढ़ता रहा जो स्टेशन की दीवारें सजाते हैं। समय काटने को मैंने नाश्ता किया, जर्मन **जाल** (94) का नक़्शा देखा कि स्ट्रासबूर्ग अभी कितनी दूर है, और अपनी यात्रा के अंत तक जल्दी पहुँचने की आशा से मन में बल पाकर फिर डिब्बे में चढ़ गया।","t13-apar-1":"तालिका सं. 13 होटल। — भोजनालय। कहवाघर।","t13-01-1":"1. — कल शाम रुआयाँ पहुँचकर मैं *महासागर होटल* में ठहरा, जिसकी सिफ़ारिश एक मित्र ने की थी।","t13-01-2":"मुझे एक सुंदर **कमरा** (2) मिला, दूसरी **मंज़िल** (1) पर, जहाँ मैं बहुत अच्छी तरह सोया (*) ।","t13-02-1":"2. — आज सुबह अपना कमरा छोड़ते हुए, जहाँ **नौकरानी** (3) मेरा नाश्ता ले आई थी, मैं **धूम्रपान-कक्ष** (5) में गया, जो **वाचन-कक्ष** (4) का काम भी देता है, ताकि **अख़बार** (6) देख लूँ, एक **सिगरेट** (8) पीते हुए। पढ़ चुकने पर मैं **लिफ़्ट** (9) से नीचे उतरा और नगर में टहलने निकल पड़ा।","t13-03-1":"3. — चूँकि मैं होटल के **बाबू** (12) से पूछना भूल गया था कि **सामूहिक मेज़** (11) पर भोजन किस समय परोसा जाता है, मैं जल्दी लौट आया और मौके का लाभ उठाकर होटल के **स्नान-कक्ष** (10) में नहा लिया। फिर मैं अपने एक मित्र को फ़ोन करने **गल्ले** (15) पर लौटा। पर **टेलीफ़ोन** (13) व्यस्त था; मुझे उलझन में देखकर **ख़ज़ांची** (14) , जो एक **बिल** (17) **अतिथि-पंजी** (16) में चढ़ा रही थी, उन्होंने **द्वार-रक्षक** (18) से कहा कि **छोकरे** (19) को भेज दें, जो अपनी **साइकिल** (20) पर मेरा काम कर आए।","t13-04-1":"4. — मैंने उन्हें धन्यवाद दिया और बाहर जाकर **कुली** (24) (फुटकर काम वाले) को बख़्शीश दी, जो अपनी **हाथ-ठेली** (25) पर स्टेशन से मेरा **टोपी-बक्स** (26) , मेरा **सूटकेस** (27) और मेरा **यात्रा-थैला** (28) लाया था। **डाकिया** (21) , जो ठीक उसी समय आया, उसने मुझे एक **चिट्ठी** (22) थमाई।","t13-05-1":"5. — मैं **चिट्ठी-पेटी** (23) के पास देहरी पर कुछ देर और खड़ा रहा, गली की चहल-पहल देखता। **चालक** (30) , जो **ओमनीबस** (29) का है, अपनी गाड़ी पर एक **संदूक** (31) लाद रहा था, जो एक **मेहमान** (32) का था, जिससे **होटल वाला** (33) विदा ले रहा था। एक जवान **तार वाला लड़का** (35) बिना किसी जल्दी के होटल के एक मेहमान के लिए एक **तार** (34) ला रहा था; एक **सैलानी** (36) , कंधे पर अपना **कैमरा** (38) लटकाए, अपनी **पथ-पुस्तिका** (37) देख रहा था।","t13-tit-1":"दोपहर के भोजन का समय।","t13-06-1":"6. — जँगले के सामने एक शांत **फेरी वाला** (39) अपने **ढोने के काँटों** (40) और अपनी **जूता-पॉलिश की पेटी** (41) के बीच ऊँघ रहा था, जब कि एक जवान **धोबिन** (42) , कपड़ों की एक **टोकरी** (43) उठाए, दरवाज़े के पास खड़े **प्रधान परिचारक** (44) की गंभीर मुद्रा पर हँस रही थी।","t13-07-1":"7. — **रसोइए** (45) को देखकर, जो अपनी **रसोई** (47) से, जो **तहख़ाने** (48) में है, एक **रसोई के छोकरे** (46) को काम पर भेजने बाहर आया था, मुझे याद आया कि भोजन का समय पास है, और मैं आँगन पार कर भोजनालय की ओर गया, जहाँ एक **मोटर-चालक** (50) अपनी **मोटर** (49) खड़ी कर रहा था, जब कि एक **मिस्त्री** (52) **साइकिल वाले** (53) के बताए अनुसार एक **मोटर-तिपहिया** (51) की मरम्मत कर रहा था, जिसकी अभी-अभी दुर्घटना हुई थी।","t13-08-1":"8. — एक जवान **परिचारक** (54) से, जो **बीयर के गिलास** (55) उठाए था, मैंने पूछा कि सामूहिक मेज़ बरामदे के नीचे है क्या, और उसके हाँ कहने पर मैं एक मेज़ पर बैठ गया और मैंने अपने लिए एक बढ़िया भोजन मँगवाया।","t13-tit-2":"एक बढ़िया भोजन।","t13-09-1":"9. — बैरा मेरे लिए दोपहर के भोजन का पत्र (*) और शराब की सूची लाया। मैंने चुनाव किया और **पहले व्यंजन** के रूप में **मक्खन** के साथ **झींगे** मँगाए, और पहले परोसे में **कान की तरह बनी ओझड़ी**। मैंने **मछली** नहीं ली, पर भेड़ की **रान** का एक हिस्सा माँगा और **सब्ज़ी** में मलाई वाली **पालक**। फिर, जब **मीठे व्यंजनों** में कोई मुझे न भाया, मैंने तरह-तरह की मिठाइयाँ मँगवाईं: **पनीर**, **फल** और **बिस्किट**। मैंने साथ में एक बढ़िया सैंत-एमिलियों **शराब** जोड़ी, और अपने भोजन से बहुत संतुष्ट होकर **बैरे** (57) को अच्छी **बख़्शीश** (59) देकर मेज़ छोड़ी।","t13-10-1":"10. — मुझे उठने को तैयार देखकर **प्रबंधक** (60) ने सुझाया कि मैं बालाख़ाने पर निकल आऊँ और **महासागर** (62) का शानदार विहंगम दृश्य निहारूँ। दूर छोटी मछली की **नावें** (63) , **पालदार जहाज़** (64) और एक विशाल **यात्री जहाज़** (65) पहचाना जा सकता था, जिसकी काली छाया सफ़ेद **बादलों** (67) पर उभरती थी, जो **क्षितिज** (66) पर थे। एक हलकी हवा उस **झंडे** (70) को हिला रही थी जो **बोर्ड** (69) के ऊपर गाड़ा है, और वह बोर्ड **हॉल** (68) का है।","t13-tit-3":"मनोरंजन।","t13-11-1":"11. — दृश्य इतना रोचक था कि मैंने तय किया कि अगले दिन कहवाघर की छत पर चढ़ूँगा, साथ में एक **दूरबीन** (71) या एक **दूरदर्शी** (72) लेकर।","t13-12-1":"12. — बालाख़ाना छोड़कर मैं होटल के कहवाघर में गया, एक **पेय** (73) पीने और **बिलियर्ड** (75) का एक खेल खेलने। मैं सीधे कहवाघर के कक्ष में से गुज़रा, जहाँ बहुत से ग्राहक **शतरंज** (78) , **चौपड़** (79) , **डोमिनो** (80) , **बैकगैमन** (81) या **ताश** (82) खेल रहे थे, और सीधे **बिलियर्ड-कक्ष** (74) में जा पहुँचा।","t13-13-1":"13. — खेल समाप्त होने पर मैं भूतल पर उतरा और बैरे से एक चिट्ठी लिखने के लिए एक **लिफ़ाफ़ा** (84) , कुछ **काग़ज़** (83) , एक **डाक-टिकट** (85) , एक **कलम** (87) और कुछ **स्याही** (86) माँगी।","t13-13-2":"फिर मैंने एक **कोचवान** (92) को बुलाया, जिसकी **बग्घी** (88) कहवाघर के सामने रुकी थी। मैंने उससे घंटे और फेरे का भाव पूछा, और सौदा तय हो जाने पर उसने मेरे लिए **बग्घी का दरवाज़ा** (89) खोला और मुझे भीतर बिठाया। वह फिर अपनी **गद्दी** (91) पर चढ़ा, अपने **चाबुक** (93) से घोड़ों को फुरती से चलाया, और हम एक आनंददायक सैर पर निकल पड़े।","t14-apar-1":"तालिका सं. 14","t14-tit-1":"सड़क। — दुकानदार।","t14-01-1":"1. — मेरा मित्र जॉन, जो देहात में रहता है, मेरे परिवार के साथ तीन दिन बिताने आया है। **अब तक** उसे कभी कोई बड़ा नगर देखने का अवसर न मिला था, सो हम अपने सारे दिन घूमते बिताते हैं और जो उसे मालूम नहीं, वह मैं उसे समझाता हूँ।","t14-02-1":"2. — पहले हम **वेधशाला** (1) देखने गए, जिसमें उसे बड़ी रुचि हुई। उस **सड़क** (3) से लौटते हुए जहाँ **तुर्की हम्माम** (2) हैं, हमें एक **अंत्येष्टि** (4) मिली। **शव-यात्रा** के आगे-आगे **पुरोहित** चल रहे थे, उस **शव-गाड़ी** के आगे जिसमें **ताबूत** रखा था। बहुत से मित्र **शोक** में डूबे परिवार के पीछे चल रहे थे।","t14-02-2":"जुलूस के गुज़र जाने पर हमने बड़ी **शराबख़ाने** (5) के सामने सड़क पार की, जहाँ बहुत से **ग्राहक** छत के नीचे **बीयर** पी रहे थे, काँच की **छतरी** (6) की ओट में।","t14-03-1":"3. — जॉन उस **राज-चिह्न** से उलझन में पड़ गया जो **शराब के व्यापारी** (7) की दुकान और **संगीत-विक्रेता** (10) की दुकान के बीच लगा है। उसने मुझसे पूछा कि उसका क्या अर्थ है; मैंने कहा कि वह अंग्रेज़ी **वाणिज्य-दूतावास** (8) की पहचान है, और उसे बालाख़ाने पर खड़े **वाणिज्य-दूत** (9) की ओर इशारा किया।","t14-tit-2":"दुकानें देखना।","t14-04-1":"4. — स्वभावतः हम **वाद्यों**, **हारमोनियमों**, **ऑर्गनों** और **पियानो** की सजावट के सामने रुक गए; हमने **स्वरलिपियों** और पियानो के **टुकड़ों** के चित्रित आवरण देखे, और दुकान के बोर्ड के रूप में लगी सोने की लकड़ी की **वीणा** निहारी।","t14-05-1":"5. — **झाड़ू लगाने वालों** (11) और **झाड़ू की गाड़ी** (12) से उठे धूल के बादलों ने हमें विवश किया कि हम **साज-सामान के व्यापारी** (13) के सुंदर **सामान-समूहों** और **लोहे के व्यापारी** (14) की **चूल्हों** तथा **लैंपों** की सजावट के पास से जल्दी निकल जाएँ।","t14-06-1":"6. — उसी जगह हमें पटरी छोड़नी पड़ी, क्योंकि वह उन गठरियों से रुकी थी जो एक **सामान ढोने की गाड़ी** (16) से उतारी जा रही थीं, ताकि उस **दुकान** (15) में ले जाई जाएँ जो अभी-अभी किराए पर उठी थी।","t14-06-2":"इससे हम **गाड़ी बनाने वाले** (17) की सुंदर गाड़ियाँ न देख सके, पर हम रुककर **बाँधने वाले** (19) को यह देखने से न रुके कि वह अपने पड़ोसी **साइकिल और मोटर के व्यापारी** (18) के लिए एक पेटी बना रहा है। फिर, चूँकि काफ़ी देर हो चुकी थी, हम घर लौट आए।","t14-tit-3":"नगर में एक सैर।","t14-07-1":"7. — अगले दिन मेरी माँ ने सुझाया कि जॉन अपनी तसवीर खिंचवाए, और मुझसे कहा कि उसके साथ **फ़ोटोग्राफ़र** (20) के यहाँ जाऊँ। भोजन के बाद हम कलाकार के **कक्ष** में गए, जहाँ हमें काफ़ी देर प्रतीक्षा करनी पड़ी। समय काटने को हमने दीवार पर टँगे **चित्र** (22) देखे।","t14-07-2":"हमारी बारी आने पर काम में देर न लगी, और मेरे मित्र के **कैमरे** (21) के सामने बैठ चुकने पर हम नीचे उतर आए।","t14-08-1":"8. — पहली मंज़िल पर हमने **हजामतवाले** (23) के खुले दरवाज़े से देखा कि उसका सहायक एक ग्राहक के बाल काट रहा है।","t14-08-2":"फिर सड़क पर आकर हम **तंबाकू की दुकान** (24) के पास से गुज़रे। जॉन को लाल **लालटेन** (25) और **बोर्ड** (26) के रूप में लगी **बड़ी चिलम** से इतना मज़ा आया कि वह दो बूढ़े सज्जनों से टकरा गया, जो **नसवार की चुटकी** (27) लेते बातें कर रहे थे।","t14-tit-4":"मिठाई की दुकान।","t14-09-1":"9. — **सर्राफ़** (29) की **खिड़की** में सजे हर देश के **नोट** और **सिक्के** ने कुछ देर हमारा ध्यान बाँधे रखा, पर चूँकि चाय का समय था, हम बिना और रुके **हलवाई** (31) की दुकान में घुस गए।","t14-10-1":"10. — दुकान में जितनी **अच्छी चीज़ें** थीं — हर तरह के **केक, अदरक-रोटी, बिस्किट** और **मिठाइयाँ** — उन्हें देखकर हमसे चुना ही न गया। अंत में जॉन ने **मलाई के केक** लिए, और मैंने केवल एक छोटी **चेरी की टिकिया**, क्योंकि मीठी चीज़ों से **मेरे दाँत दुखते हैं** और मुझे **दंत-चिकित्सक** (30) के यहाँ बार-बार जाने की तनिक इच्छा नहीं।","t14-tit-5":"टंकण।","t14-11-1":"11. — अपने मित्र को एक **टाइपराइटर** दिखाने के लिए, जिसके बारे में उसने सुना तो था पर देखा न था, हम उस **दफ़्तर** (32) में गए जो मेरे **चचेरे भाई** (34) का है। हमने उन्हें अपनी **सचिव** (35) को पत्र लिखवाते पाया, जो **आशुलिपिक** है। एक पत्र समाप्त होते ही एक **टंकक** (33) उसे अपनी मशीन पर उतार लेता था। अपने रिश्तेदार का काम न रोकना चाहते हुए हम उनके पास केवल कुछ मिनट रुके।","t14-12-1":"12. — मेरे चचेरे भाई के दफ़्तर के नीचे एक बड़े **घड़ीसाज़ और जौहरी** (37) रहते हैं, जो चाँदी के कारीगर भी हैं। उनकी शानदार दुकान में बहुत सी **घड़ियाँ, अँगीठी की घड़ियाँ, जेब-घड़ियाँ**, **ज़ंजीरें** और बहुमूल्य **गहने** हैं, जैसे **मोतियों के हार**, सोने के **कंगन**, **कर्णफूल** और **बहुमूल्य पत्थरों** तथा **हीरों** से जड़ी **अँगूठियाँ**। एक खिड़की पूरी तरह **चाँदी के बरतनों** को दी गई है और उसमें चाँदी के **चम्मच-काँटों** का एक बड़ा संग्रह है।","t14-13-1":"13. — सड़क का मोड़ मुड़ते हुए मैंने देखा कि घर के **नंबर** के पास लगी **नाम-पट्टी** (36) बदल दी गई है। मैं यह ज़ोर से कहने ही वाला था कि एक सैनिक बैंड की प्रसन्न ध्वनि सुनाई दी। हम रेजिमेंट की ओर दौड़ पड़े, यह सोचे बिना कि वह **टोपीवाले** (39) और **दस्ताने वाले** (40) की दुकानों के सामने से गुज़रने वाली है, और कि उसे निकलते देखने के लिए हम **ऐनकवाले** (38) की खिड़की के सामने खड़े रहकर भी उतने ही अच्छे स्थान पर होते, जो **नाक-चश्मों, ऐनकों** और **दूरबीनों** से भरी है।","t14-tit-6":"सलामी-परेड।","t14-14-1":"14. — **रेजिमेंट** (41) के आगे-आगे **ढोल-प्रमुख** (42) चल रहा था, उसके पीछे **ढोलवाले** (43) , **बिगुलवाले** (44) और सारा **बैंड**। **जनरल** (45) , जो अपने सहायक के साथ चौक पर थे, **जल-धार** (49) के पास रुक गए थे, जो **फ़व्वारे** (48) की है, **परेड** देखने के लिए।","t14-14-2":"**स्टाफ़ के अफ़सरों** (46) , **कर्नल** और **उप-कर्नल** ने उन्हें तलवार से सलामी दी। **मेजर** अपनी **बटालियनों** (47) के आगे थे और हर **कप्तान** अपनी **कंपनी** का नेतृत्व करता था, जब कि **लेफ़्टिनेंट**, **उप-लेफ़्टिनेंट** और **ग़ैर-कमीशन अफ़सर** अपने आदमियों के पास अपनी सामान्य जगहों पर थे।","t14-15-1":"15. — **चौराहे** (50) पर बहुत से राहगीर जमा हो गए थे; दुकानदार — **छाता बेचने वाला** (51) , **रँगरेज़** (53) , **बंदूकसाज़** (54) — **सिपाही** देखने बाहर आ गए। हर गाड़ी — **किराए की बग्घियाँ** (52) , **निजी गाड़ियाँ** (57) और **पानी की गाड़ी** (56) भी — पटरी के साथ खड़ी हो गई।","t14-tit-7":"सड़क के दृश्य।","t14-15-2":"हाथ में अपने **नमूने के बक्स** लिए एक **यात्रा-विक्रेता** (55) फुरती से सड़क पार कर गया, और **ऊपरी तख़्ते** (59) पर बैठे लोग, जो **ओमनीबस** (58) का है, मुड़कर तमाशा देखने लगे। एक बेचारे **गली के गवैये** (60) को, जो अपना **पेटी-बाजा** (61) लिए था, अपना **गीत** बीच में छोड़ना पड़ा, क्योंकि ढोलों के शोर ने उसकी आवाज़ दबा दी।","t14-16-1":"16. — जब रेजिमेंट **कपड़े की दुकान** (64) के सामने आई, तो **सिलाई करने वालियाँ** (63) और **दर्ज़ी** (62) अपनी **सिलाई की मशीनें** और अपना काम छोड़कर खिड़की से झाँकने लगे। **दुकानदार** (65) , जिसने अभी-अभी अपनी **सजावट की खिड़की** में नए **सूट** (66) रखे थे, उसे **कपड़े** (67) और **लिनन** के वे थान हटाने पड़े जो पटरी पर **नाली के मुँह** (68) के पास रखे थे, इस डर से कि भीड़ उन्हें गिरा न दे; एक बूढ़े **फेरीवाले** (69) तक को, जिससे एक चौकीदार कुछ मोज़ों का मोल-भाव कर रहा था, अपनी बिक्री पूरी करने के लिए एक ड्योढ़ी में घुसना पड़ा।","t14-16-2":"हम रेजिमेंट के साथ बैरकों तक गए **और**, अपने दिन से बहुत संतुष्ट, भोजन के समय घर लौट आए।","t14-tit-8":"विविध व्यापार और पेशे।","t14-17-1":"17. — अगले दिन मेरे पिता ने प्रस्ताव रखा कि हमें स्थानीय अख़बार की छापेख़ाना दिखा लाएँ। हमने उत्साह से मान लिया।","t14-17-2":"**छापेवाला** **पुस्तक-विक्रेता** (70) , **प्रकाशक**, **लेखन-सामग्री विक्रेता** और **जिल्दसाज़** भी है। उसने पहली मंज़िल पर अख़बार का **संपादकीय कक्ष** (71) रखा है, और **उत्कीर्णन-कक्ष** भी, जहाँ **शिलामुद्रक** (72) और **ताम्र-उत्कीर्णक** (73) काम करते हैं, और अंत में संयोजन-कक्ष, जहाँ **अक्षर-संयोजक** (74) हैं। असली **छापाख़ाना** (75) , **छापने की मशीनें** और अलग-अलग यंत्र भूतल पर हैं।","t14-tit-9":"जॉन बहुत से प्रश्न पूछता है।","t14-18-1":"18. — छापेख़ाने से निकलते हुए जॉन बड़ी उलझन में एक खंभे पर लगे छोटे काँच के डिब्बे के सामने रुक गया, जो **ग़ल्ले वाले** (77) के सामने था, और पूछा कि वह किस काम का है। मेरे पिता ने समझाया कि वह **आग की चेतावनी** (76) है। सचमुच नगर की हर चीज़ मेरे मित्र के लिए अचरज थी, साधारण **पानी के नल** (78) और उस हलकी **सामान की तिपहिया** (80) से लेकर, जिसे वरदी पहने एक **छोकरा** (79) चलाता है, **डाक की गाड़ी** (81) तक।","t14-19-1":"19. — जब तक मेरे पिता हमें छोड़कर **कर-वसूली अधिकारी** (83) से बात करने गए, जो एक **वकील** (82) और एक **मुंशी** (84) से बातें करने रुके थे, हम सड़क की चहल-पहल देखने में मन बहलाते रहे। हमारे सामने से तरह-तरह के लोग गुज़रे: एक **हलवाई का छोकरा** (85) , जो एक टोकरी में एक शानदार **पाई** लिए था, एक **कपड़ों के व्यापारी** (86) के पीछे आया; एक **बत्ती जलाने वाला** (87) एक **गैस लगाने वाले** (88) से बातें कर रहा था; एक **भिक्षुणी** (89) एक नन्ही अनाथ लड़की का हाथ थामे अपने मठ को लौट रही थी।","t14-tit-10":"लौटते समय।","t14-20-1":"20. — मेरे पिता हमसे आ मिले ही थे कि जॉन दो **चिमनी साफ़ करने वालों** (91) के कालिख से काले चेहरों और अनोखे वेश पर हँस पड़ा।","t14-21-1":"21. — मैं अपनी माँ के लिए **फूल बेचने वाली** (92) से एक पौधा ख़रीदना चाहता था, पर मेरे पिता ने कहा कि वह ढोने में बहुत भारी होगा और कुछ **संतरे** ले लेना बेहतर रहेगा। हम **ठेले वाली** (94) के पास गए, और जब **शिक्षिका** (93) , जो अपनी छोटी शिष्या के लिए कुछ छाँट रही थीं, अपनी ख़रीद पूरी कर चुकीं, तब हमारा नंबर आया।","t14-22-1":"22. — लौटते हुए हमें कई जान-पहचान वाले मिले: मेरे परिवार की एक पुरानी सहेली, अपनी **सहचरी** (95) की बाँह थामे, पुलों और सड़कों के **अभियंता** (96) , और मेरी एक चचेरी बहन अपनी **आया** (98) के साथ।","t14-22-2":"फिर हम मेरी माँ की **टोपी बनाने वाली** (97) के पास से गुज़रे और दो **भिक्षुओं** (99) के, जो नगर में अनजान थे और जो मेरे पिता से स्टेशन का रास्ता पूछने आए।","t15-apar-1":"तालिका सं. 15","t15-tit-1":"बाज़ार। — खाद्य सामग्री।","t15-01-1":"1. — जो व्यापारी हमें हमारी ज़रूरत का खाना देते हैं, उनमें से अधिकतर **ढके बाज़ार** के **हॉल** (1) के नीचे जमा रहते हैं, या पास की गलियों में।","t15-02-1":"2. — **सूअर के माँस का क़साई** (2) , जो **हैम** (3) , **ख़ून की सॉसेज** (4) , **सॉसेज** (5) , **आँतों की सॉसेज** (6) और **चरबी** (7) बेचता है, वह **मक्खन और पनीर बेचने वाली** (8) के पास बैठता है, जिसका ठेला लाल छिलके वाले **हॉलैंड के पनीर** (9) , **कामांबेर** (10) , **ग्रुयेर के बड़े चक्के** (11) और ताज़े **मक्खन के पेड़ों** (12) से सजा है।","t15-03-1":"3. — उसके सामने एक **सब्ज़ी बेचने वाली** (13) अपनी ग्राहकों को सुंदर **टमाटर** (14) , **फूलगोभी** (15) , **सलाद** (16) , **बंदगोभी** (17) , **कद्दू** (19) , **ख़रबूज़े** (18) और **कुकुरमुत्ते** (20) तक दिखाती है। पर एक **शराब वाले** ने अपनी **ढुलाई की गाड़ी** (21) , जो **बीयर के पीपों** (22) से लदी है, ठीक उसके ठेले के सामने खड़ी कर दी है और उसकी ग्राहकों को पास नहीं आने देती। एक बाग़वान उसे **हाथीचक** (23) की एक टोकरी ला रहा है।","t15-tit-2":"बेचना और ख़रीदना।","t15-04-1":"4. — बाज़ार में बड़ी चहल-पहल है, क्योंकि **नीलामी** (24) का समय आ गया है। जो **गृहिणियाँ** (26) यहाँ सौदा करने आती हैं, वे रास्ते में **ओझड़ी बेचने वाली** (25) के ठेले के सामने रुककर **ओझड़ी** या एक **बछड़े का सिर** ख़रीदती हैं।","t15-05-1":"5. — एक मोटा **रसोइया** (27) **मछली बेचने वाली** (28) से एक बहुत सुंदर **टूना** का मोल-भाव कर रहा है, जो अपने मन से दाम बढ़ाती जाती है। उसके यहाँ **बाम, सोल, ट्राउट** और **कार्प** की बड़ी खेप आई है। उसका **कॉड** और उसकी **सीपियाँ** बहुत ताज़ी हैं।","t15-tit-3":"सस्ता माल और महँगा।","t15-06-1":"6. — उसके पास बैठी **मुर्ग़ी बेचने वाली** (29) बहुत ईमानदार है। जब वह कोई **टर्की**, कोई **हंस**, कोई **बत्तख** या साधारण **मुर्ग़ी** बेचती है, तो उचित दाम से अधिक नहीं माँगती।","t15-07-1":"7. — चौक के कोने पर, पहली मंज़िल पर, एक **कपड़े की दुकान वाली** (30) ने हाल ही में दुकान खोली है, जहाँ ख़रीदने वालों को **मेज़पोश**, **नैपकिन, एप्रन** और **तौलियों** का बहुत बढ़िया चुनाव सदा मिलता है। उसी मंज़िल पर एक **छुरी बनाने वाले** (31) ने अपनी कार्यशाला लगाई है। वह बाज़ार की औरतों की **छुरियाँ** तेज़ करता है और माली के लिए सबसे कड़े **इस्पात** से **छाँटने के हँसुए** बनाता है।","t15-tit-4":"परचून की दुकान।","t15-08-1":"8. — उसकी कार्यशाला के नीचे कुछ समय पहले एक बड़ी खाद्य-दुकान खुली है। यह अब पुराने दिनों की वह सादी छोटी **परचून की दुकान** (32) नहीं रही, जो केवल रोज़ का माल बेचती थी — **चाय** (33) , **चॉकलेट** (34) , **डली की चीनी** (37) और **साबुन** (38) । यहाँ सब कुछ बिकता है: **कुरकुरे बिस्किट**, **डिब्बाबंद चीज़ें** (35) , **मदिराएँ** (36) , **रम, ब्रांडी, किर्श, अनीसेत** और **कुरासाओ**। यहाँ शिकार भी उतनी ही सहजता से मिलता है — **ख़रगोश** (39) , **चिड़ियाँ** (40) , **तीतर** (41) , **बटेर** (42) , **जंगली बत्तख** (43) या **तीतर-मोर** (44) — जितनी उष्ण देशों के फल, जैसे **केले** (46) और **अनन्नास**।","t15-09-1":"9. — एक बहुत उपकारी परचून का **कारिंदा** (45) जो माँगा जाए वही देने को तैयार रहता है: **मुरब्बा** (47) , करौंदे का या बिही का, **चरबी** (48) , **खीरे** (49) या नमकीन **सार्डिन** (50) ।","t15-09-2":"यह **ग्राहिकाओं** (51) के लिए बहुत सुविधा की बात है, जो सबसे साधारण माल के पास ही सबसे दुर्लभ अगेती उपज और सबसे स्वादिष्ट फल पाती हैं: रसीली **नाशपाती** (52) , **आलूबुख़ारे** (53) , **अंगूर** (54) , **आड़ू** (55) , **बादाम** (56) और **अख़रोट** (57) ।","t15-tit-5":"ग्राहक।","t15-10-1":"10. — **चावल** (58) और **मसूर** (59) धुँआई **हेरिंग** (60) के डिब्बे के पास रखे हैं; **आलू** (61) और **सेम** (63) **सेबों** (62) , **अंजीरों** (64) , **सूखे आलूबुख़ारों** (65) और **पहाड़ी बादामों** (66) के पास बैठे हैं। इस दुकान में ताज़े **अंडे** (67) और **जैतून** (68) भी मिलते हैं, सो **टोकरियाँ** (70) और **जाली के थैले** (73) बहुत जल्दी भर जाते हैं।","t15-11-1":"11. — इस बढ़िया दुकान की **कॉफ़ी** (72) ने **नौकरानियों** (69) और रसोइयों में अच्छा-ख़ासा नाम कमाया है, क्योंकि बूढ़ा **परचून वाला** (71) उसे स्वयं बड़े ध्यान से भूनता है।","t15-tit-6":"देखने की चीज़ें।","t15-12-1":"12. — सब लोग बाज़ार सौदा करने ही नहीं आते। हॉल तक जाती उस छोटी गली की सुरम्य आवाजाही में तरह-तरह के लोग दिखाई देते हैं। एक भले **कसाईख़ाने के मज़दूर** (75) के पास, जो अपने आगे एक **ठेला** (74) धकेल रहा है, यह रहे दो छुट्टी पर आए सिपाही, जिन्हें अपनी चमकीली वरदी दिखाने में बड़ा गर्व है: **हुसार** (76) अपने नीले **दोलमान** और **पंखदार शाको** में, और **ज़ुआव का हवलदार** ढीली निकर में, सिर पर **फ़ेज़** लगाए।","t15-13-1":"13. — **नानबाई** (80) , जो **नानबाईख़ाने** (78) की देहरी पर खड़ा है, उसने अभी-अभी अपनी **रोटी** (79) का आटा गूँधा है और तंदूर से वे **क्रोइसाँ** (81) , **छोटी रोटियाँ** (82) और **गोल रोटियाँ** (83) निकाली हैं जो खिड़की में रखी हैं।","t15-14-1":"14. — नानबाईख़ाने के ऊपर एक कुशल **सिलाई करने वाली** (84) रहती है, जो कई **कढ़ाई करने वालियाँ** (85) रखती है। उसके पास एक **धोबिन और इस्तिरी करने वाली** (86) रहती है, जो **कपड़े** (88) धोकर और सुखाकर उनमें कलफ़ लगाती है और **इस्तिरी** (87) से दबाती है।","t15-tit-7":"माँस, मछली और सब्ज़ी।","t15-15-1":"15. — भूतल की **क़साई की दुकान** (89) में हर तरह का माँस बिकता है — **भेड़ का** (90) , **गाय का** (94) या **बछड़े का** (92) — **रानें, चापें, टुकड़े** और **पसलियाँ** के रूप में। **क़साई का छोकरा** (93) यह सारा माँस काटता है और **मज्जा की हड्डियाँ** (96) अलग रखता है। क़साई के दरवाज़े पर एक **सीपी बेचने वाली** (97) खड़ी है, जो **सीपियाँ** (98) बेचती है। चाहें तो वह उन्हें खोल भी देती है।","t15-16-1":"16. — ये सब व्यापारी लाइसेंस या जगह का शुल्क देते हैं; इसीलिए **सिपाही** (100) उन बेचारी **घूमकर सब्ज़ी बेचने वालियों** (99) का बिना दया पीछा करता है, जो अपनी ठेलियों पर **गाजर, मूली, शलजम, गंधना** या **शतावरी के गट्ठर, ताज़े मटर, पालक, चूका, जलकुंभी** और **धनिया** ढोकर उनसे प्रतिस्पर्धा करती हैं।","t15-tit-8":"सिपाही से बचो!","t15-17-1":"17. — **लहसुन** (101) और **प्याज़** बेचने वाला लड़का ख़ूब जानता है कि उसे भी बाज़ार के पास अपना माल बेचने की अनुमति नहीं। वह भाग खड़ा होता है, इस ख़तरे के साथ कि **झींगे-मछली** और **लॉब्स्टर** **बेचने वाली** (102) की **केकड़ों**, **क्रेफ़िश** और **झींगों** की टोकरी उलट दे।","t15-18-1":"18. — सब लोग हड़बड़ी में हैं और बड़ा शोर मचा रहे हैं; पर इससे घूमते **शीशासाज़** (103) की हाँक साफ़ सुनाई देना नहीं रुकता, न उस **कोयले वाले** (104) की, जिसने अभी-अभी एक **कोयले की बोरी** (105) पहुँचाने को अपनी गाड़ी थोड़ी देर के लिए छोड़ी है।","t16-apar-1":"तालिका सं. 16 बड़ी दुकान। — बाज़ार। खिलौने।","t16-01-1":"1. — नया साल आ रहा है। बड़ी दुकानों ने **खिलौनों** (1) और नए साल की भेंटों की अपनी सजावट तैयार कर ली है।","t16-01-2":"मैंने अपने दादा से कहा कि मुझे यह सुंदर सजावट देखने बाज़ार ले चलें, और वे मान गए।","t16-02-1":"2. — पहले हम हथियारों की कुछ सुंदर सजावटों के सामने रुके, जिनमें एक **राइफ़ल**, एक **झालरदार टोपी**, एक **कृपाण**, एक **तलवार की पेटी** और एक जोड़ी **कंधे के फुँदने** थे, या फिर एक **शिरस्त्राण**, एक **छाती का कवच** (3) और एक **पिस्तौल** (4) । यह सब मुझे **जादुई लालटेनों** (2) से कहीं अधिक भाया।","t16-tit-1":"देखने लायक़ चीज़ें।","t16-03-1":"3. — उसी विभाग में एक **संतरी** (5) अपनी **संतरी-कोठरी** में था; वह गत्ते के पूरे चिड़ियाघर पर पहरा देता लगता था। कितने जानवर थे वहाँ! अपने अड्डे पर एक **तोता** (6) , नाक पर सींग लिए एक **गैंडा** (7) , एक **बारहसिंगा** (8) , एक **शुतुरमुर्ग़** (9) , एक **बंदर** (10) जो अख़रोट तोड़ रहा था, एक **लोमड़ी** (11) जो एक मुर्ग़ी उठाए ले जाती थी, एक **मगरमच्छ** (12) अपने विशाल जबड़े खोले, एक **ऊँट** (13) , एक सजीला **ग्रेहाउंड** (14) , एक **तेंदुआ** (15) , और फिर दो जानवर जिन्हें मैं जानता न था, जो, मुझे बताया गया, एक **नेवला** (16) और एक **लकड़बग्घा** (17) हैं। वहाँ एक **चीता** (18) और एक **भेड़िया** (21) भी था; पास ही प्यारे नन्हे **चूहे** (19) और रबर की नन्ही **चुहिया** (20) थीं। अंत में एक **दरियाई घोड़ा** (22) और एक कूबड़ वाला **ऊँट** (23) संग्रह पूरा करते थे। मैं वहाँ घंटों खड़ा रहता, यदि पास ही **टिन के सिपाहियों** (29) से भरा एक शानदार शिविर मेरी आँख न खींच लेता।","t16-tit-2":"सिपाही और युद्ध।","t16-04-1":"4. — मेरे दादा, जो **अपंग पूर्व-सैनिक** (24) हैं और जिन्हें एक **घाव** के बाद सेना छोड़नी पड़ी, जिसने उन्हें **सैनिक पदक** दिलाया, उन्हें मुझे उन **अभियानों** की बातें सुनाना बहुत भाता है जिनमें वे शामिल हुए। वे मुझे उस नन्ही सेना की अलग-अलग चालें समझाकर बहुत प्रसन्न हुए। बाज़ार देखने आए असली सिपाहियों का एक समूह — एक **इंजीनियर सैनिक** (25) , एक **पहाड़ी हलका सैनिक** (26) अपनी **टोपी** में, पैदल सेना का एक **प्रमुख हवलदार** (27) और तोपख़ाने का एक **हवलदार** (28) , जिसकी आस्तीन पर सोने की **धारी** थी — वे भी व्याख्या सुनने हमारे पास रुक गए।","t16-05-1":"5. — मेरे दादा, इतने प्रतिष्ठित श्रोता पाकर बहुत गर्व से भरे, उन्होंने तुरंत युद्ध की एक पूरी योजना गढ़ डाली।","t16-05-2":"वह किलेबंद नगर, अपनी **प्राचीरों** और **खाइयों** समेत, **शत्रु सेना** से घिरा था, जो लंबी **गोलाबारी** के बाद उस पर **धावा** बोलने की तैयारी में थी। पर **घिरे हुए** लोग, भूख से विवश, **घेरने वालों** के **शिविर** पर एक **निकास-आक्रमण** कर बैठे थे। **तंबुओं** के चारों ओर एक प्रचंड **युद्ध** में **आक्रमण** को पीछे धकेलकर **विजयी** घेरने वालों ने अपने **घुड़सवार दस्ते** **पराजित** हमलावरों के **पीछा** करने भेजे। वे **पीछे हटे**, **रणभूमि** को **मृतकों** और **घायलों** से बिछाकर। **स्ट्रेचर वाले** घायलों को **चलती चिकित्सा-शाला** तक ले गए, ताकि **शल्य-चिकित्सक** उनकी देखभाल करें।","t16-05-3":"कुछ **बटालियनों** के वीर प्रतिरोध के बावजूद, जिन्होंने **चौकोर व्यूह** बनाया था, **पराजय** पूरी थी; बची सेना **भाग गई**, बहुत से **बंदी** पीछे छोड़कर। शत्रु नगर लेकर अपनी **विजय** पर मुकुट रखने को था। शायद यही अभियान का अंत होता, और एक **युद्धविराम** के बाद एक **शांति-संधि** पर हस्ताक्षर हो सकते।","t16-tit-3":"नए साल की भेंटें।","t16-06-1":"6. — वे जवान सिपाही, जो पूर्व-सैनिक की रंगीन कथा सुनते हुए हँस रहे थे, उन्होंने उनसे कुछ और प्रश्न पूछे। रहा मैं, तो मैं काउंटर का चक्कर काटकर एक सुंदर **धनुष-यंत्र** (32) और एक **धनुष** (33) उसके **तीर** (31) समेत देखने गया। वहाँ मुझे जानवरों का एक और संग्रह मिला: दो **गाने वाली चिड़ियाँ** (34) , एक चाबी वाली **बुलबुल** और **फुदकी** जो गला फाड़कर गा रही थीं, और अनोखे जीवों की एक कतार — एक **चमगादड़** (35) , एक **अजगर** (36) , एक **कछुआ** (37) , एक **सील** (38) , एक **व्हेल** (39) और सोने की झिल्ली से बनी एक **शार्क** (40) ।","t16-07-1":"7. — मैं उन्हें देखने अधिक देर न रुका, क्योंकि मेरी आँख उस चीज़ पर पड़ चुकी थी जिसका मैं सपना देखता था: एक शानदार **कठपुतली रंगमंच** (41) , शानदार **दृश्य-पट** और एक सुंदर लाल **परदे** समेत। **मंच** पर दो अभिनेता किसी बहुत रोचक **नाटक** में अपनी **भूमिका** निभाते लगते थे, क्योंकि बक्सों के गत्ते के नन्हे **दर्शक**, या जो **अगली कुरसियों** और **पिछले भाग** में **वाद्य-संचालक** के पीछे बैठे थे, वे गरमजोशी से ताली बजा रहे थे।","t16-07-2":"अफ़सोस, वह रंगमंच बहुत महँगा था।","t16-08-1":"8. — इसके सिवा, खिलौनों में से चुनना कठिन था, क्योंकि खिड़कियाँ हर तरह के खिलौनों से भरी थीं: **हरलेकिन** (42) , **पोलिशिनेल** (43) , **पिएरो** (44) , पंख फड़फड़ाते **उल्लू** (45) , सीटी बजाते **कालकंठ** (46) , भौंकते **पूडल**, एक **ग्रामोफ़ोन** (47) और **पहेलियाँ**। इनमें से एक खिलौने ने मुझे बहुत भाया: उसमें एक **समुद्री युद्ध** (48) दिखाया गया था, जिसमें **नारियल के पेड़ों** से भरे किनारे के सामने **समुद्री लुटेरे** एक **जहाज़** पर हमला करते हैं।","t16-09-1":"9. — मैं ये सब अद्भुत चीज़ें बड़े इत्मीनान से देख सका, क्योंकि दुकान में लोग कम ही थे — मुश्किल से मुट्ठी भर तमाशबीन, एक **घुड़सवार सैनिक** (49) , और एक **वसूली करने वाला** (50) , जो मुख्य **गल्ले** (51) पर एक **हुंडी** पेश कर रहा था।","t16-10-1":"10. — मैंने अपने दादा से पूछा कि **ख़ज़ांची** के पीछे ताकों पर रखी वे किताबें किस काम की हैं; उन्होंने बताया कि वे **हिसाब की बहियाँ** हैं।","t16-tit-4":"दुकान में ताक-झाँक।","t16-11-1":"11. — खिलौनों का विभाग छोड़कर हम जीनसाज़ी की ओर गए, ताकि **जीनों** (53) , **रकाबों** (54) , **लगामों** (55) , **मुखकड़ों** (56) और **सवारी के चाबुकों** पर एक नज़र डाल लें। जब तक **विभाग के प्रबंधक** (57) मेरे दादा को कुछ जानकारी देते रहे, मैं **चीनी मिट्टी** और **काँच के बरतनों** (58) की सजावट देखने गया, जहाँ सुंदर **सलाद के कटोरे** और नाज़ुक **चायदान** (59) थे।","t16-12-1":"12. — पहली मंज़िल पर चढ़ने के लिए हम **कमरबंदों** (60) की खिड़की के पीछे से गुज़रे, जो मोज़ों के विभाग के पास है, जहाँ बहुत सुंदर **निकरें** (63) बिछी थीं। पास ही एक **दुकान की सहायिका** (61) एक **ग्राहिका** (62) को सुंदर रेशमी **कपड़े** (64) चुनने में मदद कर रही थी।","t16-12-2":"सीढ़ियाँ चढ़ते हुए मैंने देखा कि दुकान जापानी **लालटेनों** (65) , **छतरियों** (66) और विशाल **ताड़ों** (70) से सजी है।","t16-13-1":"13. — पहली मंज़िल पर देखने को अधिक कुछ न था: केवल साज-सामान (*) , **तिजोरियाँ** (67) , **दराज़ों वाली अलमारियाँ** (68) और **बच्चा-गाड़ियाँ** (69) । पर दुकान का समग्र दृश्य बहुत **मनोरंजक** था।","t16-14-1":"14. — अपने नीचे मुझे वाद्य दिखाई दिए: **वीणाएँ** (71) , **गिटार** (72) , **मैंडोलिन** (73) , **कॉर्नेट** (74) , **क्लैरिनेट** (75) , अपने **गज़** (76) समेत वायलिन और एक **बड़ा ढोल** (77) तक। कुछ और आगे, लेखन-सामग्री के काउंटर पर, एक **विद्यार्थी** (78) **दुकान के सहायक** (79) से एक काग़ज़-थैले का मोल-भाव कर रहा था। उनके पास मुझे एक सुंदर **वर्णमाला की पुस्तक** (80) दिखाई दी।","t16-14-2":"दुकान के बीच एक ऊँचा **क्रिसमस का पेड़** (81) खड़ा था, जिस पर चारों ओर मोमबत्तियाँ, गहने और हर तरह के खिलौने टँगे थे: **लकड़ी के घोड़े** (82) , **गुड़ियाँ** (83) , इत्यादि।","t16-14-3":"**इत्र की दुकान** (84) , अपने **दाँत के मंजनों** और अपने अलग-अलग **इत्रों** समेत, एक बहुत सुखद गंध छोड़ती थी जो हम तक उठ आती थी।","t16-tit-5":"हम कुछ ख़रीदते हैं।","t16-15-1":"15. — चूँकि मेरे दादा को समय लंबा लगने लगा था, हम बड़ी सीढ़ी से फिर नीचे उतरे। वे एक **खगोल की तालिका** (85) के सामने क्षण भर रुके, जिस पर, उन्होंने बताया, **धूमकेतु** (a) , **चाँद और सूरज के ग्रहण** (b) , **चार दिशाओं** (c) **(उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम)** वाला एक दिशा-चक्र, दोनों **गोलार्धों** (d) का नक़्शा, **ग्रह** (e) और **सौर मंडल** (f) दिखाए गए थे। मुझे उसमें से कुछ समझ न आया, और मुझे कहीं अधिक रुचि उस **सामान पहुँचाने वाले** (86) की गोटेदार वरदी में हुई जो गुज़र रहा था, और अपने पास रखी उन सुंदर **पंखियों** (87) में, **बटुओं** (88) और **जेब-बटुओं** (89) के पास।","t16-16-1":"16. — मैंने काउंटर पर कुछ **पंख** (90) और **पेटी के बकसुए** (91) भी निहारे, और वे सुंदर **बनावटी फूल** (94) जो टोकरियों में सलीके से सजे थे। **बनफ़शे**, **गुलशब्बो**, **सुंबुल** (95) , **जेरेनियम** (96) , **कुमुदिनी** (97) और **नस्तरन** (98) की नक़ल बहुत अच्छी थी।","t16-tit-6":"दादा की भेंट।","t16-17-1":"17. — मैंने अपने दादा से कहा कि मुझे उन **दाँत के ब्रशों** (92) में से एक ख़रीद दें जो **बालों की पिनों** (93) के पास एक डिब्बे में थे। वे मान गए, और मैं स्वयं गल्ले पर अपनी ख़रीद का दाम चुकाने गया, जिसके पास एक बड़ा **पैकेट** (100) बाँधा जा रहा था, एक **ग्राहक** (99) के लिए।","t16-18-1":"18. — अचानक कलात्मक **काँसे के बुतों** (101) के पास खड़े लोगों में हलचल मच गई। एक **चोर** (102) को अभी-अभी एक **दुकान के निगरानी करने वाले** (103) ने किसी की जेब काटते रँगे हाथ पकड़ लिया था। उसे **गिरफ़्तार** करने को सिपाही बुलाया गया, और हम निकल ही रहे थे कि अपराधी को थाने ले जाया जा रहा था।"}